लोकसभा चुनाव 2024 में 2019 के मुकाबले 90% सीटों पर मतदान घटा, मतदान कम होने से किसे ज्यादा नुकसान होगा ‘एनडीए या इंडिया’

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 28 अप्रैल 2024 | जयपुर – दिल्ली – लोकसभा चुनाव : 2024 के लोकसभा चुनाव ने एक-तिहाई रास्ता तय कर लिया है। कुल 543 सीटों में से 190 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। 19 अप्रैल को पहले चरण में 102 सीटों पर वोटिंग हुई। इनमें औसत मतदान 65.5% रहा, जो 2019 में इन्हीं सीटों के औसत वोटर टर्नआउट से 4.4% कम है। वहीं, 26 अप्रैल को दूसरे चरण में 88 सीटों पर 61% वोटिंग हुई, जो 2019 के मुकाबले 7% कम है। दोनों चरण में इस बार मतदान घटने का ट्रेंड साफ तौर पर दिख रहा है।

लोकसभा चुनाव 2024 में 2019 के मुकाबले 90% सीटों पर मतदान घटा

MOOKNAYAKMEDIA 52 300x195 लोकसभा चुनाव 2024 में 2019 के मुकाबले 90% सीटों पर मतदान घटा, मतदान कम होने से किसे ज्यादा नुकसान होगा एनडीए या इंडिया2024 में मतदान प्रतिशत तो घटा, लेकिन इसका पैटर्न क्या है?
पहले फेज में 17 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 102 सीटों पर वोटिंग हुई। इनमें 40 सीटों पर बीजेपी, 15 पर कांग्रेस और 47 सीटों पर अन्य सांसद हैं। पहले फेज में बीजेपी ने 77 और कांग्रेस ने 56 उम्मीदवार उतारे थे। 2024 में 102 में से 93 सीटों पर मतदान घटा, जबकि 9 सीटों पर बढ़ा। जिन 10 सीटों पर वोटर टर्नआउट में सबसे ज्यादा कमी आई, उनमें 8 सीटों पर बीजेपी के सांसद हैं।

दूसरे फेज में 12 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश की 88 सीटों पर मतदान हुआ। इनमें 52 सीटों पर बीजेपी और 18 पर कांग्रेस सांसद हैं। दूसरे फेज में 70 सीटों पर बीजेपी और 67 पर कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारे हैं। दूसरे फेज की 88 में से 77 सीटों पर वोटिंग में कमी आई, जबकि 10 सीटों पर वोटिंग बढ़ी है। जिन 10 सीटों पर वोटर टर्नआउट में सबसे ज्यादा कमी आई, उनमें 5 सीटों पर बीजेपी और 4 पर कांग्रेस के सांसद हैं।

दोनों चरणों में 190 सीटों पर वोटिंग हुई। इनमें 76 सीटें ऐसी हैं, जहां वोटर टर्नआउट में 5% से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। इन 76 सीटों में 42 सीटें फिलहाल बीजेपी के पास हैं। यानी 2024 में सबसे ज्यादा बीजेपी की सीटों पर वोटिंग प्रतिशत घटा है।

2024 में 2019 के मुकाबले वोटिंग कम होने की क्या वजह हो सकती है? इसके लिए हमने कई पॉलिटिकल एक्सपर्ट, चुनावी विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकारों से बात की। वोटिंग कम होने की कोई एक स्पष्ट वजह नहीं है। इसके पीछे 7 संभावित फैक्टर हो सकते हैं…

1. देश के कई हिस्सों में औसत तामपान सामान्य से 4-6 डिग्री ज्यादा

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अप्रैल-जून के दौरान भीषण गर्मी का अलर्ट जारी किया है। देश के कई हिस्सों में औसत तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में भी रिकॉर्ड गर्मी पड़ रही है।

पूरे अप्रैल-जून में 4 से 8 दिनों के सामान्य के मुकाबले 10 से 20 दिन लू चलने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश के मुताबिक, अधिक गर्मी होने की वजह से वोटर्स घर से बाहर निकलने से बचते हैं। हालांकि टेम्प्रेचर और वोटर टर्नआउट का कोई सीधा संबध नही हैं। IMD के मुताबिक, चुनावों के दौरान हीट वेब्स वाले दिन सामान्य से ज्यादा होंगे।

