किडनी-लीवर ट्रांसप्लांट केश में फोर्टिस जयपुर के दो डॉक्टर गिरफ्तार, नर्सिंग स्टाफ और दलालों से संपर्क में रहने वालों की जांच में जुटी पुलिस

मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 11 मई 2024 | दिल्ली – जयपुर – फोर्टिस अस्पताल (ऑर्गन ट्रांसप्लांट फर्जी एनओसी)स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से किडनी प्रत्यारोपण के मामले में फोर्टिस अस्पताल जयपुर के सर्जरी करने वाले डाक्टरों की भूमिका संदिग्ध है। विभागीय जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि अस्पताल प्रबंधन से लेकर आपरेशन करने वाले डाक्टरों को पूरी अनियमितता का पता होता था। मोटी रकम के लालच में उनकी ओर से एक के बाद एक ऑपरेशन किये गये।

किडनी-लीवर ट्रांसप्लांट केश में फोर्टिस जयपुर के दो डॉक्टर गिरफ्तार

MOOKNAYAKMEDIA 8 Copy 300x195 किडनी लीवर ट्रांसप्लांट केश में फोर्टिस जयपुर के दो डॉक्टर गिरफ्तार, नर्सिंग स्टाफ और दलालों से संपर्क में रहने वालों की जांच में जुटी पुलिसरिश्वत लेकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट की फर्जी एनओसी जारी करने के मामले में पुलिस ने फोर्टिस हॉस्पिटल के दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। दरअसल, शुक्रवार को फोर्टिस हॉस्पिटल के नर्सिंग स्टाफ भानू लववंशी उर्फ भानू प्रताप की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को डॉक्टरों के बारे में कई जानकारी मिली।

जयपुर पुलिस ने आज तीन अस्पतालों के डॉक्टरों से 6 घंटे अलग-अलग पूछताछ की थी। इसके बाद सर्जन संदीप गुप्ता और जितेन्द्र गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि दोनों डॉक्टर किराए के मकानों में मरीज देखने जाते थे।

डॉक्टर जितेन्द्र गोस्वामी फोर्टिस के पहले मणिपाल हॉस्पिटल में काम करता था। मणिपाल का लाइसेंस रिन्यू नहीं होने पर सितम्बर 2023 में जितेन्द्र गोस्वामी ने फोर्टिस जॉइन कर लिया था। डॉक्टर जितेन्द्र और संदीप गुप्ता ही फोर्टिस में ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया करते थे। जानकारी में यह भी आया है कि इन लोगों को कई अन्य डॉक्टरों की जानकारी भी है। जो ट्रांसप्लांट कर चुके हैं।

दरअसल, पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी भानू ने पुलिस को बताया है कि कौन-कौन डॉक्टर इस पूरे खेल में लगे हुए हैं। जिस पर पुलिस टीम ने दो डॉक्टरों को शनिवार सुबह एसीपी गांधी नगर के कार्यालय में बुलाकर पूछताछ की। इस पर दोनों डॉक्टरों ने पुलिस के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। फोर्टिस हॉस्पिटल के नर्सिंग स्टाफ भानू लववंशी उर्फ भानू प्रताप पहले से पुलिस की गिरफ्त में है।

नर्सिंग स्टाफ दलालों की मदद कर रहा था

बता दें कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट मामले में एसएमएस के सहायक प्रशासनिक अधिकारी (एएओ) गौरव सिंह, फोर्टिस अस्पताल के ऑर्गन को-ऑर्डिनेटर विनोद सिंह, अंग प्रत्यारोपण के मामले में एमओयू की गई कंपनी मैड सफर के डायरेक्टर सुमन जाना और दलाल सुखमय नंदी से भी पूछताछ से की गई थी।

पूछताछ में भानू की भूमिका मिली थी। पूछताछ में सामने आया था कि आरोपी रोजाना दलालों के संपर्क में रहकर उन्हें अवैध ट्रांसप्लांट के लिए मदद करता था। हॉस्पिटल में सर्जरी के बाद दलाल मरीजों को किराए के मकानों में रखते थे। जहां पर मरीजों की देखरेख के लिए भानू ही जाता था।

नर्सिंग स्टाफ और दलालों से संपर्क में रहने वालों की जांच में जुटी पुलिस

Logo357 300x300 किडनी लीवर ट्रांसप्लांट केश में फोर्टिस जयपुर के दो डॉक्टर गिरफ्तार, नर्सिंग स्टाफ और दलालों से संपर्क में रहने वालों की जांच में जुटी पुलिसगिरफ्तार डॉक्टर कई बार किराए के मकान में मरीजों को देखने के लिए जाते थे। अब पुलिस भानू और दलालों के सीधे संपर्क में रहने वाले डॉक्टर्स की भूमिका तय करने में जुटी हुई है। इसके अलावा इस मामले में फरार चल रहे मैड सफर के अन्य डायरेक्टर राज कमल व दलाल मोहम्मद मुर्तजा अंसारी को पकड़ने के लिए पश्चिम बंगाल के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

क्या है मामला

दरअसल, एसीबी ने एसएमएस हॉस्पिटल में 31 मार्च सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह और ईएचसीसी हॉस्पिटल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर अनिल जोशी को लेनदेन करते रंगे हाथों पकड़ा था। टीम ने मौके से 70 हजार रुपए और 3 फर्जी एनओसी भी जब्त किए थे।

कार्रवाई के बाद एसीबी ने आरोपियों के घर और अन्य ठिकानों पर भी सर्च किया था। इनकी गिरफ्तारी से खुलासा हुआ था कि फोर्टिस हॉस्पिटल का को-ऑडिनेटर विनोद सिंह भी कुछ समय पहले पैसा देकर फर्जी सर्टिफिकेट लेकर गया था। एसीबी ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया था। बाद में जयपुर पुलिस ने इस केस में जांच शुरू कर दी थी।

अब तक की पुलिस व विभागीय जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों को किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान पता होता था कि किडनी देने व लेने वाले का आपस में खून का रिश्ता नहीं है। डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग की एनओसी को देखकर आगे बढ़ जाते थे। इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने फोर्टिस अस्पताल के दो समन्वयकों से पूछताछ के बाद जेल भेज दिया है। उसमें विनोद सिंह और गिरीराज शर्मा शामिल हैं।

आईएएस अधिकारी रश्मि गुप्ता की जांच रिपोर्ट के बाद जयपुर कमिश्नरेट की पुलिस ने फोर्टिस जयपुर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सूत्रों की माने तो शहर के अन्य नामी-गिरामी अस्पताल भी पुलिस के निशाने पर हैं। जिनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा।

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इसके लिए कोई अलग से एफआईआर नहीं होगी आगे जांच में ही इनको एक ही एफआईआर में मर्ज किया जाएगा। अंग प्रत्यारोपण की एनओसी की जांच में ईएचसीसी अस्पताल का नाम सामने आ चुका है। पुलिस उसके समन्वयक अनल जोशी को भी गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

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