करियर फंडा : खरगोश नहीं कछुआ चाल है IAS बनने का मंत्र, तैयारी में रोज बढ़ाएं एक-एक कदम, ‘50% एनर्जी ऑन फर्स्ट डे’ सिद्धांत से करें शुरुआत

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 24 जनवरी 2024 | जयपुर – दिल्ली – मसूरी : आपने यदि आईएएस या आईपीएस बनने का संकल्प लिया और कुछ दिन बाद ही वो टूट गया तो आपको कैसा लगेगा। रोजाना पढ़ने का संकल्प सप्ताह भर भी नहीं टिका। हेल्दी खाना खाने के संकल्प ने उसी शाम चाट-मोमोज के खोमचे पर दम तोड़ दिया। सोचा था, रोज सुबह उठकर वॉक करने जाएंगे, लेकिन सुबह रजाई की गर्मी की ताकत इतनी थी कि उसके आगे वॉक करने का संकल्प औंधे मुंह गिर गया।

कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। हम जो चाहते हैं, वो कर क्यों न हीं पाते। तो फिर हम ऐसा क्या करें कि हमारा संकल्प अडिग रहे। हम जो भी करने का फैसला करें, वह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का, हमारी लाइफ स्टाइल का हिस्सा हो जाए। अगर हम यह कहें कि गलत समय और जरूरत से ज्यादा मेहनत इन संकल्पों को तुड़वा देती है तो शायद आप यकीन न करें।

“अगर किसी  चीज़  को  दिल  से  चाहो  तो  सारी  कायनात  उसे  तुम  से  मिलाने  में  लग  जाती  है” ज़रूर सुना होगा. इसी को सिद्धांत के रूप में Law of Attraction  कहा जाता है।  एक सार्वभौमिक सत्य है. A Universal Truth. यानि हम अपनी सोच के दम पर जो चाहे वो बन सकते हैं और यही हकीकत है। हमारे संकल्प हमारी जिंदगी का हिस्सा बनें; हम जो सोचें, उसे लंबे समय तक करते रहें और अपने सपनों को पूरा करें, इसके लिए आज ‘करियर फंडा’ कॉलम में कुछ मनोवैज्ञानिक उपायों की बात करेंगे।

‘50% एनर्जी ऑन फर्स्ट डे’ सिद्धांत से करें शुरुआत

करियर काउंसिलिंग के एक्सपर्ट प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा ‘50% एनर्जी ऑन फर्स्ट डे’ का मनोवैज्ञानिक फॉर्मूला सुझाते हैं। उनका कहना है कि जब भी आप कोई नई आदत डालने की शुरुआत करें या कोई नई कोशिश करें तो पहले ही दिन अपना सबकुछ खर्च न कर दें। संकल्प लेने के बाद पहली बार उस काम को अपनी इच्छा से आधा ही करें। यानी 6 किलोमीटर दौड़ने या 6 घंटे पढ़ने का संकल्प लिया है तो पहले दिन 3 किलोमीटर दौड़िए या 2-3 घंटे ही पढ़ाई करिए।

kchhua 300x192 करियर फंडा : खरगोश नहीं कछुआ चाल है IAS बनने का मंत्र, तैयारी में रोज बढ़ाएं एक एक कदम, ‘50% एनर्जी ऑन फर्स्ट डे’ सिद्धांत से करें शुरुआतसंकल्प जिंदगी का हिस्सा बने, इसके लिए जरूरी है कि इच्छाशक्ति की आग जलती रहे। अगर शुरुआत में ही जरूरत से ज्यादा मेहनत कर ली तो सारा शौक हवा हो जायेगा। पहले ही दिन आप खुद को एग्जॉस्ट कर देंगे। फिर संकल्प के प्रति उबासी सी होने लगेगी और यह टूट जाएगा।

