सपोटरा प्रकरण : निर्दोष कैलाश मीणा को न्याय दिलाने के लिए आगे आयें,CM केनाम ADM / SDM को ज्ञापन दें

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‘प्राचीनतम आदिवासी मीणा समुदाय की अपील एवं ज्ञापन यहाँ से डाउनलोड करें और हस्ताक्षर करके अपने एरिया के कलेक्टर / एडीएम/ एसडीएम / तहसीलदार को दें’ मूकनायक मीडिया ब्यूरो || अक्टूबर 21, 2020 || जयपुर-सपोटरा : मूकनायक मीडिया की तटस्थ और पारदर्शी रिपोर्टिंग आप सब ने mooknayakmedia.com पर पढ़ी ही होगी। जबकि मनुवादी मीडिया, सारे के सारे टीवी चैनल्स, राष्ट्रीय अख़बार और सोशल मीडिया एक तरफ़ा रिपोर्टिंग करके एक गरीब और मासूम आदिवासी कैलाश मीणा को दोषी साबित करने में लगे थे। मूकनायक मीडिया की रिपोर्टिंग्स में आपने देखा कि दिनांक 07.10.2020 को मृतक बाबूलाल वैष्णव, पुजारी, मंदिर राधागोपाल जी ग्राम बूकना, सपोटरा, करौली के द्वारा कैसे आत्मदाह कर लिया था। जिसके बाद राजनैतिक हितपूर्ति के लिए तथाकथित राजनेताओं ने मृतक की लाश पर राजनीति कर पुलिस एवं प्रशासन पर अनावश्यक दबाब बनाया। और मीडिया आदि के माध्यम से भ्रामक व झूँठी खबर फैलाकर उक्त घटना को हत्या जैसे गंभीर अपराध का रूप दे दिया है। ज्ञापन यहाँ से डाउनलोड करें : प्राचीनतम आदिवासी मीणा समुदाय की अपील एवं ज्ञापन यहाँ तक कि कैलाश व उसके परिजनों पर षडयंत्रपूर्वक हत्या जैसे गंभीर आरोप लगा दिये तथा कैलाश को हत्या के आरोप में गिरफ्तार भी करवा दिया। जबकि इस बात की जानकारी कई लोगों को रही है कि मृतक श्री बाबूलाल पुजारी आपस में कहासुनी होने के बाद स्वंय खाली बोतल लेकर प्रातः 8ः30 बजे के लगभग सपोटरा से पैट्रोल लेने गया था, जिसे सपोटरा मोड पर कई व्यक्तियों ने देखा था। उसके पश्चात् मृतक प्रभु मीणा पुत्र श्री किशोर की मोटरसाईकिल पर बैठकर एचपी पंप नारौली डांग रोड पर जाता है एवं वहाँ से बोतल में 100/- रूपये का पैट्रोल लेने की ,माँग करता है परंतु वहाँ मौजूद सेल्समैन मृतक को बोतल में पैट्रोल देने से मना करते है। जिस पर वहाँ मौजूद अन्य मोटरसाईकिल वाले एवं प्रभु मीणा मृतक को पैट्रोल देने का आग्रह करते हैं। जिस पर सैल्समैन उसे पैट्रोल दे देता है। यह सम्पूर्ण दृश्य पैट्रोल पंप पर स्थित सीसीटीवी कैमरो में सुस्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। जिसे मूकनायक मीडिया ने सबसे पहले आप सबके समक्ष रखा। इसके पश्चात् मृतक पैट्रोल लेकर पैदल ही अपने गाँव जाता है जिसे रास्ते में भी कई लोगों (देखें मूकनायक मीडिया रिपोर्टिंग) ने देखा है। गाँव पहुँचने पर गाँव वालों ने मृतक को घटनास्थल पर पैट्रोल की बोतल ले कर जाते हुए भी देखा है। जिसकी सूचना मृतक की पत्नी को भी दी, मृतक की पत्नी को खबर होने पर वे भी उनके पीछे दौड़ी हुई गयीं। इसके बाद मृतक ने घटनास्थल पर स्वंय पर एवं विपक्षीगण की कडव आदि पर पैट्रोल छिडक कर लाईटर से आग लगा ली। उस वक्त घटनास्थल पर विपक्षीगण की केवल दो विवाहित लडकियाँ मौजूद थी। जिन्होंने मृतक को जलता हुआ देखकर तुरंत आग बुझाने का प्रयास किया एवं जोर-जोर से चिल्लाकर मदद माँगने का प्रयास किया। आग बुझाने से उनके हाथ आदि भी जल गए जो मीडिया आदि में भी देखा गया है। वहाँ मौजूद प्रत्यक्षदर्शीयों आदि ने इस बात को स्पष्ट रूप से देखा है कि मृतक बाबूलाल को किसी ने जलाया नहीं बल्कि उसने स्वंय पर पैट्रोल छिडक कर आग लगायी थी। घटनास्थल पर तुरंत पहुँचने वाले व्यक्तियों ने भी इस बात को देखा था कि घटनास्थल पर विपक्षी परिवार की उक्त दोनेां लडकियों के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था वे सभी शोर-शराबा सुनकर ही घटनास्थल पर पहुँचे थे। इसके बाबजूद भी उन्हे हत्या जैसे गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया जो कि सरासर अन्याय है। सूत्र बताते हैं कि इस बात के भी अनेक साक्षी मौजूद है कि शुरू में मृतक बाबूलाल ने किसी को आरोपित नहीं किया परंतु बाद में परचा बयान के समय एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर में विपक्षियों पर आरोप लगाये जो स्वाभाविक परिवर्तन था, क्योंकि उससे पूर्व वह अनेक राजनैतिक एवं षडयंत्रकारी व्यक्तियों के सर्म्पक में आ चुका था। सूत्रों का यह भी कहना है कि उन्होंने जैसा मृतक को गाईड किया, वैसा ही उसने पुलिस को परचा बयान दिया था, जो कि सत्य नहीं था, क्योंकि यदि उसके बयानों को एवं कलुशित मानसिकता वाले तथाकथित राजनेताओं तथा मीडिया आदि की खबरों को सच मान लिया जाए तो पैट्रोल पंप की सीसीटीवी फुटेज एवं हर जगह मौजूद प्रत्यक्षदर्शी साक्षियों आदि का कोई महत्व नहीं रह जाता है। जबकि उक्त सभी साक्ष्य एवं साक्षी तटस्थ एवं निष्पक्ष घटना को बयान करने वाले व्यक्ति है जिनकी विश्वसनीयता पर लेशमात्र भी संदेह नहीं हो सकता है। जहाँ एक ओर मृतक बाबूलाल पुजारी के साथ प्रारंभ से ही सम्पूर्ण गाँव खडा है एवं उसके पक्ष में फैसला आदि भी पूर्व में दिया हैं। यदि मीडिया आदि की भ्रामक रिपोर्टो में लेशमात्र भी सच्चाई होती तो वे अवश्य खुलकर मृतक के पक्ष में बयान देते परंतु ऐसा कुछ था ही नहीं। बाबजूद इसके विपक्षी परिवार के लोगों को हत्या जैसे गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया, जिससे बूकना गाँव एवं मीणा समाज की छवि राष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक धूमिल हुई है एवं समाज को अपूर्तनिय क्षति हुई है तथा दो समाजों में आपस में अनावश्यक वैमनष्य उत्पन्न हुआ है जो कि पूर्णरूप से गलत है एवं निंदनीय है।

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