India Is No More free : फ्रीडम हाउस अंतरराष्ट्रीय संस्था ने कहा भारत अब आज़ाद देश नहीं रहा,आंशिक आजाद

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो || मई 23, 2021 || जयपुर : अमेरिका की “फ्रीडम हाउस” ने जो 1941 से लोकतंत्र, राजनैतिक स्वाधीनता और मानवाधिकार पर रिसर्च करता है “फ्रीडम हाउस” की पूरे विश्व मे बहुत बड़ी इज्जत है। वैश्विक स्तर पर सर्व के आधार पर बताया हैं कि भारत अब आज़ाद देश नहीं रहा, आंशिक आज़ाद बचा है। “फ्रीडम हाउस” ने भारत को “फ्री” देशों की सूची से हटा कर “पार्सिअली फ्री” यानी “आंशिक स्वाधीन” देशों की सूची में डाल दिया है | जिसकी प्रमुख वजहों में निम्नांकित बिंदुओं को शामिल हैं; मोदी और बीजेपी त्रासदीपूर्ण तरीके से भारत को तानाशाही की ओर ले जा रहे है मोदी के नेतृत्व में भारत ‘लोकतंत्र का प्रहरी’ बनने की राह को बंद कर चुका है | फ्री से पार्सिअली फ्री के कारण – मुसलमान, मीडिया, बुद्धिजीवी, सिविल सोसाइटी और आंदोलनकारियों पर प्लानिंग के तहत आक्रमण | कुछ खतरनाक ट्रेंड : देशद्रोह के कानून का गलत प्रयोग, एनजीओ पर रोक, विरोधियों पर एजेंसीओ की रेड, एक रिटायर्ड चीफ जस्टिस को राज्यसभा में भेजना |

भारत मे लोकतंत्र पर खतरा पूरे विश्व मे लोकतंत्र पर खतरे की घंटी है..लोकतांत्रिक स्पेस को भारत ने संकुचित किया है | सीसीए / दिल्ली दंगे / अदालतों के फैसलों पर भी विस्तार से लिखा है..मोदी ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ के काम में जबरदस्त तेजी लाई है | भारत के निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गये है मोदी ने जिस ढंग से बीजेपी के लिए पैसे जुटाए है वो भी भारत के लिए काफी खतरनाक माना गया है | अमेरिका के विदेश विभाग ने इस रिपोर्ट को मान्यता दी है..पूरे विश्व के निवेशक किसी भी निवेश के पहले सारे फैक्टर का विश्लेषण करते है..ऐसी रिपोर्ट “आर्थिक बैरियर” लगाने की पहली कड़ी है..बैरियर का अर्थ प्रतिबंध नही है | स्वतंत्र देश के रूप में भारत के दर्जे में कमी से जुड़ी फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट का खंडन फ्रीडम हाउस की “डेमोक्रेसी अंडर सीज” शीर्षक वाली रिपोर्ट, जिसमें दावा किया गया है कि एक स्वतंत्र देश के रूप में भारत का दर्जा घटकर “आंशिक रूप से स्वतंत्र” रह गया है, पूरी तरह भ्रामक, गलत और अनुचित है।

यह बात इस तथ्य से जाहिर होती है कि केंद्र में मौजूद राजनीतिक दल से इतर दूसरे दल भारत के कई राज्यों में संघीय ढांचे के तहत एक चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से सत्ता में आये हैं। ये चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हुए थे, जिन्हें एक स्वतंत्र संस्था द्वारा कराया गया था। इससे एक जीवंत लोकतंत्र की उपस्थिति का पता चलता है, जो विभिन्न विचारों वालों को स्थान देता है। इन विशेष बिंदुओं का खंडन किया जाता है कि भारत में मुसलमानों और उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के खिलाफ बनायी गयी भेदभावपूर्ण नीति – भारत सरकार अपने सभी नागरिकों के साथ समानता का व्यवहार करती है, जैसा देश के संविधान में निहित है और बिना किसी भेदभाव के सभी कानून लागू हैं। आरोपी भड़काने वाले व्यक्ति की पहचान को ध्यान में रखे बिना, कानून व्यवस्था के मामलों में कानून की प्रक्रिया का पालन किया जाता है… जनवरी, 2019 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के विशेष उल्लेख के साथ, कानून प्रवर्तन मशीनरी ने निष्पक्ष और उचित तरीके से तत्परता से काम किया। हालात को नियंत्रित करने के लिए समानता के साथ और उचित कदम उठाए थे। प्राप्त हुई सभी शिकायतों / कॉल्स पर कानून प्रवर्तन मशीनरी ने कानून और प्रक्रियाओं के तहत आवश्यक कानूनी और निरोधक कार्रवाई की थीं।

