सपोटरा-प्रकरण : आज गाँवों के पंच-पटेल कैसे हैं,आप और हम भलीभांति परिचित है,राजनेता भी बेसिर-पैर वाले

2 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो || अक्टूबर 15, 2020 || जयपुर-सपोटरा : यह बात सही है की मृतक बाबूलाल वैष्णव और कैलाश सहित उनके कुनबे के 16-18 परिवारों के बीच 18 बीघा जमीन के एक हिस्से को लेकर के विवाद था। पर क्या यह विवाद कानून के दायरे में नहीं सुलझाया जा सकता था। क्या दोनों में से किसी ने भी प्रशासन के पास जाकर इसकी शिकायत की। यह भी पढ़ें : सपोटरा एक्सक्लूसिव रिपोर्ट : ‘बाबूलाल वैष्णव की मृत्यु पूर्व नियोजित षड्यंत्र था या आत्महत्या’ अतिक्रमण स्थल का आकलन करके उस पर प्रशासन अपना फैसला दे सकता था। गाँव में अक्सर कहासुनी छोटे-मोटे झगड़े यहाँ तक की खुद के खून के रिश्तेदारों को भी जमीन के मामले में मारा गया है पीटा गया है यहाँ तक की हत्याएँ भी हुई। परंतु इसका मतलब यह नहीं है की आरोपी कैलाश इसका दोषी है। उन्हें सरेआम हत्यारा कह कर संबोधित करना तो आदिवासियत और कानून दोनों ही दृष्टियों से न्यायोचित नहीं है। हत्या जैसे जघन्य अपराध के आरोप बिना जाँच एवं सबूत के लगाना भी अन्यन्न अपराध है। उसकी जाँच होनी चाहिए एवं दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। कानून के किस प्रावधान के अनुसार जो राजनेता बाहर से आये और उन्होंने स्थानीय लोगों के घटनास्थल पर जाकर सबूत मिटाने की, सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की। क्या उन पर कानून की धाराओं में कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में वे इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त नहीं हो। कैलाश के परिवार ने अतिक्रमण किया होगा। उनके और मृतक परिवार के बीच कहासुनी भी हुई होगी। परंतु इसका मतलब यह निकाल देना कि कैलाश और उनके 9 परिजन हत्यारे हैं। उन पर 302 की धारा में मुकदमा दर्ज होना पूर्ण रूप से गलत है। कैलाश के परिवार ने स्थानीय पंचों के तथाकथित आदेश का उल्लंघन किया होगा। परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि उन पर हत्या का मुकदमा लगा दिया जाए और उनके जीवन को नर्क बना दिया जाए। क्योंकि आज गाँवों के पंच-पटेल कैसे हैं, आप और हम भलीभांति परिचित है। इस प्रकरण में तथाकथित लोग और उनके दलाल किसी निर्दोष परिवारों को गाँव से निकाल देने की साजिश रच रहे हैं, जो अपने आप में अपराध और ऐसी स्थिति में प्रशासन को बाहरी लोगों के घटनास्थल पर आकर सभा करने सबूतों को मिटाने सबूतों को मिटाने की कोशिश करने और अन्य कानूनी प्रावधानों में मुकदमा दर्ज करना चाहिए ताकि भविष्य में उन्हें सबक मिल सके। यह भी पढ़ें : खोजी रिपोर्टिंग : सपोटरा में राजनीति ने एक आदिवासी गरीब किसान कैलाश को ‘कैसे बनाया बलि का बकरा’ (अगली पोस्ट में चश्मदीद गवाहों पर होगी)

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This