आरक्षण की व्यवस्था को मोदी ने किया पूर्णरूपेण निष्प्रभावी, बड़ी चतुराई से धर्म का चश्मा चढ़ा एससी एसटी ओबीसी की आँखों में धूल झोंक कर किया आरक्षण ख़त्म

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 30 अप्रैल 2024 | जयपुर – दिल्ली – लखनऊ : भारत में चुनावी साल में एक बार फिर आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है। लोकसभा चुनावों में प्रचार के दौरान मोदी-शाह और आरएसएस प्रमुख भागवत चीख-चीख कर कह रहे हैं कि आरक्षण ख़त्म नहीं करेंगे। पर पिछले दस सालों में मोदी ने बड़ी चतुराई से धर्म का चश्मा चढ़ाकर एससी, एसटी, ओबीसी की आँखों में धूल झोंक कर आरक्षण ख़त्म किया है।

मोदी ने बड़ी चतुराई से धर्म का चश्मा चढ़ा एससी एसटी ओबीसी की आँखों में धूल झोंक कर किया आरक्षण ख़त्म

MOOKNAYAKMEDIA 6 300x253 आरक्षण की व्यवस्था को मोदी ने किया पूर्णरूपेण निष्प्रभावी, बड़ी चतुराई से धर्म का चश्मा चढ़ा एससी एसटी ओबीसी की आँखों में धूल झोंक कर किया आरक्षण ख़त्मप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार कई सावर्जनिक क्षेत्र की कंपनियों यानी पीएसयू में अपनी हिस्सेदारी बेच चुकी है क्योंकि इनमें आरक्षण-व्यवस्था लागू करनी पड़ती है। वहीं, आगे भी कई कंपनियों में सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेचने यानी विनिवेश का फैसला लिया है ताकि आरक्षण की व्यवस्था को पूर्णरूपेण निष्प्रभावी किया जा सके।

दूसरी तरफ लोकसभा चुनावों में प्रचार के दौरान मोदी-शाह और आरएसएस प्रमुख भागवत चीख-चीख कर कह रहे हैं कि आरक्षण ख़त्म नहीं करेंगे। जब सावर्जनिक क्षेत्र की कंपनियाँ ही नहीं रहेंगी तो आरक्षित पोस्ट कहाँ से आयेंगी और संविधान प्रदत्त आरक्षण को समाप्त करने का यही सबसे आसान तरीका आरएसएस-बीजेपी ने चुना है। देखिए पिछले दस सालों में मोदी ने बड़ी चतुराई से धर्म का चश्मा चढ़ाकर एससी, एसटी, ओबीसी की आँखों में धूल झोंक कर आरक्षण ख़त्म किया है।

वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद से विनिवेश और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की रणनीतिक बिक्री से 4.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाए गए हैं। सबसे ज़्यादा 1.07 लाख करोड़ रुपये की राशि 59 मामलों में बिक्री पेशकश के ज़रिये जुटाई गई है।

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लिखित जवाब में 28 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नाम भी बताए, जिनमें विनिवेश यानी हिस्सेदारी बेचने की सैद्धांतिक मंजूरी मिली है, ये कंपनियां हैं-

  • 1- स्कूटर्स इंडिया लि.,
  • 2- ब्रिज ऐंड रूफ कंपनी इंडिया लि,
  • 3- हिंदुस्तान न्यूज प्रिंट लि.,
  • 4- भारत पंप्स ऐंड कम्प्रेसर्स लि,
  • 5- सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि.,
  • 6- सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लि,
  • 7- भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड,
  • 8- फेरो स्क्रैप निगम
  • 9- पवन हंस लिमिटेड,
  • 10- एअर इंडिया और उसकी पांच सहायक कंपनियां और एक संयुक्त उद्यम,
  • 11- एचएलएल लाइफकेयर,
  • 12- हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लि.,
  • 13- शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया,
  • 14- बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड.
  • 15- नीलांचल इस्पात निगम लिमिडेट में विनिवेश की सैद्धांतिक मंजूरी बीते आठ जनवरी को दी गई.
  • 16- हिंदुस्तान प्रीफैबलिमिटेड (HPL),
  • 17 – इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड,
  • 18- भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन
  • 19- कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR)
  • 20- एनएमडीसी का नागरनकर स्टील प्लांट,
  • 21- सेल का दुर्गापुर अलॉय स्टील प्लांट, सलेम स्टील प्लांट और भद्रावती यूनिट.
  • 22- टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDCIL)
  • 23- इंडियन मेडिसीन ऐंड फार्मास्यूटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (IMPCL),
  • 24- कर्नाटक एंटीबायोटिक्स,
  • 25-इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (ITDC) की कई ईकाइयां
  • 26- नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO)
  • 27- प्रोजेक्ट ऐंड डेवलपमेंट इंडिया लि.
  • 28- कामरजार पोर्ट

