सबसे बड़ा सवाल : मोदी बनाम खरगे हुआ चुनाव तो किसे होगा फायदा, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को नई संजीवनी

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 20 दिसंबर 2023 | जयपुर – दिल्ली : अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों और रणनीति बनाने के लिए विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेताओं की राजधानी के अशोका होटल में हुई इस बैठक में विपक्षी गठबंधन के पीएम उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा की गई। दिल्ली में आयोजित इस बैठक में सभी राज्यों में आपस में सहयोग कर लोकसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है।

इसमें अलग-अलग पार्टियों के नेता शामिल हुए। इस बीच, इस बैठक को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि राजधानी के अशोका होटल में हुई इस बैठक में विपक्षी गठबंधन के पीएम उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा की गई। दिल्ली में आयोजित इस बैठक में सभी राज्यों में आपस में सहयोग कर लोकसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नाम का प्रस्ताव दिया।

मल्लिकार्जुन खरगे के नाम पर अभी इंडिया गठबंधन में कोई सहमति नहीं बनी है, लेकिन यदि उनके नाम पर अंतिम सहमति बनी, तो यह कांग्रेस के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकता है। विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों में, जहां द्रविड़ राजनीति नेतृत्वकारी भूमिका में है, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को नई संजीवनी मिल सकती है। mqdefault 6 300x171 सबसे बड़ा सवाल : मोदी बनाम खरगे हुआ चुनाव तो किसे होगा फायदा, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को नई संजीवनी

खरगे के तुरंत खारिज किया प्रस्ताव
वीसीके सांसद थोल. थिरुमावलवन ने बताया कि ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने प्रस्ताव दिया कि मल्लिकार्जुन खरगे को टीम का समन्वयक होना चाहिए और हम उन्हें आगामी चुनावों में प्रधानमंत्री के रूप में पेश करेंगे। हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे तत्काल ही साफ शब्दों में खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस सुझाव की कोई जरूरत नहीं है। चुनाव के बाद ही हम तय कर सकते हैं कि पीएम कौन होगा। उन्होंने तुरंत इस बात को खारिज कर दिया।
खरगे ने कही ये बात
इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा, इंडिया गठबंधन के सभी दलों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि गठबंधन को कैसे आगे बढ़ाया जाए। देशभर में एक साथ कम से कम 8-10 सभाएं की जाएंगी। अगर गठबंधन के सदस्य एक मंच पर नहीं आएंगे तो लोगों को गठबंधन के बारे में पता नहीं चलेगा। सभी इस पर सहमत थे। खरगे ने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर राज्य स्तर पर बातचीत होगी।

अगर कोई मुद्दा उठेगा तो उसे इंडिया गठबंधन के नेता दूर करेंगे। चाहे तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली या पंजाब की बात हो, सीट बंटवारे के मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा। खरगे ने यह भी कहा कि गठबंधन के घटक दलों ने एक प्रस्ताव पारित कर लोकसभा और राज्यसभा से विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने की निंदा की।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए हम सभी को लड़ना होगा और हम सभी इसके लिए तैयार हैं। हमने संसद में सुरक्षा उल्लंघन का मुद्दा उठाया। हम पहले से कह रहे हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या पीएम मोदी को संसद में आना चाहिए और संसद सुरक्षा चूक के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में बोलना चाहिए, लेकिन वे ऐसा करने से इनकार कर रहे हैं।

खरगे ने कहा कि यह पहली बार है जब देश में 141 संसद सदस्यों को निलंबित किया गया है। यह गलत है, हम इसके खिलाफ लड़ेंगे। हम इसके खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हुए हैं। हमने 22 दिसंबर को सांसदों के निलंबन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को नई संजीवनी

इंडिया गठबंधन की दिल्ली में आयोजित चौथी बैठक बहुत महत्त्वपूर्ण साबित हुई है। इस बैठक में अगले दस दिनों के अंदर सभी राज्यों में सीटों पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश करने की बात हुई है, तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को इंडिया गठबंधन का संयोजक या प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की चर्चा भी हुई है। इसके बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई है कि यदि आगामी लोकसभा चुनाव ‘मोदी बनाम खरगे’ हुआ तो इसका क्या असर हो सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपनी छवि है। वे गुजरात में मुख्यमंत्री रहने के बाद अब दस साल से देश के प्रधानमंत्री पद पर विराजमान हैं। अपने कार्यों और जनहितकारी योजनाओं के जरिए देश की जनता के बीच उनकी एक खास अपील है। उनके नाम पर भाजपा को जीत दिलाने की विश्वसनीयता भी जुड़ गई है। भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव भी उनके नाम ‘मोदी की गारंटी’ पर लड़ेगा।

लेकिन, केवल किसी नेता की छवि के आधार पर किसी चुनाव का परिणाम तय नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री मोदी के ना्म पर भाजपा को अब तक की सबसे बड़ी जीत दिलाने का रिकॉर्ड दर्ज है, तो हिमाचल प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों की हार भी उनके नाम पर दर्ज हैं।