देशद्रोह कानून का उपयोग भारत के शासन के संघीय ढांचे के तहत ‘सरकारी आदेश’ और ‘पुलिस’ राज्य के विषय हैं। अपराधों की जाँच, दर्ज करना और मुकदमा, जीवन और संपत्ति की रक्षा आदि सहित कानून व्यवस्था बनाये रखने का दायित्व मुख्य रूप से राज्य सरकारों के पास है। इसलिए, कानून प्रवर्तन प्राधिकरणों द्वारा सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा के लिए सही कदम उठाए गये थे। लॉकडाउन के माध्यम से कोविड-19 पर सरकार की प्रतिक्रिया –16 मार्च से 23 मार्च के बीच ज्यादातर राज्य सरकारों / संघ शासित क्षेत्रों ने कोविड-19 के आकलन के आधार पर अपने संबंधित राज्यों/ संघ शासित क्षेत्र में आंशिक या पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया था। लोगों की किसी प्रकार की व्यापक आवाजाही से देश भर में तेजी से यह बीमारी फैल सकती थी। वैश्विक अनुभव और रणनीति में तात्कालिकता की जरूरत इन तथ्यों, वैश्विक अनुभव और रणनीति में तात्कालिकता की जरूरत व देश भर में विभिन्न रोकथाम के उपायों के कार्यान्वयन को ध्यान में रखते हुए, एक देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया था। सरकार इस बात को लेकर पूरी तरह सतर्क थी कि लॉकडाउन के दौरान, लोगों को बेवजह संकट का सामना नहीं करना चाहिए।

इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने हालात से निपटने के लिए ये कदम उठाए; भारत सरकार ने खाद्य पदार्थ, स्वास्थ्य, निराश्रितों और प्रवासी कामगारों को आश्रय उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकारों को राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) के इस्तेमाल की अनुमति दे दी सरकार ने प्रवासी कामगारों को नियंत्रित क्षेत्रों के बाहर विभिन्न गतिविधियों से जोड़े जाने की अनुमति दे दी, जिससे उनके लिए आजीविका सुनिश्चित हुई सरकार ने 1.7 लाख करोड़ रुपये के एक राहत पैकेज की भी घोषणा की, जिसमें प्रवासी कामगारों को भी शामिल किया गया सरकार ने अपने गाँवों में लौट रहे प्रवासी कामगारों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए एक अभियान लॉन्च किया राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत नवंबर, 2020 तक लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने मुफ्त में 5 किलोग्राम गेहूँ या चावल, 1 किलोग्राम दाल उपलब्ध करायी गयी महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत दैनिक मजदूरी बढ़ा दी गई, जिसमें वापस लौटने वाले प्रवासी कामगारों को भी शामिल किया गया। लॉकडाउन अवधि से सरकार को मास्क, वेंटिलेटर, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट आदि की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और इससे प्रभावी रूप से महामारी के प्रसार को रोकने का मौका मिला। प्रति व्यक्ति आधार पर भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या और कोविड-19 से जुड़ी मौतों के मामले में वैश्विक स्तर पर सबसे कम दर में से एक रही।