2. 19 और 26 अप्रैल को शादियों का मुहूर्त था

चुनाव आयोग ने ठीक से होमवर्क नहीं किया और आयोग की उदासीनता के कारण ही शादियों का आंकलन नहीं किया जबकि शादी-विवाह कि दृष्टि से अप्रैल का महीना काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद विवाह कार्यक्रमों पर 2 महीने के लिए ब्रेक लग जाएगा। पहले फेज की वोटिंग की दोनों तारीख 19 और 26 अप्रैल को शादी का शुभ मुहूर्त था।

ऐसे में देशभर में जमकर शादियां हुई। इसका मतदान पर भी असर पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर देखें तो फेज-2 में वोटिंग के दिन मध्यप्रदेश की महज 6 लोकसभा सीटों पर साढ़े तीन हजार से अधिक शादियां हुई। इसमें लाखों बाराती शामिल होते हैं। पहले चरण की वोटिंग में जम्मू-कश्मीर की ऊधमपुर सीट पर एक नवविवाहित जोड़े ने मतदान किया।

3. अति-आत्मविश्वास में वोट देने नहीं निकल रहे बीजेपी वोटर्स

पॉलिटिकल एक्सपर्ट हर्षवर्धन का कहना है कि पिछले दस साल की मोदी सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी जैसा फैक्टर नहीं दिख रहा। इस वजह से हो सकता है कि बीजेपी के कार्यकर्ता और मतदाताओं ने चुनाव को जीता हुआ मान लिया हो।

4. ‘अबकी बार 400 पार’ फैक्टर से वोटर्स उदासीन

2024 लोकसभा चुनाव की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने 400 पार का नारा दिया। हर्षवर्धन का कहना है कि हो सकता है ‘अबकी बार 400 पार’ फैक्टर ने विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का उत्साह कम कर दिया हो। उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी की वापसी हो रही है, हमें ज्यादा जद्दोजहद करने की जरूरत नहीं है।

5. शहरी लोगों में पॉलिटिकल लीडर्स को लेकर उदासीनता

चुनाव के शुरुआती फेज में चेन्नई, गाजियाबाद जैसी शहरी सीटों के वोर्टर्स में उदासीनता साफ तौर पर देखने को मिली है। इन सीटों पर मतदान कम हुआ है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अमिताभ तिवारी के मुताबिक, अर्बन इलाकों के लोगों ने मान लिया है कि सांसद और अन्य पॉलिटिकल लीडर्स उनके लिए कुछ नहीं कर पाएंगे। उनके मन में है कि अगर नेता समस्या सुलझा ही नहीं पा रहे हैं तो वोट देने क्यों जाए। शहरी लोगों का मतदान में दिलचस्पी कम होना भी वोटिंग प्रतिशत कम होने का बड़ा कारण हो सकता है।

6. स्थानीय मुद्दों को लेकर नाराजगी में वोटिंग से दूरी बनाई

हर चुनाव की तरह इस चुनाव में भी नेशनल मुद्दों और बड़े नेताओं के नाम के अलावा स्थानीय मुद्दे और जातीय समीकरण भी हावी है। पहले फेज में नगालैंड में हुई वोटिंग में 6 जिलों में एक भी वोट नहीं डाला गया। दरअसल, सीमांत नगालैंड क्षेत्र की मांग को लेकर एक स्थानीय संगठन ने बंद की घोषणा की थी। इसके चलते के क्षेत्र के 20 विधायकों समेत लगभग 4 लाख मतदाताओं ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

इसके अलावा पश्चिमी यूपी, राजस्थान समेत हिंदी पट्टी के कुछ इलाकों में जाट और राजपूत समाज में नाराजगी है। साथ ही लोकल कैंडिडेट्स के खिलाफ स्थानीय स्तर पर एंटी-इनकंबेंसी और विरोध भी है। अमिताभ तिवारी के मुताबिक, कैंडिडेट्स ने डोर टू डोर प्रचार करना भी कम कर दिया है। लोग कह रहे हैं कि हमारे पास कोई वोट ही नहीं मांगने आ रहा है तो देने क्या जाए। बड़े नेताओं के साथ-साथ उम्मीदवार तक डोर टू डोर प्रचार करने के बजाय रोड-शो को तरजीह दे रहे हैं।