दक्षिण में भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं खरगे

खरगे के नाम पर अभी इंडिया गठबंधन में कोई सहमति नहीं बनी है, लेकिन यदि उनके नाम पर अंतिम सहमति बनी, तो यह कांग्रेस के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकता है। विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों में, जहां द्रविड़ राजनीति नेतृत्वकारी भूमिका में है, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को नई संजीवनी मिल सकती है। कर्नाटक और तेलंगाना में जिस तरह कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की है, उसके पीछे मल्लिकार्जुन खरगे का नाम बहुत अहम माना जाता है। ऐसे में यह मानने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए कि यदि खरगे को इंडिया गठबंधन ने पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश किया, तो इससे उसकी साख को मजबूती मिलेगी।

उत्तर भारत के राज्यों में मल्लिकार्जुन खरगे की विश्वसनीयता कितनी होगी, यह कहना आसान नहीं है, लेकिन इसका एक सकारात्मक संदेश अवश्य जाएगा और कांग्रेस के साथ-साथ दूसरे दलों को इसका लाभ हो सकता है। कांशीराम-मायावती के बाद की राजनीति में कोई ऐसा चेहरा नहीं है, जो दलितों का प्रतिनिधित्व करता हो। ऐसे में दलित समुदाय भी कहीं न कहीं दूसरे दलों की ओर आकर्षित हो रहा है। दलितों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के पास भी चला गया है।

लेकिन यदि कांग्रेस दलित चेहरे को प्रधानमंत्री के तौर पर पेश कर दे, तो इससे दलितों का वोटर उसके पास वापस लौट सकता है। इंडिया गठबंधन में शामिल अरविंद केजरीवाल को इसका लाभ दिल्ली-पंजाब में हो सकता है, तो ममता बनर्जी को इसका लाभ पंजाब में हो सकता है। यूपी में समाजवादी पार्टी और बिहार में लालू-नीतीश कुमार को भी इसका लाभ मिल सकता है।

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लेकिन खरगे को प्रधानमंत्री पद के रूप में स्वीकार करना सबके लिए आसान नहीं होगा। खुद कांग्रेस में ही एक वर्ग राहुल गांधी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाने पर तुला हुआ है, ऐसे में उनके लिए यह समझा पाना आसान नहीं होगा कि खरगे को पीएम उम्मीदवार बनाने से बेहतर संदेश दिया जा सकता है।

विपक्ष में भी अनेक दल लगातार कांग्रेस पर हमलावर रहे हैं। उनके लिए भी खरगे को पीएम उम्मीदवार के रूप में स्वीकार कर पाना आसान नहीं होगा। ममता बनर्जी उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बनाने पर तो सहमत हो सकती हैं, लेकिन जब प्रधानमंत्री पद की बात आएगी तब उनका रुख क्या रहेगा, यह कहा नहीं जा सकता।

यहां तक कि जिस अरविंद केजरीवाल ने खरगे को पीएम बनाने का पासा फेंका है, जब बात असलियत में सामने आ जाएगी, तो उनका रुख कैसा होगा, कहना आसान नहीं है। क्योंकि खरगे को पीएम उम्मीदवार बनाने का एक मतलब दिल्ली-पंजाब में दलित मतदाताओं को कांग्रेस की ओर धकेलना होगा, जिसे केजरीवाल कभी पसंद नहीं करेंगे, क्योंकि यह निर्णय उनके लिए राजनीतिक आत्महत्या की तरह होगा।

केरल कांग्रेस नेता पीसी थॉमस ने ममता बनर्जी के नाम प्रस्तावित करने वाले बयान को खारिज किया
इस बीच, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस प्रमुख मल्लिलकार्जुन खरगे का नाम इंडिया अलायंस के पीएम चेहरे के रूप में प्रस्तावित करने की खबरों को केरल कांग्रेस नेता पीसी थॉमस ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने ऐसा सुझाव नहीं दिया। ममता बनर्जी ने कहा अगर हम किसी दलित प्रधानमंत्री को पेश कर सकें तो अच्छा होगा। उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। इस मामले पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई क्योंकि वह आखिरी में बोली थीं।

यह चौथी बैठक
‘इंडिया’ गठबंधन की अब तक तीन बैठक पटना, बेंगलुरु और मुंबई में हो चुकी है। इसके बाद चौथी बैठक आज यानी मंगलवार को नई दिल्ली के अशोका होटल में हुई।

इन मुद्दों पर हुई चर्चा

  • सकारात्मक एजेंडा तय करना
  • सीटो का बंटवारा
  • नए सिरे से रणनीति बनाना
  • साझा जनसभाओं पर मंथन
  • संसद से विपक्षी सांसदों के निलबंन पर

इन पर भी हुआ विमर्श

  • जाति आधारित गणना
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी
  • श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा

अशोका होटल में हुई बैठक
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, जनता दल (यू) से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजीव रंजन सिंह, शिवसेना (यूबीटी) से उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ्ती, अपना दल (के) से कृष्णा पटेल एवं पल्लवी पटेल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, द्रमुक के टीआर बालू, सीपीआई-एम के सीताराम येचुरी, राजद के तेजस्वी यादव, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और राम गोपाल यादव, सीपीआई के डी राजा, एनसी के फारूक अब्दुल्ला, ईटी मोहम्मद बशीर, ई के इलांगोवन, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन, केरल कांग्रेस (एम) के जोस के मणि, एनसीपी की सुप्रिया सुले और जेएमएम की महुआ माजी समेत अन्य शामिल हुए।

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