केजरीवाल की जमानत से मोदी और इडी को बड़ा झटका, चुनाव प्रचार कर सकेंगे केजरीवाल, सब कुछ 11 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 10 मई 2024 | दिल्ली – जयपुर – मुंबई (हिंदू सामाजिक और जाति व्यवस्था)दिल्ली शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल को शीर्ष अदालत ने आज 1 जून तक अंतरिम राहत दे दी है। शीर्ष अदालत से जमानत मिलने के बाद केजरीवाल चुनाव प्रचार कर सकेंगे। बता दें कि शराब नीति केस में दिल्ली के मुख्यमंत्री को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। 1 अप्रैल से वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।

‘अरविंद केजरीवाल दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री हैं। वो कोई आदतन अपराधी नहीं हैं। यह एक असाधारण स्थिति है। चुनाव 5 साल में एक बार होता है। यह फसल की कटाई जैसा नहीं है कि हर 4-6 महीने में होगी। उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा किए जाने पर प्राथमिकता से विचार करना चाहिए।’

केजरीवाल की जमानत से मोदी और इडी को बड़ा झटका

MOOKNAYAKMEDIA 61 300x195 केजरीवाल की जमानत से मोदी और इडी को बड़ा झटका, चुनाव प्रचार कर सकेंगे केजरीवाल, सब कुछ 11 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगेसुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने मंगलवार को ये टिप्पणी की थी। उसी वक्त केजरीवाल को अंतरिम जमानत के संकेत मिल गए थे। शुक्रवार यानी 10 मई की दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी। उन्हें 2 जून को सरेंडर करना होगा। हालांकि मेन केस पर सुनवाई चलती रहेगी, जिसमें केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती दी है।

केजरीवाल को आखिर बिना मांगे अंतरिम जमानत कैसे मिली, अंतरिम जमानत क्या होती है, ईडी ने कौन से तर्क दिए जो सुप्रीम कोर्ट में नहीं टिके, क्या चुनाव प्रचार करना संवैधानिक अधिकार है;  सब कुछ 10 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे…

चुनाव प्रचार कर सकेंगे केजरीवाल

सवाल-1: केजरीवाल अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट गए थे, फिर अंतरिम जमानत कैसे मिल गई?

जवाबः ED ने शराब नीति केस में केजरीवाल को 21 मार्च को अरेस्ट किया था। ED ने 22 मार्च को उन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने दिल्ली सीएम को 28 मार्च तक ED रिमांड पर भेजा, जो बाद में 1 अप्रैल तक बढ़ाई गई। कोर्ट ने 1 अप्रैल को उन्हें 15 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया और ये मियाद बढ़ती जा रही है।

इस दौरान केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल को उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद की टाइमलाइन…

  • 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने ED को नोटिस देकर गिरफ्तारी पर जवाब मांगा। हलफनामे में ED ने कहा कि कई बार समन भेजे जाने के बावजूद उन्होंने एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया।
  • 29 अप्रैल की सुनवाई में केजरीवाल की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें दी। गिरफ्तार करने का अधिकार होने का मतलब यह नहीं कि गिरफ्तार कर लें। आरोप साबित होना चाहिए, सिर्फ शक नहीं होना चाहिए।
  • 29 अप्रैल को कोर्ट ने केजरीवाल से पूछा- आप गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ यहां आए, आप जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट क्यों नहीं गए? इस पर केजरीवाल के वकील सिंघवी ने कहा था कि गिरफ्तारी अवैध है इसलिए।
  • 30 अप्रैल की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से कई सवाल पूछे। PMLA के सेक्शन-19 की व्याख्या कैसे की जाए, क्योंकि केजरीवाल जमानत के लिए आवेदन करने के बजाय गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ आ रहे हैं। गिरफ्तारी की टाइमिंग। चुनाव के पहले ऐसा क्यों किया?
  • 3 मई को हुई सुनवाई में दो घंटे की लंबी बहस के बाद बेंच ने कहा था कि मेन केस यानी जिसमें केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती दी है, इसमें समय लग सकता है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है, ताकि वे कैंपेन में हिस्सा ले सकें।
  • 7 मई को केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर बहस हुई और सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों पर बात की। 10 मई को कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी।

सवाल-2: अंतरिम जमानत क्या है, ये सामान्य जमानत से कैसे अलग होती है?

