केजरीवाल और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्रियों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, कब और कैसे की जा सकती है सीएम की गिरफ्तारी

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 07 जनवरी 2024 | जयपुर – दिल्ली – राँची : शराब नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बार-बार प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होने से इनकार कर रहे हैं। इस बीच उनकी गिरफ्तारी की चर्चा भी आम हो गई। आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि ईडी अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर सकती है। सवाल ये उठता है कि क्‍या किसी भी जांच एजेंसी के लिए किसी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री को गिरफ्तार कर लेना इतना आसान होता है। किसी मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने के नियम-कानून क्‍या है? क्‍या उन्‍हें गिरफ्तारी से छूट मिलती है?

आम लोगों के लिए किसी मुख्‍यमंत्री की गिरफ्तारी की बात सुनना बहुत अजीब अनुभव होता है। बता दें कि भारतीय दंड सहिंता के तहत किसी भी आरोपी पर आरोप साबित होने पर उसे दोषी मान लिया जता है। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी की जा सकती है। यह गिरफ्तारी सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के मामलों में की जा सकती है। लेकिन, किसी राज्‍य के मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के मामले में नियम अलग होते हैं। नागरिक प्रक्रिया संहिता के तहत मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने को लेकर विशेष प्राविधान किए गए हैं. इनके तहत सीएम की विशेष परिस्थिति में गिरफ्तारी के नियम हैं।

कब और कैसे की जा सकती है सीएम की गिरफ्तारी

कोड ऑफ सि‍विल प्रोसिजर में इसका भी जिक्र किया गया है कि किसी सीएम की गिरफ्तारी कब हो सकती है और कब नहीं हो सकती है। सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा-135 के तहत किसी भी मुख्यमंत्री, विधानसभा या विधान परिषद सदस्य को गिरफ्तारी में छूट दी गई है। हालांकि, ये छूट केवल सिविल मामलों में ही मिलती है।

MK 300x204 केजरीवाल और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्रियों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, कब और कैसे की जा सकती है सीएम की गिरफ्तारीअगर किसी मुख्यमंत्री या विधासभा सदस्य पर कोई क्रिमिनल केस होता है, तो उसे गिरफ्तारी से छूट नहीं मिलती है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो सीएम को क्रिमिनल केस में गिरफ्तार किया जा सकता है। लेकिन, अगर सीएम या विधानसभा सदस्य की क्रिमिनल केस में गिरफ्तारी की जानी है तो पहले सदन के अध्यक्ष से मंजूरी लेनी होगी।

आसान शब्‍दों में कहें तो विधानसभा अध्यक्ष की मंजूरी के बाद मुख्‍यमंत्री की क्रिमिनल केस में गिरफ्तारी हो सकती है। ईडी के समन को लगातार अनदेखा करने के कारण दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मुख्‍यमंत्री को कब-कब गिरफ्तार नहीं कर सकते

कोड ऑफ सिविल प्रोसिजर के सेक्‍शन-135 के तहत अगर विधानसभा सत्र शुरू होने वाला है तो शुरू होने से 40 दिन पहले और खत्‍म होने के 40 दिन बाद तक मुख्यमंत्री, विधानसभा या विधान परिषद सदस्य की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है। अवधि पूरी होने के बाद सदन के अध्यक्ष की मंजूरी लेकर क्रिमिनल मामले में इन्‍हें गिरफ्तारी किया जा सकता है।

इसके अलावा किसी राज्‍य के मुख्यमंत्री को विधानसभा से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। वहीं, अगर जांच एजेंसी ये साबित कर सकती है कि आरोपी फरार हो सकता है, सबूत मिटाने की की कोशिश कर सकता है या कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए कोई काम कर सकता है तो सीएम को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।

जानें किस-किस को मिलती है गिरफ्तारी से छूट

आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुच्छेद-61 के तहत भारत के राष्‍ट्रपति और राज्यपाल को पद पर रहते हुए गिरफ्तारी से छूट मिलती है. उन्‍हें सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के मामलों में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, राष्‍ट्रपति और राज्यपाल को भी पद से इस्तीफा देने के बाद गिरफ्तार किया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद-361 में कहा गया है कि भारत के राष्‍ट्रपति और राज्यों के राज्यपाल अपने आधिकारिक कर्तव्यों को निभाने के लिए किए गए किसी भी काम के लिए किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट की दी हुई व्यवस्था के मुताबिक, कैबिनेट सदस्यों और मुख्यमंत्री के खिलाफ अभियोजन पर विचार करते समय राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सिफारिश के बिना स्वतंत्र तौर पर काम कर सकते हैं। देश में पहली बार तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयलतिा को आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

पहली बार किस मुख्‍यमंत्री को किया गया गिरफ्तार

मुख्‍यमंत्री को गिरफ्तार करने का देश में पहला मामला तमिलनाडु में हुआ था। दरअसल, तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे. जयललिता पर गांवों के लिए रंगीन टेलीविजन सेट्स की खरीद में भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे। इसके बाद उन्‍हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में 7 दिसंबर 1996 को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्‍हें अपने पद से इस्‍तीफा भी देना पड़ा था। उन्हें एक महीने तक जेल में रहना पड़ा था। बता दें कि केंद्रीय एजेंसी आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रावधानों के मुताबिक अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी करवाकर किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है।

देश के दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार

क्या 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले INDIA गठबंधन के दो सीएम जाएंगे जेल? दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर क्यों लटकी गिरफ्तारी की तलवार? आखिर क्यों लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के दो मुख्यमंत्री मुश्किलों में घिरे हुए हैं?

क्या अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन के जेल जाने से ‘INDIA’ गठबंधन की बढ़ जाएंगी मुश्किलें? हेमंत सोरेन को अब तक 7 बार पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है और अरविंद केजरीवाल को भी तीन बार। लेकिन दोनों में से कोई भी पेश होने को राजी नहीं है। तो ऐसे में आइए हम आपको बताते है केजरीवाल और सोरेन पर गिरफ्तारी से क्या ‘INDIA’ गठबंधन को नुकसान होगा?

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