यकीन कीजिए कि शुरुआत करनी ही पड़ती है मानसिक मजबूती के साथ, जबकि अधिकांश लोग शुरुआत करते हैं किताबों के साथ। इस धारणा को तोड़ना आसान नहीं है। हाँ, आपको पूरी तैयारी कैसे करनी चाहिए, मूकनायक मीडिया वेबसाइट से धीरे-धीरे पता चलता रहेगा।

बहाना बनाना छोड़ें और अपनी क्षमताओं के साथ आगे बढ़ें 

प्रोफ़ेसर मीणा का कहना है कि अगर मुझसे कोई पूछे की इस दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी क्या है तो मैं कहूँगा- बहाना बनाना। इसी एक बीमारी की वजह से आज बहुत से लोग अपनी योग्यताओं और क्षमताओं के साथ अन्याय कर रहे है। जब कोई इंसान बहाना बनाता है तो उसे खुद पर शर्म महसूस करनी चाहिए क्योंकि वो किसी और को नहीं बल्कि अपने आप को धोखा दे रहा होता है।

अकसर लोग बहाने बनाकर अपनी कमजोरियों और असफलताओं को ढकना चाहते है। वो एक से बढ़ाकर एक बहाने गिनाते है की वो असफल क्यों हुआ, ताकि दूसरों के सामने यह साबित कर सके की उसके सामने ज्यादा मुश्किलें थी।

दुनिया में ज्यादातर लोग जो असफल होते है, उनमें से ज्यादातर अपने आपको दोष नहीं देते है वो अकसर कोई न कोई बहाना बना लेते है, वो परिस्थितियों को दोष देते है, लेकिन कभी ये स्वीकार नहीं करना चाहते है की उसका कारण तो वे स्वयं थे। अगर आप वाकई में सफलता पाने चाहते है और अपने सपनों को पाना चाहते है तो बहाने बनाना बंद करे क्योंकि आज मैं कुछ अलग देने जा रहा हूँ जो आप लोगों के सामने मुश्किलें हैं, उनका समाधान है।

सबके जीवन में कई बार और बार-बार तिरस्कार हुआ, उनकी भी कई बार हिम्मत टूटी थी। लेकिन उन्होंने एक अच्छा काम कर दिया कि “ तमाम मुश्किलों के बावजूद भी वो डटे रहे, हारे नहीं और एक सुनहरी सुबह के इंतजार में काम करते रहे।” इसीलिए आज वो दुनिया में अपनी पहचान बना पाए और आज आपको एक प्रेरणा देने जा रहे …..

संकल्प टूटने का मनोविज्ञान समझ लेंगे तो फैसले पर रहेंगे अडिग

6 किलोमीटर दौड़ने, 6 घंटे पढ़ने या हेल्दी खाने से हमें काफी फायदा होगा, यह बात जानते हुए भी लोग इन आदतों को अपने जीवन में शामिल क्यों नहीं कर पाते हैं। दरअसल, इसके पीछे गलत आदतों की ‘रिवॉर्ड थ्योरी’ काम करती है। ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुबह रजाई में लेटे हुए मन सोचता है कि अगर यहीं लेटे रहें तो शरीर को आराम और गर्मी मिलेगी।

यह इन्फॉर्मेशन दिमाग के रिवॉर्ड एरिया को ट्रिगर करती है। डोपामाइन रिलीज होने से थोड़ी मात्रा में खुशी भी मिलती है, जिसकी वजह से वर्कआउट का संकल्प टूट जाता है। तात्कालिक फायदे के लिए मन शरीर को लॉन्ग टर्म नुकसान पहुंचाने वाले काम करने देता है। इसे ही मनोविज्ञान की भाषा में गलत आदतों की ‘रिवॉर्ड थ्योरी’ कहते हैं।

इस दौरान मन यह नहीं सोचता कि रजाई में पड़े रहने की खुशी बाहर निकलकर टहलने, लोगों से मिलने, प्रकृति के बीच वक्त गुजारने की खुशी के मुकाबले काफी कम है। सहज रूप से हमारा मन तात्कालिक खुशी पर ही ध्यान देता है।

