तृतीय श्रेणी शिक्षक और शारीरिक शिक्षकों के तबादले की तारीख आखिर कब आयेगी, राजस्थान टीचर ट्रांसफर पॉलिसी जुमला या शिगुफा, 1990 से 2024 तक लागू नहीं हो पाई

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 16 मई 2024 | दिल्ली – जयपुर – बीकानेर #तृतीय_श्रेणी_शिक्षक_ट्रांसफर  : कल से ग्रीष्मकालीन अवकाश स्गुरु हो रहा है और देश कि तक़दीर लिखने वाले शिक्षक ट्रांसफर को लेकर हेरान-परेशां है। राजस्थान में शिक्षकों की तबादलों की पॉलिसी अब एक जुमला लगने लगी है। पिछले तीन विधानसभा और लोकसभा चुनावों से लगातार हर राजनैतिक दल शिक्षकों से तबादला पॉलिसी लागू करने का वादा करते आ रहे हैं। लेकिन यह वादा तीन चुनावों बाद भी पूरा नहीं हो पाया है।

तृतीय श्रेणी शिक्षक और शारीरिक शिक्षकों के तबादले की तारीख आखिर कब आयेगी

MOOKNAYAKMEDIA 35 Copy 300x195 तृतीय श्रेणी शिक्षक और शारीरिक शिक्षकों के तबादले की तारीख आखिर कब आयेगी, राजस्थान टीचर ट्रांसफर पॉलिसी जुमला या शिगुफा, 1990 से 2024 तक लागू नहीं हो पाईअब एक बार फिर से लोकसभा चुनाव के बीच खबर आई है कि उड़ीसा वाली तबदाला पॉलिसी के आधार पर राजस्थान में तबादला पॉलिसी लागू होगी। लेकिन राजस्थान के शिक्षकों को यह बात जुमला ही लग रही है।

इन दिनों चुनावी माहौल में राजस्थान में शिक्षकों के बीच तबादला पॉलिसी की चर्चा जोरों पर है। हर राजनैतिक दल पहले भी सत्ता में आने से पहले शिक्षकों से तबादला पॉलिसी लाने का वादा करता रहा है। लेकिन तबादला पॉलिसी अभी तक नहीं आ पाई।

राजस्थान के तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ ऐसा बीते 15 बरसों से हो रहा है। पिछली सरकार ने हर विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले किए लेकिन तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादले नहीं हो पाये।

ना पॉलिसी आई और ना तबादले हुए

बीमारी से परेशान कई शिक्षकों ने बुजुर्ग माता पिता की सेवा के लिए तबादले जैसे तर्क दिए लेकिन उनकी पार नहीं पड़ पाई। सरकारों ने हर बार कहा कि पॉलिसी लाएंगे फिर तबादले करेंगे। लेकिन विधानसभा चुनाव के ऐलान तक ना पॉलिसी आई और ना तबादले हुए।

अब विधानसभा चुनाव बीत गए और सरकार बदल गई। तीन महीने से ज्यादा समय तक राज्य में नई सरकार ने काम कर लिया। लेकिन तृतीय श्रेणी शिक्षकों को राहत नहीं मिली। लोकसभा चुनाव आ गए फिर भी तबादला पॉलिसी नहीं आ पाई।

बरसों से ड्राफ्ट तैयार तो हो रहे हैं

अब लोकसभा चुनाव के बीच शिक्षकों से राजनैतिक दल फिर से तबादलों पॉलिसी का वादा कर रहे हैं। लेकिन शिक्षक वर्ग को अब इस पर विश्वास नहीं रहा। अब उन्हें यह एक जुमला लगने लगा है। बरसों से ड्राफ्ट तैयार तो हो रहे हैं लेकिन तबादला पॉलिसी जारी नहीं हो रही है।

अब एक बार लोकसभा चुनाव के बीच फिर से खबर आई है कि उड़ीसा की तबादला पॉलिसी को राजस्थान में लागू करने के लिए समिति बनाई गई है और सुझाव मांगे गए हैं। शिक्षक नेता रणजीत मीणा और महावीर सियाग समेत कर्मचारी नेता विपिन शर्मा का कहना है कि यह जुमला क्यों बन गया। इसे गहराई से समझने की जरुरत है।

शिक्षक नेता गोकुल मीणा का कहना है कि अकेले बूंदी जिले के 5135 तृतीय श्रेणी शिक्षक को अब तक तबादलों का इंतजार है। शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत प्रबोधक व तृतीय श्रेणी शिक्षकों के 2018 यानी 6 वर्षों के बाद भी तबादलों से रोक नहीं हट पाई है।

इससे राज्य में अपने जिले या घर के पास तबादला करवाने की उम्मीद लिए बैठे हजारों तृतीय श्रेणी शिक्षक व उनके परिजन परेशान हैं। राज्य सरकार की ओर से शिक्षकों के तबादले करने की लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही है।

पूर्व सरकार ने अगस्त 2021 में तृतीय श्रेणी शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन भरवाए थे। इसमें राज्य के करीब 85 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन किए, लेकिन उस समय सरकार ने नई नीति के तहत तबादले करने का कहकर तबादले ही नहीं किए।

