करौली : देशभर के दलित-आदिवासी संगठन शिक्षक बैरवा केसाथ, कलेक्टर पर संवैधानिक अवमानना का केस दर्ज हो

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‘विश्लेषण : कांग्रेस राज में भी जिलाधिकारी जैसे पद पर बैठे ब्यूरोक्रेट्स आरएसएस और जातिवादी संगठनों के मातहत क्यों रहते हैं’ मूकनायक मीडिया ब्यूरो || मई 19, 2021 || करौली – जयपुर : करौली के जिला कलेक्टर सिद्धार्थ सिहाग द्वारा एक दलित शिक्षक को निलंबित करने का मामला राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ता जा रहा है । देश भर के दलित-आदिवासी-पिछड़े संगठनों ने पुरजोर माँग की है कि विप्र फाउण्डेशन नामक किसी गैर सरकारी संस्था की शिकायत पर बिना कोई जांच किये अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर पृथ्वीराज बैरवा, स्कूल व्याख्याता को निलंबित करने वाले जिला कलेक्टर, करौली के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा स्कूल व्याख्याता को तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाना संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण में उठाया गया श्रेयस्कर कार्य होगा। शिक्षक का कसूर क्या है ? पृथ्वीराज बैरवा, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, चंदेलीपुरा ( मंडरायल), जिला करौली में व्याख्याता पद पर कार्यरत है। जिला कलेक्टर, करौली द्वारा बिना किसी उपयुक्त आधार के मनमानी और तानाशाही पूर्ण कृत्य किया, जिसकी पारदर्शी और जवाबदेही व्यवस्था में कोई स्थान नहीं है। बिना किसी जांच के विप्र फाउण्डेशन नामक किसी गैर सरकारी संस्था की शिकायत पर किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर तथागत जातिवादी संस्था के दबाव में अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए पृथ्वीराज बैरवा, स्कूल व्याख्याता को आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए निलंबित कर दिया गया है, जिससे संपूर्ण अनुसूचित जाति/जनजाति समाज तथा बहुजन समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है । देश भर से सामाजिक कार्यकर्त्ता और सामाजिक संगठन एक सुर में उठ खड़े हुए हैं। पाखंडों की पौषक विप्र फाउन्डेशन बड़े आश्चर्य की बात बात है कि विप्र फाउंडेशन राजस्थान, किसी तथागत जातिवादी प्राइवेट सामाजिक संस्था द्वारा दिनांक 16 मई 2021 को पुलिस अधीक्षक, जिला करौली के नाम से एक ज्ञापन दिया गया, जिसमें पृथ्वीराज बैरवा, व्याख्याता के विरुद्ध फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया। इस ज्ञापन पर दिनांक 17 मई 2021 को जिला कलेक्टर, करौली ने बिना किसी जांच के उसे निलंबित कर दिया । किसी प्राइवेट संस्था द्वारा किसी सरकारी कर्मचारी / अधिकारी के बारे में किसी भी प्रकार का ज्ञापन दिए जाने पर इतनी जल्दबाजी में तुरंत संज्ञान लिया जाकर की गई कार्रवाई से जिला कलेक्टर, करौली की पूर्वाग्रह से ग्रसित सोच या दबाव को प्रदर्शित करती है। जो किसी भी प्रकार से संविधान की भावनाओं का समर्थन नहीं करती है। क्या संकीर्णता युक्त सोच का ब्यूरोक्रेट जिलाधिकारी जैसे संवेदनशील पद पर नियुक्ति का पत्र है! संविधान क्या कहता है ? ज्ञातव्य है कि भारतीय संविधान ( अनुच्छेद 51क) के अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करें। इसी कर्तव्य का निर्वहन करते हुए पृथ्वीराज बैरवा ने तार्किक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण की पोस्ट डाली होगी, ऐसी परिषद् की सोच है। सरकार का भी मुख्य कर्तव्य जनता को अंधविश्वास व पाखण्ड से बाहर निकालना है। संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति का अधिकार भी सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ प्रदान करता है। सर्वविदित है कि मनुवादी नीतियों के चलते अनुसूचित जाति / जनजाति वर्ग को पढ़ने-लिखने का अधिकार नहीं था। धार्मिक पुस्तकों व ग्रंथों में जो भी बातें लिखी गई हैं, वे तथाकथित उच्च वर्ग के ऋषि-मुनियाँ द्वारा ही लिखी गई है। अभिव्यक्ति की आजादी का क्या होगा ? पृथ्वीराज बैरवा ने जो भी उद्धरण फेसबुक पर दिए हैं, उन्हीं ऋषि-मुनियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों से लिए गए हैं। अतः यदि ये दृष्टांत या उद्धरण किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं तो जिन पुस्तकों में इस प्रकार के उद्धरण हैं, जिनसे सामाजिक विद्वेष पैदा होता है, उन पुस्तकों तथा धार्मिक ग्रंथों से इन उद्धरणों को हटाया जाना चाहिए या उन पुस्तकों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। जिला कलेक्टर महोदय, करौली को विप्र फाउण्डेशन द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक को प्रेषित ज्ञापन की जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जानी चाहिए थी तथा जांच होने के बाद यदि राजकीय कर्मचारी/अधिकारी के विरुद्ध गम्भीर संज्ञेय अपराध का आरोप साबित होता है और न्यायालय में विचारण के लिए चार्जशीट पेश की जाती है। तभी राजकीय कर्मचारी / अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए थी। इस प्रकार के ज्ञापन में तो कोई भी व्यक्ति या प्राइवेट संस्था किसी भी राजकीय कर्मचारी/अधिकारी के ऊपर आरोप लगा सकती है, जिसकी जांच किए बिना निलंबित किया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है। मनुस्मृति के पौषक जिलाधिकारी पर संविधान की अवमानना का मामला दर्ज करें गहलोत सरकार जिला कलेक्टर, करौली को ज्ञात होना चाहिए की देश मनुस्मृति से नहीं, बल्कि भारतीय संविधान से चलता है। पृथ्वीराज बैरवा को इस कारण से बिना किसी जांच के निलंबित किया जाना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है अतः अखिल भारत अनुसूचित परिषद तुरंत प्रभाव से उनका निलंबन रद्द किए जाने तथा अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने वाले जिला कलेक्टर, करौली के विरुद्ध संविधान की अवमानना के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की मांग सारे देश से उठ रही है। मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए आर्थिक सहयोग दीजिए… उम्मीद है आप मिशन अंबेडकर से अवश्य जुड़ेंगे आप सब जानते हैं अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक ! मूकनायक मीडिया आपके लिए ले कर आता है, वे न्यूज़-स्टोरीज जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहाँ से जहाँ वे हो रही हैं। मूकनायक मीडिया यह सब तभी कर सकता है जब आप सभी बाबासाहब डॉ अंबेडकर के इस मिशन से आत्मीयता से जुड़ें ! हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरें आप तक पँहुचाने के लिए हमारा आर्थिक सहयोग करें। आप सब दानवीर हैं इसलिए आपसे मिशन अंबेडकर को आगे बढ़ाने हेतु आर्थिक मदद माँग रहे हैं। अत: अपनी इच्छानुसार PhonePay या Paytm 9999750166 पर 100, 500, 1000 या अपनी हेसियत के मुताबिक नीचे Donate link पर जाकर आर्थिक सहयोग दीजिए..

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