संकल्प और सपनों की जीतने का मनोविज्ञान

प्रोफ़ेसर मीणा देश के जाने-माने करियर एक्सपर्ट्स में गिने जाते हैं। वे मोटिवेशनल स्पीकर और लाइफ कोच हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और अपने अंदर की चिंगारी को जलाए रखने की समझाइश दी है। उनका बेहतरीन फलसफा है 50% के नियम।

प्रोफ़ेसर मीणा सलाह देते हैं कि संकल्प करने के बाद उसे कागज पर लिखकर ऐसी जगह चस्पा करें, जहां रोज उस पर आपकी नजर पड़ती रहे। साथ ही शुरुआत में जितनी इच्छा हो, उसके मुकाबले काम थोड़ा कम करें। ऐसी स्थिति में काम को छोड़ें, जब थोड़ा और करने की इच्छा बाकी हो। अगर यह थोड़ा और करने की इच्छा पहले ही दिन खत्म हो गई तो संभव है कि वह काम रेगुलर नहीं हो पाएगा।

छोटा संकल्प बड़े से बेहतर

ज्यादातर लोग संकल्प तो ले लेते हैं, फिर उसे पूरा करने में उन्हें परेशानी होती है। हम यह मानकर चलते हैं कि बड़ी सफलता के लिए बड़ी कोशिशें जरूरी होती हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में सेल्फ कमिटमेंट जवाब देने लगता है। ऐसे में अपने संकल्प को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर शुरुआत करें।

प्रोफ़ेसर मीणा कहते हैं कि शुरुआत में आप कितना काम करते हैं, इससे ज्यादा जरूरी है कि आप उस काम में कितनी कॉन्टिन्यूटी ला पाते हैं। काम भले थोड़ा कम ही करें, लेकिन उसमें कॉन्टिन्यूटी लाने की कोशिश करें। मनोविज्ञान कहता है कि अगर कोई काम लगातार 4 सप्ताह यानी 28 दिनों तक किया जाए तो वह हमारे स्वभाव का हिस्सा बनने लगता है।

खरगोश नहीं कछुआ चाल है IAS बनने का मंत्र

आईएएस बनने के लिए कछुए की तरह लगन से पढ़ना पड़ता है, खरगोश की तरह नहीं जो आधी मंजिल पर आराम करने लगे। इसलिए जरूरी है कि संकल्प को पूरा करने के लिए शुरुआत में उसे बोझ की तरह न लिया जाए। थोड़ा-थोड़ा काम रेगुलर करके उसमें कॉन्टिन्यूटी लाई जाए। इस कवायद को अगर आप कम से कम 28 दिनों तक कर लेते हैं तो ज्यादा संभावना है कि आगे भी आप उस राह पर चलते रहेंगे।

फिर चाहे 8 किलोमीटर टहलने का संकल्प हो, रोज 7 घंटे पढ़ने का या और कोई भी संकल्प, उसके पूरा होने की संभावना बढ़ जाएगी। आपका मन उससे थकेगा नहीं और रोज सुबह उठकर आपको वो करने का मन करेगा। फिर रिवॉर्ड थ्योरी का पैराडाइम भी बदल जाएगा। जिस दिमाग को पहले सोने में ज्यादा रिवॉर्ड मिल रहा था, अब उसे टहलने और दौड़ने में मिलने लगेगा। वैसे भी, बिना रिवॉर्ड के तो कोई भी अच्छी आदत नहीं टिक सकती।