जवाबः सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक संविधान में जीवन का अधिकार सबसे बड़ा है। उसके अनुसार निर्दोष व्यक्ति को बेवजह जेल में नहीं रखा जाना चाहिए। इसलिए गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत में रिहा करने के लिए सीआरपीसी की धारा 437 और 439 में कानूनी प्रावधान हैं।

भारतीय दंड संहिता के मुताबिक, किसी आरोपी या दोषी को तीन तरह से जमानत दी जा सकती है…

1. अग्रिम जमानत या एंटीसिपेटरी बेल: अगर किसी व्यक्ति को आशंका है कि उसे पुलिस गिरफ्तार कर सकती है तो वह सीआरपीसी की धारा 438 के तहत एडवांस में बेल यानी अग्रिम जमानत ले सकता है। यह केवल वही व्यक्ति दायर कर सकता है जिसे जिसे पता है कि उसे गैर-जमानती अपराध के लिए पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है।

2. नियमित जमानत या रेगुलर बेल: यदि कोई व्यक्ति पुलिस द्वारा गिरफ्तार या पुलिस हिरासत में है तो वह सीआरपीसी की धारा 437 और 439 के तहत जमानत याचिका दायर कर सकता है।

3. अंतरिम जमानत या इंटेरिम बेल: नियमित जमानत की अर्जी और फैसले में विलम्ब की स्थिति में सक्षम अदालत अंतरिम बेल दे सकती है। सुनवाई के बाद यदि नियमित बेल की अर्जी अस्वीकृत हो जाती है तो फिर अंतरिम बेल भी रद्द मानी जाती है। जमानत देते समय कोर्ट कुछ शर्तें लगा सकता है जिनका आरोपी को पालन करना होगा। जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपी को बिना वारंट गिरफ्तार किया जा सकता है।

लाल कमलेन्द्र प्रताप सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उचित मामलों में अंतिम जमानत आवेदन के निपटारे तक अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए, क्योंकि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी और हिरासत से उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है। केजरीवाल के जेल में होने की वजह से उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल कैंपेनिंग कर रही हैं।

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सवाल-3: केजरीवाल की अंतरिम जमानत की शर्तें क्या हैं, वो क्या कर सकते हैं क्या नहीं?

जवाबः सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत के लिए 4 प्रमुख शर्तें रखी हैं…

  • इस दौरान वो मुख्यमंत्री कार्यालय और दिल्ली सचिवालय नहीं जाएंगे।
  • किसी सरकारी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, जब तक लेफ्टिनेंट गवर्नर के अप्रूवल के लिए वो जरूरी न हो।
  • मौजूदा केस पर किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं करेंगे।
  • मौजूदा केस से जुड़े किसी गवाह से नहीं मिलेंगे और न इससे जुड़े फाइल देखेंगे।

सवाल-4: ईडी के वकीलों ने केजरीवाल की अंतरिम बेल के विरोध में क्या-क्या तर्क दिए?

जवाबः ईडी ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इससे आम आदमी निराश होगा कि कैंपेनिंग करना कोई लग्जरी है। ईडी ने कहा कि केजरीवाल ने 9 बार हमारे समन को दरकिनार किया। ईडी ने ये भी कहा कि जमानत की याचिका सुप्रीम कोर्ट से पहले ट्रायल कोर्ट के सामने जाना चाहिए।

सवाल-5: ईडी के तर्कों पर केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या दलीलें दी?

जवाबः ED की तरफ से ASG एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केजरीवाल को गिरफ्तार करने का निर्णय सिर्फ जांच अधिकारी नहीं, बल्कि एक स्पेशल जज द्वारा भी लिया गया था। दिल्ली के CM गिरफ्तार नहीं किए जाने को लेकर हाईकोर्ट भी गए थे। लेकिन कोर्ट ने दस्तावेजों को देखने के बाद गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

इसके जवाब में केजरीवाल की जमानत और गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में पांच बड़े तर्क दिए…

सवाल-6: केजरीवाल को अंतरिम बेल मामले में कानूनी सवाल और पेचीदगी क्या हैं?

जवाब: विराग गुप्ता के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम बेल देने की मंशा के बाद कई नये सवाल खड़े हो रहे हैं? क्या नेताओं को अलग विशिष्ट दर्जा दिया जा सकता है? क्या पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम बेल मिल सकती है? जमानत की अर्जियों पर जिला अदालतों की बजाए सुप्रीम कोर्ट में लंबी बहस से मुख्य मामलों का ट्रायल कोर्ट में निर्धारण कैसे होगा?

