प्लाज्मा खरीदने वालों का नेटवर्क खंगालेगी पुलिस, जयपुर के जेके लोन अस्पताल की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी मामला

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 08 मई 2024 | जयपुर – दिल्ली – जेके लोन अस्पताल : जयपुर के जेके लोन अस्पताल की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी किया जाता था। प्लाज्मा की चोरी ब्लड बैंक का लैब टेक्नीशियन करता था। अस्पताल प्रशासन ने उसे प्लाज्मा चोरी करता पकड़ा है। आरोपी की कार से प्लाज्मा के 76 बैग बरामद हुए हैं। मामले की जांच के लिए 5 सदस्यों की कमेटी बनाई गई है।

प्लाज्मा खरीदने वालों का नेटवर्क खंगालेगी पुलिस

MOOKNAYAKMEDIA 44 300x195 प्लाज्मा खरीदने वालों का नेटवर्क खंगालेगी पुलिस, जयपुर के जेके लोन अस्पताल की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी मामलाप्लाज्मा एक चमकीला पीला पदार्थ है जो बाकी रक्त से अलग होता है। प्लाज्मा में पानी, लवण और एंजाइम होते हैं। प्लाज्मा का मुख्य कार्य पोषक तत्वों, हार्मोन और प्रोटीन को शरीर के उन हिस्सों तक पहुंचाना है, जिनकी उन्हें जरूरत है। कोशिकाएं अपने अपशिष्ट उत्पादों को भी प्लाज्मा में जमा करती हैं।

बता दें कि प्लाज्मा बहुत मुश्किल से उपलब्ध होता है। आमतौर पर प्लाज्मा गंभीर बीमारियों के मरीज के काम में ही आता है। इसकी वजह से इसकी कीमत 3500 से 4000 प्रति लीटर तक होती है। प्लाज्मा हमेशा डॉक्टरों की राय के बाद ही मरीज को चढ़ाया जाता है, ऐसे में इसकी उपलब्धता काफी कम होती है।

ऐसे में पुलिस अब आरोपी कृष्णकांत को हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी। इसके बाद पूछताछ के आधार पर पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करेगी। इस दौरान प्लाज्मा खरीदने और बेचने के नेटवर्क में कौन कौन लोग शामिल है। पुलिस उन सब आरोपियों के बारे में मालूम करेगी, जो इस गौरखधंधे में शामिल है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर के जेके लोन अस्पताल से प्लाज्मा चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। यहां की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी किया जा रहा था। ब्लड बैंक का लैब टेक्नीशियन लंबे समय से प्लाज्मा चोरी कर रहा था। उसे प्लाज्मा चोरी करते हुए पकड़ा गया है। उसकी कार से प्लाज्मा के 76 बैग बरामद हुए हैं। इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन ने पुलिस से कोई शिकायत नहीं की है। इस पूरे मामले में चिकित्सा एसीएस शुभ्रा सिंह ने रिपोर्ट मांगी है।

प्लाज्मा चोरी करने वाले आरोपी लैब टेक्नीशियन को ब्लड बैंक से हटा दिया गया है। आरोपी काफी समय से प्लाज्मा चोरी कर उन्हें बेच रहा था। जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। उससे जानकारी ली जा रही है कि अस्पताल से चोरी किए गए प्लाज्मा को वह कहां बेचता था। इतनी बड़ी संख्या में प्लाज्मा चोरी होने पर ब्लड बैंक के स्टॉक वेरिफिकेशन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

लैब टेक्नीशियन करता था प्लाज्मा चोरी

जेके लोन अस्पताल की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी करते लैब टेक्नीशियन कृष्ण कांत कटारिया को पकड़ा है। उसकी कार से काली पोलीथिन में प्लाज्मा के 76 बैग बरामद किए हैं। वह काफी दिनों से प्लाज्मा की चोरी करता था। बीते दिन उसे अस्पताल की ब्लड बैंक से प्लाज्मा के बैग चोरी करते पकड़ा था। शक होने पर अस्पताल प्रशासन ने उसे पकड़ लिया। जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने प्लाज्मा चुराने की बार कबूल की। दोषी पाए जाने पर उसे ब्लड बैंक से हटा दिया गया।

जयपुर के जेके लोन अस्पताल की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी मामला

plasma donation 260x300 प्लाज्मा खरीदने वालों का नेटवर्क खंगालेगी पुलिस, जयपुर के जेके लोन अस्पताल की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी मामलाइस मामले में अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर कैलाश मीणा ने जांच की बात कही है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि लैब टेक्नीशियन काफी समय से अस्पताल की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी कर रहा था। इस मामले में जांच की जा रही है. इसके लिए पांच सदस्यों की कमेटी बनाई गई है। 5 सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता अस्पताल के सीनियर प्रोफेसर डॉक्टर राम बाबू शर्मा कर रहे हैं।

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अस्पताल प्रशासन आरोपी लैब टेक्नीशियन से पूछताछ कर रहा है। इस मामले में कोई पुलिस से शिकायत नहीं की गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी। मामले में चिकित्सा एसीएस शुभ्रा सिंह ने जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश करने की बात कही है।

कई बीमारियों के काम आता है प्लाज्मा

रक्तदान किए गए खून से प्लाज्मा निकाला जाता है। यह कई गंभीर बीमारियों में काम आता है। इसकी सबसे ज्यादा मांग डेंगू मरीजों के उपचार के लिए होती है। प्लाज्मा प्राइवेट ब्लड बैंक से 4 से 5 हजार रूपये तक मिलता है। डेंगू के प्रकोप के वक्त यह 10 से 15 हजार रूपये तक बिक जाता है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में प्लाज्मा निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

अस्पताल का पूरा प्रशासन शक के घेरे में 

प्लाज्मा गंभीर बीमारियों के मरीजों के काम आता है और डॉक्टरों की राय के बाद ही मरीजों को चढ़ाया जाता है। इसलिए अब अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में है की क्या इतने बड़े अस्पताल के ब्लड बैंक में स्टॉक वेरिफिकेशन की कोई व्यवस्था नहीं थी? इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन के रवैए पर कई सवाल उठते हैं।

अस्पताल ने पुलिस में नहीं दर्ज करवाई रिपोर्ट 

आखिर मामले का खुलासा होने के बाद भी अधीक्षक ने पुलिस में मामला क्यों नहीं दर्ज कराया? प्लाज्मा की अक्सर कमी रहती है ऐसे में ब्लड बैंक प्लाज्मा का रिकॉर्ड क्यों नहीं रख रहा था? 76 बैग का स्टॉक बहुत बड़ा होता है। क्या अकेले टेक्नीशियन इसमें संलिप्त था? सरकारी अस्पतालों में प्लाज्मा फ्री में मिलता है जबकि बाहर इसकी रेट 3000 से ₹4000 तक की है। इसलिए सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आरोपी प्लाज्मा को निजी ब्लड बैंक की अस्पतालों में बेच रहा था?

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