‘ब्राह्मणवाद मुसलमानों का नहीं, हिंदू बहुजन समाज का दुश्मन है’ संघियों के अधिकांश दामाद मुस्लिम हैं

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो || अक्टूबर 04, 2020 || जयपुर : हिंदू के नाम पर राजीनीति करने वाले संगठन यह कहते नहीं थकते कि हिंदू उदार होते हैं। बाबा साहब इस पाखंड को नहीं मानते। उनकी राय में, मौका मिलने पर वे बेहद अनुदार हो जाते हैं और अगर वे किसी खास मौके पर उदार नजर आते हैं, तो इसकी वजह यह होती है कि या तो वे इतने कमजोर होते हैं कि विरोध नहीं कर सकते या फिर वे विरोध करने की जरूरत महसूस नहीं करते। बाबा साहेब ‘एनिहिलेशन ऑफ कास्ट’ में गैर हिंदुओं के जातिवाद की भी चर्चा करते हैं, लेकिन इसे वे हिंदुओं के जातिवाद से अलग मानते हैं। वे लिखते हैं कि गैर हिंदुओं के जातिवाद को धार्मिक मान्यता नहीं है। लेकिन हिंदुओं के जातिवाद को धार्मिक मान्यता है। गैर हिंदुओं का जातिवाद एक सामाजिक व्यवहार है, कोई पवित्र विचार नहीं है। उन्होंने जाति को पैदा नहीं किया। अगर हिंदू अपनी जाति को छोड़ने की कोशिश करेगा, तो उनका धर्म उसे ऐसा करने नहीं देगा। वे हिंदुओं से कहते हैं कि इस भ्रम में न रहें कि दूसरे धर्मों में भी जातिवाद है। वे हिंदू श्रेष्ठता के राधाकृष्णन के तर्क को खारिज करते हुए कहते हैं कि हिंदू धर्म बेशक टिका रहा, लेकिन उसका जीवन लगातार हारने की कहानी है। वे कहते हैं कि अगर आप जाति के बुनियाद पर कुछ भी खड़ा करने की कोशिश करेंगे, तो उसमें दरार आना तय है। अपने न दिए गए भाषण के आखिरी हिस्से में बाबा साहेब बताते हैं कि हिंदू व्यक्ति जाति को इसलिए नहीं मानता कि वह अमानवीय है या उसका दिमाग खराब है। वह जाति को इसलिए मानता है कि वह बेहद धार्मिक है। जाति को मान कर वे गलती नहीं कर रहे हैं। उनके धर्म ने उन्हें यही सिखाया है। उनका धर्म गलत है, जहाँ से जाति का विचार आता है। इसलिए अगर कोई हिंदू जाति से लड़ना चाहता है तो उसे अपने धार्मिक ग्रंथों से टकराना होगा। बाबा साहब भारत के मरीज को उपचार बताते हैं कि शास्त्रों और वेदों की सत्ता को नष्ट करो। यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि शास्त्रों का मतलब वह नहीं है, जो लोग समझ रहे हैं। दरअसल शास्त्रों का वही मतलब है जो लोग समझ रहे हैं और जिस पर वे अमल कर रहे हैं। क्या आरएसएस हिंदू धर्म शास्त्रों और वेदों को नष्ट करने और ‘एनिहिलेशन ऑफ कास्ट’, ‘मैं हिंदू क्यों नहीं हूँ’ एवं ‘वीजा का इंतजार’ को अपना बीज-शास्त्र मानने के लिए तैयार है? मुझे शक है। इस भाषण में वे पहली बार बताते हैं कि वे हिंदू बने रहना नहीं चाहते। आरएसएस को बाबा साहेब को अपनाने का पाखंड करते हुए, यह सब ध्यान में रखना होगा। क्या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ बाबा साहेब को अपना सकता है? बेशक। लेकिन ऐसा करने के बाद फिर वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं