पिता खोने के बाद किसान मां के बेटे का UPSC में सिलेक्शन, मैकेनिक के बेटे ने कैसे पाई सफलता, कृषि वैज्ञानिक रामराज मीणा के बेटे का तीसरे प्रयास में हुआ चयन

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 17 अप्रैल 2024 | जयपुर – दिल्ली – संघ लोक सेवा आयोग : यूपीएससी ने आज सिविल सर्विस परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है। जयपुर से कई अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इनमें पुरुराज सिंह सोलंकी की 21वीं रैंक, विनायक कुमार की 180वीं रैक और हर्ष चौधरी ने 254वीं रैंक हासिल की है। विनायक कुमार के पिता भी आईएएस ऑफिसर हैं। जयपुर में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर हैं।

पिता खोने के बाद किसान मां के बेटे का UPSC में सिलेक्शन

यूपीएससी की इन परीक्षाओं में कुल 180 उम्मीदवार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के लिए चुने गये हैं। वहीं, 200 उम्मीदवार इंडियन पुलिस सर्विस यानी आईपीएस के लिए चुने गए। भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के लिए 37 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। इन परीक्षाओं के माध्यम से 613 उम्मीदवारों का चयन केंद्र सरकार के विभिन्न ग्रेड ए पदों पर हुआ है। 113 उम्मीदवार ग्रेड बी पद के लिए चुने गये हैं।

इन पदों पर होगी नियुक्तियां

SERVICES GEN EWS OBC SC ST Total
I.A.S. 73 17 49 27 14 180
I.F.S. 16 4 10 5 2 37
I.P.S. 80 20 55 32 13 200
Central Services Group A 258 64 160 86 45 613
Group B Services 47 10 29 15 12 113
Total 474 115 303 165 86 1143

यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा-2023 में कोटा के युवाओं ने भी काबयाबी हांसिल की। इनमें अदिति चौधरी को 389वीं, दिव्यांशपाल को 618वीं और सतपाल को 920वीं रैंक मिली है। इनसे इंटरव्यू में कोटा और यहां की कोचिंग से जुड़े सवाल पूछे गए।

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मैकेनिक के बेटे ने भी पाई सफलता

जयपुर के पास दूदू के मोखमपुरा गांव के रहने वाले दीपक चौधरी ने 775वीं रैंक हासिल की है। दीपक को छठे प्रयास में सिविल सर्विस परीक्षा पास की है। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग एमएटी यूनिवर्सिटी नोएडा से ग्रेजुएशन की है।

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जयपुर की दूदू तहसील के मोखमपुरा गांव के रहने वाले दीपक चौधरी

दीपक ने पॉलिटिकल साइंस से नेट-जेआरएफ 2023 में पहली रैंक हासिल की थी। दीपक के पिता ट्रक मैकेनिक का काम करते थे। उनका सन् 2000 में देहांत हो चुका है। मां गृहिणी हैं। दीपक अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और भाई को देते हैं।

कृषि वैज्ञानिक राम राज मीणा के बेटे का तीसरे प्रयास में हुआ चयन

सतपाल मीना का भी सिविल सेवा में चयन हुआ है। देश की कठिनतम मानी जाने वाली इस परीक्षा के िलए भी सतपाल ने कोई कोचिंग नहीं की। पूरे समय घर पर रहकर पढ़ाई की। उनकी 920वीं रैंक है। यह उनका तीसरा अटेंप्ट था। आईआईटी मंडी से बीटेक के बाद ही सिविल सेवा में जाने का मन बना लिया था। बड़े भाई एलेस रायपुर एम्स से एमबीबीएस कर रहे हैं।

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सतपाल मीना का भी सिविल सेवा में चयन हुआ

पिता रामराज मीना कृषि विश्वविद्यालय कोटा में सहायक आचार्य व मां सफेदीबाई गृहिणी हैं। सतपाल का कहना था कि बीटेक करने के बाद भी परिजनों ने नौकरी के लिए दबाव नहीं बनाया। मेरा सपना साकार करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे।

