मोदी के सत्ता संभालने के बाद से यूपीएससी में भर्तियां आधी, दो साल में ठेका कर्मचारियों की संख्या दोगुनी, बेरोजगारी और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ी

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 28 अप्रैल 2024 | जयपुर – दिल्ली – मुंबई देश में बेरोजगारी और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के खिलाफ युवाओं ने देश के कई राज्यों में उग्र विरोध प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार सेना के अवाला अन्य क्षेत्रों में भी स्थायी नौकरियों को तेजी से खत्म कर रही है। साथ ही सरकार लगातार ठेका प्रथा को प्रोत्साहित कर रही है। आंकड़े बताते हैं कि ठेका कर्मी सिर्फ दो साल में ही दोगुने हो चुके हैं।

मोदी के सत्ता संभालने के बाद से यूपीएससी में भर्तियां आधी

MOOKNAYAKMEDIA 53 300x195 मोदी के सत्ता संभालने के बाद से यूपीएससी में भर्तियां आधी, दो साल में ठेका कर्मचारियों की संख्या दोगुनी, बेरोजगारी और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ीनेशनल पेंशन स्कीम के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने 2020 की तुलना में 2021 में स्थायी भर्तियां 27 प्रतिशत कम की है। राज्यों का भी यही हाल हैं, उन्होंने भी रेगुलर भर्तियां 21 प्रतिशत कम कर दी है। मोदी सरकार ने साल 2021 में 87,423 स्थायी नौकरियां दीं। जबकि साल 2020 में स्थायी भर्तियों की संख्या 1.19 लाख थीं।

महीने का औसत देखें तो स्थायी नौकरियों का गिरता हुआ ग्राफ अधिक स्पष्ट नजर आएगा। साल 2017 में केंद्र सरकार हर माह औसतन 11 हजार लोगों को स्थायी नौकरी दे रही थी। 2020 में यह आंकड़ा 7285 पर पहुंच गया। यानी 2020 में सरकार हर माह औसतन 7285 लोगों को ही नौकरी दे पाई। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकारें प्रतिमाह 45,208 भर्तियां कर रही थी, 2020 में हर माह मिलने वाली नौकरियों की संख्या 32,421 रह गईं।

संघ लोक सेवा आयोग जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में भी भर्ती आधी कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद से यूपीएससी में भर्तियां आधी हो गई हैं। नरेंद्र मोदी जिस साल प्रधानमंत्री बने थें यानी 2014 में यूपीएससी ने 7799 भर्तियां की थीं। 2015 में घटकर भर्तियां 5959 हो गयीं।

2016 में घटकर 5659 हो गयीं। 2017 में घटकर 4612 हो गयीं। यानी 2017 तक 3187 भर्तियां कम हो गयीं। फिर आया 2018, इस साल सरकार ने 2017 की तुलना में 217 भर्तियां बढ़ाईं। यानी 2018 में भर्तियां की संख्या रही 4829. 2019 में भर्तियां का आंकड़ा फिर लुढ़का और 3889 पर पहुंच गया। 2020 में भर्तियों को बढ़ाकर 4351 कर दिया गया। लेकिन 2021 में ये भर्तियां फिर 3986 पर पहुंच गयीं।

दो साल में ठेका कर्मचारियों की संख्या दोगुनी

भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि साल 2019 में केंद्र सरकारी की नौकरियों ठेका कर्मचारियों की कुल संख्या 13.64 लाख थी। 2021 के आंकड़े बताते हैं कि केंद्र सरकार के पास 24.31 लाख ठेका कर्मचारी हैं। यानी दो साल में ही केंद्र सरकार ने ठेका कर्मचारियों की संख्या करीब-करीब दोगुनी कर दी है।

ध्यान देने वाली बात ये भी है कि जिन दो सालों में ठेका कर्मचारियों की संख्या दोगुनी हुई है, वो कोरोना महामारी के वर्ष थे। पिछले पांच साल के आंकड़ों को एक साथ रखकर देखें तो ठेका कर्मियों का ग्राफ लगातार बढ़ता नजर आएगा। साल 2017 में ठेका कर्मचारियों की संख्या 11.11 लाख थी। 2018 में बढ़कर ये संख्या 11.79 लाख हो गई। 2019 में संख्या 13.64 लाख पहुंच गई. 2020 में ठेका कर्मियों की संख्या 13.25 रही। 2021 में ठेका कर्मियों की संख्या बड़ी उछाल के साथ 24.31 लाख हो गई है।

