सचिन पायलट के खुद कमान संभालने से मीणा-गुर्जर समुदायों की जातीय कड़वाहट दूर होगी, टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा विकास के मुद्दों पर होगा मतदान

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 11 अप्रैल 2024 | दिल्ली – जयपुर – टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा : चुनावी समीकरणों को समझने के लिए मूकनायक मीडिया के रिपोर्ट्स टोंक-सवाई माधोपुर पहुँचे। चुनावों को लेकर युवाओं के क्या विचार हैं, नई सरकार से उनकी क्या अपेक्षाएं हैं, इन्हीं बातों के साथ हमारी टीम ने दोपहर के सत्र में युवाओं से खास चर्चा की।

टोंक सवाई माधोपुर : संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का विवरण

MOOKNAYAKMEDIA Copy 18 Copy 300x195 सचिन पायलट के खुद कमान संभालने से मीणा गुर्जर समुदायों की जातीय कड़वाहट दूर होगी, टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा विकास के मुद्दों पर होगा मतदानटोंक सवाई माधोपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र राजस्थान राज्य के 25 लोकसभा (संसदीय) निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह सामान्य श्रेणी की संसद सीट है। इसमें संपूर्ण टोंक-सवाई माधोपुर जिले शामिल है। इसमें टोंक-सवाई माधोपुर सीट में गंगापुर, बामनवास, सवाईमाधोपुर, खंडार, मालपुरा, निवाई, टोंक, देवली-उनियारा सहित 8 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। भाजपा, कांग्रेस निर्वाचन क्षेत्र में मुख्य दल हैं। लोकसभा क्षेत्र की साक्षरता दर 54.14% है ।

राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर निर्वाचन क्षेत्र में आगामी 2024 के लोकसभा चुनावों ने ध्यान आकर्षित किया है। भारत के चुनाव आयोग द्वारा अभी तक सटीक तारीखों की पुष्टि नहीं की गई है। इस निर्वाचन क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और 2019 के चुनावों में 63.21% मतदान हुआ।

कांग्रेस पार्टी ने संसदीय सीट के लिए हरीश मीना को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। वर्तमान सांसद, भाजपा के सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने पिछला चुनाव 1,11,291 वोटों के महत्वपूर्ण अंतर से जीता था। तीसरी बार भी भाजपा ने जौनापुरिया पर विश्वास जताते हुए आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है।

  • टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट पर एससी मतदाताओं की संख्या लगभग 440,900 है जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 20.5% है।
  • टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट पर एसटी (मीणा) मतदाताओं की संख्या लगभग 409,994 है जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 16.9% है। वहीं गुर्जर मतदाताओं की संख्या लगभग 2 लाख 85 हजार है
  • इस लिए दोनों राजनीतिक दल कांग्रेस और बीजेपी ने जातीय समीकरणों को ध्यान में रख कर ही टिकट मीणा और गुर्जर समुदायों में दिये हैं।
  • टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 302,689 है जो मतदाता सूची विश्लेषण के अनुसार लगभग 12.5% ​​है।
  • टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट पर ग्रामीण मतदाताओं की संख्या लगभग 1,524,681 है जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 78.8% है।
  • टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट पर शहरी मतदाताओं की संख्या लगभग 410,193 है जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 21.2% है।
  • 2024 के संसदीय चुनाव के अनुसार टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट के कुल मतदाता – 21 लाख 33 हजार 692 है।
  • 2024 के संसदीय चुनाव के अनुसार टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट के मतदान केंद्रों की संख्या – 2072 है।
  • 2019 के संसदीय चुनाव में टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट पर मतदाताओं का मतदान – 63.1% रहा है।
  • 2014 विधानसभा चुनाव में टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट पर मतदान – 70.4% रहा है।

टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र की अगर बात की जाए तो पूर्व में टोंक जिले की विधानसभाएं इस संसदीय क्षेत्र में शामिल नहीं थी। पूर्व में सवाई माधोपुर जिला ही संसदीय क्षेत्र था। साल 2008 में परिसीमन होने के बाद टोंक जिले को इसमें शामिल किया गया और टोंक-सवाई माधोपुर संसदीय क्षेत्र के नाम से इसे जाना गया। पूर्व में यह सीट जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थी।