रह जाएगा। ब्राह्मणवाद मुसलमानों का नही हिंदू बहुजन समाज का दुश्मन है। दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी, गांधी आदि मुसलमान नहीं थे। फिर उन्हें ब्राह्मणवाद ने क्यों मारा ? संत तुकाराम, शिवाजी महाराज, मुसलमान नहीं थे फिर इन्हें क्यों मारा ? महात्मा फुले, शाहू जी महाराज, बाबासाहब अंबेडकर आदि भी मुसलमान नहीं थे इन्हें क्यों मारा? सावित्री माँ फुले भी मुसलमान नहीं थी फिर उनके शरीर पर गोबर किचड क्यों डाला गया ? भारत के मुसलमानों का इतिहास गवाह है वे ब्राह्मणों से ज्यादा मानवतावादी है! वे ज्यादातर मौकों पर सत्य का साथ देते आये है । जब भी ब्राह्मणवाद किसी हिंदू (दलित, शुद्र ) पर जुल्म करता मुस्लमान ज्यादा तत्परता से फौरन उनकी मदद करने पहुंच जाते हैं। मुसलमान हिंदूओं को ब्राह्मण का गुलाम या दास बनाने में ब्राह्मणों की मदद करो वो आपको दामाद बनायेंगे। शर्त यह है कि आप महात्मा फुले जी को स्कूल डालने वाले गफ्फार मुन्शी बेग, महात्मा फुले – सावित्री माँ फुले को उनके पिताजी गोविंद राव ने ब्राह्मणों के डर से अपने घर से बाहर निकल दिया था तब उन्हें अपने घर में रखने वाले भाई-बहन उस्मान शेख और फातिमा शेख ना बने । बाबासाहब अंबेडकर जी को महाड के तालाब के आंदोलन के लिए कोई जगह नहीं दे रहा था तब ब्राह्मणों से दुश्मनी मोल लेकर आंदोलन के लिए जगह देने वाला फतेहखान ना बने । लिखने को हजारों साल का इतिहास है ब्राह्मणवाद के जुल्म का’ लेकिन शॉर्टकट में बता दू आरएसएस वाले आज भी आप को सर आँखों पर रखने को तैयार है, दामाद बनाने को तैयार है, सिर्फ आप इंडिया से मुहब्बत करना छोड़ दो, आदमी-आदमी के बीच नफ़रत पनपाने को तैयार हो जाओ। भारतीयों से मुहब्बत करना छोड़दो, बहुजन हिंदूओं को अपना भाई कहना छोड़दो, परेशानी मुसलमानों से नहीं है इस्लाम की शिक्षा से है, कि मुसलमान वर्णवाद को कमतर मानते हैं । ब्राह्मणवाद जिसे शुद्र, दलित कहकर उसे छुना भी पसंद नहीं करता तुम मुसलमान उस दलित, शुद्र भाई के साथ एक थाली में खाना खाते हो।’ मुसलमानों आप पर जुल्म इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि आप मुसलमान हो, बल्कि इसलिए हो रहा है ताकि आप इतना डर जाये कि दोबारा बहुजन हिंदू भाईयों की मदद करने की सपने में भी ना सोंचे । अगर ब्राह्मणों को मुसलमानों से सच्ची नफरत होती तो मुझे बताओं 800 साल भारत मे मुगलों (बाहेर के मुगल वंश के मुसलमान) की हुकुमत थी तब कभी ब्राह्मणों ने मुगलों से बगावत नहीं की। क्यों .? इतना ही नहीं बगावत तो बिल्कुल भी नहीं बल्कि सारे प्रधानमंत्री ब्राह्मण ही हुआ करते थे और हिंदूओं से टैक्स वसुल कर मुगलों को देते थे। भारतीय मुसलमानों की दिक्कत तुमसे नहीं तुम्हारे भारतीय हिंदू पर होने वाले अन्याय के खिलाफ के संघर्ष से है ।

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