यह सूची एक बानगी के रूप में दी गयी वरना सूची बहुत लंबी है जिसमें लगभग 164 से भी अधिक नाम शामिल हैं।

आरक्षण की व्यवस्था को मोदी ने किया पूर्णरूपेण निष्प्रभावी

मोदी सरकार ने विनिवेश से की इतने लाख करोड़ की कमाई?

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने विनिवेश और पब्लिक सेक्टर यूनिट में हिस्सेदारी बेचकर 4.04 लाख करोड़ से ज्यादा रुपये की कमाई की है। वर्तमान वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर केंद्र सरकार ने 28 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कमाए हैं। इसमें से सर्वाधिक एलआईसी के 3.5 फीसदी शेयर बेचकर कमाए गए हैं।

सरकार को एलआईसी के शेयर बेचकर 20 हजार करोड़ से ज्यादा रुपये कमाए थे। इसी तरह मोदी सरकार ने एयर इंडिया, टाटा कम्युनिकेशन, एक्सिस बैंक, आईपीसीएल जैसी कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेची है. वहीं, मोदी सरकार ने एचएएल लाइकेयर लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम जैसी कई कंपनियों में विनिवेश के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं।

लैटरल एंट्री का चोर दरवाजा खोलना

केंद्र सरकार ने लेटरल एंट्री के तहत निजी क्षेत्र के 9 विशेषज्ञों को केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव के पदों पर नियुक्त किया है। ब्यूरोक्रेसी में सुधार लाने के उद्देश्य से UPSC ने इस तरह की ये पहली भर्तियाँ की हैं। UPSC द्वारा चुने गए नौ विशेषज्ञों में अंबर दुबे (नागरिक उड्डयन), अरुण गोयल (वाणिज्य), राजीव सक्सेना (आर्थिक मामले), सुजीत कुमार बाजपेयी (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन), सौरभ मिश्रा (वित्तीय सेवाएँ), दिनेश दयानंद जगदाले (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा), सुमन प्रसाद सिंह (सड़क परिवहन और राजमार्ग), भूषण कुमार (शिपिंग) और काकोली घोष (कृषि, सहयोग और किसान कल्याण) शामिल हैं। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय को इन पदों के लिये 6077 आवेदन मिले थे।

निजीकरण को बढ़ावा देना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार का बिजनेस यह नहीं है कि वह बिजनेस में रहे। पीएम ने कहा कि उनका प्रशासन चार रणनीतिक क्षेत्रों में कुछ को छोड़कर सभी सरकारी कंपनियों का निजीकरण करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम ने कहा, ‘यह सरकार का कर्तव्य है कि वह उद्योगों और कारोबारों का सहयोग करे, लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि सरकार खुद कारोबार का स्वामित्व अपने पास रखे और उसे चलाए।’

प्रधानमंत्री निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) द्वारा निजीकरण विषय पर आयोजित एक वेबिनार में बोल रहे थे। यहां पीएम ने कहा, ‘हमारी सरकार का प्रयास लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के साथ ही लोगों के जीवन में सरकार के बेवजह के दखल को भी कम करना है। यानि जीवन में ना सरकार का अभाव हो, ना सरकार का प्रभाव हो।’

पीएम ने कहा, ‘सरकार जिस मंत्र को लेकर आगे बढ़ रही है, वो है मोनेटाइज और मॉर्डनाइज। जब सरकार मोनेटाइज करती है, तो उस स्थान को देश का प्राइवेट सेक्टर भरता है। प्राइवेट सेक्टर अपने साथ निवेश भी लाता है और वैश्विक स्तर की बेहतर प्रैक्टिस को भी लाता है। इससे चीजें और मॉर्डनाइज होती हैं, पूरे सेक्टर में आधुनिकता आती है, सेक्टर का तेजी से विस्तार होता है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।’

