झारखंड CM सोरेन की गद्दी पत्नी को सौंपने की तैयारी, 7 समन के बाद बड़ी कार्रवाई के मूड में ईडी, सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 02 जनवरी 2024 | जयपुर – दिल्लीझारखंड सरकार पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सीएम हेमंत सोरेन जमीन घोटाला और अवैध खनन के आरोपों में फंसते दिख रहे हैं। 3 जनवरी को सोरेन ने महागठबंधन के विधायक दल की बैठक बुलाई है। चर्चा है कि इस बैठक में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का नाम CM के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।

हेमंत सोरेन इस संबंध में कानूनी सलाह भी ले रहे हैं। हेमंत सोरेन ने मंगलवार को महाधिवक्ता राजीव रंजन से मुलाकात की। वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक भी हुई जिसमें सीएम के सचिव विनय चौबे भी शामिल रहे। दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सात समन के बाद भी सीएम पूछताछ के लिए तैयार नहीं हुए। माना जा रहा है कि ईडी बड़ी कार्रवाई के मूड में है।

इस बीच राजभवन में बंद लिफाफे की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। अगर राजभवन का लिफाफा खुला और हेमंत सोरेन की सदस्यता चली गई, तो झारखंड सरकार खतरे में आ जाएगी। इसी तरह अगर ED ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार करने का फैसला लिया तब भी महागठबंधन की सरकार पर संकट छाएगा।

जानिए, वर्तमान सियासी उठापटक के बीच सरकार को बचाने के लिए हेमंत सोरेन का मास्टर प्लान क्या हो सकता है…

गांडेय विधायक ने क्यों दिया इस्तीफा

maxresdefault 2024 01 02T184502.204 300x169 झारखंड CM सोरेन की गद्दी पत्नी को सौंपने की तैयारी, 7 समन के बाद बड़ी कार्रवाई के मूड में ईडी, सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगेकयास लगाए जा रहे हैं कि जेएमएम कल्पना सोरेन को सीएम बनाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि सरकार पर मंडराते दो बड़े खतरों से निपटने के लिए गांडेय विधायक ने इस्तीफा दिया।

सरफराज अहमद ने इस्तीफे के बाद कहा- यह फैसला महागठबंधन धर्म को ध्यान में रखकर लिया है। यह मेरा व्यक्तिगत फैसला है। मेरे अब तक के अनुभव से मुझे खतरा नजर आ रहा था।

मैंने झारखंड और गठबंधन की सरकार को ध्यान में रखकर फैसला लिया। इस फैसले से झारखंड भी बचेगा और सरकार भी। अगर भाजपा नए साल में कुछ नया करने वाली थी, तो मैंने उनसे पहले कुछ नया कर दिया। मैंने बस ये ध्यान रखा कि एक सेकुलर सरकार को कैसे बचाया जाए, इसे ध्यान में रखते हुए मैंने फैसला लिया।

आसान नहीं होगी कल्पना सोरेन के लिए सत्ता की राह

झारखंड में सियासी हलचल पर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे लगातार ट्वीट किया है। उन्होंने ट्वीट कर बताया है कि कैसे हेमंत सोरेन की पत्नी के लिए सत्ता की राह आसान नहीं होगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट (श्री चौधरी वर्सेस स्टेट ऑफ पंजाब) का हवाला दिया। उन्होंने लिखा कि इस जजमेंट के अनुसार यदि 6 महीने के अंदर कल्पना सोरेन विधायक नहीं बनती हैं तो वह मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ले सकती हैं।

काटोल विधानसभा के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के जजमेंट का भी निशिकांत ने उल्लेख किया है। इसके अनुसार अब गांडेय या झारखंड के किसी भी विधानसभा का चुनाव नहीं हो सकता। राज्यपाल को चुनाव आयोग के साथ- साथ कानूनी राय लेकर झारखंड के लुटेरों की मंशा को रोकना चाहिए, यही प्रार्थना है।

