प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती में गड़बड़ी रोकथाम, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक 2024 संसद में पेश

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 06 जनवरी 2024 | जयपुर – दिल्ली – मुंबई : प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती में किसी भी गड़बड़ी पर अब बड़ा एक्शन होगा। सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और अनियमितताओं से सख्ती से निपटने के प्रावधान वाला लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक, 2024 सोमवार को लोकसभा में पेश किया। विधेयक में परीक्षाओं में अनियमितताओं (Centre’s New Anti-Cheating Bill) से संबंधित अपराध के लिए अधिकतम 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल में इस विधेयक को मंजूरी दी थी। इससे पहले बजट सत्र की शुरुआत पर गत 31 जनवरी को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा था कि सरकार परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ी को लेकर युवाओं की चिंताओं से अवगत है।

इस दिशा में सख्ती लाने के लिए नया कानून बनाने का निर्णय लिया गया है। नकल पर नए कानून में किन बातों का जिक्र है इसको इन पॉइंट के जरिए समझ सकते हैं। केंद्र सरकार ने सरकारी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक, नकल और फर्जी वेबसाइट्स जैसी गड़बड़ियों पर रोक के लिए संसद में विधेयक पेश किया।

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2024 (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Bill 2024) में उल्लेख है कि कोई व्यक्ति, समूह या संस्थान पर्चा या आंसर की लीक करते हैं, परीक्षा में किसी तरीके से अभ्यर्थी की मदद करते हैं और कंप्यूटर नेटवर्क या सिस्टम से छेड़छाड़ करते हैं, तो यह अपराध माना जाएगा।

ऐसे व्यक्तियों को 3-5 साल कैद, 10 लाख जुर्माने का प्रावधान है। संगठित अपराध से जुड़े केस में 5 से 10 साल तक कैद और न्यूनतम एक करोड़ रु. जुर्माने का प्रस्ताव है। सर्विस प्रोवाइडर पर 1 करोड़ रु. तक जुर्माने का प्रावधान है। परीक्षा की लागत भी उससे वसूली जाएगी। ऐसे सर्विस प्रोवाइडर चार साल तक सार्वजनिक परीक्षा नहीं करवा सकेंगे।

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक 2024 संसद में पेश

➤ यह एक केंद्रीय कानून होगा और इसके दायरे में संयुक्त प्रवेश परीक्षाएं और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षाएं भी आएंगी।

➤ विधेयक में एक उच्च-स्तरीय तकनीकी समिति के गठन का भी प्रस्ताव है, जो कम्प्यूटर के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सिफारिश करेगी।


पिछले 5 साल में राज्यों में पेपर लीक के कितने मामले
राज्य पेपर लीक के मामले (भर्ती परीक्षा)
हरियाणा 2
राजस्थान 7
गुजरात 3
महाराष्ट्र 2
कर्नाटक 2
उत्तराखंड 4
यूपी 1
मध्य प्रदेश 5
तेलंगाना 5
असम 1
बिहार 3
झारखंड 1
ओडिशा 1

➤ परीक्षाओं में दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने के मामले में दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को न्यूनतम 3 साल की सजा मिलेगी। इसे बढ़ाकर पांच साल किया जा सकता है और 10 लाख का जुर्माना भी लगाया जायेगा।➤ छात्रों के साथ फर्जी वेबसाइट या फर्जी केंद्रों के जरिए परीक्षा कराने और नौकरी देने आदि का फर्जीवाड़ा भी इसके दायरे में आएगा।

➤ यदि पेपर लीक और नकल में परीक्षा कराने वाली एजेंसी शामिल पाई जाती है तो परीक्षा का पूरा खर्च वसूला जाएगा। इसके साथ ही संपत्ति भी जब्त की जा सकती है।

➤ इनमें यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, जेईई, नीट जैसी सभी कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं शामिल होंगी।

➤ विधेयक के अनुसार पेपर लीक से जुड़ी जांच पुलिस उपायुक्त या सहायक पुलिस आयुक्त के स्तर पर होगी।

➤ सरकार के पास जांच किसी भी समय केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का पूरा अधिकार होगा।

➤ परीक्षाओं को लिए आईटी सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जायेगा।

नए विधेयक में कौन सी परीक्षाएं शामिल हैं?

