भजनलाल सरकार की महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को बंद करने की साजिश, गरीबों को क्वालिटी एजुकेशन देना नहीं चाहते शिक्षा मंत्री और आरएसएस

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 05 मई 2024 | जयपुर – दिल्ली – कोटा : राजस्थान में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल का रिव्यू करने के फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निशाना साधा है। अशोक गहलोत ने बीजेपी सरकार के फैसले को बेतुका और गरीब विरोधी बताकर इसका विरोध किया है।

screenshot 2024 05 05 110126 1714887116 भजनलाल सरकार की महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को बंद करने की साजिश, गरीबों को क्वालिटी एजुकेशन देना नहीं चाहते शिक्षा मंत्री और आरएसएस
अशोक गहलोत ने ट्वीट कर भजनलाल शर्मा से की पुनर्विचार की अपील

अशोक गहलोत ने कहा- गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा देने के उद्देश्य से हमारी सरकार ने महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम स्कूल शुरू किए थे। अगर इन स्कूलों में सुधार की आवश्यकता थी तो वर्तमान सरकार इसमें आवश्यक सुधार करती। लेकिन अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को फिर से हिन्दी माध्यम करना बेतुका और गरीब और मध्यम वर्ग के विरोध में लगता है।

गहलोत ने कहा- हिंदी तो हम सभी की मातृभाषा है। लेकिन अंग्रेजी माध्यम बच्चों को रोजगार के नए अवसर देता है। हमारी सरकार ने स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों की मांग पर ही अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले थे। इनसे प्रदेश में एक अच्छा माहौल तैयार हुआ था।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सरकार के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील भी की है। अशोक गहलोत ने ट्वीट कर भजनलाल शर्मा से की पुनर्विचार की अपील की। दरअसल, राजस्थान में चल रहे 2000 से ज्यादा महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को हिंदी मीडियम में बदलने की तैयारी चल रही है।

शिक्षा मंत्री बोले-अंतिम फैसला लेना अभी बाकी

इस मामले में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बड़ा बयान आया है।शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा राजस्थान में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल की जरूरत को लेकर सरकार के स्तर पर रिव्यू किया जा रहा है। इसके बाद ही स्कूल चलेंगे या बंद होंगे। इस पर कोई फैसला होगा। सरकारी स्तर पर रिव्यू करने के साथ ही हम यह भी देखेंगे कि महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुरूप है भी या नहीं है। इसी आधार पर अंतिम फैसला किया जायेगा।

मदन दिलावर बोले- सरकार के स्तर पर रिव्यू किया जा रहा

2086fe35 e96a 4342 b69b 6a4f17688798 1714887958 भजनलाल सरकार की महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को बंद करने की साजिश, गरीबों को क्वालिटी एजुकेशन देना नहीं चाहते शिक्षा मंत्री और आरएसएसराजस्थान में चल रहे 2000 से ज्यादा महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को हिंदी मीडियम में बदलने की तैयारी चल रही है। शिक्षा विभाग ने जिला स्तर पर अधिकारियों से इंग्लिश मीडियम स्कूल के मौजूदा हालात, टीचर्स की संख्या, स्टूडेंट की संख्या के साथ ही उसे फिर से हिंदी मीडियम में शुरू करने की सिफारिश मांगी है। इसके आधार पर फैसला कर शिक्षा विभाग इंग्लिश मीडियम स्कूल को फिर से हिंदी मीडियम में बदलेगा।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि राजस्थान में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल की जरूरत को लेकर सरकार के स्तर पर रिव्यू किया जा रहा है। इसके बाद ही स्कूल चलेंगे या बंद होंगे इसको लेकर कोई फैसला होगा। सरकारी स्तर पर रिव्यू करने के साथ ही हम यह भी देखेंगे कि महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुरूप है भी या नहीं है। इसी आधार पर अंतिम फैसला किया जाएगा।

दरअसल, राजस्थान की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने प्रदेश में लगभग 2070 सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम में कन्वर्ट कर उन्हें डेवलप किया था। इन स्कूलों को महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम स्कूल का नाम दिया गया था। इन स्कूलों में दाखिले की निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर गरीब परिवार के छात्र पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने के बाद अब शिक्षा विभाग ने इसमें बदलाव की कवायद तेज कर दी है।

