केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की शर्तें, अरविंद केजरीवाल ने शर्त मान ली है, क्या जल्द मिल सकती है केजरीवाल को जमानत

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 07 मई 2024 | जयपुर – दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अरविंद केजरीवाल को जमानत दिए जाने की शर्तें रखीं। अदालत ने जमानत का विरोध कर रही ED से कहा कि चुनाव चल रहे हैं और केजरीवाल मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। चुनाव 5 साल में सिर्फ एक बार आते हैं। अदालत ने केजरीवाल से कहा कि हम आपको जमानत दे देते हैं तो आप ऑफिशियल ड्यूटी नहीं करेंगे। हम नहीं चाहते कि आप सरकार में दखल अंदाजी करें। अगर चुनाव नहीं होते तो अंतरिम जमानत का सवाल ही नहीं उठता था।

केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की शर्तें

MOOKNAYAKMEDIA 35 300x195 केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की शर्तें, अरविंद केजरीवाल ने शर्त मान ली है, क्या जल्द मिल सकती है केजरीवाल को जमानतकेजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- हम किसी फाइल पर साइन नहीं करेंगे। शर्त है कि LG किसी भी काम को इस आधार पर ना रोकें कि फाइल पर साइन नहीं है। ऐसा कुछ नहीं बोलूंगा, जो नुकसान पहुंचाने वाला हो।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री और आम आदमी में फर्क किया जाना सही नहीं है। राजनेताओं के लिए अलग कैटेगरी ना बनाएं। जनता के बीच गलत संदेश जाएगा। इस मामले पर सुनवाई लंच यानी 2 बजे के बाद भी जारी रहेगी।

कोर्ट का कमेंट और SG की दलील…

केजरीवाल की जमानत पर कोर्ट के 4 कमेंट
1. जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा- केजरीवाल कोई आदतन अपराधी नहीं हैं।
2. यह एक अभूतपूर्व परिस्थिति है। लोकसभा चुनाव जारी हैं। वो दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री हैं।
3. अगर चुनाव नहीं चल रहे होते तो अंतरिम जमानत का सवाल ही नहीं उठता था।
4. चुनाव 5 साल में सिर्फ एक बार होते हैं।

जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट की शर्त

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अगर जमानत दी जाती है तो केजरीवाल सरकारी काम में दखल नहीं देंगे। वो अपने आधिकारिक कार्य नहीं करेंगे। ऐसा हुआ तो हितों का टकराव पैदा होगा और हम यह नहीं चाहते।

जमानत के विरोध में ED की दलीलें

1. कोर्ट का नजरिया क्या है? आपको राजनेताओं के लिए अलग कैटेगरी नहीं बनानी चाहिए।
2. देश में इस वक्त 5 हजार केस हैं जिनमें सांसद शामिल हैं। इन सभी को जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए?
3. अगर कोई किसान जिसका बुवाई का सीजन चल रहा है, वो किसी सांसद से कम महत्वपूर्ण है?
4. जमानत पर रिहाई दी तो यह संदेश जाएगा कि केजरीवाल ने कुछ नहीं कियाा था, लेकिन उन्हें चुनाव से पहले गिरफ्तार कर लिया गया।
5. अगर उन्होंने सहयोग किया होता और 9 समन नजरंदाज ना किए होते तो शायद गिरफ्तारी ना होती।

अरविंद केजरीवाल ने शर्त मान ली है

केजरीवाल ने कहा- हम किसी फाइल पर साइन नहीं करेंगे। शर्त है कि LG किसी भी काम को इस आधार पर ना रोकें कि फाइल पर साइन नहीं है। ऐसा कुछ नहीं बोलूंगा, जो नुकसान पहुंचाने वाला हो।

3 मई की सुनवाई में कोर्ट रूम में क्या हुआ था…

इससे पहले 3 मई को हुई सुनवाई में दो घंटे की लंबी बहस के बाद बेंच ने कहा था कि मेन केस यानी जिसमें केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती दी है, इसमें समय लग सकता है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है, ताकि वे कैंपेन में हिस्सा ले सकें।

30 अप्रैल की सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने ED से 5 सवाल पूछे

