बुद्ध जयंती पर विशेष : लोकतांत्रिक भारत के प्रति RSSकी नफ़रत; अहिंसा के देश में RSSका मूलमंत्र हिंसा

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो || मई 26, 2021 || अहमदाबाद – जयपुर : आरएसएस लोकतंत्र के सिद्धांतों के विपरीत लगातार यह माँग करता रहा है कि भारत में तानाशाही शासन हो। इस आलेख का मक़सद आरएसएस के असली चरित्र के प्रति सचेत करना है। यह हिंदुत्ववादी संगठन न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में लोकतंत्र, न्याय, धर्मनिरपेक्षता, समता-मूलक और सह-अस्तित्व पर आधारित समाज के निर्माण के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन कर उभरा है। गोलवालकर ने सन् 1940 में आरएसएस के मुख्यालय, रेशम बाग़ में आरएसएस के 1350 उच्चस्तरीय कार्यकर्ताओं के सामने भाषण करते हुए घोषणा कीः एक झण्डा (पर तिरंगा नहीं भगवा), एक नेता और एक विचारधारा एक ध्वज के नीचे, एक नेता के मार्गदर्शन में, एक ही विचार से प्रेरित होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व की प्रखर ज्योति इस विशाल भूमि के कोने-कोने में प्रज्जवलित कर रहा है। याद रहे कि एक झण्डा (पर तिरंगा नहीं भगवा), एक नेता और एक विचारधारा का यह नारा सीधे यूरोप की नाज़ी एवं फ़ासिस्ट पार्टियों, जिनके नेता क्रमशः हिटलर और मुसोलिनी जैसे तानाशाह थे, के कार्यक्रमों से लिया गया था। स्वतंत्रता की पूर्व-संध्या पर स्वतंत्रता की पूर्व-संध्या पर (14 अगस्त 1947) इसके इसी अंग्रेज़ी मुखपत्र में संपादकीय द्वारा भारतीय राष्ट्र की निम्नलिखित परिभाषा दी गयीः राष्ट्रत्व की छद्म धारणाओं से गुमराह होने से हमें बचना चाहिए। बहुत सारे दिमाग़ी भ्रम और वर्तमान एवं भविष्य की परेशानियों को दूर किया जा सकता है अगर हम इस आसान तथ्य को स्वीकारें कि हिंदुस्थान में सिर्फ़ हिंदू ही राष्ट्र का निर्माण करते हैं और राष्ट्र का ढांचा उसी सुरक्षित और उपयुक्त बुनियाद पर खड़ा किया जाना चाहिए…स्वयं राष्ट्र को हिंदुओं द्वारा हिंदू परम्पराओं, संस्कृति, विचारों और आकांक्षाओं के आधार पर ही गठित किया जाना चाहिए। विश्व में आरएसएस इकलौता सांस्कृतिक-धार्मिक संगठन जो हथियारों की पूजा करता है आरएसएस का दावा है कि वह एक सांस्कृतिक संगठन और दुनिया के हिंदुओं का सबसे बड़ा संगठन है। चौंकाने वाली बात यह है कि विश्व-भर में यह अकेला ऐसा सांस्कृतिक-धार्मिक संगठन है जो धार्मिक त्योहारों के नाम पर खुलेआम हथियारों की पूजा किया करता है। आरएसएस की स्थापना विजय दशमी (दशहरा; रावण पर भगवान राम का जीत का दिन) के दिन 1925 में हुयी थी जो 1923में इसी विचारधारा द्वारा नागपुर में करवाये सांप्रदायिक-दंगों की बदनुमा परिणिति था। हर साल इस दिन आरएसएस अपने प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम का अयोजन करता है। बुद्ध और अशोक के देश में हथियारों की पूजा क्यों इस आयोजन का सब से महत्पूर्ण हिस्सा है आरएसएस के मुखिया (सरसंधचालक) दुवारा “शस्त्र-पूजा” (हथियारों की पूजा) किया जाना। वर्तमान आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने हर साल की तह 25 अक्टूबर, 2020 को ‘शस्त्र पूजा’ को एक हिंदू त्योहार के रूप में मनाया और इस तरह आरएसएस की फ़ासीवादी विरासत को एक बार फिर रेखांकित किया। सब से शर्मनाक यह है कि हिंसा के प्रतीक “शस्त्र-पूजा” की परम्परा को नरेंद्र मोदी ने बहैसियत गुजरात के मुख्यमंत्री अपनाया था और इसे एक राजकीय समारोह की हैसियत प्रदान की थी। लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष भारत के इतिहास में पहली बार देखा गया कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन कोई नेता देश के संविधान को न पूज कर हथियार पूज रहा था। मोदी द्वारा ‘शस्त्र-पूजा’ की तस्वीरों को सरकारी तौर पर व्यापक रूप से प्रसारित किया गया जो देश के प्रजातान्त्रिक ढांचे के लिए एक दिल दहलाने वाली बात थी। हिटलर और मुसोलिनी तक ने भी कभी हथियारों के प्रति इस प्रकार का लगाव का सार्वजनिक प्रदर्शन किया हो, इतिहास में ऐसी नज़ीर नहीं मिलती। मोदी द्वारा ‘शस्त्र-पूजा’ नागरिक समाज के कड़े विरोध के बावजूद हथियारों की पूजा का यह सिलसिला जारी है। डॉ भीम राव अंबेडकर ने जीवन-पर्यंत इस पर चिंता ज़ाहिर करते रहे हैं और सबसे बड़ा सवाल है कि देश में शस्त्र अधिनियम है, जिसके अंतर्गत किसी के लिए भी [बिना लाइसेंस] हथियार रखने पर रोक है। आरएसएस के लोग खुले आम हथियारों के साथ देखे जा सकते हैं। ऐसी तस्वीरें प्रचारित की जा रही हैं, जिनमें मोहन भागवत (आरएसएस मुखिया) और नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) एके 47, स्वचालित बंदूकों (मल्टी-फ़ायरिंग गन), कंधों पर रखकर रॉकेट दागने जैसे हथियार लिए हुए हैं। मैंने कई बार केंद्र और राज्य सरकारों से पूछा है उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए आर्थिक सहयोग दीजिए… उम्मीद है आप मिशन अंबेडकर से अवश्य जुड़ेंगे मूकनायक मीडिया बिरसा फुले अंबेडकार मिशन हम तभी जारी रख सकते हैं जब आप सभी बाबासाहब डॉ अंबेडकर के इस मिशन से आत्मीयता से जुड़ें ! मिशनरी कार्य आप तक पँहुचाने के लिए हमारा आर्थिक सहयोग करें। आप सब दानवीर हैं इसलिए आपसे मिशन अंबेडकर को आगे बढ़ाने हेतु आर्थिक मदद माँग रहे हैं। अत: अपनी इच्छानुसार PhonePay या Paytm 9999750166 पर 200, 500, 1000, 2000, 5000, 10000, 20000 या इससे भी इससे भी अधिक अपनी हेसियत के मुताबिक नीचे Donate link पर जाकर आर्थिक सहयोग दीजिए ताकि बिरसा फुले अंबेडकार मिशन का कारवाँ जारी रह सके। जैसे-जैसे संसाधन बढ़ेंगे.. आपका मूकनायक मीडिया आगे बढ़ेगा..

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