पीएम ने कहा, ‘बीते वर्षों में हमारी सरकार ने भारत को कारोबार के लिए एक अहम स्थान बनाने के लिए निरंतर सुधार किए हैं। आज भारत वन मार्केट-वन टैक्स सिस्टम से युक्त है। आज भारत में कंपनियों के लिए एंट्री और एग्जिट के लिए बेहतरीन माध्यम उपलब्ध हैं। ये पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे, नियमों के तहत रहे, इसके लिए मॉनीटर करना भी उतना ही आवश्यक है।’

पीएम ने कहा, ‘एफडीआई के लिए सहज माहौल और PLI जैसे प्रोत्साहन के कारण, आज निवेशकों में भारत के प्रति उत्साह और बढ़ा है। यह बीते कुछ महीनों में हुए रिकॉर्ड एफडीआई निवेश में स्पष्ट रुप से दिखता भी है।’ नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 18 रणनीतिक क्षेत्रों की पहचान कर ली है। दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक इसमें बैंकिंग, बीमा, इस्पात, उर्वरक, पेट्रोलियम और रक्षा उपकरण आदि क्षेत्र शामिल हैं।

अगर इसे पूरी तरह से लागू किया जाता है, तो इसका सीधा मतलब होगा कि सरकार निजीकरण या रणनीतिक विनिवेश के जरिए गैर-रणनीतिक क्षेत्रों से पूरी तरह बाहर निकल रही है। यहां तक कि रणनीतिक क्षेत्रों में भी सार्वजनिक क्षेत्र की अधिकतम चार इकाइयां होंगी और न्यूनतम एक इकाई का संचालन होगा।

वित्त मंत्रालय के तहत काम कर रहे निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम), जो पिछले महीने ‘वाणिज्यिक क्षेत्र उद्यम में सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी को फिर से परिभाषित करने’ पर एक कैबिनेट प्रस्ताव लाया था कि 18 रणनीतिक क्षेत्रों को तीन व्यापक खंडों में विभाजित किया है-खनन और पर्यवेक्षण, विनिर्माण, प्रसंस्करण एवं निर्माण, और सेवा क्षेत्र। खनन और पर्यवेक्षण खंड में कोयला, कच्चा तेल एवं गैस और खनिज और धातु आदि क्षेत्रों में सरकार सीमित उपस्थिति बनाए रखेगी।

इसी तरह, विनिर्माण, प्रसंस्करण और निर्माण क्षेत्र में, सरकार जिन क्षेत्रों में सीमित उपस्थिति बनाए रखेगी वे हैं रेलवे, रक्षा उपकरण, इस्पात, पेट्रोलियम (रिफाइनरी और मार्केटिंग), उर्वरक, बिजली उत्पादन, परमाणु ऊर्जा और जहाज निर्माण। और, सेवा क्षेत्र खंड में चिह्नित क्षेत्र हैं- पावर ट्रांसमिशन, अंतरिक्ष, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, राजमार्गों और गोदामों का विकास और संचालन और गैस ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक (गैस और पेट्रो-केमिकल ट्रेडिंग शामिल नहीं), रणनीतिक क्षेत्रों और उप-क्षेत्रों से जुड़ा तकनीकी परामर्श और अनुबंध और निर्माण, बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय सेवाएं, निर्यात ऋण गारंटी, ऊर्जा और आवास क्षेत्र, दूरसंचार और आईटी, बैंकिंग और बीमा से संबंधित सेवाएं शामिल हैं।

इसका सबसे ज्यादा असर बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में निजीकरण होने की उम्मीद है, जहां बड़ी संख्या में सरकारी स्वामित्व वाले बैंक संचालित होते हैं. पिछले साल सरकारी स्वामित्व वाले 10 बैंकों का विलय करके चार बैंक बनाए जाने और 2017 और 2018 में हुए विलय के बाद भी, भारत में अभी सरकारी स्वामित्व वाले 12 बैंक हैं. इसके साथ ही भारतीय रेलवे का निजीकरण प्राथमिकताओं में रहेगा।

योजना के अनुसार, यहां तक कि जिन क्षेत्रों में सरकार अपनी उपस्थिति बनाए रखना चाहती है, उनमें भी एक फर्म में केवल उतनी हिस्सेदारी रखी जाएगी जितनी नियंत्रण बनाए रखने के लिए जरूरी हो। लेकिन सरकार इनसे बाहर कब निकलेगी यह बाजार की स्थितियों और प्रस्ताव की व्यवहार्यता सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।