सफलता पाने के 10 मूल मंत्र

Success Mantra: जीवन में सफलता के पीछे हर कोई भागता है, मगर सफलता उसी शख्स के पीछे दौड़ती है, जो खुद पर अटूट विश्वास और हर तूफान से भिड़ जाने का दम रखता है। कामयाबी उन लोगों की गुलाम होती है, जो खुद से ज्यादा अपने काम को महत्व देते हैं। अगर आप भी उन सफल लोगों की फेहरिस्त का हिस्सा बनना चाहती हैं, तो सफलता के इन सूत्रों का पालन अवश्य करें।The Great IAS Race 300x170 करियर फंडा : खरगोश नहीं कछुआ चाल है IAS बनने का मंत्र, तैयारी में रोज बढ़ाएं एक एक कदम, ‘50% एनर्जी ऑन फर्स्ट डे’ सिद्धांत से करें शुरुआत

दूसरों के मुताबिक न चलें

दूसरों को अहमियत देना बेहद ज़रूरी है। मगर अपनी हर बात के लिए अपने पति, माता-पिता, रिश्तेदारों या दोस्तों पर निर्भर न रहें। स्वयं निर्णय लेने के लिए खुद को सक्षम बनाएं और अपनी ज़रूरतों और अपने भविष्य को देखते हुए, जीवन में आगे बढ़े और खास मुकाम को हासिल करें।

अन्यथा आप जीवन में अपने सभी फैसलों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाएंगे और फिर न चाहते हुए भी आपके फैसलों और क्रियाकलापों की बागडोर दूसरों के हाथों में चली जाएंगी, जिससे आप मनचाही उपलब्धियां हासिल नहीं कर पाएंगी और जीवन में निराशा की ओर बढ़ने लगेंगे।

सुनें सब की करें मन की

जीवन में सफल होने के लिए आपका खुद पर दृढ़ विश्वास होना बेहद ज़रूरी है। कई बार ऐसे हालात भी होते हैं, जब हम कोई निर्णय लेने से पहले असमंजस की स्थिति में खुद को महसूस करते हैं। मगर इन हालातों में आप किसी अनुभवी शख्स से सलाह मशविरा करें और उनकी सोच को ज़रूर परखें। उसके बाद किसी नतीजे तक पहुंचे। मगर अपने निर्णयों के लिए सदैव अपने मन (Always listen to your heart for your decisions) की ही सुनें।

अपने अंदर आत्मविश्वास भरें

जीवन में सफल होने का एकमात्र सूत्र है, आत्मविश्वास। जो हमारे अनुभवों और काम के प्रति हमारी सर्तकता को लेकर हमारे अंदर जागृत होता है। खुद में आत्मविश्वास पैदा करने के लिए आपके पास जीवन में एक मकसद होना ज़रूरी है। आपके आस पास ऐसे लोगों का होना भी ज़रूरी है, जो आप पर पूर्ण रूप से विश्वास करते हों। अगर हमारा खुद पर अटूट विश्वास हैं, तो हम किसी भी काम को आसानी से कर सकते हैं।

अपनी कमियों को स्वीकार करें 

अपनी खूबियों की जानकारी के साथ-साथ हमें अपनी खामियों का अंदाज़ा होना भी बेहद ज़रूरी है। अगर हमें जीवन में आगे बढ़ना है और नई उपलब्धियों को हासिल करना है, तो इसके लिए ज़रूरी है कि आपको अपनी कमियां पता हों और आप उन्हें न केवल स्वीकारें (Acceptance of failure) बल्कि उन्हें सुधारने की दिशा में भी काम करें। दरअसल, किसी भी इंसान की कमियां उसे आगे बढ़ने देने में बाधक साबित होती हैं। ऐसे में अपनी कमज़ोरियों को बड़ा बनने से पहले ही संभल जायें, ताकि आपके करियर में उसके कारण कोई अड़चन न आ पाये।

