नयी आफत : तीसरी लहर में ब्लड क्लोटिंग की दहशत, सोच में पड़े वैज्ञानिक, एहतियात ही बचाव, सतर्क रहें !

5 min read

मूकनायक मीडिया ब्यूरो || मई 20, 2021 || जोधपुर – जयपुर : कोरोना वायरस ने भारत समेत दुनियाभर में तबाही मचा रखी है। दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिक लगभग रोज ही इससे जुड़े नए खुलासे करते हैं। कभी वायरस के नए स्ट्रेन को लेकर तो कभी इसके कारण हो रही बीमारियों को लेकर । कोरोना वायरस महामारी एक बार फिर से पूरी दुनिया पर अपना कहर बरपा रही है। रोजाना नए मामले रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, जबकि मृतकों के आंकड़ों में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। अकेले भारत में कोविड-19 के अब तक ढाई करोड़ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और करीब 287156 लोग काल के गाल में समा चुके हैं। कोरोना नित नया रूप बदल रहा है । पहली बार बाजू में हुई ब्लड क्लॉटिंग आपको बता दें कि यह ऐसा पहला मामला सामने आया है, जब कोरोना वायरस की वजह से मरीज की बांह पर ब्लड क्लॉटिंग हुई हो। इससे पहले भी कोरोना संक्रमित मरीजों के शरीर में ब्लड क्लॉटिंग देखी जा चुकी है, लेकिन वो शरीर के निचले हिस्से में। ऐसा पहली बार है जब कोरोना के चलते मरीज के बाजू में खून का थक्का जमा हो। यह मामला सामने आया है न्यू जर्सी के रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की स्टडी में। रिसर्चर्स का कहना है कि इस अध्ययन से यह जानने में मदद मिलेगी कि महामारी की वजह से होने वाला इंफ्लेमेशन शरीर को किस तरह नुकसान पहुंचा रहा है। इसके साथ ही ये भी जानने को मिलेगा कि बार बार होने वाले ब्लड क्लॉटिंग का इलाज किस तरह किया जा सकता है। 85 वर्षीय मरीज को हुई समस्या वायरसेस पत्रिका में छपी स्टडी के मुताबिक, 85 साल के एक मरीज के बाजू में ये ब्लड क्लॉटिंग देखी गयी है। शोधकर्ता पायल पारिख बताती हैं कि बुजुर्ग मरीज बाजू में सूजन की समस्या लेकर डॉक्टर के पास आया था। जब जांच की गयी तो पता चला कि मरीज के हाथ के ऊपर हिस्से में खून का थक्क जमा हुआ है। उसके कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई शोधकर्ता पायल पारिख थी, हालांकि उसमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। स्टडी में शोधकर्ता डॉक्टर पायल पारिख बताती हैं कि मरीज का ऑक्सीजन लेवल सामान्य था, लेकिन उसके हाथ में खून का थक्का जमा हुआ है, जिसके चलते उसे भर्ती करना पड़ा। उनका कहना है कि ब्लड क्लॉट के मामले शरीर में इंफ्लेमेशन के चलते या फिर उन लोगों में देखने को मिलते हैं, जो ज्यादा चल फिर नहीं पाते हैं। ऐसे में एक्टिव व स्वस्थ लोगों में कम देखे गये हैं। बच्चों को कोरोना से बचाने की तैयारी, सिंगापुर-यूएई ने दी वैक्सीनेशन को मंजूरी स्टडी के बताया गया है कि ज्यादा ब्लड क्लॉट के मामले पैरों में देखे गये हैं। बाजू में ब्लड क्लॉटिंग होने के मामले कम ही देखे गये हैं। जो करीब 10 फीसदी हैं। इसके साथ ही ये भी बताया गया है कि इनमें से नौ प्रतिशत मामले ऐसे होते हैं, जिनमें ब्लड क्लॉटिंग बार-बार उभर जाता है। ब्लड सेल्स अध्ययन में सामने आई चिंताजनक बात स्टडी में एक चिंताजनक बात भी सामने आयी है। अध्ययन के मुताबिक, 30 फीसदी मरीजों में ब्लड क्लॉट फेफड़ों तक पहुंच जाता है जो खतरनाक साबित हो सकता है और यह काफी चिंताजनक है। स्टडी में पारिख ने कहा कि इसके चलते सूजन, दर्द और थकान भी बनी रह सकती है। बार्ज-305 से पहले डूब चुके ये समुद्री जहाज, दुनिया की सबसे खराब तूफानी आपदाएं स्टडी बताती है कि अगर कोई मरीज बिना वजह सूजन की शिकायत डॉक्टर के पास लेकर जाता है तो उसका डीप वेन थ्रोम्बोसिस और कोरोना वायरस की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर पारिख का कहना है कि अगर आपको पहले डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी नसों में खून जमने की शिकायत है या फिर ऐसी कोई पुरानी बीमारी है, जिस वजह से ब्लड क्लॉटिंग हो जाती है तो फिर कोरोना पॉजिटिव होने पर ये फिर से उभर सकता है, जो खतरनाक भी साबित हो सकता है। ऐसे में काफी ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। कोरोना पर रिसर्च जारी जाहिर है कि कोरोना वायरस महामारी से पूरी दुनिया बीते करीब एक साल से जंग लड़ रही है, लेकिन महामारी कहर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बीच दुनियाभर के कई देशों में कोरोना को लेकर रिसर्च अभी भी जारी है। वैज्ञानिक कोरोना की दवा से लेकर उस पर अध्ययन करने में जुटे हुए हैं। आपको बता दें कि अब कोरोना तेजी से बच्चों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। वैज्ञानिकों की ओर से चेतावनी दी गयी थी कि तीसरी लहर की दस्तक के बाद बच्चे भी कोरोना की चपेट में आने लगेंगे। लेकिन भारत के कुछ राज्यों में बच्चों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कर्नाटक में तो बीते 15 दिनों में 19 हजार से ज्यादा बच्चे कोविड पॉजिटिव पाये गये हैं। मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए आर्थिक सहयोग दीजिए… उम्मीद है आप मिशन अंबेडकर से अवश्य जुड़ेंगे आप सब जानते हैं अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक ! मूकनायक मीडिया आपके लिए ले कर आता है, वे न्यूज़-स्टोरीज जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहाँ से जहाँ वे हो रही हैं। मूकनायक मीडिया यह सब तभी कर सकता है जब आप सभी बाबासाहब डॉ अंबेडकर के इस मिशन से आत्मीयता से जुड़ें ! हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरें आप तक पँहुचाने के लिए हमारा आर्थिक सहयोग करें। आप सब दानवीर हैं इसलिए आपसे मिशन अंबेडकर को आगे बढ़ाने हेतु आर्थिक मदद माँग रहे हैं। अत: अपनी इच्छानुसार PhonePay या Paytm 9999750166 पर 200, 500, 1000 या अपनी हेसियत के मुताबिक नीचे Donate link पर जाकर आर्थिक सहयोग दीजिए..

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This