योगेश कुमार मीणा आईएएस में एसटी टॉपर

आईएएस परीक्षा में राजस्थान से आदिवासी मीणा समाज के युवाओं ने हमेशा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस बार योगेश कुमार मीणा ने आल इंडिया रैंक 66 हासिल की है। वे एसटी वर्ग में इंडिया में टॉपर रहे हैं।

साथ राजस्थान से आदिवासी मीणा समाज के 32 होनहारों ने किया नाम रोशन  किया है जो कि निम्न हैं;

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वहीं, 21वीं रैंक हासिल करने वाले पुरुराज सिंह के पिता बिजली बोर्ड में इंजीनियर (एक्सईएन) हैं। 73वीं रैंक हासिल करने वाली कृष्णा जोशी के पिता सरकारी वकील हैं। विनायक कुमार ने इसी साल जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से MBBS पास की है।

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21वीं रैंक हासिल करने वाले पुरुराज सिंह सोलंकी।

आईटीआईटी बॉम्बे से की इंजीनियरिंग

21वीं रैंक हासिल करने वाले पुरुराज सिंह सोलंकी ने साल 2021 से बॉम्बे आईआईटी से कैमिकल इंजीनियरिंग की है। उनका डॉ. रेड्‌डीज कंपनी में अच्छे पैकेज पर प्लेसमेंट भी हुआ, लेकिन सोलंकी ने जॉब जॉइन नहीं की। उन्होंने लगातार दो बार यूपीएससी का एग्जाम फाइट किया और सलेक्ट हुए। सोलंकी के पिता जयपुर विद्युत प्रसारण निगम लि. में एक्सईएन है, जबकि माता सरकारी टीचर हैं। वर्तमान में बगरू के छितरौली में राजकीय स्कूल में पढ़ाती है।

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जयपुर के मांग्यावास के रहने वाले हर्ष चौधरी।

हर्ष चौधरी की 254वीं रैंक

जयपुर के मांग्यावास के रहने वाले हर्ष चौधरी पुत्र दीनदयाल चौधरी ने भी यूपीएससी में 254वीं रैंक हासिल की है। हर्ष 2021 की परीक्षा में भी यूपीएससी पास कर कर चुके थे, उस समय उनकी रैंक 528वीं थी और वे वर्तमान में सूचना एवं प्रसारण विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर है।

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जयपुर के वेदिका बिहाणी ने ऑल इंडिया 396 रैंक हासिल की है।

वेदिका बिहाणी ने ऑल इंडिया 396 रैंक हासिल की

जयपुर के वेदिका बिहाणी ने ऑल इंडिया 396 रैंक हासिल की है। वेदिका बिहाणी के पिता मधुसूदन बिहाणी माहेश्वरी समाज सोसायटी की एजुकेशन कमेटी के महासचिव शिक्षा हैं। ताऊ जयदीप बिहाणी गंगानगर से विधायक हैं। वे फिलहाल पुलिस अकादमी हैदराबाद में आईपीएस की ट्रेनिंग कर रही है। दरअसल, उन्हें 2022 में 213 रैंक मिली थी।

cover 03 1713274532 पिता खोने के बाद किसान मां के बेटे का UPSC में सिलेक्शन, मैकेनिक के बेटे ने कैसे पाई सफलता, कृषि वैज्ञानिक रामराज मीणा के बेटे का तीसरे प्रयास में हुआ चयन

बाड़मेर के मोहनलाल जाखड़ ने 53वीं और अक्षय डोसी ने 75वीं रैंक हासिल की है। बीकानेर की खुशहाली सोलंकी को 61वीं और जोधपुर की कृष्णा जोशी को 73वीं रैंक मिली है। नागौर की मृणालिका राठौड़ ने 125वीं और शिवांक चौधरी ने 530वीं रैंक हासिल की है।

