ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, EWS को केवल सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित पदों में से ही 10 प्रतिशत आरक्षण होगा मान्य

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 07 मई 2024 | जयपुर – दिल्ली – जबलपुर (ईडब्ल्यूएस आरक्षण) : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस यानि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। इसके जरिये न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने साफ कर दिया कि ईडब्ल्यूएस को महज सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित पदों में से ही 10 प्रतिशत आरक्षण मान्य होगा, कुल पदों में से नहीं। इस टिप्पणी के साथ ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिकाएं निरस्त कर दी गईं।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

MOOKNAYAKMEDIA 40 300x196 ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, EWS को केवल सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित पदों में से ही 10 प्रतिशत आरक्षण होगा मान्यशहडोल निवासी अंकुश मिश्रा, कटनी निवासी पुष्पेंद्र सिंह राजपूत के अलावा रायसेन, रीवा, राजगढ़, सीधी, छिंदवाड़ा आदि जिलों के निवासी ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों की ओर से याचिका दायर कर बताया गया कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने लेबोरेटरी टेक्निशियन के 219 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ईडब्ल्यूएस कोटा को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए कोटा सामान्य सीटों के 10% तक सीमित है न कि कुल रिक्तियों के 10% तक, जिनके लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की जाती है। साथ ही इससे संबंधित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।

आरक्षण को लेकर लगाई थी याचिका

मामले पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 15(6) तथा 16 (6) की स्पष्ट व्याख्या करते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था दी गई है। ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लाभ से ओबीसी, एससी व एसटी वर्ग को अलग रखा गया है, इसलिए कुल विज्ञापित पदों में से 10 प्रतिशत पद ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित किया जाना संविधान के अनुच्छेद 16 (6) के प्रविधान से असंगत है।

दरअसल, अभ्यर्थी अंकुश मिश्रा, पुष्पेद्र और अन्य की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने कहा कि प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) ने ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित सीटों की गणना सही की थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पीईबी ने लैब टेक्नीशियन के 219 पदों के लिए विज्ञापन दिया था। उनका तर्क था कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए 10% आरक्षण के साथ, 22 पद उनके लिए आरक्षित होने चाहिए थे, लेकिन केवल चार लोगों को ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत नियुक्ति दी गई।

EWS को केवल सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित पदों में से ही 10 प्रतिशत आरक्षण होगा मान्य

याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 219 रिक्तियों में से 122 पद ओबीसी, 46 एससी और 13 एसटी के लिए आरक्षित थे अदालत ने हाल ही में माना कि पीईबी द्वारा ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए 4 सीटें आरक्षित करना सही था और याचिका खारिज कर दी। यह याचिकाकर्ताओं के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। साथ ही हाईकोर्ट ने फैसले से ईडब्ल्यूएस को लेकर भ्रांतियां भी दूर कर दी है। बहस के दौरान दलील दी गई कि 10 प्रतिशत आरक्षण के तहत ईडब्ल्यूएस के लिए 22 पद आरक्षित रखे जाने थे, लेकिन केवल चार पद ही निर्धारित रखे गए।

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इस वजह से याचिकाकर्ताओं का नाम मेरिट सूची में होने के बावजूद उनका चयन नहीं हो सका। इस मामले में कुल 219 पदों में से 122 ओबीसी, 46 एसटी और 13 एससी वर्ग के लिए आरक्षित रखे गए हैं। इस तरह शेष अनारक्षित (सामान्य) के 38 पदों में से 10 प्रतिशत यानि चार पद ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित करना पूरी तरह वैधानिक है।

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