सीबीआई जाँच : मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का मामला, चार्जसीट में दावा ‘पुलिस ने ही महिलाओं को भीड़ के बीच छोड़ा था’

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 01 मई 2024 | जयपुर – दिल्ली – इंफाल : मई में हुई इस वारदात का वीडियो जुलाई में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस मामले में CBI ने चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि मणिपुर पुलिस के अधिकारी इन महिलाओं को कांगपोकपी जिले में 1000 मैतेई प्रदर्शकों के बीच लेकर पहुंचे थे।

सीबीआई जाँच : मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का मामला

MOOKNAYAKMEDIA 9 300x195 सीबीआई जाँच : मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का मामला,  चार्जसीट में दावा पुलिस ने ही महिलाओं को भीड़ के बीच छोड़ा थायह फोटो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाए जाने के वीडियो से ही ली गई है। हमने महिलाओं वाले हिस्से को नहीं लगाया है। यह हुजूम आरोपियों का है, जो उन महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें करते हुए चल रहे थे। मणिपुर में पिछले साल हिंसा के बीच कुकी-जो समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके घुमाया गया था।

चार्जशीट में कहा गया है कि इन महिलाओं ने पुलिस की गाड़ी में शरण मांगी थी। लेकिन, पुलिस ने दोनों महिलाओं को भीड़ के बीच छोड़ दिया, जिसके बाद भीड़ ने उन्हें निर्वस्त्र करके परेड कराई और फिर उनके साथ यौन शोषण किया। इन महिलाओं में से एक कारगिल युद्ध लड़ चुके सैनिक की पत्नी थी।

चार्जशीट की जानकारी देने वाले अधिकारियों ने बताया कि महिलाओं ने पुलिसवालों से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए मदद मांगी थी, लेकिन पुलिसवालों ने महिलाओं को कहा कि उनके पास गाड़ी की चाबी नहीं है। पुलिस ने महिलाओं की कोई मदद नहीं की। घटना के विरोध में मणिपुर के चुराचांदपुर में प्रदर्शन किए गए। हजारों लोगों ने काले कपड़े पहनकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी।

4 पॉइंट्स में जानिए क्या है मणिपुर हिंसा की वजह

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

httpsonecmsbhaskarcomnews mobile preview taxo08554 1714487155 सीबीआई जाँच : मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का मामला,  चार्जसीट में दावा पुलिस ने ही महिलाओं को भीड़ के बीच छोड़ा था

महिलाओं ने पुलिस से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद मांगी थी

चार्जशीट के मुताबिक, यह भीड़ कांगपोकपी जिले में महिलाओं के गांव में जबरदस्ती दाखिल हुई थी। कई विक्टिम के साथ दोनों महिलाएं भीड़ से बचने के लिए जंगल की तरफ भागीं, लेकिन भीड़ ने उन्हें देख लिया। भीड़ में से कुछ लोगों ने महिलाओं से कहा कि वे सड़क किनारे खड़ी पुलिस की गाड़ी के पास पहुंचकर मदद मांगें।

किसी तरह महिलाएं पुलिस की गाड़ी तक पहुंचीं और उसके अंदर बैठ गईं। इसके बाद भी ड्राइवर और दो पुलिसवाले गाड़ी में शांति से बैठे रहे। तीन-चार पुलिसवाले गाड़ी के बाहर खड़े थे। इन महिलाओं के साथ एक पुरुष विक्टिम भी पुलिस की गाड़ी में बैठा था, उसने पुलिसवालों से हाथ जोड़कर कहा कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह ले चलें, लेकिन पुलिसवालों ने उसे जवाब दिया कि गाड़ी की चाबी नहीं है।

चार्जसीट में दावा ‘पुलिस ने ही महिलाओं को भीड़ के बीच छोड़ा था’

पुलिस ने गाड़ी में बैठे पुरुष के पिता को भी भीड़ के हाथों प्रताड़ित होने दिया। इसके बाद पुलिस जिप्सी के ड्राइवर ने 1000 लोगों की भीड़ की तरफ गाड़ी मोड़ी और उनके सामने जाकर गाड़ी रोक दी। जीप को भीड़ के बीच खड़ा करके पुलिस वाले वहां से चले गए।

तब तक भीड़ ने जीप में बैठे पुरुष विक्टिम के पिता को मार डाला था। इसके बाद भीड़ जीप की तरफ आई। लोगों ने महिलाओं को जीप से बाहर खींचा, उन्हें निर्वस्त्र किया और इसी हालात में उन्हें घुमाया। इसके बाद उनका रेप किया।

पिछले साल अक्टूबर में CBI ने कोर्ट में दाखिल की थी चार्जशीट

CBI ने ये चार्जशीट पिछले साल 16 अक्टूबर को गुवाहाटी के CBI कोर्ट में स्पेशल जज के सामने दाखिल की थी। इस चार्जशीट में कहा गया है कि दोनों महिलाएं 900 से 1000 लोगों की भीड़ से भागने की कोशिश कर रही थीं। इस भीड़ के पास AK राइफल्स, SLR, इन्सास और .303 राइफल्स भी थीं।

