भूकंप से कांपा दिल्ली-एनसीआर, जयपुर-लखनऊ में भी झटके, जानमाल के नुकसान की खबर नहीं

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 11 जनवरी 2024 | जयपुर – दिल्ली – लखनऊ : दिल्ली-एनसीआर में आज भूकंप के झटके महसूस किए गए। जम्मू-कश्मीर में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। कश्मीर के पुंछ में भी झटके महसूस किए गए हैं। दिल्ली से सटे नोएडा में भी झटकों के कारण लोग घरों के बाहर आ गए।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके लगातार आ रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर सिस्मिक जोन 4 में है। जो भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। रिक्टर स्केल की भूकंप की तीव्रता 6.1 थी। अफगानिस्तान के फैजाबाद में था भूकंप का केंद्र। नेशनल सेंटर फॉर सीसमोलॉजी के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई। इसका केंद्र हिंदुकुश में जमीन से करीब 220 किलोमीटर नीचे था। फिलहाल किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

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दिल्ली-एनसीआर में लगातार आ रहे हैं झटके

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। इसके झटके दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में महसूस किए गए।

गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ समय से लगातार भूकंप के झटके मसहूस किए जा रहे हैं। दिल्ली भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील जगहों में शुमार है इसलिए यहां हाल के दिनों में लगातार झटके आ रहे हैं।

जानमाल के नुकसान की खबर नहीं

इस भूकंप के कारण अभीतक किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। हालांकि, भूकंप के कारण लोग डरकर घरों से निकल गए। ऑफिस में काम करने वाले लोग भी खुले में आ गए। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही जापान में 7 से अधिक तीव्रता के आए भूकंप में कई लोगों की जान चली गई थी।
बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर था। 6.1 तीव्रता वाले इस भूकंप की वजह से किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है।

4 नवंबर को नेपाल में आया था 6.4 तीव्रता का भूकंप

4 नवंबर 2023 को रात 11:32 बजे नेपाल में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 157 लोगों की मौत हुई थी। तब दिल्ली-NCR के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और बिहार की राजधानी पटना में भी झटके महसूस किए गए थे। हालांकि भारत में किसी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था।

इसके बाद 6 नवंबर को दिल्ली-NCR में शाम 4 बजकर 16 मिनट पर फिर एक बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका केंद्र भी नेपाल में था। रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.6 आंकी गई। इसकी वजह से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी झटके महसूस किए गए। 4 नवंबर को भी नेपाल में आए भूकंप का असर दिल्ली-NCR में महसूस किया गया था। लोग अपने घरों से बाहर आ गए थे। (फाइल फोटो)

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भूकंप क्यों आता है?

हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

2015 में आए भूकंप से काठमांडू 10 फीट तक खिसक गया था

नेपाल में साल 2015 में 7.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इस दौरान करीब 9 हजार लोग मारे गए थे। इस भूकंप ने देश के भूगोल को भी बिगाड़ दिया था। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के टैक्टोनिक एक्सपर्ट जेम्स जैक्सन ने बताया कि भूकंप के बाद काठमांडू के नीचे की जमीन तीन मीटर यानी करीब 10 फीट दक्षिण की ओर खिसक गई। हालांकि दुनिया की सबसे बड़ी पर्वत चोटी एवरेस्ट के भूगोल में किसी बदलाव के संकेत नहीं हैं। नेपाल में आया यह भूकंप 20 बड़े परमाणु बमों जितना शक्तिशाली था।

467 साल पहले चीन में आए भूकंप में 8.30 लाख लोगों की मौत हुई थी

सबसे जानलेवा भूकंप चीन में 1556 में आया था, जिसमें 8.30 लाख लोगों की मौत हुई थी। तीव्रता के लिहाज से अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप चिली में 22 मई 1960 को आया था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 9.5 थी। इसकी वजह से आई सुनामी से दक्षिणी चिली, हवाई द्वीप, जापान, फिलीपींस, पूर्वी न्यूजीलैंड, दक्षिण-पूर्व ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भयानक तबाही मची थी। इसमें 1655 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 3000 लोग घायल हुए थे।

जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।
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