मानवाधिकार संगठनों पर सरकार की प्रतिक्रिया मानवाधिकार संगठनों पर सरकार की प्रतिक्रिया – भारतीय संविधान मानवाधिकारों की रक्षा के लिए मानवाधिकार सुरक्षा अधिनियम, 1993 सहित विभिन्न कानूनों के तहत पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराती है। यह अधिनियम मानवाधिकारों के बेहतर संरक्षण और इस विषय से जुड़े मसलों के लिए एक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोगों के गठन का प्रावधान करता है। राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं और पूछताछ, जाँच के एक तंत्र के रूप में काम करता है तथा ऐसे मामलों में सिफारिश करता है जहां उसे लगता है कि देश में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया है। शिक्षाविदों और पत्रकारों को धमकी व मीडिया शिक्षाविदों और पत्रकारों को धमकी व मीडिया द्वारा व्यक्त असंतोष की अभिव्यक्ति पर अंकुश – भारतीय संविधान अनुच्छेद 19 के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रावधान करता है। चर्चा, बहस और असंतोष भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा है।

भारत सरकार पत्रकारों सहित देश के सभी नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च अहमियत देती है। भारत सरकार ने पत्रकारों की सुरक्षा पर राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों को विशेष परामर्श जारी करके उनसे मीडिया कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून लागू करने का अनुरोध किया है। इंटरनेट शटडाउन –दूरसंचार अस्थायी सेवा निलंबन (लोक आपात और लोक सुरक्षा) नियम, 2017 के प्रावधानों के तहत इंटरनेट सहित दूरसंचार सेवाओं का अस्थायी निलंबन किया जाता है, जिसे भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के अंतर्गत जारी किया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समीक्षा समिति इस अस्थायी निलंबन के लिए केंद्र सरकार के मामले में गृह मंत्रालय में भारत सरकार के सचिव; या राज्य सरकार के मामले में गृह विभाग के प्रभारी सचिव की अनुमति की जरूरत होती है। इसके अलावा, ऐसे किसी आदेश की समीक्षा एक निश्चित समय अवधि के भीतर केंद्र या राज्य सरकार द्वारा, क्रमशः भारत सरकार के कैबिनेट सचिव या संबंधित राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समीक्षा समिति द्वारा की जाती है। इस प्रकार, सख्त सुरक्षा उपायों के तहत कानून व्यवस्था बनाये रखने के व्यापक उद्देश से दूरसंचार / इंटरनेट सेवाओं के अस्थायी निलंबन का सहारा लिया जाता है।

एफसीआरए संशोधन के तहत एमनेस्टी इंटरनेशनल की संपत्तियाँ जब्त किये जाने से रैंकिंग में आयी गिरावट – एमनेस्टी इंटरनेशनल को एफसीआरए अधिनियम के तहत सिर्फ एक बार और वह भी 20 साल पहले (19 दिसंबर 2000) में अनुमति मिली थी। तब से एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा बार-बार आवेदन के बावजूद बाद की सरकारों ने एफसीआरए स्वीकृति देने से इनकार कर दिया, क्योंकि कानून के तहत वह ऐसी स्वीकृति हासिल करने के लिए पात्र नहीं थी। हालांकि, एफसीआरए नियमों को दरकिनार करते हुए एमनेस्टी यूके भारत में पंजीकृत चार इकाइयों से बड़ी मात्रा में धनराशि ले चुकी है और इसका वर्गीकरण प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआयी) के रूप में किया गया। इसके अलावा एमनेस्टी को एफसीआरए के अंतर्गत एमएचए की मंजूरी के बिना बड़ी मात्रा में विदेशी धन प्रेषित किया गया। दुर्भावना से गलत रूट से धन लेकर कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। एमनेस्टी के इन अवैध कार्यों के चलते पिछली सरकार ने भी विदेश से धन प्राप्त करने के लिए उसके द्वारा बार-बार किये गये आवेदनों को खारिज कर दिया था। इस कारण पहले भी एमनेस्टी के भारतीय परिचालन को निलंबित कर दिया गया था।

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