सुदामा कोटा लागू करना

आरक्षण एक सकारात्मक कार्रवाई नीति है, जिसे भारत सहित दुनिया भर में कलंकित किया गया है। जब से देश में कोटा लागू हुआ है, आरक्षण विरोधी, मुख्य रूप से ‘उच्च’ जातियों से, लगातार इसे कलंकित कर रहे हैं। वे ‘योग्यता’ के नाम पर ऐसा करते रहे हैं। ओबीसी के लिए कोटा लागू होने के साथ ही यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है।

आरक्षण विरोधियों ने आरक्षण का विरोध करने के लिए योग्यता के सिद्धांत का प्रयोग करते हुए नीतिगत पूर्वावलोकन के अंतर्गत आने वाले समुदायों को भी कलंकित कर दिया है। ओबीसी आरक्षण का विरोध करते हुए जूते पॉलिश करने और सड़कों की सफाई करने के उनके कार्य जीवंत उदाहरण हैं – जैसे कि ये काम ‘निचली’ जातियों के लिए हैं और इसके लिए किसी कौशल, प्रतिभा या श्रम की आवश्यकता नहीं है।

ईडब्ल्यूएस कोटा किस प्रकार एससी, एसटी और ओबीसी के हितों को नुकसान पहुंचाता है, यह विवाद का विषय बन गया है क्योंकि यह खुली श्रेणी में अर्हता प्राप्त करने के उनके अवसरों को 50 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर देता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि ईडब्ल्यूएस कोटा इन समूहों के लिए अवसरों को कम करता है, और इसलिए, यह मुख्य रूप से उनके हित के विरुद्ध प्रतीत होता है।

केंद्रीय सेवाओं में 30 लाख सरकारी पद रिक्त रखना

सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि 30 लाख पदों को भरने के लिए क्या 200 पॉइंट आरक्षण रोस्टर लागू किया जायेगा। अकेले रेलवे में 9 लाख से अधिक पद खाली पड़े है जबकि वहाँ 200 पॉइंट आरक्षण रोस्टर लागू नहीं है। देखिए 1950 से 1997 तक देश की केंद्रीय शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण का प्रावधान ही नहीं था । सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1997 से देश की शिक्षण-संस्थाओं में आरक्षण लागू हुआ था । लेकिन मनुवादी ताकतों ने शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण तोड़मरोड़ के लागू किया।

जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश संस्था को इकाई मानकर ही दिया था। लेकिन संस्थाओं में लगाया गया विभागवार आरक्षण व्यवस्था 1997 से 2004 तक शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण की धज्जियाँ उड़ाई गई और ज्यादातर जगह SC / ST के कैंडिडेट्स को एनएफएस (NFS – Not Found Suitable Candidate) कर दिया जाता था। फिर यह कहानी ओबीसी के अभ्यर्थियों के साथ भी दोहरायी जाने लगी।

प्रोफ़ेसर राम लखन मीणा ने मूकनायक मीडिया से कहा कि “2012 में हमने लंबी लड़ाई लड़ी और संप्रग सरकार पर दवाब बनाकर 200 पॉइंट्स रोस्टर को सभी शिक्षण-संस्थानों को सांविधिक इकाई मानकर आरक्षण लागू करवाया। एनएफएस घोषित करने की साजिश के खिलाफ शिक्षा मंत्रालय ( मानव संसाधन विकास मंत्रालय) से नियम बनवाकर यूजीसी से लागू करवाया।

जिसे मनुवादी न्याय-व्यवस्था ने इलाहबाद उच्च न्यायालय ने ख़त्म कर दिया । 2 अप्रेल 2018 को एससी एसटी के युवाओं ने अपने प्राणों का बलिदान देकर देशव्यापी आंदोलन से डरकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की। किंतु बहुजनों का सरकार पर जैसे ही दवाब कम हुआ मोदी सरकार ने आरक्षण कि व्यवस्था को कमजोर करवा दी। इसी का परिणाम है कि केंद्र सरकार में 30 लाख पद खाली है।”

इसी बीच 1990 में मंडल कमीशन के द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी संविधान सम्मत आरक्षण मिल गया था। जब प्रोफ़ेसर सुखदेव थोराट यूजीसी के चेयरमैन बने तो यूजीसी की आरक्षण गाइडलाइन 2006 आई । लेकिन किसी भी शिक्षण संस्थान ने इसे लागू नहीं किया । इसके बाद 2007 में OBC का आरक्षण उच्च शिक्षण संस्थाओं में लगाया गया।