  1. क्या बिना किसी न्यायिक कार्यवाही के विजय मदनलाल चौधरी या अन्य मामले में जो कहा गया है, उसके संदर्भ में आपराधिक कार्यवाही शुरू की जा सकती है? (जस्टिस खन्ना ने कहा कि केजरीवाल के मामले में अब तक कोई कुर्की नहीं हुई है। अगर हुई है तो ED को यह बताना होगा कि उनका संबंध कैसे था)
  2. मनीष सिसोदिया मामले में फैसले के दो हिस्से हैं- एक, जो उनके पक्ष में है, दूसरा, जो उनके पक्ष में नहीं है। केजरीवाल का मामला किस भाग में आता है?
  3. PMLA के सेक्शन-19 की व्याख्या कैसे की जाए, क्योंकि केजरीवाल जमानत के लिए आवेदन करने के बजाय गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ आ रहे हैं। यदि वे बाद का रास्ता अपनाते हैं तो उन्हें PMLA के सेक्शन-45 के तहत उच्च प्रावधानों का सामना करना पड़ेगा?
  4. मामले में कार्यवाही शुरू होने और कुछ समय बाद बार-बार शिकायत दर्ज होने के बीच का समय। (इस संबंध में यह बताया गया कि अंतर के गंभीर नतीजे होंगे। चूंकि धारा 8 न्यायिक प्रक्रिया के लिए 365 दिनों की अधिकतम समय सीमा निर्धारित करती है)
  5. गिरफ्तारी की टाइमिंग। चुनाव के पहले ऐसा क्यों किया?

29 अप्रैल की सुनवाई: केजरीवाल की तरफ से दी गईं दलीलें

  • 3 स्टेज होती हैं। दस्तावेज, विश्वास करने का कारण और आरोपी होना। गिरफ्तार करने का अधिकार होने का मतलब यह नहीं कि गिरफ्तार कर लें। आरोप साबित होना चाहिए, सिर्फ शक नहीं होना चाहिए। आपके पास पुख्ता या आरोपी साबित करने के सबूत होने चाहिए। कुछ आधार होना चाहिए, जो हमें नहीं पता।
  • केजरीवाल को CBI ने बुलाया, वे गए। ED के नोटिस का डिटेल में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे नहीं आ सकते। आप आज ये नहीं कह सकते हैं कि आप आए नहीं, इसलिए हमने गिरफ्तार कर लिया। ये मेरा अधिकार है कि मैं न जाऊं।
  • अगर कोई आरोपी कहता है कि मैं बयान नहीं दूंगा तो क्या आप कह सकते हैं कि आरोपी सहयोग नहीं कर रहा है, इसलिए उसे गिरफ्तार करते हैं? इन्होंने केजरीवाल को गिरफ्तार किया। सेक्शन 50 के तहत वहां बयान नहीं लिए गए। डेढ़ साल तक गिरफ्तारी नहीं की गई। मेरी बेल को नकार दिए जाने से मुझे घर आकर गिरफ्तार करने का आधार नहीं बन जाता।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- आपको ED ने जो नोटिस भेजे, आपने उन्हें नजर अंदाज क्यों किया। आप गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ यहां आए, आपने जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट क्यों नहीं गए। इस पर केजरीवाल के वकील सिंघवी ने कहा था कि गिरफ्तारी अवैध है इसलिए। ED के वकील एसवी राजू ने कहा कि इन्होंने पिछली कस्टडी का भी विरोध नहीं किया था।

15 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने ED को नोटिस देकर गिरफ्तारी पर जवाब मांगा

  • 15 अप्रैल को अरविंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED से 24 अप्रैल तक जवाब मांगा था। हलफनामे में ED ने कहा कि कई बार समन भेजे जाने के बावजूद उन्होंने एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया।
  • ED ने यह भी कहा कि केजरीवाल को किसी दुर्भावना या दूसरे कारणों से गिरफ्तार नहीं किया गया है। किसी अपराध की जांच एक ऐसा क्षेत्र है जो जांच एजेंसी के लिए रिजर्व है। उनकी गिरफ्तारी भी जांच का हिस्सा है।

क्या जल्द मिल सकती है केजरीवाल को जमानत

मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि अगर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी जाती है, तो उन्हें शासन पर संभावित प्रभाव से बचने के लिए किसी भी आधिकारिक कर्तव्यों को निष्पादित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

दिल्ली शराब नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 21 मार्च को की गई गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह टिप्पणी की। अदालत के सत्र में दोपहर 2 बजे इस मामले के लिए आधे घंटे का समय निर्धारित किया गया था, जिसमें रिहाई के बाद केजरीवाल द्वारा संभाली जा सकने वाली परिचालन जिम्मेदारियों के बारे में सवालों की जांच शामिल थी।

ED ने शराब नीति केस में केजरीवाल को 21 मार्च को अरेस्ट किया था। ED ने 22 मार्च को उन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने दिल्ली सीएम को 28 मार्च तक ED रिमांड पर भेजा, जो बाद में 1 अप्रैल तक बढ़ाई गई। कोर्ट ने 1 अप्रैल को उन्हें 15 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था।​​​​​​