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CBI ने चार्जशीट में हुईरेम हिरोदास मैतेई समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया है। हुईरेम को पिछले साल जुलाई में मणिपुर पुलिस ने पकड़ लिया था। इसके अलावा एक नाबालिग के खिलाफ एक रिपोर्ट दाखिल की गई है। आरोपियों के खिलाफ IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है। इनमें गैंग रेप, मर्डर, महिला की अस्मिता को तार-तार करना और आपराधिक षड्यंत्र शामिल है।

comp 2411689998886 1714487436 सीबीआई जाँच : मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का मामला,  चार्जसीट में दावा पुलिस ने ही महिलाओं को भीड़ के बीच छोड़ा थासुप्रीम कोर्ट बोला- सरकार कदम उठाए, वरना हम उठाएंगे

​​​​​​वीडियो सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वीडियो देखकर हम बहुत परेशान हुए हैं। हम सरकार को वक्त देते हैं कि वो कदम उठाए। अगर वहां कुछ नहीं हुआ तो हम कदम उठाएंगे। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सांप्रदायिक संघर्ष के दौरान महिलाओं का एक औजार की तरह इस्तेमाल कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह संविधान का सबसे घृणित अपमान है। महिलाओं ने मुख्य आरोपी हुइरेम हेरोदास मैतेई के घर को तोड़ दिया और आग लगा दी।

बिष्णुपुर में महिलाओं ने आर्मी को हथियार ले जाने से रोका

वहीं, मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में मंगलवार 30 अप्रैल को महिला प्रदर्शनकारियों ने आर्मी को रोक लिया। सेना यहां से जब्त हथियार और गोलाबारूद लेकर जा रही थी। घटना मंगलवार सुबह की है। आर्मी की 2 महार रेजीमेंट ने कुम्बी इलाके में पेट्रोलिंग के दौरान दो SUV को रोका। एक अफसर ने बताया कि जैसे ही उन्होंने आर्मी को देखा, वे हथियार छोड़कर भाग गए।

अफसर ने ये भी बताया कि कुछ देर बाद मैतेई महिलाओं का ग्रुप मीरा पायबिस मौके पर पहुंचा। इन्होंने मांग की कि हम (आर्मी) हथियार छोड़कर चले जाएं। महिलाओं ने यह भी मांग की कि कुकी-मैतेई के बीच संघर्ष जारी तक कोई हथियार जब्त नहीं किया जाए।

अफसरों ने बताया कि सैकड़ों महिलाओं ने रोड ब्लॉक कर दी थी। उन्हें हटाने के लिए हमने हवाई फायर किए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। इस बात पर सहमति बनी कि आर्मी पुलिस को हथियार सौंप देगी।

प्रदर्शनकारियों की नेता जया खागेनबाम ने बताया कि कुम्बी जैसे इलाकों से अगर हथियार जब्त कर लिए जाएं तो यहां हथियारबंद आतंकियों के हमले का खतरा हो सकता है। इस हिंसा को लेकर ट्राइबल कम्युनिटी के एक संगठन ने 12 घंटे तक बंद का ऐलान किया है। इस दौरान कांगपोकपी के सदर हिल्स की सभी दुकानें बंद रखी जाएंगी।

comp 1 2024 04 28t151955834 1714297830 सीबीआई जाँच : मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का मामला,  चार्जसीट में दावा पुलिस ने ही महिलाओं को भीड़ के बीच छोड़ा था

मणिपुर के कांगपोकपी जिले के कांगचुप हिल रेंज में दो गुटों के बीच शनिवार रात से शुरू हुई गोलीबारी रविवार सुबह भी जारी है। इसमें 1 विलेज वॉलंटियर की मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि एक गुट के 12 लोगों ने पहाड़ी इलाके से एक साथ गांव पर ओपन फायरिंग की। उन्होंने मोर्टार भी दागे। जवाब में गांववालों ने भी फायरिंग की।

पुलिस अधिकारी ने कहा- कॉर्तुक गांव में गोलीबारी के बाद आसपास के गांव में भी फायरिंग हुई। घरों में गोलियों के निशान साफ देखे जा सकते हैं। महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित जगह तक पहुंचाया गया है। गोलीबारी में मारे गए वॉलंटियर का नाम लमांग किपगेन है। वह कांगपोकपी के मालसोंग गांव का रहने वाला है। शनिवार देर रात उसे गोली लगी थी। रविवार सुबह अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

इससे पहले 26 अप्रैल की रात को इंफाल ईस्ट के बॉर्डर पर सिनम कोम गांव में दो गुटों के बीच गोलीबारी हुई थी। इसमें 33 साल एक विलेज वालंटियर की मौत हो गई थी। मृतक की पहचान लैशराम प्रेम के रूप में की गई है। गोलीबारी के बाद से लैशराम लापता था। 27 अप्रैल को सुबह उसका शव बरामद किया गया।

मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा जारी, अब तक 200 से ज्यादा मौतें

मणिपुर में पिछले साल 3 मई से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर हिंसा चल रही है। राज्य में अब तक हुई हिंसा की घटनाओं में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं। 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 65 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले के कांगचुप हिल रेंज में कुकी गनमैन ने बंकर से फायरिंग की।

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