सीसीए,कश्मीर पर तल्खी,मोदी को अमरीका वीजा जारी नहीं होने देने वाले बिडेन-हैरिस से कैसे होंगे रिश्ते

मूकनायक मीडिया ब्यूरो || नवंबर 07, 2020 || जयपुर : अमेरिकी मीडिया के अनुसार, बाइडेन चुनाव जीत चुके हैं। अब यूएस के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे। अमेरिका का राष्ट्रपति बनना जो बाइडेन का 50 सालों का सपना था। हाऊडी मोदी का क्या होगा? अबकी बार ट्रम्प सरकार बोलने का भविष्य में क्या परिणाम होगा? तीन दशक बाद पूरा हुआ बाइडन का सपना, 50 साल लंबा है राजनीतिक करियर। कश्मीर-CAA पर मुखर रहे हैं बाइडेन और कमला, कई बार दे चुके हैं बयान। आपको यह भी ज्ञात होगा कि जो बिडेन वही शख्स हैं जो मोदीजी को अमेरिका का वीजा जारी नहीं करने देने पर अड़े थे और उन्होंने मोदी को अमेरिकी वीजा जारी नहीं करने के निर्देश दिये थे। साल 1972 की बात है। व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति पद पर रिचर्ड निक्सन बैठे थे और अमेरिका अब भी चांद पर इंसानों को भेजने के अभियानों को चला रहा था। इस बीच अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले जो बाइडन करीब 50 साल लंबा राजनीतिक करियर बिता चुके हैं। इस दौरान तीन दशक में तीन बार देश का सर्वोच्च नेता बनने की आकांक्षा जताने वाले बाइडन का सपना शनिवार को तब पूरा हुआ, जब वे अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति चुन लिये गये हैं । पेनिसिल्वेनिया में 1942 में एक कैथोलिक परिवार में जन्मे जो रोबिनेट बाइडन जूनियर ने डेलावेयर यूनिविर्सिटी से पढ़ाई पूरी की और इसके बाद सिएराक्यूज यूनिवर्सिटी से 1968 में वकालत की डिग्री लेकर करियर शुरू किया। 78 वर्षीय डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बाइडन राष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाले अपने देश के अब तक के सबसे बुजुर्ग नेता भी बन गये हैं। लेकिन उम्र के रिकॉर्ड बनाने का जो बाइडन के लिए यह पहला मौका नहीं है। अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करते हुए 1972 में वे 30 साल की उम्र में पहली बार डेलावेयर से देश के पाँचवे सबसे कम उम्र सीनेटर के तौर पर चुने गये। इस सीट से छह बार सीनेटर चुने जा चुके बाइडन ने पहली बार राष्ट्रपति बनने का सपना 1988 में देखा था। इसके बाद 2008 में वह दोबारा डेमोक्रेटिक उम्मीदवार चुने जाने की होड़ में उतरे, लेकिन इस बाद उन्हें देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने बराक ओबामा से पिछड़ना पड़ा। हालांकि ओबामा ने बाइडन के लंबे अनुभव और उनके देश विदेश में सम्मान को देखते हुए उन्हें अपने उपराष्ट्रपति के तौर पर साथ जोड़ा और यह साथ ओबामा के राष्ट्रपति पद पर दोनों कार्यकाल में जारी रहा। ओबामा ने बाइडन को देश का आज तक का सर्वश्रेष्ठ उपराष्ट्रपति घोषित किया था। 2017 तक उपराष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालने वाले बाइडन इस बार तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के लिए मैदान में उतरे थे। इस बार डोनाल्ड ट्रंप से नाराज अश्वेत समुदाय ने बाइडन को चुनने के लिए उनकी तरफ से अश्वेत राष्ट्रपति ओबामा को उनके दो कार्यकाल में दिए समर्थन का भी ध्यान रखा। कमला हैरिस अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव पर भारतीय समुदाय की भी निगाहें लगी थीं। कारण था डेमोक्रेटिक पार्टी से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के तौर पर कमला हैरिस की मां का भारतवंशी होना। हालांकि हैरिस खुद को ठेठ अमेरिकी कहलाना पसंद करती हैं, इसके बावजूद उन्होंने भारतीय समुदाय को लुभाने के लिए चुनावी अभियान के दौरान अपनी भारतीय जड़ों का जिक्र भी खूब किया। इसकी बदौलत शनिवार को सबसे ज्यादा आबादी वाले अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया की इस पहली महिला अटार्नी जनरल ने देश की पहली अश्वेत उपराष्ट्रपति बनने का इतिहास रच दिया। साथ ही कमला इस पद पर पहुंचने वाली पहली निर्वाचित महिला और पहली एशियाई अमेरिकी भी बन गयी हैं। कैलिफोर्निया से सीनेटर कमला हैरिस 2003 में सैन फ्रांसिस्को की पहली महिला जिला अटार्नी चुनी गयी थीं। इसके बाद कैलिफोर्निया की अटार्नी जनरल के तौर पर उन्होंने दो कार्यकाल हासिल