इसरो की सफलता पर नतमस्तक नासा, आदित्य एल1 सौर मिशन कामयाब, जानिए इसरो की उल्लेखनीय कामयाबी

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 07 जनवरी 2024 | जयपुर – दिल्ली – न्यूयार्क : चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसरो ने शनिवार यानी आज एक और कीर्तिमान रचते हुए सौर मिशन में भी सफलता हासिल कर ली है। आदित्य एल1 शाम 4 बजे सफलतापूर्वक हेलो ऑर्बिट में प्रवेश कर गया है। इसरो की इस सफलता पर पूरा देश खुशी से झूम रहा है।

पीएम मोदी समेत कई राजनेताओं ने भी इसरो को बधाई दी। अब बधाई देने वालों की लिस्ट में नासा के वैज्ञानिक का नाम भी जुड़ गया है। नासा के वैज्ञानिक अमिताभ घोष ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को इस सफलता पर दिल खोलकर बधाई दी और सराहना भी की। घोष ने कहा कि भारत अभी अधिकांश क्षेत्रों में है जहां यह वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है।

आदित्य एल1 ने रचा इतिहास, फूले नहीं समा रहे नासा के वैज्ञानिक

नासा के वैज्ञानिक अमिताभ घोष ने सौर मिशन की तारीफ करते हुए कहा कि भारत अभी अधिकांश क्षेत्रों में है जहां यह वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है। फिर अगला पड़ाव ‘गगनयान’ है, जो मानव अंतरिक्ष उड़ान का हिस्सा है, जिस पर अभी काम चल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इसरो के लिए पिछले 20 वर्ष जबरदस्त प्रगति वाले रहे हैं। ग्रह विज्ञान कार्यक्रम ने होने से लेकर आज हम जहां खड़े हैं, और विशेष रूप से आदित्य की सफलता के बाद, यह एक बहुत ही उल्लेखनीय यात्रा रही है।

नए साल में एक और मील का पत्थर

इसरो ने आज शनिवार को अपने सौर मिशन के तहत आदित्य-एल 1 अंतरिक्ष यान को अपनी अंतिम गंतव्य कक्षा में स्थापित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने इस उपलब्धि की सराहना की। आदित्य-एल 1 पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर लैग्रेंज पॉइंट एल 1 तक पहुंच गया है।

M5426 300x169 इसरो की सफलता पर नतमस्तक नासा, आदित्य एल1 सौर मिशन कामयाब, जानिए इसरो की उल्लेखनीय कामयाबीआदित्य-एल 1 ऑर्बिटर को ले जाने वाले पीएसएलवी-सी 57.1 रॉकेट को पिछले साल 2 सितंबर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।

बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पहले सौर मिशन का सफल लॉन्च ऐतिहासिक चंद्र लैंडिंग मिशन-चंद्रयान-3 के बाद हुआ था।

आदित्य एल1 में सूर्य का डिटेल में अध्ययन करने के लिए 7 अलग-अलग पेलोड हैं, जिनमें से 4 सूर्य के प्रकाश का निरीक्षण करेंगे और अन्य तीन प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्रों के इन-सीटू मापदंडों को मापेंगे। आदित्य-एल1 पर सबसे बड़ा और तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण पेलोड विजिबल एमिशन लाइन कोरोनग्राफ या वीईएलसी है।

वीईएलसी को इसरो के सहयोग से होसाकोटे में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के क्रेस्ट (विज्ञान प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और शिक्षा केंद्र) परिसर में एकीकृत, परीक्षण और कैलिब्रेट किया गया था।

यह रणनीतिक स्थान आदित्य-एल1 को ग्रहण या गुप्तता से बाधित हुए बिना सूर्य का लगातार निरीक्षण करने में सक्षम बनाएगा, जिससे वैज्ञानिक सौर गतिविधियों और वास्तविक समय में अंतरिक्ष मौसम पर उनके प्रभाव का अध्ययन कर सकेंगे।

सफल रहा सौरमिशन, अब आगे क्या?

सफल सौरमिशन के बाद इसरो यहीं बस नहीं रुकने वाला। उसने आगे का भी प्लान किया है। मिली जानकारी के अनुसार, अभी आने वाले समय में आदित्य-L1 कुछ और जरूरी कदम उठाएगा,जिससे उसमें लगे उपकरण ठीक से काम करने लगेंगे। इसके बाद वह लगातार सूरज का डेटा पृथ्वी पर भेज सकेगा। यह भी कहा जा रहा है कि आदित्य एल1 हम सबको सूरज के बारे में ऐसी जानकारियां देगा जो अब तक हम नहीं जानते थे।

M100 300x231 इसरो की सफलता पर नतमस्तक नासा, आदित्य एल1 सौर मिशन कामयाब, जानिए इसरो की उल्लेखनीय कामयाबीआदित्य एल1 को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अंतरिक्ष यान के अंदर लगे एक खास इंजन, 440N लिक्विड अपोजी मोटर (LAM) का इस्तेमाल किया गया। यह इंजन उसी तरह का है जैसा इसरो ने अपने मंगल मिशन (MOM) में इस्तेमाल किया था। यह छोटा लेकिन शक्तिशाली इंजन भविष्य में भी आदित्य-L1 के लिए बहुत मददगार होगा।

अंतरिक्ष जगत में जबरदस्त कामयाबी का दौर

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक के मुताबिक, भारत अभी अधिकांश अंतरिक्ष क्षेत्रों में है। इस मिशन के बाद ‘गगनयान’ की तैयारियां हो रही हैं। यह मानव अंतरिक्ष उड़ान होगा। इस पर अभी काम चल रहा है। पिछले 20 वर्षों में इसरो समेत अंतरिक्ष जगत में जबरदस्त कामयाबी हासिल की गई है।

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आठ 22N थ्रस्टर्स और चार 10N थ्रस्टर्स के साथ मिलकर, यह इंजन अंतरिक्ष यान को सही दिशा में रखने और कक्षा में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह एक किले की तरह काम करेगा जो आदित्य-L1 को और सूर्य पर अपना ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।

इस सटीक कक्षा में पहुँचने के बाद, आदित्य-L1 अपने मुख्य मिशन की शुरुआत करेगा। वह लगातार सूर्य का अध्ययन करेगा, उसके रहस्यों को दुनिया के सामने लाएगा और हमें उसके बारे में और अधिक जानकारी देगा।

क्या है इसरो की कामयाबी

बता दें कि सूर्य मिशन पर निकले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के आदित्य एल-1 ने अपनी मंजिल लैग्रेंज प्वाइंट-1 (एल1) पर पहुंच कर एक कीर्तिमान हासिल किया। इसी के साथ आदित्य-एल 1 अंतिम कक्षा में भी स्थापित हो गया। यहां आदित्य दो वर्षों तक सूर्य का अध्ययन करेगा और महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाएगा। भारत के इस पहले सूर्य अध्ययन अभियान को इसरो ने 2 सितंबर को लॉन्च किया था।

इस मिशन की सफलता के बाद इसरो चीफ एस सोमनाथ के मुताबिक आदित्य एल वन सही जगह पर है। मिशन से जुड़े वैज्ञानिक अगले कुछ घंटों तक इसकी निगरानी करेंगे। अगर यह अपने तय रास्ते से थोड़ा सा भटकता है, तो हमें थोड़ा और सुधार करना पड़ सकता है। हालांकि, ऐसा होने की उम्मीद नहीं के बराबर है। इसरो ने तस्वीरें पहले ही वेबसाइट पर डाल दी हैं।

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