बालोतरा के विजय राघव गोयल की 229वीं और झुंझुनूं के सचिन राहर को 291वीं रैंक मिली है। सीकर के हेड कॉन्स्टेबल के बेटे मोहन मंगावा की 551वीं रैंक आई है। अजमेर के अभिमन्यु सिंह को 673वीं रैंक मिली है। दूदू के किसान मां के बेटे दीपक चौधरी ने 755वीं रैंक हासिल की है। बाड़मेर कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोपाराम मेघवाल के बेटे पूरण मेघवाल की 885वीं रैंक रही।

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दूदू जिले के दीपक चौधरी ने 755वीं रैंक हासिल की है।

मां-भाई ने खेतों में बहाया पसीना, बेटा बनेगा अफसर

दूदू जिले के मोखमपुरा गांव के रहने वाले 29 वर्षीय दीपक चौधरी (755वीं रैंक) को छठे प्रयास में सफलता मिली है। उन्होंने एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। दीपक ने पॉलिटिकल साइंस से नेट-जेआरएफ-2023 में पहली रैंक हासिल की थी।

दीपक के पिता खेमचंद चौधरी ट्रक मैकेनिक थे। वर्ष 2000 में उनका देहांत हो गया। उस वक्त दीपक की उम्र महज 5 साल थी। इसके बाद उनकी मां भोली देवी और बड़े भाई दीनदयाल चौधरी ने खेती-बाड़ी कर दीपक को पढ़ाया-लिखाया। दीपक ने सफलता का श्रेय मां और बड़े भाई को दिया है।

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मोहनलाल जाखड़ ने 53वीं रैंक हासिल की है। वे फिलहाल हैदाराबाद में जॉब कर रहे हैं।

एक महीने पहले ही ICAR में जॉइन की जॉब

मोहनलाल जाखड़ (53वीं रैंक) बाड़मेर के भाखड़ा गांव के रहने वाले हैं। वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) हैदराबाद में जॉब कर रहे हैं। मोहनलाल ने बताया- मेरी प्रारंभिक शिक्षा बाड़मेर में हुई है। 2020 में IIT खड़गपुर से बीटेक किया। एक महीने पहले ही जॉब जॉइन की है।

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बाड़मेर के चौहटन निवासी अक्षय डोसी की 75वीं रैंक आई है।

5वें प्रयास में मिली सफलता

अक्षय डोसी (75वीं रैंक) बाड़मेर के चौहटन के रहने वाले हैं। उनके पिता महेश डोसी ने बताया- बेटे ने 5वें प्रयास में यूपीएससी क्रैक किया। अक्षय 2016 में आईआईटी खड़गपुर से पासआउट है। दो महीने पहले ही उसने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (आईएफएस)-2023 का इंटरव्यू दिया था, लेकिन सिलेक्शन नहीं हुआ।

अक्षय की आरएएस एग्जाम-2023 में भी 165वीं रैंक आई थी। अक्षय ने 10वीं तक की पढ़ाई बाल विद्या मंदिर में की थी। फिलहाल अक्षय दिल्ली में है। मेरा छोटा बेटा शुभम जयपुर में आरएएस एग्जाम की तैयारी कर रहा है।

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झुंझुनूं के सचिन राहर ने चौथे प्रयास में यूपीएससी एग्जाम में सफलता हासिल की।

झुंझुनूं के सचिन राहर को मिली 291वीं रैंक

झुंझुनूं के 26 वर्षीय सचिन राहर (291वीं रैंक) को चौथी बार में सिविल सर्विसेज एग्जाम में सफलता मिली है। सचिन के पिता शुभकरण राहर जिला परिषद झुंझुनूं में अधिशाषी अभियंता हैं। माता सावित्री देवी अध्यापिका हैं। सचिन अपने पिता को रोल मॉडल मानते हैं। बड़े भाई डॉ. संजीव राहर का भी मार्गदर्शन रहा। सचिन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है। लोहिया कॉलेज से भूगोल में एमए किया है।

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ये पूरण मेघवाल हैं, जिन्होंने 885वीं रैंक हासिल की है।

