मायावती ने भतीजे आकाश को सौंपी बसपा की कमान, कांशीराम का मिशन स्वाहा, परिवारवाद के खिलाफ थे मान्यवर

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 10 दिसंबर 2023 | जयपुर – दिल्ली – लखनऊ : बसपा सुप्रीमो मायावती (67) ने अपने भतीजे आकाश आनंद (27) को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। यानी मायावती के बाद पार्टी की कमान आकाश के हाथों में होगी। अभी यूपी और उत्तराखंड में पार्टी की जिम्मेदारी मायावती संभालेगी, जबकि बाकी 26 राज्यों को आकाश देखेंगे। पार्टी की विरासत और राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने भतीजे को आगे किया है।
मान्यवर कांशीराम ने भारतीय समाज के वंचित तबको, गरीबों, दलितों को जीने की एक मुकम्मल राह दिखाई है। उनमें आत्मविश्वास की ललक पैदा की है। कांशीराम का उद्देश्य सर्व जनहिताय, सर्व जनसुखाय रहा, किन्तु वह वंचित समुदाय को ‘बहुजन समाज’ नाम के पदबंध से संबोधित किया।
59 1702195441 मायावती ने भतीजे आकाश को सौंपी बसपा की कमान, कांशीराम का मिशन स्वाहा, परिवारवाद के खिलाफ थे मान्यवरपरिवारवाद के खिलाफ थे मान्यवर कांशीराम

वह कई बार अपने भाषणों में कहते हैं कि समाज में जनसंख्या के हिसाब से वंचित समाज की संख्या अधिक है, इसीलिए इसे बहुजन समाज कहना ज़्यादा समीचीन होगा।

परिवारवाद के खिलाफ थे मान्यवर कांशीराम और इसीलिए उन्होंने अपना राजनीतिक वारिस परिवार से बाहर मायावती को चुना था। अब मायावती ने मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों को अंगूठा दिखाते हुए अपने सगे भतीजे को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर मान्यवर के मिशन को स्वाहा कर दिया है ।

बहुजन समाज को वह भारतीय समाज का असली वारिस मानते हैं। कांशीराम उन लोगों में से थे जो अपना सुख आराम त्याग कर गरीबों की सेवा में अपना जीवन न्यौछावर कर देते हैं।

उनके समकालीन तमाम ऐसे नेता थे जो ऐश-आराम करके ज़िदगी व्यतीत कर रहे थे किन्तु कांशीराम ने ज़िदगी भर अविवाहित रहकर, बिना किसी लाभ के पद पर रहते हुए उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) और दलित समाज को संगठित व संचालित किया।

‘सोशल इंजीनियरिंग’ का उन्होंने जो सफल मंत्र दिया वह भारतीय इतिहास में अद्वितीय है। वंचित तबके की सेवा के लिए अपनी सरकारी नौकरी को भी छोड़ दिया, उनकी यही कर्तव्यनिष्ठता बहुजन समाज को सामाजिक व राजनीतिक रूप से एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया, उन्हें बहुजन समाज की राजनीति का पितामह कहा जाता है।

राजनीतिक व्यवस्था के प्रतिनिधित्व पर ज़ोर

कांशीराम सामाजिक चेतना की अपेक्षा राजनीतिक चेतना को अधिक तवज्जो देते थे, उनका मानना था कि ‘जिस समुदाय का राजनीतिक व्यवस्था में प्रतिनिधित्व नहीं है, वह समुदाय मर चुका है।’ ऐसा इसलिए कहते थे कि आप चाहे जितनी बड़ी नौकरी पा जाओ किसी ना किसी नेता के शरण में ही काम करना पड़ता है।Website Thumbnail 2022 06 11T151814.662 300x207 मायावती ने भतीजे आकाश को सौंपी बसपा की कमान, कांशीराम का मिशन स्वाहा, परिवारवाद के खिलाफ थे मान्यवर