7 समन के बाद बड़ी कार्रवाई के मूड में ईडी

सरफराज अहमद के इस फैसले की वजह को ठीक से समझने के लिए मुख्यमंत्री पर लगे अब तक के आरोप, ईडी की अब तक की पूछताछ और जमीन घोटाला मामले में जारी किए गए एक के बाद एक सात समन पर भी गौर करना होगा। चर्चा तेज है कि 7 समन के बाद भी सीएम सोरेन के ईडी के सामने पेश नहीं होने पर प्रवर्तन निदेशालय अब बड़ी कार्रवाई का मन बना रहा है।

बंद लिफाफे में क्या है

साल 2023 में निवार्चन आयोग से राजभवन पहुंचे बंद लिफाफे की खूब चर्चा रही। लिफाफा पहुंचने के बाद हेमंत सोरेन ने विधायकों की खरीद-फरोख्त से बचने के लिए एक सप्ताह तक विधायकों को छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित एक रिसॉर्ट में ठहराया था। आज भी लिफाफे का रहस्य बरकरार है।

भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पत्थर खनन लीज लेने को लेकर सवाल उठाया था। तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस से इस संबंध में शिकायत कर आरोप लगाया गया कि उनका यह काम गलत है। ऐसे में हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता निरस्त की जाए। राज्यपाल ने इसे तत्काल चुनाव आयोग के पास भेजकर राय मांगी थी।

आयोग में सुनवाई की प्रक्रिया के बाद राजभवन को बंद लिफाफा मिला था। राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि अभी इसकी समीक्षा की जा रही है। चर्चा तेज है कि अब लिफाफा जल्द खुलेगा।। इस लिफाफे के खुलने के बाद हेमंत सोरेन की सदस्यता जा सकती है।

अब ईडी क्या करेगी

झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा से जाना कि पीएमएलए एक्ट 2002 के तहत ईडी के पास समन के अलावा दूसरे और कौन-कौन से रास्ते हैं। Prevention of money laundering act 2002 (PMLA) की धारा 11 और इसकी उप धाराओं में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को समन (summon) करने की शक्ति मिली हुई है।

इस धारा में संबंधित अधिकारी को हर वो अधिकार है जो दीवानी प्रक्रिया संहिता में एक सूट के निर्धारण में मिला है। इस एक्ट से मिली शक्ति के तहत ईडी के अधिकारी आरोपी को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बाध्य कर सकते हैं। इतना ही ईडी की ओर से नोटिस भेजे जाने पर धारा 11 की उप धारा 2 के तहत व्यक्ति को अधिकारी के सामने हाजिर होने की बाध्यता होगी। ऐसी प्रक्रिया न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आती है।

ईडी को गिरफ्तार करने का अधिकारmax4537.686 300x177 झारखंड CM सोरेन की गद्दी पत्नी को सौंपने की तैयारी, 7 समन के बाद बड़ी कार्रवाई के मूड में ईडी, सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे

PMLA 2002 की धारा 19 में ऐसी परिस्थितियों में संबंधित अधिकारी को यह अधिकार है कि वो अपेक्षित व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है। हालांकि ईडी के अधिकारी को अपेक्षित व्यक्ति की गिरफ्तारी से पूर्व अधिकारी को गिरफ्तारी की वजह बतानी होगी।

गिरफ्तारी ही नहीं, कुर्की तक का प्रावधान

PMLA 2002 की धारा 50 में यह जिक्र नहीं है कि नोटिस कितनी बार जारी की जाएगी या कितने नोटिस के बाद गिरफ्तारी की जाएगी। इस धारा में संख्या का जिक्र नहीं किया गया है। व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक, उप निदेशक या उनके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति का आदेश जरूरी होगा। इसका जिक्र धारा 19 की उप धारा 1 में है।

नियम के मुताबिक यदि ED को लगता है कि अपेक्षित व्यक्ति जानबूझकर पूछताछ से भाग रहा है, तथ्य छिपा रहा है, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना तलाश रहा है तो ऐसी परिस्थिति में गिरफ्तारी की जा सकती है। गिरफ्तारी से भागने की स्थिति में धारा 60 के तहत कार्रवाई करते हुए संपत्ति कुर्क, जब्ती की कार्रवाई का भी प्रावधान है। 31 दिसंबर को गांडेय सीट से जेएमएम विधायक सरफराज अहमद ने इस्तीफा दे दिया।

