आईपीएस रवि प्रकाश मेहरडा होंगे एसीबी के डीजी, दूदू कलेक्टर मामले में एडीजी हेमंत प्रियदर्शी को हटाया, एसीबी की गिरती परफॉर्मेंस कहां हुई चूक

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 02 मई 2024 | जयपुर – दिल्ली – अजमेर : राज्य सरकार ने गुरुवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस ) के तीन अधिकारियों के तबादले किए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो( एसीबी) की कमान अब सरकार ने 1990 बैच के आईपीएस अफसर रवि प्रकाश मेहरडा को सौंपी है। मेहरडा अभी तक डीजी एससीआरबी थे। अब सरकार ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी हैं।

आईपीएस रवि प्रकाश मेहरडा होंगे एसीबी के डीजी

MOOKNAYAKMEDIA 19 300x195 आईपीएस रवि प्रकाश मेहरडा होंगे एसीबी के डीजी, दूदू कलेक्टर मामले में एडीजी हेमंत प्रियदर्शी को हटाया, एसीबी की गिरती परफॉर्मेंस कहां हुई चूकवहीं, एसीबी में करीब सवा साल से कार्यवाहक डीजी का पद संभाल रहे एडीजी हेमंत प्रियदर्शी को एसीबी से हटाकर एडीजी एससीआरबी में भेज दिया गया है। वहीं, सरकार ने आईपीएस सचिन मित्तल को एडीजी भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड में लगाया है। हेमंत प्रियदर्शी को हटाने के पीछे कुछ दिनों में एसीबी की गिरती परफॉर्मेंस से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

ऑर्गन ट्रांसप्लांट मामले में भी एसीबी की परफॉर्मेंस सही नहीं रही

एसीबी डीजी होने के कारण प्रियदर्शी की इसमें जिम्मेदारी तय की गई थी। इसी तरह से ऑर्गन ट्रांसप्लांट मामले में भी एसीबी की परफॉर्मेंस उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। इसके बाद पूरे मामले की जांच अब जयपुर कमिश्नरेट पुलिस कर रही रही है।

दूदू कलेक्टर मामले में एडीजी हेमंत प्रियदर्शी को हटाया

आमतौर पर रिश्वत मांगने की शिकायत होने पर एसीबी सबसे पहले उसका सत्यापन करती है। शिकायत सही पाए जाने पर ट्रेप किया जाता है। इस दौरान एसीबी संबंधित अधिकारी पर नजर रखती है और तैयार रहती है कि अधिकारी कभी भी परिवादी से रिश्वत मांग सकता है। इस हाई प्रोफाइल मामले में पुख्ता सबूत होने के बावजूद एसीबी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। एसीबी अधिकारियों के दावे के अनुसार दूदू कलेक्टर हनुमान मल ढाका ने 15 अप्रैल को साढ़े सात लाख रुपए देने के लिए डाक बंगले पर बुलाया था। इसके बावजूद एसीबी परिवादी के जरिए रिश्वत की राशि का इंतजाम नहीं कर पाई।

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एसीबी की गिरती परफॉर्मेंस कहां हुई चूक

सरकार की तरफ से जवाब में एसीबी ने 22 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि एकल पट्टा प्रकरण में कोई मामला नहीं बनता है। एकल पट्टा प्रकरण में पूरी तरह से नियमों की पालना की गई थी। वहीं, इसमें राज्य सरकार को किसी भी तरह का वित्तीय नुकसान भी नहीं हुआ है। ऐसे में शांति धारीवाल सहित अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी थी। इससे सरकार की किरकिरी हुई थी। हालांकि इस मामले में सरकार पहले ही आरपीएस सुरेंद्र सिंह को एपीओ कर चुकी है।

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