सभी विभागों के कोई ना कोई मंत्री होता है, उन्ही के नीचे सबको काम करना होता है, इसलिए वे राजनीतिक चेतना को अधिक महत्वपूर्ण मानते थे और यही कारण है जब वह नौकरी से त्यागपत्र देने के बाद महाराष्ट्र की प्रमुख राजनीतिक पार्टी आरपीआई से जुड़े तो उन्हें वहां पर भी राजनीतिक चेतना का अभाव दिखाई दिया।

कांशीराम का मिशन स्वाहा
आकाश आनंद लखनऊ में पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में बसपा प्रमुख मायावती के साथ पहुंचे थे। रविवार 10 दिसंबर को डेढ़ घंटे चली मीटिंग के बाद मायावती ने इस फैसले का ऐलान किया। इस मीटिंग में पार्टी के 28 राज्यों के पदाधिकारी मौजूद थे।
आकाश, मायावती के सबसे छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं और फिलहाल पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर हैं। सार्वजनिक तौर पर मायावती के साथ आकाश पहली बार 2017 में सहारनपुर में नजर आए थे। 

आकाश ने लंदन से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई की है। आकाश की शादी बसपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ की बेटी डॉ. प्रज्ञा से इसी साल मार्च में हुई थी।

आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ की गिनती मायावती के भरोसेमंद नेताओं में होती है। यह फोटो 9 जुलाई 2023 की दिल्ली में हुई बसपा की बैठक की है। इसमें पहली बार मायावती के बगल में सोफे पर भतीजे आकाश आनंद और भाई आनंद नजर आए थे।

मायावती के साथ गाड़ी में आये थे आकाश आनंद

रविवार को लखनऊ में पार्टी कार्यालय हुई बैठक में आकाश आनंद मायावती के साथ एक ही गाड़ी में आए थे। मायावती ने हाल ही में चार राज्यों में हुए चुनाव की कमान भी आकाश को सौंपी थी। इसी से यह तय माना जा रहा था कि आकाश पार्टी में नंबर-2 हैं। इसके अलावा, मायावती राजनीति तौर पर खुद ज्यादा एक्टिव न होकर आकाश को ही अहम जिम्मेदारियां दे रही थीं। 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान ही यूपी में उन्होंने चुनिंदा रैलियां ही की थीं।

%name मायावती ने भतीजे आकाश को सौंपी बसपा की कमान, कांशीराम का मिशन स्वाहा, परिवारवाद के खिलाफ थे मान्यवरलोकसभा चुनाव से पहले आकाश के ऐलान की प्रमुख वजह

1-चंद्रशेखर के ऑप्शन में आकाश: पश्चिम यूपी में आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर की दलित वर्ग के बीच पकड़ मजबूत हो रही है। बसपा प्रमुख ने दलित समाज के युवाओं को यह साफ मैसेज देने का प्रयास किया कि बसपा में युवा नेता और पार्टी का ऑप्शन आकाश है। वह लगातार रैलियां भी कर रहे हैं।

2-आकाश के बहाने बसपा का युवाओं पर फोकस: यूपी में विधानसभा चुनाव 2022 के चुनाव में बसपा को तगड़ा झटका लगा था। पार्टी का वोट शेयर 22% से घटकर 11% पर आ गया था। इसलिए, बसपा अपना खोया जनाधार पाने के लिए युवाओं को जोड़ना चाहती है। इसलिए आकाश को मायावती ने उत्तराधिकारी चुना है।

3-बसपा के सामने अब ज्यादा ऑप्शन नहीं: 4 बार यूपी की सीएम रह चुकी मायावती की पार्टी बसपा की अब प्रदेश में स्थिति कमजोर हो रही है। अभी बसपा का सिर्फ एक विधायक है। जबकि 10 सांसद थे, जिसमें शनिवार को ही उन्होंने एक सांसद दानिश अली को पार्टी से बाहर कर दिया था। आकाश आनंद ने लंदन से आकाश ने लंदन से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई की है।