लेकिन अब यह सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। इस संसदीय क्षेत्र में भाजपा, कांग्रेस तथा स्वतंत्र पार्टी के सभी वर्ग के उम्मीदवारों ने अपनी जीत हासिल की है। टोंक को नवाबों की नगरी के नाम से जाना जाता है, तो दूसरी ओर सवाई माधोपुर जिले को विश्व में कौन नहीं जानता। विश्व का सुप्रसिद्ध रणथंभौर नेशनल पार्क यहां स्थित है, जिसके चलते देश ही नहीं विश्व भर में सवाई माधोपुर की एक बड़ी पहचान है।

वर्तमान में टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सुखबीर सिंह जौनापुरिया सांसद हैं। इस लोकसभा क्षेत्र से रहने वाले सांसद केंद्रीय मंत्री के पद पर भी काबिज रहे हैं। इनमें 2004 से 2014 तक सांसद रहने वाले कांग्रेस के नमोनारायण मीणा केंद्र में लगातार मंत्री रहे।

उससे पूर्व 1999 में भाजपा की जसकौर मीना भी केंद्रीय मंत्री रही। वर्तमान में भाजपा के सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया 2014 से लगातार दो बार सांसद बने। वहीं, पूर्व में केंद्रीय मंत्री रहे कांग्रेस के नमोनारायण मीणा के छोटे भाई हरीश मीणा जो कि वर्तमान में टोंक जिले के ही देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उन्हें इस लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उतारा गया है। टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र गुर्जर, मीणा तथा मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है।

ऐसे में परिसीमन होने के बाद भी भाजपा तथा कांग्रेस दोनों ही बड़ी पार्टियों ने इन्हीं जातियों में से अपना प्रत्याशी बनाया है। इस बार भी दोनों ही पार्टियों ने जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा से गुर्जर समाज से आने वाले सुखबीर सिंह जौनपुरिया तथा कांग्रेस पार्टी ने मीणा समुदाय से आने वाले हरीश मीणा पर अपना दांव खेला है।

एक नजर टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र के अब तक रहे सांसद  पर

  • 1957 से 62 तक जगन्नाथ पहाड़िया (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस) MOOKNAYAKMEDIA Copy 2 300x195 सचिन पायलट के खुद कमान संभालने से मीणा गुर्जर समुदायों की जातीय कड़वाहट दूर होगी, टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा विकास के मुद्दों पर होगा मतदान
  • 1962 से 67 तक केसर लाल (स्वतंत्र पार्टी)
  • 1967 से 71 तक मीठालाल मीना (स्वतंत्र पार्टी)
  • 1971 से 77 तक छुट्टनलाल मीना (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • 1977 से 80 तक मीठालाल मीना (जनता पार्टी)
  • 1980 से 84 तक रामकुमार मीना (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • 1984 से 89 तक रामकुमार मीना (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • 1989 से 91 तक किरोड़ीलाल मीना (भारतीय जनता पार्टी)
  • 1991 से 96 तक कुंजीलाल मीना (भारतीय जनता पार्टी)
  • 1996 से 98 तक उषा मीना (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • 1998 से 99 तक उषा मीना (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • 1999 से 04 तक जसकौर मीना (भारतीय जनता पार्टी)
  • 2004 से 2009 तक नमोनारायण मीना (कांग्रेस)
  • 2009 से 14 तक नमोनारायण मीणा (कांग्रेस)
  • 2014 से 19 तक सुखबीर सिंह जौनपुरिया (भाजपा)
  • 2019 से अब तक सुखबीर सिंह जौनपुरिया (भाजपा)

महज 347 वोटों से हारे थे बैंसला 

परिसीमन के बाद 2009 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में यह सीट देश में चर्चित रही क्योंकि इस सीट पर गुर्जर आंदोलन के नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को बीजेपी ने टिकट दिया था। हालांकि वो कांग्रेस के नमोनारायण मीणा से महज 347 वोटों से चुनाव हार गये थे।

सचिन पायलट के खुद कमान संभालने से मीणा-गुर्जर समुदायों की जातीय कड़वाहट दूर होगी

ऐसे में कांग्रेस ने इस सीट को कब्जाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। राजस्थान कांग्रेस के सबसे ताकतवर गुर्जर नेता सचिन पायलट ने इस सीट पर खुद कमान संभाल रखी है। ऐसे में इस बार कांग्रेस इस सीट पर कुछ नया प्रयोग करने की तैयारी में है। माना तो यह जा रहा है कि इस बार मीणा-गुर्जर समुदायों कि जातीय कड़वाहट दूर होगी और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर चुनाव रहेगा।