देश-दुनिया से रहें अपडेटेड 

आगे बढ़ने के लिए मेहनत के अलावा हमें देश-दुनिया में हो रही घटनाओं की जानकारी होनी चाहिए। अगर हम अपडेटेड होंगे, तो हमें मार्किट में खुद को स्थापित करने और लोगों के बीच बैठकर बातचीत करने में हिचक का सामना करना नहीं पड़ेगा। हमें हर उस चीज से वाकिफ रहना चाहिए, जो हमारे काम में मददगार है। चाहे अप किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हैं, हर दिन आने वाली नई टेक्नोलॉजी से खुद को जागरुक रखें ताकि आप से जब कोई किसी भी विषय पर चर्चा करें तो कम जानकारी होने के नाते झेपना न पड़ें।

हार्ड वर्क के साथ करें स्मार्ट वर्क भी

कई बार हम दिन रात मेहनत करने के बाद भी लक्ष्य को पाप्त नहीं कर पाते हैं। कारण सही दिशा में मेहनत न करना। मगर कुछ लोग बिना मेहनत किए भी आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे में आप अपने काम करने के तरीके पर गौर करें और समझें कि काम को किस प्रकार अंजाम देकर आप सफलता हासिल कर सकते हैं।

बोलने की शैली

हमारी बोलने की शैली (Believe in yourself and anything is possible) ही हमें पुरूस्कार और तिरस्कार दिला सकती है। ऐसे में अपने बातचीत के ढ़ंग पर गौर करें और कम्यूनिकेशन स्क्लिस को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास करें। दरअसल, किसी व्यक्ति से भी बातचीत करके आप उस शख्स के स्वभाव से लेकर उसके काम करने के तौर-तरीके तक, सभी कुछ आसानी से पता लगा सकती हैं।

कई बार केवल उचित बातचीत न होने के कारण कई मौके हमारे हाथ से निकल जाते हैं। दरअसल, हम जब तक अपनी बातों को दूसरों तक नहीं पहुंचाएंगे तब तक हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे। इसके लिए हमें हमेशा दूसरों से नज़रे मिलाकर बात करनी चाहिए, ताकि सामने वाला हमारी बात को गौर से सुने।

समय की पाबंदी 

सफलता की उंचाईयों को छूने के लिए समय के पाबंद होना ज़रूरी हैं। अगर आप समय के महत्व को समझोगे, तभी काम की गति बढ़ेगी। अगर हम समय से काम नहीं करेंगे, तो इससे न सिर्फ आपका नुकसान होगा बल्कि दूसरे व्यक्ति को भी आपकी वजह से परेशानी झेलनी पड़ सकती है। समय को गंवाने से बेहतर है कि उसे अच्छे लोगों से वार्तालाप में लगाएं या फिर अपने बचे खुचे कामों को निपटाने के लिए इस्तेमाल करें।

रिजल्ट देने में विश्वास रखें

हम रोज़ाना ऐसे बहुत से लोगों से मिलते हैं, जो अपनी गलती छुपाने के लिए व्यर्थ के बहाने बनाने लगते हैं। ऐसे में आप अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाते हैं। अपने टारगेट को अचीव करने के लिए बहाने बनाने से बचें और अपनी गलती को स्वीकार करने से परेहेज न करें। अधूरे कार्य को बहाने बनाकर छोड़ने की बजाय रिजल्ट देने में विश्वास रखें।

दूसरों की कमियां न तलाशें 

हर व्यक्ति अपने अच्छे और बुरे के लिए स्वयं जिम्मेदार होता है। उसके द्वारा किए गए कर्म ही उसे अच्छाई या फिर बुराई की राह पर ले जाता है। ऐसे में दूसरों की कमियों को मत तलाशें और अगर कोई कुछ गलत कर भी रहा है, तो उसे समझाएं या फिर ऐसी परिस्थ्तियां पैदा कर दें कि वो अपने खुद के अनुभवों से सीखने के लिए मज़बूर हो जाए। अगर हम दूसरों की कमियों या गलतियां का ध्यान रखेंगे, तो हम अपने कार्य को गंभीरता से करने में स़क्षम नहीं हो पाएंगे। ऐसे में सिर्फ और सिर्फ अपने काम पर ध्यान दें।

