ACP क्राइम को सौंपी ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट फर्जी एनओसी मामले की जाँच, गुड़गांव पुलिस की कार्रवाई के बाद हुआ बड़ा खुलासा

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 07 मई 2024 | जयपुर – दिल्ली – SMS मेडिकल कॉलेज : प्रदेश के निजी अस्पतालों में गैर कानूनी तरीके से हुए ऑर्गन ट्रांसप्लांट अब अफसरों की गले की फांस बन गए हैं। चिकित्सा विभाग से जुड़े अफसरों की लापरवाही के कारण फर्जी एनओसी जारी होती रही और निजी अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट होते रहे।

ACP क्राइम को सौंपी ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट फर्जी एनओसी मामले की जाँच

MOOKNAYAKMEDIA 37 300x195 ACP क्राइम को सौंपी ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट फर्जी एनओसी मामले की जाँच, गुड़गांव पुलिस की कार्रवाई के बाद हुआ बड़ा खुलासाकिडनी ट्रांसफर की खबरें मीडिया में छपती रही लेकिन अफसरों ने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि बिना एनओसी जारी किए किडनी ट्रांसप्लांट कैसे हो रहे हैं। पिछले महीने जयपुर पुलिस ने फर्जी एनओसी जारी करने के मामले में सवाई मानसिंह अस्पताल के एक कर्मचारी के साथ निजी अस्पतालों के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। ये तीनों आरोपी फर्जी एनओसी जारी करने वाले गिरोह के मुख्य किरदार थे।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए फर्जी एनओसी जारी करने वाले मामले की जांच अब अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) करेंगे। मंगलवार को इस संबंध में राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी करते हुए ये जानकारी साझा की है।

इसमें लिखा है कि मानव अंग एवं उत्तक प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 के तहत एसीपी क्राइम को इस केस की जांच प्रभावी ढंग से करने के लिए सौंपी गई है। डॉ. रश्मि गुप्ता पहले से ही समुचित प्राधिकारी के रूप में जांच कर रही हैं। ऐसे में एसीपी क्राइम के समुचित प्राधिकारी नियुक्त होने से इस प्रकरण में आपराधिक दृष्टि से जुड़े पक्षों पर भी गहन जांच पड़ताल हो पाएगी।

इससे पहले 24 अप्रैल को राजस्थान सरकार ने अंग प्रत्यारोपण में संदिग्ध भूमिका के मद्देनजर जयपुर के मणिपाल अस्पताल को जारी रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल सर्टिफिकेट निलंबित कर दिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा के निर्देश के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा निजी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की गई।

एक सरकारी बयान के अनुसार, प्राधिकृत अधिकारी डॉ. रश्मि गुप्ता ने बताया कि मणिपाल अस्पताल को मानव अंगों के प्रत्यारोपण के लिए ‘ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एक्ट’ के तहत पंजीकरण एवं नवीनीकरण प्रमाण-पत्र जारी किए गए थे। विगत दिनों मानव अंग प्रत्यारोपण के लिए फर्जी एनओसी जारी होने का प्रकरण सामने आने के बाद इस मामले में फोर्टिस अस्पताल के कर्मचारी गिरिराज शर्मा को गिरफ्तार किया गया था।

शर्मा पूर्व में मणिपाल अस्पताल में भी कार्यरत था। मणिपाल अस्पातल में भी मानव अंग प्रत्यारोपण के लिए एनओसी प्राप्त करने में शर्मा की भूमिका सामने आई है। उल्लेखनीय है कि फर्जी एनओसी प्रकरण में इससे पूर्व जयपुर के फोर्टिस अस्पताल एवं ईएचसीसी अस्पताल का पंजीकरण एवं नवीनीकरण प्रमाण-पत्र निलंबित कर दिया गया था।

गुड़गांव पुलिस की कार्रवाई के बाद हुआ बड़ा खुलासा

Mooknayak Media Polity 300x300 ACP क्राइम को सौंपी ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट फर्जी एनओसी मामले की जाँच, गुड़गांव पुलिस की कार्रवाई के बाद हुआ बड़ा खुलासादरअसल पिछले महीने गुड़गांव पुलिस ने फर्जी तरीके से किडनी ट्रांसफर करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। इस गिरोह में बांग्लादेशी लोग भी जुड़े थे। इसी दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने जयपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए फर्जी एनओसी जारी करने वाले मामले का खुलासा किया।

एसीबी की जांच में पता चला कि लाखों रुपए लेकर हर महीने फर्जी तरीके से ऑर्गन ट्रांसप्लांट की एनओसी जारी की जाती थी। एनओसी जारी करने वाली कमेटी की पिछले दो साल में बैठक भी नहीं हुई और सैंकड़ों एनओसी जारी कर दी गई। इस प्रकरण में जयपुर के कुछ नामी अस्पताल भी लिप्त थे। एसीबी ने तीन निजी अस्पतालों के दस्तावेज जब्त किए हैं।

विदेशी नागरिकों को लगाई गई किडनी

एसीबी की जांच में सामने आया कि जयपुर के निजी अस्पतालों में कई विदेशी लोगों के किडनियां ट्रांसप्लांट की गई। किडनी डोनेट करने वाले ब्लड रिलेशन में नहीं थे। इसके बावजूद फर्जी एनओसी के जरिए ट्रांसप्लांट की अनुमति मिलती रही और गैर कानूनी तरीके से ऑर्गन ट्रांसप्लांट होते रहे। जांच में यह भी पता चला कि बांग्लादेश के कई लोगों की किडनियां अन्य देशों के लोगों को लगाई गई। इसके बदले उन्हें 4 से 5 लाख रुपए का भुगतान किया गया। फर्जी तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट में दलाल लाखों रुपए ऐंठते रहे।

अब इन अफसरों पर गिरने लगी गाज

फर्जी तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट होने और चिकित्सा विभाग के अफसरों के आंखें मूंदने पर सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। सरकार की ओर से इस पूरे प्रकरण की जांच करवाई गई और अफसरों की भूमिका की जांच कराई गई। जांच के दौरान फर्जी तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट होते रहने पर चिकित्सा विभाग के अफसरों को जिम्मेदार माना गया क्योंकि जिन अफसरों की जिम्मेदारी थी, वे सब चुप क्यों थे।

यह भी पढ़ें : डॉ. दीपक माहेश्वरी होंगे एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल

अब चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार को जांच रिपोर्ट भेजी है। साथ ही सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव बगरहट्टा, एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा और आरयूएचएस के वीसी डॉ. सुधीर भंडारी से इस्तीफा मांगा गया है।

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