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शराब नीति केस में केजरीवाल को इस साल 27 फरवरी, 26 फरवरी, 22 फरवरी, 2 फरवरी, 17 जनवरी, 3 जनवरी और 2023 में 21 दिसंबर और 2 नवंबर को समन भेज गया था। हालांकि, वे एक बार भी पूछताछ के लिए नहीं गए। निचली अदालत और हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

इस तरह चली थी बहस 

  • सुप्रीम कोर्ट : 15 मिनट बचे हैं.. ED अपनी केस फाइल दे
    -SG: अरविंद ने किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि इनके पास मंत्रालय नहीं है। केवल नियुक्ति पर हस्ताक्षर करते थे, मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है कि वही ये करते है, लेकिन बाद मैं हम कानून ले आए, इनके पास कुछ भी नही है।
    -सुप्रीम कोर्ट : अगर याचिकाकर्ता राहत चाहता है, तो हम क्या राहत पर विचार न करें?
    SG: लेकिन फिर आपको हर किसी की याचिका पर विचार करना होगा, चाहे वो किसी भी समूह से हो।
  • हम ये नहीं कह रहे कि नेताओं के लिए अलग कानून है।
    -SG तुषार मेहता : इन लोगों ने बड़ी चतुरता से याचिका दाखिल की है. ये गिरफ्तारी को चुनौती वाली है, लेकिन इसमें जमानत भी मांगी है।
  • जस्टिस दीपांकर दत्ता : ये अर्नब गोस्वामी केस में भी हुआ था।
    -जस्टिस खन्ना : अगर हम अंतिम आदेश जारी कर सकते हैं, तो फिर अंतरिम आदेश भी जारी कर सकते हैं।
    -जस्टिस खन्ना : हम इस पर जा रहे हैं कि A राजनेता है या नहीं…? हम ये देख रहे हैं कि चुनाव हो रहे हैं तो क्या व्यक्ति के पास असाधारण परिस्थिति का आधार है?
    -अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर फैसला सुरक्षित
  • एसजी: एक राजनेता होने के कारण उन्हें रिहा करना सही मिसाल नहीं है. उन्होंने बिना पोर्टफोलियो वाला मुख्यमंत्री बनना चुना और ऐसा कुछ लोगों को समायोजित करने के लिए किया गया है. यदि जमानत की अनुमति दी जाती है, तो क्या याचिका की अनुमति होने पर यह अपरिवर्तनीय नहीं होगा?
  • जस्टिस खन्ना: नहीं, नहीं, अपरिवर्तनीय नहीं होगा।
    -SG मेहता: जिन फैसलों का हवाला दिया जा रहा है वो सभी अंतिम आदेश थे। उनका कहना है कि यह मेरा मौलिक अधिकार है… लेकिन भोजन का अधिकार भी मौलिक अधिकार है। बड़ी संख्या में लोग जेल में सड़ रहे हैं। क्या आम आदमी का अधिकार कम है?
    -SG: कई फैसले हैं, जिसमें जमानत देते हुए अदालत ने राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने को मना किया है. अरविंद गंभीर मामले में आरोपी है।
    -SG: RP एक्ट कहता है की राइट टू वोट भी निलंबित हो जाता है, अगर आप न्यायिक हिरासत में रहते है तो।
  • सिंघवी: मैं रोज 10 फाइल पर हस्ताक्षर करता हूं।
  • सॉलिसिटर जनरल: अरविंद कोई फाइल नहीं करते है।
  • अभिषेक मनु सिंघवी: मैं एक बयान दूंगा कि वह किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। इस शर्त के साथ कि एलजी इस आधार पर कोई काम नहीं रोकेंगे कि मैंने किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • जस्टिस दत्ता – हम सिर्फ चुनाव के लिए अंतरिम बेल पर विचार कर रहे हैं। अगर चुनाव ना होते तो हम फैसला रिजर्व करते. हम केस की सुनवाई पूरी कर छुट्टियों से पहले फैसला नहीं दे सकते।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आपको चुनाव को लेकर अंतरिम जमानत पर सुनवाई कर रहे थे। लेकिन अगर आप मुख्य मुद्दे पर बहस करना चाहते है, तो आप करें. आज केवल 2.30 तक ही बेंच बैठी है। फिर मामले की सुनवाई गर्मियों की छुट्टियों के बाद करेंगे।
    -जस्टिस खन्ना: हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि अगर हम आपको अंतरिम जमानत पर रिहा करते हैं, तो हम नहीं चाहते कि आप आधिकारिक कर्तव्य निभाएं।