पिछले दिनों शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने प्रदेश में संचालित किए जा रहे महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल का रिव्यू करने का फैसला किया था। इसके बाद अब शिक्षा विभाग ने सभी संभाग और उपखण्ड स्तर से महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों के संचालन को लेकर पूरी रिपोर्ट मांगी है।

मामले पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पहले ही कह चुके हैं कि राजस्थान में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल की जरूरत को लेकर सरकार के स्तर पर रिव्यू किया जा रहा है। इसके बाद ही स्कूल चलेंगे या बंद होंगे इसको लेकर कोई फैसला होगा। सरकारी स्तर पर रिव्यू करने के साथ ही हम यह भी देखेंगे कि महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुरूप है भी या नहीं है। इसी आधार पर अंतिम फैसला किया जायेगा।

गरीबों को क्वालिटी एजुकेशन देना नहीं चाहते शिक्षा मंत्री और आरएसएस

MOOKNAYAKMEDIA 29 1 300x195 भजनलाल सरकार की महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को बंद करने की साजिश, गरीबों को क्वालिटी एजुकेशन देना नहीं चाहते शिक्षा मंत्री और आरएसएससमकालीन भारत में राजनीतिक बदलाव के पीछे हिन्दुत्व की विचारधारा और उसके वाहक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निर्विवादित रूप से केन्द्रीय भूमिका है। इसने न सिर्फ संविधान में स्थापित वैज्ञानिक सोच को विकसित करने को निष्प्रभावी किया बल्कि वैकल्पिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोणों को भी बाधित करने का काम किया।

देश के भीतर दशकों से हो रहे ज़मीनी स्तर के बदलाव को आरएसएस के रहनुमा न समझ पाए हैं और न ही आज भी समझने की कोशिश कर रहे हैं। स्वभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि प्रगतिशीलता, बदलाव और क्रांतिकारी विचारधाराओं हाशिए पर डालने में आरएसएस को क्या मजा आता है ?

राजस्थान के शैक्षिक वातावरण में महत्वपूर्ण बदलाव उसके द्वारा गरीबों, मजलूमों और एससी एसटी ओबीसी जैसे हाशिए के लोगों को दी जाने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के रूप में इंग्लिश मीडियम स्कूलों के  बदलाव को एक परिणाम के रूप में देखा जाना चाहिए।

शैक्षणिक वातावरण और उस  के विस्तार के लिए तीन बातों की आवश्यकता होती है। पहला, उसकी वैज्ञानिक सोच जो लोगों के मस्तिष्क में अपील करती है। दूसरा, उस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जो मूल्य के रूप में लोगों के मन में असर डालता है और तीसरा, विकास के दौर में पिछड़े लोगों को देश के विकास की मुख्य धारा में भागीदारी सुनिश्चित करना है।

आरएसएस की विचारधारा की न्यूनता या श्रेष्ठता के प्रश्न को अलग रखते हुए शेष दोनों बातों पर यदि गौर करें तो हम पाएंगे कि राष्ट्रीयता के प्रश्न पर आरएसएस ने भारत के मूलवासी लोगों को उननी सांस्कृतिक जड़-ज़मीन से काटकर देखने की कोशिश की और बर्लिन (जर्मनी) में एडोल्फ हिटलर के प्रोपेगैंडा मंत्री जोसफ गोएबल्स के मापदंडों के आधार पर भारत को परखने की चेष्टा की, उन्हें निष्प्रभावी बनाने का काम किया

इंग्लिश स्कूलों को बंद करने की पटकथा आरएसएस ने तब ही लिख दी थी जब मदन दिलावर के हाथों में शिक्षा मंत्रालय दिया गया। आरएसएस ने शिक्षा महकमे में दिलावर को इसीलिए रखा कि उनसे अपनी मर्जी के अनुरूप कार्य करवाये जा सके। यही सब अब खुले रूप में किया जा रहा है और मंत्री चुप हैं जबकि इसका सबसे बड़ा नुकसान दलित – आदिवासी विद्यार्थियों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ेगा। 

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वस्तुतः राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और आरएसएस नहीं कदापि चाहते हैं कि एससी एसटी ओबीसी और गरीबों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया हो जबकि शैक्षिक असानता के रहते न तो वास्तविक स्वतंत्रता कायम हो सकती, न समता, स्वतंत्रता, समानता के बिना किसी सामाजिक भाईचारे की कल्पना ही की जा सकती है। 

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