2024 लोकसभा के लिए मायावती ने बुलाई बैठक

लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती ने छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद पदाधिकारियों के साथ बैठक बुलाई थी। इसमें 28 राज्यों से पदाधिकारी शामिल हुए।

पदाधिकारियों ने आगामी लोकसभा 2024 के चुनाव को लेकर अब तक किए गए कामों की रिपोर्ट पेश की। बसपा प्रमुख ने पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर से लेकर प्रदेश के कोऑर्डिनेटरों से लोकसभा की तैयारी की रिपोर्ट मांगी थी। लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर मायावती पार्टी कार्यालय पर बैठक हुई। 28 राज्यों से पदाधिकारी पहुंचे।

पदाधिकारी बोले- मायावती के आदेशों का पालन करेंगे

तेलंगाना के जिला अध्यक्ष अहमद अली ने बताया था कि मायावती आज आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर बैठक करने वाली हैं। इसमें आगामी चुनाव में उम्मीदवारों की लिस्ट बसपा प्रमुख को दी जाएगी। उनके बताए गए दिशा निर्देश का पालन करेंगे।

मध्यप्रदेश के दतिया से पदाधिकारी लोकेंद्र अहियावर ने कहा, बसपा प्रमुख की बैठक में जो आदेश होगा, उसका पालन करेंगे। विधानसभा चुनाव में स्थिति ठीक नहीं रही, लेकिन लोकसभा चुनाव में स्थिति को बेहतर करेंगे।

new project 2023 12 10t121108536 1702191189 मायावती ने भतीजे आकाश को सौंपी बसपा की कमान, कांशीराम का मिशन स्वाहा, परिवारवाद के खिलाफ थे मान्यवरबसपा का प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया पर जोर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लखनऊ में बसपा की बैठक कई दृष्टिकोण से सियासी संदेश देने जैसा है। प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर बहुजन समाज पार्टी की ताकत का एहसास कराने के लिए बैठक बुलाई गई।

इसमें कई अहम मुद्दों और राज्यों को लेकर प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया पर पूरा जोर रहेगा। बैठक में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने कहा- बसपा प्रमुख के आदेश का पालन कर आगामी चुनाव में जीत दर्ज करेंगे।

लखनऊ की बैठक में पार्टी के कई पदाधिकारी बुलाए, राज्यों के लेकर फैसले लिए जा सकते हैं

बहुजन समाज पार्टी के सूत्र बताते हैं कि चुनाव से पहले मायावती ने पार्टी में जिम्मेदारियां भी बदलने और अन्य राज्यों को लेकर बड़े फैसले ले सकती है।

बैठक में पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य, सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य जोन इंचार्ज, जोन इंचार्ज, राज्यसभा सदस्य, सभी पूर्व और वर्तमान विधायक, विधान परिषद सदस्य, मंडल व जोन इंचार्ज, जिलाध्यक्ष तथा बहुजन वालंटियर फोर्स जैसे सभी संगठनों के जिम्मेदार लोग बुलाए गए हैं।

मध्यप्रदेश के दतिया से पहुंचे पदाधिकारी लोकेंद्र अहियाावर ने बताया, बसपा प्रमुख के निर्देश का पालन करके आगामी चुनाव में जीत दर्ज करेंगे।

वहीं पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक, बैठक में वरिष्ठ पदाधिकारियों और राज्यों के वरिष्ठ नेताओं के साथ हालिया चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों से निकली चुनौतियों से निपटने की रणनीति भी तय की जाएगी। लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत दावेदारी वाले उम्मीदवारों के नाम पर भी चर्चा होगी। बता दें कि विधानसभा चुनाव के नतीजों को विचित्र और रहस्यमयी बताते हुए बसपा सुप्रीमो ने देश भर के पदाधिकारियों को बैठक में बुलाया है।

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