7. चुनाव आयोग के प्रति कम हुआ भरोसा

CSDS-लोकनीति के प्री-पोल सर्वे में पता चला है कि 2019 के पोस्ट-पोल सर्वे के बाद से अब वोटर्स में इलेक्शन कमीशन के प्रति भरोसा कम हुआ है। 2019 के पोस्ट-पोल सर्वे में आधे से ज्यादा वोटर्स ने आयोग पर भरोसा जताया था, जो 2024 में 24% पर सिमट गया है। जबकि आयोग पर भरोसे के सवाल पर 14% लोगों ने ‘ज्यादा भरोसा नहीं’ और 9% लोगों ने ‘बिल्कुल भरोसा नहीं’ का ऑप्शन चुना।

सर्वे और एग्जिट पोल कराने वाली संस्था सी-वोटर के प्रमुख यशवंत देशमुख का मानना है कि गर्मी, बीजेपी वोटर का अति-आत्मविश्वास या विपक्ष के वोटर की हताशा कोई भी वजह हो सकती है। या हो सकता है कि ये सभी फैक्टर मिलकर काम कर रहे हों।

मतदान कम होने से किसे ज्यादा नुकसान होगा ‘एनडीए या इंडिया’

images 5 लोकसभा चुनाव 2024 में 2019 के मुकाबले 90% सीटों पर मतदान घटा, मतदान कम होने से किसे ज्यादा नुकसान होगा एनडीए या इंडियाचुनावी इतिहास में ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है, जिससे साफ पता लगे कि वोटिंग घटने से सत्ता पक्ष या विपक्ष किसे नुकसान होगा। हमने दोनों होते देखा है। हां, इसका प्रतिशत कम ज्यादा हो सकता है। 1951-52 से लेकर 2019 तक 17 लोकसभा चुनाव हुए हैं। पहले चुनाव को छोड़ दिया जाए तो 1957 से लेकर 2019 तक 16 लोकसभा चुनावों में मतदान 6 बार घटा और 10 बार बढ़ा है। इनमें से 8 बार मौजूदा सरकारें दोबारा बनीं और उतनी ही बार बदलीं।

जिन 10 बार मतदान ज्यादा हुआ है, उनमें से 4 बार सत्ताधारी दल को हार का सामना करना पड़ा है और 6 बार जीत मिली है। ऐसे में 60% बार सरकार फिर से बनी है। जिन 6 बार मतदान में कमी आई है, उनमें से 4 बार सत्ताधारी दल को हार का सामना करना पड़ा है और 2 बार जीत मिली है। ऐसे में सरकार सिर्फ 33% बार ही दोबारा बनी। चुनावी इतिहास के आधार पर कह सकते हैं कि मतदान घटने से सत्ताधारी पार्टी को ज्यादा नुकसान होता है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा का मानना है कि वोटर टर्नआउट घटने से बीजेपी को नुकसान होगा। उनके मुताबिक हिंदुस्तान में 3 कैटेगरी के वोटर होते हैं-

  1. हार्डकोर रूलिंग पार्टी के सपोर्टर
  2. फेंस सिटर
  3. विपक्ष का सपोर्टर

पवन खेड़ा के मुताबिक, ‘हम हर बार देखते हैं कि बीजेपी का समर्थक जोश से वोट देने निकलता है तो बीजेपी जीतती है। जब हताश होकर घर बैठ जाता है तो बीजेपी हारती है। बीजेपी का हार्डकोर समर्थक वोट देने नहीं निकल रहा। जो कांग्रेस या INDIA अलायंस का समर्थक है, वो जमकर वोट दे रहा है।’

अमित शाह ने कहा था- वोटिंग प्रतिशत कम होने पर मंत्री पद जाएगा

बीजेपी नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दूसरे फेज की वोटिंग से पहले भोपाल पहुंचे थे। यहां उन्होंने मध्यप्रदेश के संगठन के शीर्ष नेताओं और चुनाव प्रभारियों से चर्चा की। साथ ही मंत्रियों और विधायकों को हिदायत दी कि उनके इलाकों में कम वोटिंग न हो। इसका वो ध्यान रखें। शाह ने यह भी कहा कि जिन मंत्रियों के क्षेत्र में वोटिंग घटेगी उनका मंत्री पद जा सकता है। जबकि जिन विधायकों के क्षेत्र में वोटिंग बढ़ेगी उन्हें मंत्रीपद मिल भी सकता है।

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राज्य निर्वाचन आयोगों ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से अपने क्षेत्र में वोटिंग बढ़ाने के प्रयास करने को कहा है। इसके लिए आने-जाने की सुविधा, पोलिंग बूथ पर गर्मी से बचने, पानी, छांव आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वोटर्स को लुभाने के लिए खाने की चीजें और नकद इनाम तक की व्यवस्था की जा रही है।

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