क्षेत्रीय चुनावी मुद्दे क्या हैं 

इस दौरान युवाओं ने कहा कि पेपर लीक के मुद्दे बहुत उठ रहे है। एक युवा ने कहा कि जैसे ही किसी भी सरकारी नौकरी की परीक्षा देकर बाहर निकलते हैं, हमें पता चलता है कि पेपर लीक हो गया। आप खुद सोचिये कि उस युवा पर क्या बीत रही होगी, किस तरह गरीब मां बाप अपने बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन पेपर लीक के बाद उनकी आशाएं मर जाती है।

  • शैक्षिक-दृष्टि से बेहद पिछड़ा हा इलाका
  • चंबल परियोजना को नहीं दे सके मूर्त रूप
  • रोजगार परक कोई कारखाना नहीं कर सके स्थापित

टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें चार विधानसभा क्षेत्र सवाई माधोपुर जिले के और चार टोंक जिले के विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट पर दोनों जिलों को मिलाकर कुल 21 लाख 20 हजार 633 मतदाता हैं, जिनमें 11 लाख 10 हजार 432 पुरुष मतदाता और 10 लाख 10 हजार 181 महिला मतदाता तथा 14 थर्ड जेण्डर मतदाता शामिल हैं।

टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र में 2072 पोलिंग बूथ है, जिनमें 373 शहरी व 1694 ग्रामीण पोलिंग बूथ शामिल है। लोकसभा सीट की आठ विधानसभा सीटों में से वर्तमान में चार पर भाजपा और चार पर कांग्रेस का कब्जा है। सवाई माधोपुर जिले की सवाई माधोपुर और खंडार विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है।

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सवाई माधोपुर से डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा व खंडार से जितेंद्र गोठवाल वर्तमान में विधायक हैं। वहीं, बामनवास व गंगापुरसिटी सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। बामनवास से कांग्रेस की इंदिरा मीणा व गंगापुरसिटी से कांग्रेस के रामकेश मीना विधायक हैं।

वहीं, टोंक जिले की चार विधानसभा सीटों की बात की जाए तो चार में से दो पर भाजपा व दो पर कांग्रेस का कब्जा है। टोंक विधानसभा सीट से कांग्रेस के सचिन पायलट व देवली उनियारा सीट पर हरीशचन्द्र मीणा विधायक हैं। जो अब कांग्रेस से लोकसभा के उम्मीदवार भी हैं।

वहीं, निवाई सीट से भाजपा के रामसहाय वर्मा तथा मालपुरा सीट से कन्हैयालाल चौधरी वर्तमान में विधायक हैं। टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा सीट दो जिलों में बटी हुई है। इस सीट पर विगत दो चुनावों से सुखबीर सिंह जौनपुरिया जीत दर्ज कर चुके हैं। जौनपुरिया ने साल 2014 के चुनावों में मोहम्मद अजरुद्दीन और 2019 के चुनावों में नमोनारायण मीणा को शिकस्त दी थी।

विकास के मुद्दों पर होगा मतदान

टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या बहुतायात में है। यह चुनाव पूरी तरह से जातिगत समीकरणों के आधार पर आधारित होता है। हालांकि, पिछले दो चुनाव की बात करें भाजपा को मोदी के नाम पर बंपर वोट अब तक मिलते चले आए हैं। लेकिन खासतौर से इस संसदीय क्षेत्र में जातिगत समीकरण विकास के मुद्दों पर पूरी तरह से हावी रहते हैं। अब देखना होगा कि लोकसभा चुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है।

ऐसे हैं जातिगत आंकड़े

टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट पर जातिगत आंकड़ों पर एक नजर डाले तो टोंक-सवाई माधोपुर संसदीय क्षेत्र में मीणा मतदाता लगभग चार लाख दस हजार, गुर्जर मतदाता लगभग दो लाख पिच्यासी हजार, एससी वर्ग के मतदाता लगभग साढ़े चार लाख, मुस्लिम मतदाता लगभग सवा दो लाख, ब्राह्मण मतदाता लगभग डेढ़ लाख, वैश्य समुदाय के डेढ़ लाख, माली एक लाख, राजपूत डेढ़ लाख तथा अन्य पिछड़ा क्षेत्र के मतदाता लगभग एक लाख हैं।

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