5 साल दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी की

885वीं रैंक हासिल करने वाले पूरण मेघवाल बाड़मेर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोपाराम मेघवाल के बेटे हैं। फिलहाल पूरण दिल्ली में हैं। पूरण ने 5 साल से दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। चार बार प्री एग्जाम भी पास किया। दूसरी बार इंटरव्यू में मेरा सिलेक्शन हुआ। मेरी प्राइमरी शिक्षा पचपदरा में हुई है। मैंने जोधपुर के जीत कॉलेज से बीटेक किया है। समाज सेवा का भाव लेकर मैंने यूपीएससी को चुना। मेरा परिवार राजनीति में रहकर समाज की सेवा कर रहा है।

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पिता गोपाराम मेघवाल और मां के साथ पूरण। (फाइल फोटो)

बेहतर करने की सोच से मिली कामयाबी

सीकर में खंडेला के बस्सी गांव के रहने वाले मोहन मंगावा ने 551वीं रैंक हासिल की है। मोहन के पिता हरलाल मंगावा राजस्थान पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं। वे नागौर विधायक हरेंद्र मिर्धा की सुरक्षा में रह चुके हैं। मोहन की मां धापू देवी गृहिणी हैं।

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सीकर के मोहन मंगावा ने 551वीं रैंक हासिल की है।

मोहन ने बताया- जीवन में वर्तमान से बेहतर करने की सोच रखते हुए किसी काम को करना चाहिए। मैंने दसवीं तक की पढ़ाई श्रीमाधोपुर में की। इसके बाद पढ़ने के लिए जयपुर चला गया। वहां रहकर 12वीं की पढ़ाई की। 2019 में भारतीय नौसेना में टेक्निकल ऑफिसर की पोस्ट पर नौकरी लगी।

एक साल तक जामनगर (गुजरात) में नौकरी भी की। नौकरी करने के दौरान मन में ख्याल आया कि क्यों न इससे बेहतर नौकरी की जाए। 2020 में जॉब छोड़ दी। फिर घर पर ही यूपीएससी की तैयारी करना शुरू कर दिया। रोजाना करीब 8 से 9 घंटे तक पढ़ाई की।

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बालोतरा के विजय राघव गोयल ने 229वीं रैंक हासिल की है।

बालोतरा के विजय राघव की 229वीं रैंक

बालोतरा जिले के विजय राघव गोयल ने 229वीं रैंक हासिल की है। विजय की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। विजय के घर में जश्न मनाया जा रहा है। पिता जय प्रकाश गोयल बेटे की कामयाबी से बहुत खुश हैं।

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जोधपुर की कृष्णा जोशी। इन्होंने 73वीं रैंक हासिल करने में सफलता पाई।

वकील की बेटी कृष्णा की 73वीं रैंक

जोधपुर की कृष्णा जोशी (73वीं रैंक) सरकारी वकील अनिल जोशी की बेटी हैं। रिजल्ट आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। पिता ने बेटी का मुंह मीठा कराया।

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नागौर के शिवांक चौधरी की 530वीं रैंक आई है।

निरंतरता रही सफलता की चाबी

नागौर में जाट कॉलोनी निवासी शिवांक चौधरी (530वीं रैंक) के पिता नवीन गोदारा ठेकेदार हैं। मां ममता गोदारा गृहिणी हैं। बहन वैष्णवी 12वीं कक्षा में पढ़ती है। शिवांक ने बताया- यूपीएससी की तैयारी में निरंतरता का सबसे अहम योगदान रहा।

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अभिमन्यु सिंह को 673वीं रैंक मिली

यह भी पढ़ें : UPSC 2023 में आदित्य श्रीवास्तव ने ऑल इंडिया एवम् योगेश कुमार मीणा आईएएस में एसटी टॉपर

IFS अभिमन्यु की 673वीं रैंक

अजमेर के अभिमन्यु सिंह (673वीं रैंक) ने इससे पहले भारतीय वन सेवा (आईएफएस) 2022 में 29वीं रैंक हासिल की थी। वे अभी देहरादून में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनके पिता अरविंद कुमार सांगवा प्रशासनिक अधिकारी (आरएएस) हैं।

