आरोपी कैलाश मीणा पुजारी की जलती देह केपास नहीं था, उससे पहले उनकी दो बेटियाँ आग बुझा रही थी -चश्मदीद

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‘कुछ दिनों पूर्व मृतक की एक लड़की बौंली तहसील के किसी अधेड़ व्यक्ति के साथ भा गयी थी, जिससे वह तनाव में थे, पास खड़ी मृतक की पत्नी ने उन्हें बचने की कोशिश नहीं की, जबकि कैलाश की लड़कियों के मृतक को बचाते हुए हाथ जल थे’ मूकनायक मीडिया ब्यूरो || अक्टूबर 17, 2020 || जयपुर-सपोटरा : गाँवों में अक्सर कहासुनी, छोटे-मोटे झगड़े में खुद के खून के रिश्तेदारों को भी जमीन के मामले में मारा गया है, पीटा गया है, यहाँ तक कि हत्या भी हुई है, परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी कैलाश को पुजारी की आत्महत्या का दोषी है। सूत्र बताते हैं कि एक नहीं अनेक चश्मदीद गवाहों का कहना है कि आरोपी कैलाश मीणा पुजारी की जलती देह के पास नहीं था। बल्कि वह तो करीब दो-तीन मिनट बाद पुजारी के पास आया था। उससे पहले उनकी दो बेटियाँ आग बुझा रही थी, और पुजारी की पत्नी दूर खड़ी थी। यह भी पढ़ें :सपोटरा-प्रकरण : आज गाँवों के पंच-पटेल कैसे हैं,आप और हम भलीभांति परिचित है,राजनेता भी बेसिर-पैर वाले पुजारी की देह को जलते हुए सबसे पहले हिंडौन के एक ट्रेक्टर वाले ने देखा। जलती हुई देह पर पानी डालने के लिए पास ही के नल से परात में पानी भरकर ले जाने लगा था। उन्हें एकट के मोटा नामक व्यक्ति ने टोकते हुए कहा कि ‘पानी नहीं मिट्टी डालो।’ यह भी पढ़ें :सपोटरा एक्सक्लूसिव रिपोर्ट : ‘बाबूलाल वैष्णव की मृत्यु पूर्व नियोजित षड्यंत्र था या आत्महत्या’ सूत्रों का कहना है कि पुजारी की चीख-पुकार सुनकर आस-पास से विनोद और विन्नू भाग कर आये। कुछ ही देर बाद, भंभल मीणा के पुत्र हेमराज और महमूद भी वहाँ पहुँचे। तब तक इनमें से किसी ने भी आरोपी कैलाश मीणा को वहाँ नहीं देखा यानि वह इन सबके बाद घटनास्थल पर आये थे। यह भी पढ़ें : खोजी रिपोर्टिंग : सपोटरा में राजनीति ने एक आदिवासी गरीब किसान कैलाश को ‘कैसे बनाया बलि का बकरा’ मूकनायक मीडिया सूत्रों का यह भी कहना है कि मृतक बाबूलाल वैष्णव को पेट्रोल पंप तक लिफ्ट देकर ले जाने वाले थळी, बूकना निवासी (नाम गुप्त) का कहना है कि पुजारी मानसिक रूप से परेशान था और उसकी लड़की को भगाकर ले जाने वाले को गाली दे रहा था। कुछ दिनों पूर्व मृतक की एक लड़की बौंली तहसील के किसी अधेड़ व्यक्ति के साथ भा गयी थी जिसको बूकना के 8-10 लोग बर्मद करके लाये थे। यह भी पढ़ें : गरीब आदिवासी कैलाश कैसे बना आरोपी,चश्मदीद गवाह और सबूत क्या कहते हैं, बिना तथ्य जाने राजनीति क्यों सूत्र यह भी बताते हैं कि पुजारी की मौत से पहले ही परशुराम सेना के लोग (नाम गोपनीय) बूकना के उन लोगों के संपर्क में थे, जो कैलाश मीणा से वैमनस्यता रखते थे। सवाल उठता है कि परशुराम सेना के पास बूकना के लोगों के मोबाइल नंबर किसने दिये, क्यों दिये होंगे। यह भी जाँच का विषय है। (शेष अगली पोस्ट में …)

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