कॉलेजों में प्रोफेसर्स के 477पद सृजित, आरक्षित-वर्गों के हितों पर कुठाराघात, भर्ती-प्रक्रिया दिशाहीन

6 min read

‘गहलोत सरकार के कल्याणकारी दावों की पोल खुली, आचार्यों के पदों पर अनुसूचित जाति/जनजाति संवर्ग के लिए नियमानुसार आरक्षण का कोई भी प्रावधान नहीं, आरक्षित-वर्गों में अधिकाशतः Ph-D धारक नहीं है, एससी /एसटी/ओबीसी के लोगों में इस बात को लेकर घोर असंतोष एवम् गुस्सा सातवें आसमान पर’ मूकनायक मीडिया ब्यूरो || नवंबर 09, 2020 || जयपुर : राजस्थान सरकार कार्मिक विभाग, जयपुर दिनांक 31.01.2018 की अधिसूचना द्वारा राजकीय महाविद्यालय के लिए आचार्यों (प्रोफेसर) के कुल 477 पद स्वीकृत किये गये है। इन पदों पर आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान, जयपुर द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गयी है। किंतु स्वीकृत आचार्यों के पदों पर अनुसूचित जाति/जनजाति संवर्ग के लिए नियमानुसार आरक्षण का कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। यह गहलोत सरकार के कल्याणकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। सवाल यह भी है कि राज्य की ब्यूरोक्रेसी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों में पलीता किसकी शह पर लगा रही है ! आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान, जयपुर में आचार्य पद पर पदोन्नति के लिए कार्मिक विभाग राजस्थान सरकार की अधिसूचना क्रमांक एफ 1 (06) डीओपी/ए-II/84 दिनांक 31.01.2018 के अंतर्गत दिनांक 01.04.2018, 01.04.2019, 01.04.2020 को पात्र सह-आचार्य पद पर कार्यरत संकाय सदस्यों को कन्सीडर (Consider) करना तय किया है। आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान, जयपुर के उक्त संदर्भित (02) पत्र में आचार्य पद पर पदोन्नति करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) योजनान्तर्गत कार्मिक विभाग राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना (संदर्भित 01) के अंतर्गत आचार्य पद को पदोन्नति द्वारा भरा जाना अवगत कराया है। इसमें राजस्थान सरकार द्वारा आचार्यो के 477 पद स्वीकृत किये गये है (437+ 40) और ये समस्त पद 100% पदोन्नति द्वारा सहआचार्यो / उप प्राचार्यो से भरा जाना है। कार्मिक विभाग की उक्त संदर्भित अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आचार्य पद पर पदोन्नति सर्वथा पद की विषयवार उपलब्धता की शर्त पर की जावेगी। जो ना तो न्याय संगत है और ना ही वैधानिक क्योंकि माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेशानुसार राज्य सरकार विश्वविद्यालय / महाविद्यालय / विभाग को इकाई मानकर 200% आरक्षण रोस्टर लागू करने का निर्णय ले चुकी है और तदनुरूप अधिसूचनाएँ भी जारी की जा चुकी है। ऐसी स्थितियों में राज्य सरकार को कॉलेज शिक्षा निदेशालय को इकाई मानकर 200% आरक्षण रोस्टर लागू करने की बाध्यता होगी और नव सृजित प्रोफेसर्स के 477 पदों पर एससी / एसटी / ओबीसी को नियमानुसार आरक्षण देय होगा। आचार्य पद पदोन्नति के लिए संकाय सदस्यों को 19 वर्ष का अनुभव होना बतलाया गया है और 9000 ग्रेड पे में 7 वर्ष की सेवा पूर्ण करना आवश्यक बतलाया गया है। इसके साथ ही Ph-D/शैक्षणिक उपलब्धि सूचकांक (API) के अनुसार क्रेडिट अंकों को पूर्ण करने वाली शैक्षणिक उपलब्धि (न्यूनतम 75 अंक) का होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त 8000 की ग्रेड पे की कार्यावधि में संकाय सदस्यों 5 प्रकाशन होना आवश्यक होना वांछित बतलाया गया है। किंतु राज्य ब्युरिक्रेसी और कार्मिक विभाग की मंशा कुछ और ही बयां करती है। उक्त संदर्भित अधिसूचना की अनुसूचि – 1 में क्रम सं0 – 2 प्राचार्य/संयुक्त निदेशक पद पर पदोन्नति 75% सह आचार्य एवं उप प्राचार्यो से की जावेगी और शेष 25% उपलब्ध आचार्यो से। कार्मिक विभाग की उक्त अधिसूचना तथा आयुक्तालय द्वारा पत्र की शब्दावली में अस्पष्टता (Ambiguity) है, उसे भी दूर करना होगा। चूँकि आयुक्तालय ने अपने पत्र में CAS स्कीम योजनान्तर्गत रखा है जिसके अंतर्गत केवल वित्तीय परिलाभ ही दिये जाते है और जबकि कार्मिक की अधिसूचना में संशोधित नियम 5 भाग – VI के शीर्षक का संशोधन – शब्द पदोन्नति के लिए पात्रता से स्पष्ट एवं प्रक्रिया होता है। यह पद पदोन्नति का है कि आचार्य के पद 100% पदोन्नति द्वारा भरे जायेंगे। इससे स्पष्ट है कि अधिसूचना में और आयुक्तालय के पत्र में सुस्पष्ट नहीं किया गया है कि