दाभोलकर हत्याकांड में पुणे कोर्ट द्वारा 11 साल बाद दो लोगों को उम्रकैद, बम बनाने में भी एक्सपर्ट है शूटर दाभोलकर हत्याकांड की पूरी कहानी

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 11 मई 2024 | दिल्ली – जयपुर – पुणे (दाभोलकर हत्याकांड फैसला)महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के प्रमुख नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में 11 साल बाद शुक्रवार (10 मई) को कोर्ट का फैसला आया है। पुणे में CBI की स्पेशल कोर्ट के एडिशनल सेशन जज पीपी जाधव ने आरोपी सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

दाभोलकर हत्याकांड में पुणे कोर्ट द्वारा 11 साल बाद दो लोगों को उम्रकैद

MOOKNAYAKMEDIA 62 300x195 दाभोलकर हत्याकांड में पुणे कोर्ट द्वारा 11 साल बाद दो लोगों को उम्रकैद, बम बनाने में भी एक्सपर्ट है शूटर दाभोलकर हत्याकांड की पूरी कहानीहत्याकांड में कुल 5 आरोपी थे। इनमें डॉ विरेंद्र सिंह तावड़े, विक्रम भावे और संजीव पुनालेकर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। इनमें तावड़े, अंदुरे और कलस्कर जेल में हैं, जबकि पुनालेकर और भावे जमानत पर हैं। 20 अगस्त, 2013 को पुणे के महर्षि विट्ठल रामजी ब्रिज पर दो बाइक सवार अपराधियों ने दाभोलकर की गोली मारकर हत्या की थी।

घटना के वक्त दाभोलकर सुबह की सैर के लिए घर से निकले थे। उनपर पांच गोलियां चलाई गईं थीं। वीरेंद्र तावड़े पर दाभोलकर की हत्या की ​​साजिश रचने का आरोप था। वह हत्याकांड का मास्टरमाइंड माना जा रहा था। नरेंद्र दाभोलकर मर्डर केस में सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को दोषी पाया गया है।

दाभोलकर के बाद अगले 4 साल में 3 और हत्याएं हुईं

नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में हत्या की गई थी, लेकिन इस केस की गुत्थी तब सुलझी, जब कर्नाटक पुलिस ने गौरी लंकेश मर्डर केस का इन्वेस्टिगेशन शुरू किया। गौरी लंकेश की 5 सितंबर, 2017 को हत्या कर दी थी। कर्नाटक में एक एसआईटी बनाई गई, जो न सिर्फ गौरी लंकेश मर्डर की जांच कर रही थी, बल्कि उसे एमएम कलबुर्गी की हत्या का इन्वेस्टिगेशन भी सौंपा गया था।

कलबुर्गी का 30 अगस्त, 2015 को कत्ल किया गया था। गोविंद पानसरे का महाराष्ट्र में 16 फरवरी, 2015 को मर्डर कर दिया गया था। काफी लोगों का मानना है कि कर्नाटक एसआईटी ने अपनी जांच में महाराष्ट्र पुलिस और सीबीआई से नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे मर्डर से भी जुड़े इनपुट्स शेयर किए। यही नहीं, उसी दौरान नालासोपारा और औरंगाबाद में मिले आर्म्स केस में शामिल लोगों के बारे में भी जानकारियां शेयर कीं।

इसके बाद सितंबर 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। CBI को शक था कि दाभोलकर और अन्य तीन हत्याओं में शामिल अपराधी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। 20 अगस्त, 2013 को पुणे के महर्षि विट्ठल रामजी ब्रिज पर मॉर्निंग वॉक के निकले दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

बम बनाने में भी एक्सपर्ट है शूटर दाभोलकर हत्याकांड की पूरी कहानी

पुणे पुलिस ने दाभोलकर हत्या मामले की शुरुआती जांच की थी। 2014 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जांच करने के आदेश दिए। CBI ने 10 जून, 2016 को मामले में पहली गिरफ्तारी करते हुए ENT सर्जन डॉ वीरेंद्र सिंह तावड़े को पकड़ा था।

तावड़े को 2015 में पानसरे हत्याकांड मामले में पहले भी गिरफ्तार किया गया था। CBI ने 2016 में बताया था कि दाभोलकर और पानसरे की हत्या में एक ही बाइक और हथियार का इस्तेमाल किया गया था। वीरेंद्र तावड़े हिंदू दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था से जुड़ा था। यह संस्था दाभोलकर के संगठन महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के कामों का विरोध करती थी। CBI ने दावा किया कि तावड़े ने दाभोलकर की हत्या की साजिश रची थी।

 1715324309 दाभोलकर हत्याकांड में पुणे कोर्ट द्वारा 11 साल बाद दो लोगों को उम्रकैद, बम बनाने में भी एक्सपर्ट है शूटर दाभोलकर हत्याकांड की पूरी कहानी2018 में CBI ने दोनों शूटरों को पकड़ा CBI ने 6 सितंबर 2016 को दाखिल अपनी चार्जशीट में सनातन संस्था के दो भगोड़े सदस्यों सारंग अकोलकर और विनय पवार को शूटर बताया। हालांकि, अगस्त 2018 में CBI ने सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को दाभोलकर को गोली मारने के आरोप में गिरफ्तार किया।

