व्यक्तित्व : ‘ना’ कहना व्यक्तित्व की पहचान,प्लीज के अनावश्यक दबाव में न आयें,ना कहें तनाव मुक्त रहें

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो || अक्टूबर 07, 2020 || जयपुर : हर मनुष्य का अपना-अपना व्यक्तित्व है। वही मनुष्य की पहचान है। कोटि-कोटि मनु्ष्यों की भीड़ में भी वह अपने निराले व्यक्तित्व के कारण पहचान लिया जायेगा। यही उसकी विशेषता है। यही उसका व्यक्तित्व है। प्रकृति का यह नियम है कि एक मनुष्य की आकृति दूसरे से भिन्न है। आकृति का यह जन्मजात भेद आकृति तक ही सीमित नहीं है; उसके स्वभाव, संस्कार और उसकी प्रवृत्तियों में भी वही असमानता रहती है। अक्सर लोगों की यह शिकायत रहती है कि उनकी सबको हाँ कहने की आदत उनके लिए परेशानी का सबब बन जाती है। इतना ही नहीं हर काम के लिए ‘हाँ’ कहने की यह आदत व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक तौर पर परेशान भी रखती है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि व्यक्ति कभी-कभी अपने बारे में भी सोचकर थोड़ा सा स्वार्थी हो जाये। लेकिन किसी को नाराज किए बिना कैसे कहें लोगों को ‘ना’, आइए जानते हैं। खुद को ना करें परेशान
व्यक्ति की सबसे बड़ी दिक्कत ही यह है कि वो यह सोच-सोचकर परेशान होता रहता है कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। लोगों को न कहने की जगह हम दूसरों का समर्थन पाने की कोशिश में लगे रहते हैं। लेकिन अपनी इस आदत में बदलाव करते हुए बेहतर होगा कि आप अपनी स्थिति का सही आकलन करके एक ठोस तर्क के साथ स्पष्ट रूप से दूसरों को न कहें। यकीन कीजिए आपका ऐसा करना किसी को बेइज्जत नहीं करेगा। सतर्क होकर पहले दूसरों के इरादे समझें
किसी भी व्यक्ति को किसी काम के लिए हाँ करने से पहले उसके इरादे को अच्छे से समझ लें, कि जिस काम के लिए वह कह रहा है, क्या वह आपकी प्राथमिकता में आता है। ऐसा करने के बाद आप बहुत सहजता से दूसरों को कह पायेंगे कि आप उनका काम कर तो देंगे, लेकिन थोड़ा टाइम लगेगा या नहीं कर पायेंगे। जवाब दें, मगर प्यार से
फिर वो चाहे आपके बॉस हों या रिश्तेदार- जो आपसे अव्यवहारिक अपेक्षाएँ रख रहे हैं। आपको इनसे विनम्रता से निपटना आना चाहिए। आप उन्हें प्यार से कह सकते हैं कि आप पहले से ही कई अन्य जिम्मेदारियों से घिरे हुए हैं, परिवार के बारे में भी आप इसी तरह डील कर सकती हैं। फैसले पर दृढ़ रहें और किसी ‘प्लीज’ के अनावश्यक दबाव में न आयें
किसी के भी ‘प्लीज’ के दबाव में न आयें। अगर कोई आप पर इस विनम्रता से दबाव बनाने की कोशिश करे तो आपको भी उसी ट्रिक से उस दबाव से बचना है। तो आप कह सकते / सकती हैं कि, “प्लीज मुझ पर अनावश्यक दबाव न डाला जाये, मैं यह नहीं कर पाऊँगी / पाउँगा”। थोड़ा सा स्वार्थी होना अच्छा होता है
जर्नल ऑफ पर्सनेलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक रिपोर्ट कहती है कि थोड़ा सा स्वार्थी होना वास्तव में फायदेमंद है। अब जब साइंस भी आपके स्वार्थी होने को सपोर्ट कर रहा है तो मान क्यों नहीं लेते?

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