रेलवे विभाग में 5 साल से बड़ी भर्ती नहीं करना

भारतीय रेलवे एक दिग्गज कंपनी है जो 12 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देती है। यह भारत के हर कोने से लोगों को जोड़ने में मदद करता है। भारतीय रेलवे द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद के लिए भारत सरकार निजीकरण पर विचार कर रही है। यह लेख रेलवे के निजीकरण के रेल मंत्रालय के निर्णय पर संक्षेप में प्रकाश डालता है।

भारतीय रेलवे के निजीकरण से जुड़ा ताज़ा सन्दर्भ  

हाल ही में, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय रेलवे का कभी भी निजीकरण नहीं किया जाएगा, लेकिन अधिक कुशल कामकाज के लिए निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। रेलवे यात्री सुरक्षा पर अत्यधिक ध्यान दे रहा है। देश उच्च विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है और रोजगार के अधिक अवसर तभी पैदा कर सकता है जब सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें।

रेलवे का निजीकरण – रेल मंत्रालय का हालिया निर्णय

  1. 1 जुलाई, 2020 को रेल मंत्रालय ने घोषणा की कि 109 जोड़ी मार्गों पर 151 ट्रेनें निजी क्षेत्रों द्वारा संचालित की जाएंगी। इसमें भारतीय रेलवे द्वारा संचालित 2,800 एक्सप्रेस और मेल सेवाओं का केवल 5% शामिल है।
  2. 2023 में और 12 क्लस्टरों में निजी ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से शुरू हो जाएगा।
  3. निजी क्षेत्र से 30,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है।
  4. निजी कंपनियों को अपनी पसंद के स्रोत से लोकोमोटिव और ट्रेनें खरीदने की आजादी दी जाएगी।
  5. ट्रेन चलाने वाले सभी कर्मचारी प्राइवेट कर्मचारी होंगे. हालांकि, लोको पायलट और गार्ड रेलवे के कर्मचारी होंगे.
  6. एक बार जब ट्रेनें निजी कंपनियों द्वारा संचालित की जाएंगी, तो एयरलाइन उद्योग के समान, रेल यात्रियों को अतिरिक्त सामान, पसंदीदा बैठने की जगह, ऑन-बोर्ड सेवाओं आदि के लिए अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
  7. रेलवे ने विक्रेता क्षमताओं की जांच के लिए, उन लोगों से योग्यता प्रस्तावों के लिए अनुरोध आमंत्रित किया है जो मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे पर परिचालन के लिए आधुनिक ट्रेनें ला सकते हैं।

सरकार बेचेगी सार्वजनिक क्षेत्र की 100 कंपनियां : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में तेल, गैस, हवाईअड्डा, बंदरगाह, बिजली सहित विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की 100 संपत्तियों को बेचने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे 2.5 लाख करोड़ रुपये आएंगे।

2021-22 के लिए निजीकरण और निवेश पर आयोजित एक वेबिनार में उन्होंने कहा, ‘भविष्य में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।’ प्रधानमंत्री ने इन संपत्तियों के मूल्य की खोज और हिस्सेदारों की तलाश में बेहतरीन वैश्विक प्रक्रिया स्वीकार करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, ‘इन नीतियों को लागू करना समान रूप से ही महत्त्वपूर्ण है। स्थिर नीतियां और सही प्रक्रिया जरूरी है, जिससे कि पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सके।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि रणनीतिक क्षेत्र के अतिरिक्त हर क्षेत्र के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के  निजीकरण करने को प्रतिबद्ध है, जिसका उल्लेख बजट में भी किया गया है। उन्होंने कहा, ‘सरकारी कंपनियों को केवल इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए कि वे विरासत में मिली हैं।’

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प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रुग्ण सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन देते रहने से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है। मोदी ने कहा कि बजट 2021-22 में भारत को ऊंची वृद्धि की राह पर ले जाने के लिए स्पष्ट रूपरेखा बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घाटे में हैं, कइयों को करदाताओं के पैसे से मदद दी जा रही है। रुग्ण सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूर्ण रूप से उपयोग नहीं हुआ है या बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी 100 परिसंपत्तियों को बाजार में चढ़ाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाये जाएंगे। मोदी ने कहा सरकार मुद्रीकरण, आधुनिकीकरण पर ध्यान दे रही है।

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