गांडेय सीट क्यों की गई खाली

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन रिजर्व सीट से चुनाव नहीं लड़ सकती। वह मूल रूप से ओडिशा की है और चुनाव लड़ने के लिए उन्हें जनरल सीट की जरूरत होगी। अगर ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया, तो ऐसी स्थिति में कल्पना सोरेन मुख्यमंत्री बन सकती हैं। वह गांडेय ​विधानसभा की जनरल सीट से चुनाव लड़ सकती हैं।

अचानक क्यों हुआ सब कुछ
ईडी द्वारा 5 जनवरी 2024 के बाद हेमंत सोरेन के​ खिलाफ कोई भी कदम उठाया जाता है, तो कानूनी प्रावधानों के कारण उपचुनाव संभव नहीं था। इसीलिए, झामुमो ने साल 2023 के अंतिम दिन सरफराज अहमद से इस्तीफा दिला दिया है।

स्पीकर के इस्तीफा स्वीकार करने के साथ 31 दिसंबर 2023 के प्रभाव से ही गांडेय सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 151 के तहत ऐसी व्यवस्था है कि विधानसभा का कार्यकाल एक साल से कम रहने पर खाली हुई सीट पर उप चुनाव नहीं होगा।

झामुमो ने क्यों खेला यह दांव

विधानसभा का गठन 5 जनवरी 2020 को हुआ था। इसका कार्यकाल 6 जनवरी 2025 को पूरा हो रहा है। 6 जनवरी 2024 के बाद राजभवन या ईडी हेमंत सोरेन के खिलाफ कोई कदम उठाते हैं तो यहां उपचुनाव नहीं हो सकता था। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाना ही एक रास्ता था। इस खतरे से बचने के लिए झामुमो की ओर से यह दांव खेला गया है।

उपचुनाव नहीं होने पर गैर विधायक नहीं बन सकता सीएम

विधानसभा का कार्यकाल एक साल से कम रहने की स्थिति में उप चुनाव नहीं होने पर कोई गैर विधायक व्यक्ति सीएम नहीं बन सकता है। ऐसा बीआर कपूर बनाम जयललिता केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है। छह माह के लिए कोई भी व्यक्ति तभी सीएम पद की शपथ ले सकता है, जबकि उसके चुनाव जीत कर आने की संभावना रहती है।

गांडेय सीट पर जेएमएम का कब्जा, 4 में से 3 चुनाव जीते

झामुमो गांडेय विधानसभा सीट को अधिक सुरक्षित समझती है। राज्य बनने के बाद हुए चार विधानसभा चुनाव में तीन बार गांडेय से भाजपा विरोधी दल की जीत हुई है। 2005 में झामुमो की टिकट पर सालखन सोरेन जीते थे। 2009 में यहां से सरफराज अहमद कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए।

2014 में कांग्रेस और झामुमो ने अपना-अपना प्रत्याशी दिया था, इस कारण भाजपा के जेपी वर्मा जीत गए, पर 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने सरफराज अहमद को झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ने की सहमति दे दी। सरफराज जीत गए।

संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा-बाबूलाल मरांडी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है। हेमंत सोरेन जेल जाने से पहले पत्नी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। अब राज्य में उप चुनाव नहीं हो सकता। राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में राज्यपाल कानूनी सलाह लेकर निर्णय करें, ताकि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

इधर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 70 हजार करोड़ के घोटाले में मुख्य भूमिका निभाई है। उन्हें पता है कि अगर ईडी के समक्ष पेश हुए तो उनकी पोल खुल जाएगी, इसलिए वह भागते फिर रहे हैं। प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। मुख्यमंत्री कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने में लग जाएंगे। यह वंशवाद की पार्टी है इसमें यही होता है। मुख्यमंत्री को अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है।

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