किसान आंदोलन 2.0 की वजह क्या है, आंदोलन पिछली बार से कैसे अलग है, MSP का लाभ किसानों को कैसे मिलता है?

7 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 13 जनवरी 2024 | जयपुर – दिल्ली – शंभू बॉर्डर : 13 फरवरी को सुबह होते ही 250 किसान संगठनों से जुड़े किसान दिल्ली कूच करने लगे। राजधानी में किसानों की एंट्री रोकने के लिए दिल्ली से लगे राज्यों के बॉर्डर सील कर दिए गए। सड़कों पर कीलें ठोंक दी गईं, कंक्रीट के बड़े-बड़े ब्रेकर और कंटीले तार लगा दिए गए। अस्थायी जेलें भी बनाई गईं, लेकिन ये सब कुछ जिस किसान आंदोलन को रोकने के लिए हो रहा है, उसकी मांगे और नेता दो साल पहले हुए किसान आंदोलन से अलग हैं।

किसान आंदोलन 2.0 की वजह क्या है

MIQu 300x210 किसान आंदोलन 2.0 की वजह क्या है, आंदोलन पिछली बार से कैसे अलग है, MSP का लाभ किसानों को कैसे मिलता है?सवाल 1: क्या इस बार आंदोलन करने वाले संगठन पिछली बार के किसान आंदोलन से अलग हैं?

जवाब: हां… इस बार आंदोलन का कॉल किसान मजदूर मोर्चा यानी KMM के बैनर तले दिया गया है। इसमें कुल 250 किसान संगठन शामिल हैं। आंदोलन में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के 150 किसान संगठन जबकि 100 से ज्यादा अन्य किसान संगठन शामिल हैं।

इस आंदोलन की शुरुआत पंजाब से हुई है। जबकि 2 साल पहले 2020-21 में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 500 से ज्यादा किसान संगठनों ने आंदोलन की शुरुआत की थी। 13 फरवरी को ‘दिल्ली चलो’ का नारा देने वाले किसान संगठनों का कहना है कि 2 साल पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों से जो वादे किए थे, उनके पूरा नहीं होने पर उन वादों को याद दिलाने के लिए इस आंदोलन का कॉल दिया गया है।

सवाल 2: क्या पिछली बार वाले किसान संगठनों के प्रमुख नेता इस बार भी आंदोलन का हिस्सा हैं?

जवाब: नहीं… पिछली बार आंदोलन का नेतृत्व करने वाला मुख्य किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा यानी SKM था। जबकि इस बार आंदोलन किसान मजदूर मोर्चा यानी KMM के बैनर तले हो रहा है।

पिछली बार आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कई बड़े किसान नेता भी इस बार आंदोलन में शामिल नहीं हैं। किसान मजदूर मोर्चा पिछले साल जनवरी में बना है। इस संगठन को पंजाब के किसान मजदूर संघर्ष समिति (KMSC) के संयोजक सरवन सिंह पंढेर ने बनाया है।

KMSC पिछले साल किसान आंदोलन में एक्टिव तरीके से शामिल नहीं था। इसने कुंडली में दिल्ली सीमा पर बाकी संगठनों से अलग एक मंच बनाया था। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद KMSC ने किसानों के बीच अपना जनाधार बढ़ाना शुरू किया।

इस आंदोलन में शामिल होने वाले दूसरे किसान संगठन का नाम संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) है। ये संगठन जुलाई 2022 में अपने मूल संगठन संयुक्त किसान मोर्चा यानी SKM से अलग होकर बना है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के समन्वयक भारतीय किसान यूनियन (BKU) सिधुपुर पंजाब के अध्यक्ष जगजीत सिंह दल्लेवाल हैं। मंगलवार 13 फरवरी को दिल्ली में एंट्री करने की कोशिश करते आंदोलनकारी किसान।

2.0 आंदोलन पिछली बार से कैसे अलग है

सवाल 3: इस बार किसान संगठनों की मांगें क्या हैं और पिछली बार से कैसे अलग हैं?
जवाब: इस बार का किसान आंदोलन 2020-21 में हुए आंदोलन से कई मायनों में अलग है। पिछली बार किसानों का आंदोलन कृषि कानूनों के खिलाफ था और वो इसमें सफल भी हुए थे क्योंकि सरकार ने इन कानूनों को वापस ले लिया था। हालांकि उस समय केंद्र सरकार ने MSP कानून का वादा किया था, लेकिन अब तक वे मांगे पूरी नहीं हुई हैं। इस बार 250 किसान संगठन 12 पॉइंट के एजेंडे के साथ आंदोलन कर रहे हैं…

1. स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर सभी फसलों पर MSP दिया जाए।

2. किसानों और मजदूरों की पूर्ण कर्ज माफी।  1707816453 किसान आंदोलन 2.0 की वजह क्या है, आंदोलन पिछली बार से कैसे अलग है, MSP का लाभ किसानों को कैसे मिलता है?