अन्य प्राधिकारियों में, जिनमें भविष्य में इस सूची में अधिसूचित/जोड़े जा सकने वाले प्राधिकारी भी शामिल हैं, नीचे दी गई एजेंसियों द्वारा आयोजित परीक्षाएं प्रस्तावित नकल विरोधी विधेयक के अंतर्गत कवर की जाएंगी।

  • संघ लोक सेवा आयोग (अर्थात, सिविल सेवा प्रवेश परीक्षा )
  • कर्मचारी चयन आयोग (अर्थात, केंद्रीय मंत्रालयों और अधीनस्थ कार्यालय)
  • रेलवे भर्ती बोर्ड (अर्थात, भारतीय रेलवे)
  • बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (अर्थात, भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक)
  • राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (अर्थात, उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा )

SIT की गिरफ्तारी के डर से विदेश भागे पेपर लीक के आरोपी

प्रदेश में पेपर लीक के मामलों की जांच के लिए SIT का गठन होने के बाद फरार आरोपियों को पकड़ा जा रहा है। एसआईटी के डर से कुछ आरोपी नेपाल या दूसरे देशों में भाग गए हैं। इसको लेकर SIT चीफ वीके सिंह का कहना है कि कोई भी आरोपी कहीं भी चला जाए, गिरफ्तारी से बच नहीं सकेगा।

वीके सिंह ने कहा कि सभी पेपर लीक केस की लगातार जांच की जा रही है। इन मुकदमों में फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें जुटी है। कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह से पेपर लीक केस में संलिप्त है, उनको किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। एसआईटी की टीम हर समय हर जगह कार्रवाई के लिए तैयार है।

पिछले 10 साल में राजस्थान में पेपर लीक के मामले

राज्य पेपर लीक के मामले (भर्ती परीक्षा)
2013 RAS प्री परीक्षा
2017 राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा
2018 लाइब्रेरियन भर्ती परीक्षा
2018 JEN सिविल डिग्री भर्ती परीक्षा
 2020 कनिष्ठ अभियंता भर्ती परीक्षा
2020 वनरक्षक भर्ती परीक्षा
2021 रीट भर्ती परीक्षा
2021 चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा
2022 वरिष्ठ अध्यापक प्रतियोगी परीक्षा
2022 कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा
2022 हाईकोर्ट LDC भर्ती परीक्षा
2022 एसआई भर्ती परीक्षा
2022 सीएचओ भर्ती परीक्षा

रीट भर्ती पेपर लीक में RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा गिरफ्तार

राजस्थान में रीट भर्ती परीक्षा 2021 पेपर लीक केस सुर्खियों में रहा। इस पेपर लीक केस में RPSC के सदस्य बाबूलाल कटरा को भी गिरफ्तार किया गया। इस पूरे मामले में अब तक 105 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इसमें पेपर लीक करने वाले माफिया और परीक्षा से पहले पेपर प्राप्त करने वाली अभ्यर्थी शामिल है। SOG को अभी रीट पेपर लीक केस में फरार चल रहे कई आरोपियों की तलाश है, जिसके लिए टीमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दबिश दे रही है।

राजस्थान में पेपर लीक रोकने के लिए पहले से कानून

राजस्थान में पिछले 10 सालों में 14 प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। इन पेपर लीक में आरपीएससी सदस्यों और परीक्षा का आयोजन कराने वाली कंपनी के लोगों की मिलीभगत उजागर हुई। इसको लेकर राजस्थान सरकार ने राजस्थान परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) (संशोधन) कानून लागू किया है। इसमें पेपर लीक पर उम्र कैद, पेपर लीक में धोखाधड़ी पर 10 साल तक कैद और 10 करोड़ रुपए जुर्माने का प्रावधान है।

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