चौधरी चरण सिंह, पीवी नरसिम्हा राव और स्वामीनाथन को भारत रत्न, पर ‘भारत रत्न’ दिये जाने में दलित-आदिवासी हस्तियों की उपेक्षा करना उचित नहीं

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 09 जनवरी 2024 | जयपुर – दिल्ली – बागपत – विशाखापत्तनम  : पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पी वी नरसिम्हा राव और मशहूर वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ (मरणोपरांत) से सम्मानित किया जायेगा।

केंद्र सरकार ने पीवी नरसिम्हा राव, चौधरी चरण सिंह और एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न (मरणोपरांत) देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों शख्सियतों को देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान देने की जानकारी सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों के साथ शेयर की।

चौधरी चरण सिंह देश के पांचवें और नरसिम्हा राव नौवें प्रधानमंत्री थे। वहीं कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन को हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। PM की घोषणा पर चौधरी चरण सिंह के पोते और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी ने लिखा- दिल जीत लिया।

2014 में सत्ता संभालने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा दिया गया यह दसवां भारत रत्न है। इससे पहले 3 फरवरी को भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी और 23 जनवरी को बिहार के पूर्व CM कर्पूरी ठाकुर (मरणोपरांत) को भारत रत्न देने का ऐलान किया गया।

इस तरह इस साल 5 हस्तियों को यह सम्मान देने का ऐलान हो चुका है। इनके अलावा मोदी के कार्यकाल में मदन मोहन मालवीय, अटल बिहारी वाजपेयी, प्रणब मुखर्जी, भूपेन हजारिका और नानाजी देशमुख को यह सम्मान मिल चुका है। आज की तीन हस्तियों को मिलाकर इस सम्मान को हासिल करने वालों में अब तक कुल 53 लोग शामिल हो चुके हैं।

चौधरी चरण सिंह

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा- हमारी सरकार का यह सौभाग्य है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। उन्होंने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या देश के गृहमंत्री और यहां तक कि एक विधायक के रूप में भी, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण को गति प्रदान की। वे आपातकाल के विरोध में भी डटकर खड़े रहे। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए उनका समर्पण भाव और इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र के लिए उनकी प्रतिबद्धता पूरे देश को प्रेरित करने वाली है।

पीवी नरसिम्हा राव

PM मोदी ने लिखा- प्रधानमंत्री के रूप में नरसिम्हा राव गारू का कार्यकाल महत्वपूर्ण उपायों द्वारा चिह्नित किया गया था, जिसने भारत को वैश्विक बाजारों के लिए खोल दिया, जिससे आर्थिक विकास के एक नए युग को बढ़ावा मिला।

इसके अलावा, भारत की विदेश नीति, भाषा और शिक्षा क्षेत्रों में उनका योगदान एक ऐसे नेता के रूप में उनकी बहुमुखी विरासत को रेखांकित करता है, जिन्होंने न केवल महत्वपूर्ण परिवर्तनों के माध्यम से भारत को आगे बढ़ाया बल्कि इसकी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को भी समृद्ध किया।

डॉ. एमएस स्वामीनाथन

PM मोदी ने लिखा- यह बेहद खुशी की बात है कि भारत सरकार कृषि और किसानों के कल्याण में हमारे देश में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. एमएस स्वामीनाथन जी को भारत रत्न से सम्मानित कर रही है।उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय के दौरान भारत को कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में उत्कृष्ट प्रयास किये।

हम एक अन्वेषक और संरक्षक के रूप में और कई छात्रों के बीच सीखने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाले उनके अमूल्य काम को भी पहचानते हैं। डॉ. स्वामीनाथन के दूरदर्शी नेतृत्व ने न केवल भारतीय कृषि को बदल दिया है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और समृद्धि भी सुनिश्चित की है। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें मैं करीब से जानता था और मैं हमेशा उनकी अंतर्दृष्टि और इनपुट को महत्व देता था।

दक्षिण को साधने की कोशिश

नरसिम्हा राव और डॉ. एमएस स्वामीनाथन दक्षिण भारत से आते हैं। उन दोनों को भारत रत्न का अवॉर्ड देकर प्रधानमंत्री ने देश के सभी हिस्सों के योगदान को सराहने का प्रयास किया है। इससे दक्षिण को साधने की भी कोशिश भारत सरकार की नजर आती है। ये ध्यान रखा जाना चाहिए कि कुछ ही महीने के बाद देश में लोकसभा चुनाव होने हैं।

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राव, चरण सिंह, स्वामीनाथन भारत के रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे: कांग्रेस

कांग्रेस ने पीवी नरसिम्हा राव, चौधरी चरण सिंह और एमएस स्वामीनाथन को ‘भारत रत्न’ (मरोणपरांत) पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के बाद शुक्रवार को कहा कि ये तीनों महान व्यक्तित्व भारत के रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “पीवी नरसिम्हा राव, चौधरी चरण सिंह और एमएस स्वामीनाथन जी भारत के रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे. उनका योगदान अभूतपूर्व था, जिसका हर भारतीय सम्मान करता है।”

उन्होंने दावा किया, “स्वामीनाथन फ़ॉर्मूले के आधार पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का क़ानूनी दर्जा दिए जाने पर मोदी सरकार चुप है। प्रधानमंत्री मोदी की हठधर्मिता के कारण 700 किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए, मगर सरकार ने किसानों के साथ वादा खिलाफी की। आज भी किसान दिल्ली कूच के लिए तैयार बैठे हैं, मगर सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।”

इस साल सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए पांच हस्तियों के नाम का एलान किया जा चुका है। आज के तीन नामों से पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आणवाणी को भी यह सम्मान देने का एलान हो चुका है।

अब तक 53 लोगों को सम्मान

करीब 68 साल पहले शुरू हुए इस सर्वोच्च सम्मान से अब तक 53 हस्तियों को सम्मानित किया जा चुका है। पहली बार साल 1954 में आजाद भारत के पहले गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राज गोपालाचारी, वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन और सर्वपल्ली राधाकृष्णन को दिया गया था।

‘भारत रत्न’ दिए जाने में दलित-आदिवासी हस्तियों की उपेक्षा करना उचित नहीं

आजाद समाज पार्टी कांशीराम राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा ने शुक्रवार को कहा कि माननीय चौधरी चरण सिंह जी, पीवी नरसिम्हा राव जी एवम् एमएस स्वामीनाथन जी को भारतरत्न से सम्मानित किया गया। सरकार के इस फैसले का स्वागत है, देशवासियों शुभकामनाएं… लेकिन इस मामले में दलित-आदिवासी हस्तियों का तिरस्कार और उपेक्षा करना उचित नहीं।

प्रोफ़ेसर मीणा ने अपने X हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “हम प्रथम राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले, प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले, मान्यवर कांशीराम, संविधान निर्माता जयपाल सिंह मुंडा और धरती आबा बिरसा मुंडा जी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की मांग दोहराते हैं। मोदी सरकार इस ओर भी जरूर ध्यान दे। बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर को लंबे इंतजार के बाद भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उसके बाद दलित और आदिवासियों एवम् उपेक्षितों के हितों में उक्म सभी तसीहाओं का संघर्ष भी कोई कम नहीं है। उन्हें भी भारतरत्न से सम्मानित किया जाये।”
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