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संकल्प टूटने की सबसे बड़ी वजह, गलत समय पर की गई मेहनत

करियर काउंसिलिंग के एक्सपर्ट प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा बताते हैं कि संकल्प टूटने का सबसे बड़ा कारण गलत दिशा और गलत समय पर की गई मेहनत है। रात को लोग अचानक से संकल्प लेते हैं और सुबह 8 किलोमीटर की दौड़ लगा आते हैं। रेगुलर दौड़ने के लिए उनमें जितनी इच्छाशक्ति थी, वह सब उन्होंने एक दिन में ही खर्च कर डाली। नतीजतन रात का संकल्प दिन में टिक नहीं पाया। आपके बहानों का सच्चा आईना
बहाना 1. मेरे पास समय नहीं है।
भगवान ने हम सबको बराबर समय दिया है। जो लोग सफल हुए है उनके पास भी साल के 315 दिन, 8760 घंटे, 525600 मिनट, 31536000 सेकेण्ड का समय था और असफल होने वाले के पास भी।
बहाना 2. मैं बहुत गरीब घर में पैदा हुआ हूँ।
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी गरीब घर में पैदा हुए थे।
बहाना 3. मुझे ठीक से इंग्लिश नहीं आती।
राजनीतिज्ञ लालू यादव को भी नहीं आती।
बहाना 4. मेरे पास काम शुरू करने के लिए भी धन नहीं है।
इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी काम शुरू करने के लिए धन नहीं था, उन्हें अपनी पत्नी के गहने तक बेचने पड़े।
बहाना 5. मैं बहुत मोटा हूँ।
प्रसिद्ध गायक अदनान सामी भी बहुत मोटे है।
बहाना 6. मैं एक छोटी सी नौकरी करता हूँ इससे क्या हो पायेगा।
धीरू भाई अंबानी भी छोटी सी नौकरी करते थे।
बहाना 7. मैं इतनी बार असफल हुआ हूँ की अब हिम्मत नहीं बची।
अब्राहम लिंकन पंद्रह बार चुनाव हारने बाद राष्ट्रपति बने थे।
बहाना 8. मुझे बचपन से ही परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ी।
लता मंगेशकर को भी बचपन से ही परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ी थी।
बहाना 9. मेरी उम्र कम है।
सचिन तेंदुलकर की उमर भी कम थी, जब उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरु किया था।
बहाना 10. मैं दिवालिया हो चूका हूँ अब मुझ पर कौन विश्वास करेगा।
दुनिया की सबसे बड़ी कोल्ड ड्रिंक कंपनी पेप्सीकोला भी दो बार दिवालिया हो चुकी है।
बहाना 11. मेरी उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी है।
अमिताभ बच्चन ने भी 55 की उम्र में फिर से शुरुआत की थी। विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ़्राईड चिकन के मालिक ने 60 साल की उम्र में अपना पहला रेस्तरां खोला था.
बहाना 12. मेरी शक्ल-सूरत अच्छी नहीं है।
आप राजनीतिज्ञ शरद पवार से प्रेरणा लें।
बहाना 13. बचपन में ही मेरे पिता का देहांत हो गया था।
प्रसिद्ध संगीतकार ए.आर. रहमान के पिता का भी बचपन में ही देहांत हो गया था।
बहाना 14. मुझे उच्च शिक्षा का अवसर नहीं मिला।
उचित शिक्षा का अवसर फोर्ड मोटर्स के मालिक हेनरी फोर्ड को भी नहीं मिला था।
बहाना 15. एक दुर्घटना में अपाहिज होने के बाद मेरी हिम्मत टूट गई।
प्रसिद्ध नृत्यांगना सुधा चन्द्रन के पेर नकली है।

मतलब यह है कि…..
यदि आप आगे बढ़ना चाहते है तो आपको दो में
एक को चुनना होगा…..
बहाना या सफलता का रास्ता !

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