भारत में स्टाफिंग कंपनियों द्वारा नियोजित फ्लेक्सी या “औपचारिक संविदा श्रमिकों” की संख्या वर्तमान में 5-5.5 मिलियन से बढ़कर 2030 के अंत तक 10 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, क्योंकि ऐसे कार्यबल की भारी मांग है। फ्लेक्सी कर्मचारी वे कर्मचारी होते हैं जिन्हें एक विशेष अवधि के लिए काम पर रखा जाता है और उन्हें सामाजिक सुरक्षा, मानक वेतन, कानूनी अनुपालन, ईपीएफओ के तहत पंजीकरण आदि का लाभ मिलता है। वे गिग श्रमिकों से अलग होते हैं, जिन्हें जरूरी नहीं कि ऐसे लाभ मिल रहे हों।26576 300x169 मोदी के सत्ता संभालने के बाद से यूपीएससी में भर्तियां आधी, दो साल में ठेका कर्मचारियों की संख्या दोगुनी, बेरोजगारी और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ी

फ्लेक्सी कर्मचारियों को औपचारिक संविदा कर्मचारी माना जाता है, जो प्रमुख नियोक्ता, स्टाफिंग कंपनी और कर्मचारी के बीच कानूनी रूप से बाध्य त्रिपक्षीय समझौते में एक पक्ष हैं। मुख्य नियोक्ता फ्लेक्सी श्रमिकों को नियुक्त करने के लिए एक स्टाफिंग कंपनी के साथ एक समझौता करता है, जो मुख्य नियोक्ता की आवश्यकता के अनुसार एक विशेष भूमिका निभाने के लिए उपयुक्त होगा।

समझौते के अनुसार, स्टाफिंग कंपनी फ्लेक्सी कर्मचारी की नियोक्ता है, और उन्हें कानूनी लाभ प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है। आईएसएफ – स्टाफिंग उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाला एक शीर्ष निकाय – वर्तमान में भारत में कुल फ्लेक्सी कार्यबल का लगभग 30-35% हिस्सा है , और लगभग 1.6 मिलियन होने का अनुमान है।

आईएसएफ की सदस्य कंपनियों द्वारा नियोजित कर्मचारी अगले छह वर्षों में 3.5-4 मिलियन तक पहुंच जाएंगे। हम आराम से हर साल औपचारिक फ्लेक्सी बाजार में 200,000 शुद्ध नए श्रमिक जोड़ रहे हैं। अगले कुछ वर्षों में जोड़ने का पैमाना बढ़ने वाला है। 2019-20 में, ISF कंपनियों द्वारा नियोजित फ्लेक्सी कर्मचारी लगभग 1 मिलियन थे, जो 2020-21 में कोविड-19 के प्रकोप के कारण 90,000 कम हो गए। अब 1.6 मिलियन को तैनात किया है, जिनमें से 20-24% महिलाएं हैं। महिला फ्लेक्सी श्रमिकों को भी मातृत्व अवकाश का लाभ मिलता है।

बेरोजगारी और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ी

आईएसएफ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के स्टाफिंग सदस्यों ने सितंबर 2023 को समाप्त होने वाली पिछली चार तिमाहियों में 136,000 नए औपचारिक कार्यबल जोड़े थे, और इस अवधि के दौरान रोजगार की मांग मुख्य रूप से ई-कॉमर्स, खुदरा, फास्ट फूड जैसे क्षेत्रों से प्रेरित थी।

चलती उपभोक्ता वस्तुएं ( एफएमसीजी ), रसद, विनिर्माण, आतिथ्य, पर्यटन, विमानन , ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी)। 1.6 मिलियन फ्लेक्सी कर्मचारियों में से, बीएफएसआई सेक्टर आईएसएफ कार्यबल के सबसे बड़े हिस्से को रोजगार देता है, इसके बाद खुदरा, विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएं (आईटीईएस) आती हैं।

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स्टाफिंग उद्योग, वर्तमान में, भारत में संभावित रोजगार योग्य आकार का केवल 1-2% प्रवेश कवर करता है। आईएसएफ के अनुसार, 500 मिलियन कार्यबल में से लगभग 15% संगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। आईएसएफ इस बाजार को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। प्रभाव लाने के लिए, कानूनों और विनियमों ने स्टाफिंग उद्योग को संज्ञान में नहीं लिया है। हालांकि, नए श्रम कोड स्टाफिंग उद्योग को मान्यता देते हैं, लेकिन उन्हें अभी तक लागू नहीं किया गया है।

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