    -सुप्रीम कोर्ट, अगर हम आपको अंतरिम जमानत देते हैं और आप मुख्‍यमंत्री के तौर पर ऑफिशियल ड्यूटी करते है तो ये कनफ्लिक्ट हो।
    -जस्टिस खन्ना ने कहा, हम इस केस को तुरंत डिसाइड नहीं कर सकते। नेशनल चुनाव हर पांच साल बाद आते हैं. ये कोई फसल नहीं है, जो हर 6 महीने बाद बोई जाती हो। ये पूरी तरह अलग मामला है।
    -सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अंतरिम जमानत की सुनवाई का विरोध किया। उन्‍होंने कहा, कि उनके साथ आम आदमी की तरह बर्ताव हो। चुनाव में कैंपेन क्या ज्यादा जरूरी है. देश की जेलों में पांच हजार नेता बंद होंगे।
    जस्टिस खन्ना ने कहा कि चुनाव का मौसम है… ये असाधारण स्थिति है, वो दिल्ली के मुख्‍यमंत्री हैं. इनके खिलाफ कोई केस नहीं हैं।
    -सॉलिसिटर जनरल ने कहा- अगर एक किसान को अपने खेत की देखभाल करनी है और एक किराना दुकान के मालिक को अपनी दुकान पर जाना है, तो एक मुख्यमंत्री को आम आदमी से अलग कैसे माना जा सकता है? क्या हम राजनेताओं के एक वर्ग के लिए ए वर्ग के रूप में एक अपवाद बना रहे हैं। क्या चुनाव प्रचार उस व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण होगा जो किराना दुकान चलाना चाहता है।
  • जस्टिस खन्ना ने राजू से कहा, सारी सामग्री देखनी होगी. गिरफ्तारी के मानक बहुत ऊंचे हैं। आप विजय मदनलाल फैसले के विपरीत जा रहे हैं। IO को गिरफ्तारी करने से पहले विधायी उद्देश्य का पालन करना होगा।
  • ED के वकील ने कोर्ट में कहा- ये पॉलिटिकली मोटिवेटिड केस नहीं है. हमारे पास इसके पुख्ता सबूत हैं।
  • जस्टिस खन्ना ने ईडी से पूछा कि क्या राजनीतिक कार्यकारिणी भी नीति बनाने में शामिल थी? हमारी चर्चा का दायरा ईडी की धारा 19 के कार्यान्वयन तक है। क्या केजरीवाल की गिरफ्तारी में धारा 19 के प्रावधानों का पालन किया गया या नहीं! बस!! आप इस बारे में कोर्ट को बताएं!
  • ASG राजू ने कहा, हमारे पास गोवा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल के होटल खर्च का सबूत है। यह एक 7 सितारा भव्य होटल था। गोवा में ग्रैंड हयात और बिल का भुगतान उद्यमियों द्वारा किया गया था। हमारे पास इस आशय के दस्तावेजी सबूत हैं।
  • जस्टिस संजीव खन्ना ने पूछा-  बयानों में केजरीवाल का नाम पहली बार कब लिया गया?
  • ASG राजू : 23.02.2023 बुची बाबू के बयान में आया। हालांकि, उन्‍होंने कहा कि किसी को यह मानने की ज़रूरत नहीं है कि गवाह ने जो कुछ भी IO को बताया है वो सही है। वह जांच एजेंसी को गुमराह कर सकता है। इसलिए, जांच इस तरह से नहीं होनी चाहिए कि हम पहले आरोपी तक जाएं। इसमें कई बाधाएं हो सकती हैं।
  • ASG राजू ने कहा कि हमें पता चला कि अरविंद केजरीवाल गोवा चुनाव के दौरान गोवा में एक 7 सितारा होटल में रुके थे। उनके खर्च का कुछ हिस्सा उस व्यक्ति ने चुकाया था जिसने नकद पैसे लिए थे। यह राजनीति से प्रेरित मामला नहीं है। हम दिखा सकते हैं कि केजरीवाल ने 100 करोड़ की मांग की।
  • ED की ओर से ASG SV राजू बहस शुरू कर रहे हैं… उन्‍होंने हवाला के 100 करोड़ के लेनदेन के बारे में जानकारी दी।
  • जस्टिस खन्ना ने पूछा – आपने कहा था कि 100 करोड़ अपराध की आय है। ये 1100 करोड़ कैसे हो गया ? यह 2 या 3 वर्षों में 1100 करोड़ कैसे हो गई… यह रिटर्न  की एक अभूतपूर्व दर होगी।
    -एएसजी ने कहा कि 590 करोड़ थोक व्यापारी का मुनाफा है।
    -सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, अंतर लगभग 338 करोड़ था, पूरी चीज़ अपराध की आय नहीं हो सकती।
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