किए। इस दौरान कमला हैरिस ने डेमोक्रेटिक पार्टी के उभरते सितारे के तौर पर अपनी साख बनायी और इसी का इस्तेमाल करके उन्होंने साल 2017 में कैलिफोर्निया की यूएस सीनेटर का चुनाव लड़ा था। वे अमेरिकी सीनेट में चुनी गयी महज दूसरी अश्वेत महिला बनीं। अमरीकी सीनेटर के तौर पर हैरिस सीनेट की न्यायिक समिति की महत्वपूर्ण सुनवाइयों में तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट के नॉमिनी ब्रेट कावानॉघ और अटार्नी जनरल विलियम बार के खिलाफ अपने सवालों की वजह से बेहद चर्चा में रह चुकी हैं। न्यायिक समिति के अलावा कमला सीनेट की होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंट अफेयर्स कमेटी, इंटेलिजेंस पर सेलेक्ट कमेटी और बजट कमेटी में भी रह चुकी हैं। कमला जमैकाई मूल के पिता डोनाल्ड हैरिस और भारतीय मूल की मां श्यामा गोपालन की संतान हैं। उनकी मां कैंसर शोधकर्ता थी, जिनका 2009 में निधन हो चुका है। कमला ने 2020 में देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनने के लिए जो बाइडन के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी की आंतरिक उम्मीदवारी में नामांकन भरा था। लेकिन दिसंबर में उन्हें इस होड़ से हटना पड़ा था। चुनावी अभियान में बाइडन की जबरदस्त खिलाफत करने के बावजूद उन्होंने कमला की योग्यता को देखते हुए उन्हें अपने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर नामित किया। हावर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक कमला ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिअी से कानून की पढ़ाई पूरी की है। कमला ने पेशे से अटार्नी डगलस एमहाफ के साथ शादी की है। डगलस की पहली शादी से हुए दोनों बच्चे कमला को बेहद पसंद करते हैं और उसे प्यार से ‘मोमाला’ कहते हैं। कमला हैरिस के गाँव में उत्सव की तैयारी उपराष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेट प्रत्याशी और भारतवंशी कमला हैरिस के जीत के करीब पहुंचने पर तमिलनाडु स्थित उनके ननिहाल पक्ष के गाँव थुलासेंथिरापुरम और पैनगानाडु में दीपावली से पहले उत्सव की तैयारी होने लगी है। यहां के लोगों को विश्वास है कि वे जीतेंगी। सभी औपचारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीण कमला की जीत पर रंगोली से उनकी तस्वीर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। गाँव की सड़कों के किनारे कमला के पोस्टर लगाए गये हैं। तमिलनाडु में चाय-काफी की दुकानों पर अमेरिकी चुनाव परिणामों पर चर्चा हो रही है। अमेरिका की नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति कमला हैरिस आज भी भारत में अपने रिश्तेदारों से जुड़ी हुई हैं। उनके मामा गोपालन बालचंद्रन ने कहा कि मैंने कमला को एक दिन पहले ही बता दिया था कि वह चुनाव जीतने जा रही हैं। दिल्ली निवासी बालचंद्रन ने कहा कि हम सबके लिए खुशी और गर्व का दिन है। उन्होंने अपनी भांजी को योद्धा बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट्स पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन की जीत निश्चित दिखाई पड़ रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इलेक्टोरल वोट की जंग में जो बाइडेन बहुमत से सिर्फ 6 वोट दूर हैं। ऐसे में जो बाइडेन और कमला हैरिस की जोड़ी व्हाइट हाउस में जाती हुई दिख रही है। भारत को लेकर दोनों के विचार कई बार खुलकर सामने आते रहे हैं, भले ही डेमोक्रेट्स की ओर से भारत को अमेरिका का सच्चा दोस्त बताया गया हो। लेकिन बाइडेन-हैरिस ने कुछ ऐसे बयान दिए हैं, जिनकी भारत में आलोचना हुई है। जम्मू-कश्मीर के हालात पर टिप्पणी
डेमोक्रेट्स उम्मीदवार जो बाइडेन ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद लंबे वक्त तक लॉकडाउन और नेताओं को नजरबंद रखने का विरोध किया था। इसके बारे में उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में भी कई बार बात की थी।

सिर्फ जो बाइडेन ही नहीं बल्कि कमला हैरिस ने भी जम्मू-कश्मीर के मसले पर मुखर होकर राय रखी है। जम्मू-कश्मीर में लंबे वक्त तक नज़रबंदी के मसले पर कमला हैरिस ने बयान में कहा था कि हम उनके साथ खड़े हैं, मानवाधिकार के नियमों का उल्लंघन पूरी तरह गलत है।

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