इससे ऑनलाइन किए लगभग 85 हजार शिक्षकों के आवेदन रद्दी की टोकरी में चल गए। जिले में कार्यरत शिक्षकों का कहना है कि हमें तो ऐसा लगता है कि तबादला हमारे नसीब में ही नहीं है। शिक्षक दूसरी जगह व गृह जिले में तबादले, रिक्त पदों पर समायोजन की बाट जोह रहे हैं।

इसलिए तबादला पॉलिसी शिक्षकों को लगने लगी है एक जुमला

  1. सबसे पहले वर्ष 1994 में केंद्रीय शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में कमेटी ने तबादला पॉलिसी का प्रारूप बनाया लेकिन पॉलिसी लागू नहीं हुई।
  2. वर्ष 1997-1998 में तबादला नीति लाने की कवायद हुई लेकिन केवल ग्रामीण ठहराव के आधार पर तबादले हुए मगर पॉलिसी नहीं आई।
  3. वर्ष 2005 में शिक्षकों के तबादले लिए कार्मिक विभाग ने दिशा निर्देश जारी किए मगर तबादला पॉलिसी लागू नहीं हुई।
  4. 10 साल बाद वर्ष 2015 में तबादला पॉलिसी के लिए मंत्री मंडल समिति बनी। फिर भी प्रारूप ही मंजूर नही हुआ. पॉलिसी लागू नहीं हुई।
  5. साल 2020 जनवरी में विशेष कर तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लिए तबादला पॉलिसी बनाने के लिए समिति बनी। अगस्त में प्रारूप तैयार हुआ मगर पॉलिसी मंजूर नही हुई।
  6. अब एक बार फिर से उड़ीसा की तबादला पॉलिसी जैसा ड्राफ्ट साल 2024 में तैयार करवाने की तैयारी शुरू की गई है।

राजस्थान टीचर ट्रांसफर पॉलिसी जुमला या शिगुफा

विकल्प-पत्र फाइलों में दफन हो गए 1999 से पहले प्रदेश के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, जालौर, प्रतापगढ़, बाड़मेर, झालावाड़, सिरोही, बारां, बीकानेर और जैसलमेर को राज्य सरकार ने डार्क जोन का जिला घोषित था। डार्क जोन में आने वाले शिक्षकों के तबादलों पर पूरी तरह से प्रतिबंध था।

2014 में बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिले पूर्ण अनुसूचित व उदयपुर, चित्तौड़गढ़, पाली का कुछ क्षेत्र भी इसमें शामिल किया। इन शिक्षकों की ओर से तबादले चाहने पर सरकार ने विकल्प पत्र भरवाए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन बूंदी जिला डार्क जोन में नहीं होने के बाद भी यहां के शिक्षक तबादलों को तरस गए हैं।

बूंदी जिले में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के 5390 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 5135 पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं। जबकि, 468 पद रिक्त चल रहे हैं। प्रदेश की बात करें तो राजस्थान में 65 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में लगभग 2 लाख 16 हजार 889 तृतीय श्रेणी शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इनमें डार्क जोन में कार्यरत तृतीय श्रेणी शिक्षकों की संख्या लगभग 72119 है।

1990 से 2024 तक लागू नहीं हो पाई

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के जिलाध्यक्ष अनिल सामरिया और मंत्री मुकेशकुमार शर्मा कहते हैं कि आख़िरकार ट्रांसफर पॉलिसी कहाँ है जो 1990 से 2024 तक लागू नहीं हो पाई। पूर्व सरकार के कार्यकाल में अगस्त 2021 में राज्यभर से 85 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने शाला दर्पण के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किए। रेस्टा ने शिक्षकों के तबादले करवाने की मांग को लेकर धरना और प्रदर्शन किया। पर कुछ नहीं हुआ, वही ढाक के तीन पात।

शिक्षक नेता हरपाल दादररवाल का कहना है कि सालों से महिला शिक्षक अपने परिवार से दूर हैं। 50 की उम्र पार कर चुके सैकड़ों शिक्षक बीमारियों से ग्रसित हैं, बावजूद इसके उनका तबादला नहीं किया जा रहा। 

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हर बार आश्वासन ही दिया गया, जिससे लंबे समय से सूची का इंतजार कर रहे शिक्षकों के अरमानों पर पानी फिर रहा है, जबकि अन्य सभी कैडर के बंपर तबादले किए हैं और अब भी होंगे। इसलिए सबसे पहले तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले किए जाएं। तृतीय श्रेणी के साथ टीएसपी और नॉन टीएसपी दोनों क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के भी तबादले किए जाने चाहिए।

शिक्षक संघों का आरोप है कि तबादला नीति से शिक्षकों के ट्रांसफर होंगे तो विधानसभा क्षेत्र में विधायकों को शिक्षकों से तवज्जो मिलना बंद हो जाएयेगी। क्योंकि शिक्षकों को इस बात का डर नहीं रहेगा कि विधायक नाराज हो गए तो ट्रांसफर करा देंगे। वहीं, विधायकों का डिजायर में कोई दखल नहीं रहेगा और नीतिगत ट्रांसफर एक निश्चित समय पर ही होंगे।

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