अंतरिम बेल के आदेश में ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स के तहत केजरीवाल को मुख्यमंत्री के अधिकारों से वंचित करने से नई चुनौतियां आ सकती हैं। अगर जेल से निकलने के बावजूद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद का उत्तरदायित्व नहीं निभा सकते तो क्या उनकी जगह नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए? विराग कहते हैं कि अंतरिम बेल से ऐसे अनेक सवाल उठे हैं, जिनका परम्परागत कानून की किताबों में फिलहाल कोई जवाब नहीं है।

सवाल-7: क्या इस फैसले का असर अमृतपाल जैसे दूसरे आरोपियों पर भी पड़ सकता है?

जवाब: संजय सिंह को जमानत के समय कोर्ट ने कहा था कि इसका असर अन्य मामलों में नहीं होगा। उसी तरह से केजरीवाल की अंतरिम जमानत से दूसरे आरोपियों को जमानत मिलने में विशेष मदद नहीं मिलेगी। दरअसल, खालिस्तानी अमृतपाल सिंह ने भी चुनाव प्रचार के लिए जमानत की गुहार लगाई है।

सवाल-8: क्या चुनाव प्रचार में शामिल होना मौलिक या संवैधानिक अधिकार है?

जवाब: सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक संविधान के भाग-3 में मौलिक अधिकारों का जिक्र है। 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी भारतीय नागरिकों को वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने का अधिकार है।

25 साल से ज्यादा के लोगों को जिनका नाम वोटर लिस्ट में हैं, उन्हें MLA/MP का चुनाव लड़ने का अधिकार है। 2 साल से ज्यादा सजायाफ्ता लोगों को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। जेल में बंद दो साल से कम सजा वाले लोग चुनाव लड़ सकते हैं। जेल में बंद अंडरट्रायल कैदियों को वोट डालने का अधिकार नहीं है। चुनाव प्रचार में शामिल होना मौलिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है।

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सवाल-9: चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दिया जाना क्या समानता और कानून के लिहाज से सही है?

जवाब: जमानत याचिका के निपटारे में विलंब होने की स्थिति में अंतरिम जमानत का नियम बनाया गया है। ED के हलफनामे से साफ है कि चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देना गलत है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुसार नेताओं को एक अलग खास वर्ग का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।

इस फैसले के बाद मानवीय आधार पर जरूरतमंद कैदी अंतरिम जमानत की अर्जियां डाल सकेंगे। अगर सामान्य लोगों को जीवन के अधिकार के तहत अंतरिम जमानत नहीं मिलती तो फिर नेताओं को अंतरिम जमानत के लिए VIP दर्जा देना समानता और कानून के शासन के खिलाफ होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल के मामले को असाधारण माना है।

सवाल-10: अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी मामले में आगे क्या हो सकता है?

जवाबः सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को सिर्फ अंतरिम जमानत दी है। केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी। जस्टिस संजीव खन्ना के कहा है कि एक हफ्ते में आर्गुमेंट खत्म करके फैसला सुनाने की कोशिश करेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट में तीन बातें हो सकती हैं- पहली, केजरीवाल की गिरफ्तारी को अवैध कर दे, दूसरी- केजरीवाल की गिरफ्तारी वैध साबित हो जाए या तीसरा- सुप्रीम कोर्ट मामले को निचली अदालत में भी भेज सकता है।

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दिल्ली में छठे चरण में 25 मई को मतदान

बता दें कि दिल्ली की सभी सातों सीटों पर छठे चरण में 25 मई को मतदान है। कांग्रेस इस बार दिल्ली की तीन सीटों पर जबकि आम आदमी पार्टी राजधानी की चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने उत्तर पूर्वी दिल्ली से कन्हैया कुमार, उत्तर पश्चिम दिल्ली से उदित राज और चांदनी चौक से जेपी अग्रवाल को टिकट दिया है। वहीं AAP ने नई दिल्ली से सोमनाथ भारती, दक्षिणी दिल्ली से सहीराम पहलवान, पश्चिमी दिल्ली से महाबल मिश्रा और पूर्वी दिल्ली से कुलदीप कुमार को उम्मीदवार बनाया है।

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31 मार्च को INDIA गठबंधन की एक रैली में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध का बैनर लहराता समर्थक। (Photo: AFP)

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