केजरीवाल को जमानत तो आदिवासी नेता हेमंत सोरेन को क्यों नहीं, क्या इसीलिए 1919 में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 11 मई 2024 | दिल्ली – जयपुर – राँची (सुप्रीम कोर्ट)झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant soren) की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन की उस याचिका का निपटारा कर दिया है जिसमें हेमंत सोरेन ने अपील की थी चुनाव प्रचार के लिए उन्हें जमानत दी जाए।

हेमंत सोरेन को जमानत नहीं देने से देश भर में एक नई बहस छिड़ चुकी है और ऐसा होना लाजमी भी है। आखिरकार आदिवासियों के साथ आजादी के 77 साल बाद भी दोहरे मापदंड क्यों ? जबकि केजरीवाल की जमानत के बाद सोरेन ने मांग की थी कि हाईकोर्ट की जगह सुप्रीम कोर्ट उनकी याचिका पर आदेश जारी करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब हाईकोर्ट आपकी याचिका पर फैसला सुना चुका है, इसलिए ये अर्जी प्रभावहीन हो गई है।

केजरीवाल को जमानत तो आदिवासी नेता हेमंत सोरेन को क्यों नहीं

MOOKNAYAKMEDIA 4 300x195 केजरीवाल को जमानत तो आदिवासी नेता हेमंत सोरेन को क्यों नहीं, क्या इसीलिए 1919 में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थीसुप्रीम कोर्ट में दो महत्वपूर्ण सुनवाई थी। एक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तो दूसरी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की। इसमें अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल गई है, लेकिन हेमंत सोरेन को मिली तारीख। हेमंत सोरेन के बारे में अब सुप्रीम कोर्ट 13 मई को सुनवाई करेगा। इसके बाद यह बहस तेज हो गई है कि अगर अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल सकती है तो आदिवासी समाज के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को क्यों नहीं?

दरअसल अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन दोनों ने लोकसभा चुनाव में  प्रचार करने को लेकर जमानत मांगी थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को एक जून तक जमानत दे दी है, जबकि हेमंत सोरेन को फिलहाल जमानत नहीं मिल सकी है। केजरीवाल को कथित शराब घोटेले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में 21 मार्च को ईडी ने गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के बाद भी अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र नहीं दिया, न ही पार्टी के संयोजक पद से इस्तीफा दिया। जबकि दूसरी ओर कथित जमीन घोटाले में नाम आने के बाद हेमंत सोरेन ने नैतिकता दिखाते हुए राजभवन जाकर इस्तीफा दे दिया था। हेमंत सोरेन 31 जनवरी से जेल में हैं।

अब सवाल उठता है कि देश का कानून का ज्यादा पालन किसने किया, या फिर नैतिकता किसने दिखाई। घोटाले में नाम आने के बाद सीएम पद से इस्तीफा दे देने वाले हेमंत सोरेन ने या फिर घोटाले में नाम आने के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी को पकड़ कर बैठे अरविंद केजरीवाल ने? निश्चित तौर पर इसका जवाब हेमंत सोरेन है। ऐसे में दूसरा सवाल यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट से अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल सकती है तो फिर आदिवासी समाज के हेमंत सोरेन को क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका को अप्रासंगिक बताते हुए अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत ने कहा कि हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट का फैसला नहीं आने का मामला उठाया था।

हेमंत सोरेन को जमानत नहीं देने पर न्यायपालिका पर कई सवाल 

hemant soren 300x169 केजरीवाल को जमानत तो आदिवासी नेता हेमंत सोरेन को क्यों नहीं, क्या इसीलिए 1919 में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थीहेमंत सोरेन को अंदर क्यों रखा गया है? केजरीवाल को जिन शर्तों के साथ छोड़ा है, उन्हीं शर्तों के साथ सोरेन को क्यों नहीं छोड़ रहे हैं? क्या इसकी सबसे बड़ी वजह भारत के इतिहास में अब तक जस्टिस सेमा के अलावा सुप्रीम कोर्ट में कोई आदिवासी जज नहीं होना है ? 77 साल की आज़ादी के बाद भी सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ एक आदिवासी जज होना क्या दर्शाता है? जबकि जज ही वकीलों को बड़ा बनाते हैं, यानी जज नहीं, तो बड़ा वकील नहीं है। कोलिजियम सिस्टम भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

क्या इसीलिए 1919 में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी

यह मानसिक सड़ांध है, इसलिए संभवतः अंग्रेजों ने कहा था कि ब्राहमणों में न्यायिक चरित्र नहीं होता है। इन्हें न्याय-प्रणाली से विरत रखना चाहिए। आज देश में 90 % जज ब्राह्मण हैं, किस सन में अंग्रेजों ने ब्राह्मण को जज बनने पर रोक लगा दी थी और कहा था इनका न्यायिक चरित्र नहीं होता ये जाति देख के निर्णय लेते हैं? जबकि 1919 में अंग्रेजो ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी और कहा था की इनके अंदर न्यायिक चरित्र नहीं होता है।

बाबा साहब ने संविधान सभा में कोलिजियम सिस्टम को सीधे खारिज किया और पूरी संविधान सभा ने उनकी बात को सही माना। उन्होंने कहा कि “जज चुनने का काम जजों पर नहीं छोड़ सकते। उसमें मनुष्यों में पाए जाने वाली हर बुराई हो सकती है। वह पक्षपात कर सकता है। करप्ट हो सकता है। दुनिया भर में एक देश का नाम बताइए, जहां जज खुद ही किसी को जज बना लेते हैं। कोई जवाबदेही नहीं। अंबेडकर ने कॉलेजियम सिस्टम को किया खारिज, जजों की नियुक्ति पर CJI की सर्वोच्चता को बताया खतरनाक।

बता दें कि इससे पहले भी झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व सीएम हेमंत सोरे की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। हेमंत सोरेन ने अपने चाचा के श्राद्ध में शामिल होने के लिए जमानत मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें पुलिस कस्टडी में रहते हुए अपने चाचा के श्राद्ध में शामिल होने की अनुमति जरूर दी थी। झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन अपने चाचा के श्राद्ध में शामिल होंगे। दरअसल, उन्हें झारखंड हाईकोर्ट की तरफ से इसके लिए मंजूरी मिल गई थी।

यह भी पढ़ें : केजरीवाल की जमानत से मोदी और इडी को बड़ा झटका

झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने अपने बड़े चाचा राजाराम सोरेन के अंतिम संस्कार शामिल होने के लिए कोर्ट में एक याचिका दी थी। लेकिन उस दौरान कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। उस दौरान पीएमएलए कोर्ट ने अंतरिम बेल की उनकी याचिका नामंजूर कर दी थी।

सोरेन ने कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि उनके चाचा राजाराम सोरेन का 27 अप्रैल को निधन हो गया। उन्हें उनके अंतिम संस्कार और श्राद्ध में भाग लेने की अनुमति दी जाए। इसके लिए उन्होंने 13 दिनों की अंतरिम जमानत की गुहार लगाई थी।

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