आचार्य के जो 477 पद स्वीकृत किये गये है उसके एससी/एसटी के कितने पद है। एससी/एसटी को आरक्षण संविधान प्रदत्त है। किसी भी प्रकार की भर्ती (प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष या पदोन्नति) के लिए आरक्षित वर्ग (एससी/एसटी) के लिए श्रेणीवार पद निर्धारित होते है जिसका अधिसूचना पत्र में कहीं कोई भी उल्लेख नहीं किया गया है। यह संविधान की मूल भावना एवम् सामाजिक आर्थिक न्याय के पूर्णतया प्रतिकूल है, जो कांग्रेस के राज में हो रहा है, जिसे अपेक्षाकृत आरक्षित वर्गों का हितेषी कहा जाता है। पर, कांग्रेसी सरकार ऐसा पहले भी 2012-13 में कर चुकी है जिसमें आरवीआरएसई काडर के 704 पदों में एक भी आरक्षित पद नहीं रखा था और उसकी एवज में बैकलॉग भी नहीं दिया था, जबकि उस समय सारे पद राजस्थान शिक्षा सेवा के नियमित पदों में से आवंटित किये गये थे। महविद्यालयों में आचार्य पद के उपरान्त प्राचार्य पद पर पदोन्नति होती है और जब एससी/एसटी वर्ग के संकाय सदस्य आचार्य बनने से ही वंचित हो जायेगें तो इस स्थिति में एससी/एसटी वर्ग के लोग प्राचार्य कैसे बन पायेगें यह विचारणीय है। एससी /एसटी/ओबीसी के लोगों में इस बात को लेकर घोर असंतोष एवम् गुस्सा है। आचार्य पद पर पदोन्नति के लिए जिन सेवा शर्तो का निर्धारण कार्मिक विभाग की अधिसूचना में दर्शाया गया है। उन शर्तो के अनुसार तो एससी/एसटी के संकाय सदस्य आचार्य पद पर पदोन्नत ही नहीं हो पायेंगे। आरक्षित-वर्गों में अधिकाशतः Ph-D धारक नहीं है, जिसके लिए सरकारी नीतियाँ और ब्यूरोक्रेसी दोनों जिम्मेदार हैं, क्योंकि पीएच-डी करने का ना तो उन्हें कभी अवसर प्रदान किया गया और ना जाति विशेष के शोध निर्देशकों ने उनके द्वारा पीएच-डी के लिए प्रस्तुत सिनोप्सिस को स्वीकृत ही किया गया। यही नहीं अपितु शैक्षणिक स्कोर भी एससी/एसटी समुदाय के संकाय सदस्य न्यूनतम अंकों तक भी नहीं पहुँच पायेंगे। क्योंकि पुनश्चर्या पाठ्यक्रम/अभिन्नुख पाठ्यक्रम/कार्यशाला/प्रशिक्षण आदि पाठ्यकार्यक्रमों में आयुक्तालय द्वारा एससी/एसटी के संकाय सदस्यों को कम ही संख्या में नामित किया जाता रहा है। इसके लिए आयुक्तालय की अकादमिक शाखा से अबतक भेजे गये प्रस्तावित नामों की सूचियों को प्रदर्शित करने से यह सब बखूबी ज्ञात हो जायेगा। इस स्थिति में जब पाठ्यक्रमों में सहभागिता के लिए एससी/एसटी के संकाय सदस्यों को नामित ही नहीं किया जायेगा तो उनका शैक्षणिक स्कोर कैसे बढ़ पायेगा? यही स्थिति महाविद्यालय स्तर पर भी है। अधिकांश महाविद्यालयों में एससी/एसटी के लोगों को पाठ्यक्रमोत्तर गतिविधियों में सम्मिलित होने का अवसर ही नहीं दिया जाता रहा है और कमोवेश यही स्थिति विश्वविद्यालयों की भी रही है। कार्मिक विभाग की अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि आचार्य पद पर पदोन्नति सर्वथा पद की विषय वार उपलब्धता की शर्त पर की जावेगी। क्योंकि यह न्यायोचित नहीं है इसलिए समस्त विषय के संकाय सदस्यों के पद की उपलब्धता के आधार पर ही आचार्य पद स्वीकृत किये जाने चाहिए और कॉलेज शिक्षा विभाग राजस्थान को ही एक सम्पूर्ण इकाई मानते हुए आचार्य पद स्वीकृत किये जाने चाहिये न कि विषयवार उपलब्धता की शर्त पर। राज्य सरकार ने 200 अंक रोस्टर प्रणाली को स्वीकार कर लिया है और इसके अनुरूप विषयवार उपलब्धता एक इकाई कदापी नहीं हो सकती क्योंकि राजस्थान में समस्त राजकीय महाविद्यालय कॉलेज शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित है। अतः सम्पूर्ण कॉलेज शिक्षा विभाग को एक इकाई मानते हुए पर सृजित किये गये प्रोफेसर्स के पदों में आरक्षण-व्यवस्था को लागू किया जाये। गहलोत सरकार को चाहिए कि कार्मिक विभाग राजस्थान सरकार द्वारा जारी दिनांक 31.01.2018 की अधिसूचना द्वारा राजस्थान शिक्षा सेवा (महाविद्यालयशाखा) के नियमों में संशोधन कर 200 अंक रोस्टर प्रणाली के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया प्रारम्भ कि जावें और कॉलेज शिक्षा विभाग राजस्थान की ही एक सम्पूर्ण इकाई मानकर आचार्य के पद स्वीकृत किये जायें। इसमें आरक्षित वर्ग के पद स्पष्ट रूप से श्रेणीवार अंकित किये जाये, जिससे एससी/एसटी/ओबीसी के संकाय सदस्यों को इसका लाभ मिल सकें। मूकनायक मीडिया के संसाधन बढ़ाने के लिए स्वेच्छा से 9999750166 पर Paytm / PhonePay से आर्थिक सहयोग दीजिए ताकि ख़बरों की संख्या और दायरा बढ़ाया जा सके…

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This