इसके कारण CBI की जांच विवादों में आ गई। आरोपियों का पक्ष रख रहे एक वकील वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने शूटरों की पहचान को लेकर CBI की जांच में लापरवाही पर सवाल उठाया था। महाराष्ट्र एटीएस ने साल 2018 में नालासोपारा में छापेमारी के दौरान कलस्कर को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान कलस्कर ने अपना अपराध कबूल किया। इसके बाद औरंगाबाद से सचिन अंदुरे की गिरफ्तारी हुई।

CBI ने 13 फरवरी 2019 को कलस्कर और अंदुरे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसमें बताया किया कि कलस्कर और अंदुरे ने दाभोलकर को गोली मारी थी। गौरी लंकेश मर्डर केस के मुख्य आरोपी अमोल काले ने अंदुरे को हमले के लिए पिस्तौल और दो-पहिया गाड़ी मुहैया कराई थी।

CBI ने 2019 में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया

जांच एजेंसी ने 26 मई 2019 को सनातन धर्म से जुड़े वकील संजीव पुनालेकर और उसके साथी विक्रम भावे को गिरफ्तार किया। इन दोनों पर साजिशकर्ताओं का साथ देने के आरोप लगे। इस तरह दाभोलकर केस में 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

पुनालेकर ने कलस्कर को हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्तौल को ठिकाने लगाने की सलाह दी थी। कलस्कर ने ठाणे में एक खाड़ी में पिस्तौल फेंकी थी। भावे ने शूटरों के लिए इलाके की रेकी की थी।पुनालेकर को 5 जुलाई 2019 को जमानत पर रिहा किया गया था।

आरोपियों पर IPC की धारा 120 बी (साजिश), 302 (हत्या), आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम या UAPA की धारा 16 (आतंकवादी गतिविधियों के लिए सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुणे सेशन कोर्ट ने 15 सितंबर, 2021 को सभी पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।

पांच लाख रुपये के जुर्माने की सजा

untitled design 2024 05 10t130742192 1715326673 दाभोलकर हत्याकांड में पुणे कोर्ट द्वारा 11 साल बाद दो लोगों को उम्रकैद, बम बनाने में भी एक्सपर्ट है शूटर दाभोलकर हत्याकांड की पूरी कहानीलोगों से खचाखच भरे अदालत कक्ष में आदेश को पढ़ते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायालय) पी.पी. जाधव ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने सचिन अंदुरे और शरद कालस्कर के खिलाफ हत्या तथा साजिश के आरोप साबित कर दिए हैं और उन्हें आजीवन कारावास तथा पांच लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मुताबिक अंदुरे और कालस्कर ने दाभोलकर पर गोली चलाई थी। अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी कान-नाक-गला (ईएनटी) रोग सर्जन वीरेंद्र सिंह तावड़े, मुंबई के वकील संजीव पुनालेकर और उनके सहयोगी विक्रम भावे को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

9 साल से था सीबीआई के पास केस

दाभोलकर मर्डर की जांच पिछले 9 साल से सीबीआई कर रही थी, लेकिन 11 साल पहले जब यह वारदात हुई थी, तब यह केस पुणे पुलिस के पास था। उस वक्त पुणे के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी का स्टिंग हुआ था। इसमें उन्होंने एक भूत से हत्यारे का पता पूछने की कोशिश की बात की थी। इस कारण उन्हें पद से हटा दिया गया था। बाद में यह केस महाराष्ट्र एटीएस को ट्रांसफर कर दिया गया था। राकेश मारिया उन दिनों एटीएस चीफ थे। एटीएस ने उन दिनों कुछ लोगों को डिटेन भी किया था, लेकिन जब एटीएस भी इस केस की गुत्थी सुलझा नहीं पाई, तो केस फिर सीबीआई को दे दिया गया।

बम बनाने में भी एक्सपर्ट है शूटर

शुक्रवार को कनविक्ट हुआ शूटर शरद कालस्कर गौरी लंकेश मामले में आरोपी नंबर 10 है। गौरी केस की चार्जशीट के अनुसार, गौरी की हत्या की साज़िश रचने और उसे अंजाम देने के लिए 2016 में पहली बैठक बेलगावी के एक कमरे में हुई थी। वहां जहां शरद कालस्कर भी रुका था। कहा जाता है कि शरद कालस्कर ने एक शूटर को बेलगावी के पास एक जंगल में गोलियां चलाने की ट्रेनिंग भी दी थी। वह बम बनाने में भी एक्सपर्ट है।

शरद कालस्कर के बारे में वकील ने क्या कहा

दाभोलकर मर्डर में जिस शूटर शरद कालस्कर को कनविक्ट किया किया गया, गोविंद पानसरे हत्याकांड में उसकी भूमिका थी। इसका हवाला देते हुए सरकारी वकील शिवाजी राणे ने कुछ साल पहले महाराष्ट्र की एक कोर्ट को भी यह जानकारी दी थी। वकील ने बताया था कि जांच से पता चला है कि गोविंद पानसरे की हत्या से चार से पांच दिन पहले वह कोल्हापुर में मौजूद था।

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