इंटरव्यू में पूछा… कोटा में कलेक्टर बने तो सुसाइड रोकने को क्या करोगे

श्रीनाथपुरम में रहने वाले दिव्यांशपाल नागर को 618वीं रैंक मिली है। इस बार उनका पांचवा प्रयास था। इसके पहले तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचे थे। इस बार इंटरव्यू भी क्लीयर कर लिया। इंटरव्यू में उनसे कोटा में सुसाइड को लेकर सवाल किया गया।

उनसे पूछा कि कलेक्टर बन गए तो सुसाइड रोकने के लिए क्या करोगे? उनका जवाब था कि सबसे पहले मेंटल हेल्थ को लेकर काम करेंगे। यहां के लोग लोकल गार्जियन की भूमिका में रहें, ताकि उनसे इमोशनली कनेक्ट हों। साथ ही साप्ताहिक सेशन भी कम किए जा सकते हैं।

अदिति से पूछा- कोटा को लेकर नकारात्मकता क्यों, जवाब- यहां की कोचिंग में पॉजिटीविटी भी

389वीं रैंक पर रहीं रिद्धि-सिद्धि नगर निवासी आदिति चौधरी ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक किया हैै। इस बार उनका तीसरा अटेंप्ट था। पहले दो बार प्री हो गया था, लेकिन मैन आैर इंटरव्यू मेंे नहीं पहुंच पाईं। इंटरव्यू में उनसे सवाल था कि कोटा कोचिंग के प्रति नकारात्मकता अधिक है।

इस पर अदिति का कहना था कि यहां की कोचिंग में पॉजीटिविटी भी है। मेरे ऐसे दोस्त थे जिनका बाहर चयन नहीं हुआ। यहां रहकर हो सका। यहां का अच्छा पक्ष कोई कवर नहीं कर रहा। नकारात्मक पक्ष जल्दी हाइलाइट हो जाता है।

आदिति से बोर्ड ने पूछा कि कोटा कोचिंग किस तरह स्थापित हुई। उनका जवाब था कि पहले यहां जेके फैक्ट्री थी जो बंद हो गई। इसके बाद वीके बंसल ने कुछ बच्चांे के साथ ही कोचिंग शुरू कर दी। इसके बाद देशभर से आईआईटियन को हायर कर लिया।

उनसे पूछा- इंजीनियरिंग कर ली है। इसमें पैसा अधिक है। फिर कलेक्टर क्यों बनना चाहती हो? इस पर जवाब था कि ब्यूरोक्रेटस से ही लोकतंत्र अच्छा चल रहा है। इकॉनोमी उनके दम बेहतर हो सकती है। कोटा में कोचिंग के अलावा क्या प्रसिद्ध है? चंबल फर्टिलाइजर्स, थर्मल कोटा स्टोन, कोटा डोरिया उन्होंने बताया। उनके पिता आरके चौधरी थर्मल मंे इंजीनियर हैं। मां कविता चौधरी गृहणी हैं।

बीटेक के बाद 10 लाख का जॉब ऑफर था, हिंदी से पासआउट 

दिव्यांश पाल हिंदी मीडियम के मां भारती स्कूल से पास आउट हैं। आईआईटी कानपुर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक आैर एमटेक की। इसके बाद 10 लाख रुपए का पैकेज िमला। लेकिन सपना आईएएस बनने का था तो तैयारी करने लगे। कुछ समय दिल्ली रहे।

बाद में कोटा आ गये। यहां घर रहकर पढ़ाई की। चार बार असफल होने के बावजूद निराश हुए। पिता राजेंद्रपाल नागर प्रदूषण बोर्ड में क्षेत्रीय वैज्ञानिक व मां गिर्राज नागर गृहिणी हैं। एक भाई मनीषपाल एएआे हैं। ​वे मूलत: जिले के सावन भादांे गांव के रहने वाले हैं।

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