3. भूमि अधिग्रहण कानून 2013 दोबारा लागू किया जाए। इसमें जमीन लेने से पहले किसानों की लिखित सहमति और सरकारी दर से चार गुना मुआवजा दिया जाना शामिल है।

4. अक्टूबर 2021 में लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या करने वाले अपराधियों को कठोर सजा दी जाए।

5. भारत विश्व व्यापार संगठन यानी WTO से अलग हो। साथ ही WTO के साथ होने वाले किसान विरोधी समझौते रद्द किए जाएं।

6. सरकार किसानों और मजदूरों के लिए पेंशन की शुरुआत करे।

7. पिछली बार किसान आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के लिए मुआवजा और परिवार को नौकरी दी जाए।

8. बिजली संशोधन विधेयक 2020 खत्म किया जाए।

9. मनरेगा के तहत हर साल 100 के बजाय 200 दिन रोजगार की गारंटी दी जाए। साथ ही 700 रुपए की दैनिक मजदूरी तय हो।

10. नकली बीज, कीटनाशक और उर्वरक बनाने वाली कंपनियों पर सख्त एक्शन लिए जाएं।

11. मिर्च और हल्दी जैसे मसालों के लिए राष्ट्रीय आयोग बनाया जाए।

12. जल, जंगल और जमीन पर मूल निवासियों या आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित हो।

सवाल 4: सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत कहां अटकी?

जवाब: 12 फरवरी की देर शाम चंडीगढ़ में किसान नेताओं के साथ केंद्र सरकार के तीन मंत्री पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय की बातचीत शुरू हुई। करीब साढ़े 5 घंटे की चर्चा के बाद बातचीत रात करीब 11:30 बजे बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई।

इस बैठक में किसान नेताओं की दो मुख्य मांगों न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) गारंटी कानून और कर्ज माफी पर सहमति नहीं बन पाई। देर रात बैठक से बाहर आने के बाद KMM के संयोजक सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि सरकार हमारी मांगों पर सीरियस नहीं है। उसके मन में खोट है। वह सिर्फ टाइम पास करना चाहती है।

हम सरकार के प्रस्ताव पर विचार करेंगे, लेकिन कल सुबह दिल्ली कूच करने के ऐलान पर कायम हैं। उधर, किसानों को सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि बातचीत के जरिए हल निकलना चाहिए। कुछ ऐसे मामले हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए कमेटी बनाने की जरूरत है।

सवाल 5: क्या है MSP कानून?

M101 3 300x150 किसान आंदोलन 2.0 की वजह क्या है, आंदोलन पिछली बार से कैसे अलग है, MSP का लाभ किसानों को कैसे मिलता है?जवाब: MSP किसी कृषि उपज का न्यूनतम मूल्य यानी गारंटीड मूल्य है जो किसानों को उनकी फसल पर मिलता है। भले ही बाजार में उस फसल की कीमतें कम हों। इसके पीछे तर्क यह है कि बाजार में फसलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर किसानों पर न पड़े। उन्हें न्यूनतम कीमत मिलती रहे।

यह भी पढ़ें : किसानों पर ड्रोन से आंसू गैस के गोले दागे

सरकार हर फसल सीजन से पहले CACP यानी कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेस की सिफारिश पर MSP तय करती है। यदि किसी फसल की बंपर पैदावार हुई है तो उसकी बाजार में कीमत कम होती है, तब MSP उसके लिए फिक्स एश्योर्ड प्राइस का काम करती है। यह एक तरह से कीमतों में गिरावट पर किसानों को बचाने वाली बीमा पॉलिसी की तरह काम करती है।

सवाल 6: किसानों को MSP कानून की जरूरत क्यों है और इसकी मांग पहली बार कब हुई?

जवाब: देश के किसानों को MSP की जरूरत क्यों है, इस बात को जानने के लिए आजादी के बाद किसानों के हालात को समझना होगा।

1950 और 1960 के दशक की बात है। इस वक्त किसान परेशान थे। किसी फसल का बम्पर उत्पादन हो जाता था, तो उन्हें उसकी अच्छी कीमत नहीं मिल पाती थी। इस वजह से किसान आंदोलन करने लगे थे। लागत तक नहीं निकल पाती थी। ऐसे में फूड मैनेजमेंट एक बड़ा संकट बन गया था। किसानों के आंदोलन पर सरकार का कंट्रोल नहीं था।

1964 में एलके झा के नेतृत्व में फूड-ग्रेन्स प्राइस कमेटी बनाई गई। झा कमेटी के सुझावों पर ही 1965 में भारतीय खाद्य निगम यानी FCI की स्थापना हुई और एग्रीकल्चरल प्राइसेस कमीशन यानी APC बना। इन दोनों संस्थाओं का काम देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर कानून बनाने में मदद करना था। FCI वह एजेंसी है जो MSP पर अनाज खरीदती है। उसे अपने गोदामों में स्टोर करती है।

पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम यानी PDS के जरिए जनता तक अनाज को रियायती दरों पर पहुंचाती है। PDS के तहत देशभर में करीब पांच लाख उचित मूल्य दुकानें हैं जहां से लोगों को रियायती दरों पर अनाज बांटा जाता है। APC का नाम 1985 में बदलकर CAPC किया गया। यह कृषि वस्तुओं की कीमतों को तय करने की नीति बनाने में सरकार की मदद करती है।

सवाल 7: MSP का लाभ किसानों को कैसे मिलता है?

जवाब: अभी किसानों को सिर्फ 23 फसलों पर MSP दिया जाता है। MSP कानून लागू होने पर सभी फसलों पर सरकार MSP देने के लिए बाध्य हो जाएगी। साथ ही हर राज्यों में MSP पर फसलों की खरीदारी होने लगेगी।

इस वक्त MSP का सबसे ज्यादा लाभ पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों के किसान को मिलता है। इस कानून के लागू होते ही हर राज्य में MSP पर अनाजों की बिक्री होगी। 2 फरवरी 2024 को केंद्र सरकार ने कहा कि 2023-24 में 600 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान की खरीदारी हुई है। इससे 75 लाख किसानों को लाभ हुआ। सरकार ने MSP के जरिए 1.30 लाख करोड़ रुपए के खरीफ अनाज की खरीदारी की है।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This