राजस्थान के कॉलेजों में शिक्षक प्रोफ़ेसर बन सकेंगे,किंतु पीएचडी अनिवार्य,आरक्षित-वर्गो को होगा नुकसान

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो || नवंबर 10, 2020 || जयपुर : प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में प्रोफ़ेसर बनने के लिए पीएचडी धारक होना अनिवार्य होगा। हालांकि प्रोफ़ेसर के नये पदों के सृजन के साथ सहायक प्रोफ़ेसर और एसोसिएट प्रोफ़ेसर पर उनके प्रदर्शन को लेकर बाध्यताएँ भी लगा दी गयी हैं। इन शिक्षकों को एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडीकेटर (एपीआई) के निर्धारित मानदंडों पर हर साल अंक जुटाने होंगे। तब ही उन्हें करियर एडवांसमेंट योजना के तहत पदोन्नतियाँ मिल पायेंगी। पदोन्नति के अंकों की गणना का फार्मूला तय कार्मिक विभाग ने राजस्थान शैक्षणिक सेवा (महाविद्यालय शाखा) नियमों में संशोधन कर दिया है। एपीआई में पहली श्रेणी शिक्षण की है, जिसमें शिक्षक को पदोन्नति के लिए 125 में से न्यूनतम 75 अंक लाने जरुरी होंगे। यह भी पढ़ें : कॉलेजों में प्रोफेसर्स के 477पद सृजित, आरक्षित-वर्गों के हितों पर कुठाराघात, भर्ती-प्रक्रिया दिशाहीन सह-शैक्षणिक गतिविधियों (को-करिकुलर एक्टिविटी) में 50 में से 15 अंक लाने जरूरी होंगे। इसके अलावा रिसर्च के क्षेत्र में शोधपत्र, पुस्तक प्रकाशन एवं अन्य मानदंडों पर न्यूनतम प्रदर्शन अंकों की बाध्यता रखी गयी है। 477 प्रोफ़ेसर पदों का सृजन ऊँट के मुँह में जीरा सरकार ने पहली बार 477 प्रोफेसर के पद सृजित किए हैं, जिन्हें पदोन्नति से भरा जाएगा। इसके अलावा कॉलेज प्राचार्य के पदों पर 25 प्रतिशत पद प्रोफेसर एवं 75 प्रतिशत पद एसोसिएट प्रोफेसर से भरे जायेंगे। प्रोफ़ेसर के पदों पर आरक्षण की व्यवस्था का जिक्र नहीं प्रोफ़ेसर के पदों पर एससी / एसटी / ओबीसी और आर्थिक रूप से पिछड़ों एवम् शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था का जिक्र नहीं किया गया है। संवैधानिक रूप से सभी पदों में क्रमशः 15%, 12%, 22%, 10% और 3% (वर्टिकल) आरक्षण देने की बाध्यता है। ऐसे में आरक्षण का प्रावधान नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे आरक्षित-वर्गों में व्यापक असंतोष है। प्रोफ़ेसर के पदों को भरने की प्रक्रियागत खामियाँ राजस्थान सरकार ने भले ही कॉलेजों में प्रोफेसरों के पदों का सृजन कर दिया है , किंतु उनको भरने के लिए सुस्पष्ट प्रक्रिया का उल्लेख नहीं किया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रोफेसरों के पदों को किस स्तर पर भरा जायेगा। चूँकि यूजीसी ने प्रोफेसरों के पदों को भरने के लिए प्रमोशन और सीधी भर्ती (डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) की प्रक्रिया कमोबेश एक समान है। यह भी पढ़ें : गहलोत सरकार को दूर करनी होगी कॉलेजों में प्रोफ़ेसर के पदों को भरने की आरक्षण की प्रक्रियागत खामियाँ ऐसे में राज्य सरकार को तय करना होगा कि यह प्रक्रिया वह आरपीएससी के स्तर पर करवायेगी या कॉलेज शिक्षा निदेशालय के स्तर पर क्योंकि बिना साक्षात्कार के प्रोफ़ेसर पर नियुक्ति नहीं हो सकती है। साक्षात्कार की प्रक्रिया में तीन विशेषज्ञों को बुलाना होगा। वहीं, प्रोफ़ेसर रेंक के एससी / एसटी के ऑब्जर्वर को भी साक्षात्कारों में बुलाना होगा। उप-प्राचार्य पद डाइंग कैडर में सरकार ने कॉलेजों में उप प्राचार्य का पद डाइंग कैडर में मान लिया है। यानि मौजूदा उप प्राचार्यों के रिटायर होने या प्राचार्य बनने के बाद उप प्राचार्य के पद पर कोई पदोन्नतियाँ नहीं होंगी। मूकनायक मीडिया के संसाधन बढ़ाने के लिए स्वेच्छा से 9999750166 पर Paytm / PhonePay से आर्थिक सहयोग दीजिए ताकि ख़बरों की संख्या और दायरा बढ़ाया जा सके…

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