खींचतान : क्या मोदी सरकार की गिरती साख को सोशल मीडिया साइट्स का प्रतिबंध रोक सकेगा, जाने नये नियम

मूकनायक मीडिया ब्यूरो || मई 28, 2021 || दिल्ली- जयपुर : कहते हैं कि बुरा समय शत्रुओं को भी मित्र बना देता है। पिछले कुछ दिनों से इसी कहावत पर आधारित घटनाएँ घटी हैं। समस्त दक्षिणपंथियों की भी रातों की नींद को ग्रहण सा लग गया है। अब ये अपनी गिरती साख को संजीवनी देने के लिए ट्विटर-फेसबुक जैसी सोशल मीडिया साइटों को प्रतिबंधित करना चाहते हैं क्योंकि अब इनकी पोल खुल चुकी है और आम लोगों को इनकी फरेबियत समझ आ गयी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तथा केंद्र सरकार पिछले कुछ दिनों में इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तथा केंद्र सरकार के बीच चलती खींचतान को लेकर कई बड़ी सुर्खियाँ बनीं। यहाँ तक दावा किया जा रहा था, कि शायद 26 मई, 2021 से भारत में फेसबुक-टि्वटर संचालन न कर पायें। परंतु अब तक ऐसा कुछ देखने को मिला नहीं है। ऐसा ही करतब 2012 में यूपीए सरकार ने दिखने की भरपूर कोशिश की थी, तब एनडीए विरोध में थी। दोनों ही एक बेल के तुमड़े हैं! सत्ता दरकती है तो सब छटपटाते हैं, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सातवें साल ने नेहरू, इंदिरा, मनमोहन और अब मोदी तक सबको तारे दिखायें हैं। केंद्र सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच नये आईटी नियमों को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। दरअसल, सोशल मीडिया कंपनियों पर शिंकजा कसते हुए मोदी सरकार ने नये आईटी नियम बनाये हैं, जो 26 मई से प्रभावी हो गये हैं। व्हाट्सऐप ने अदालत का दरवाजा खटखटाया भारत सरकार के नये आईटी नियमों के खिलाफ फेसबुक के मालिकाना हक वाला मैसेजिंग एप व्हाट्सऐप ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वहीं सरकार ने सभी कंपनियों को नोटिस भेजकर पूछा है कि नियम का पालन अब तक क्यों नहीं किया गया? इस बीच, चर्चा हो रही है कि नये आईटी नियमों के नहीं मानने पर फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स बंद हो सकते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्या विवाद है? विवाद की वजह सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच विवाद नये आईटी नियमों की वजह से शुरू हुआ है, जिन्हें भारत सरकार ने 26 मई से लागू कर दिया है। नये नियमों के अनुसार, व्हाट्सऐप और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भेजे और शेयर किये जाने वाले मैसेजेस के ओरिजनल सोर्स को ट्रैक करना जरूरी है। यानी अगर कोई गलत या फेक पोस्ट वायरल हो रही है तो सरकार कंपनी से उसके ऑरिजनेटर के बारे में पूछ सकती है और सोशल मीडिया कंपनियों को बताना होगा कि उस पोस्ट को सबसे पहले किसने शेयर किया था। अधिकारी नियुक्त कर तय करें जवाबदेही नये नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को किसी पोस्ट के लिए शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। इसके लिए कंपनियों को तीन अधिकारियों (मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल अधिकारी और शिकायत निवारण अधिकारी) को नियुक्त करना होगा। ये अधिकारी भारत के ही रहने वाले होने चाहिए और इनका कॉन्टेक्ट नंबर सोशल मीडिया वेबसाइट के अलावा एप पर होना अनिवार्य है ताकि लोग शिकायत कर सकें। इसके साथ ही अधिकारियों के लिए शिकायत का अपडेट देने के लिए 15 दिनों की समयसीमा भी तय की गई है। कंपनियों को पूरे सिस्टम पर नजर रखने के लिए स्टाफ रखने को कहा गया है। किसी की निजता का हनन नहीं होगा नये आईटी नियमों का सरकार ने बचाव किया है। सरकार की ओर से कहा गया कि इन नियमों से किसी की निजता का हनन नहीं होता है। नये आईटी नियमों के तहत देश की संप्रभुता या सार्वजनिक व्यवस्था और देश की सुरक्षा से जुड़े ‘बेहद गंभीर अपराध’ वाले संदेशों को रोकने या उसकी जांच के लिए ही उनके मूल स्रोत की जानकारी माँगने की जरूरत है। सरकार ने दिया था तीन माह का वक्त नये आईटी नियमों की घोषणा 25 फरवरी को की गई थी और ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को इसे लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। नियमों का पालन न करने के परिणामस्वरूप इन सोशल मीडिया कंपनियों पर कार्रवाई की जा सकती है। व्हाट्सएप ने खटखटाया अदालत का दरवाजा व्हाट्सएप ने भारत सरकार के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में नये आईटी नियमों को लेकर याचिका दायर की है, जिसमें नियमों का असंवैधानिक करार देते हुए रोकने का अनुरोध किया है। व्हाट्सएप का कहना है कि नये नियमों से यूजर्स की प्राइवेसी प्रभावित होगी। ये एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को तोड़ देगा और लोगों के निजता के अधिकार को मौलिक रूप से कमजोर कर देगा। क्या नये नियमों से व्हाट्सएप को होगा नुकसान? सवाल ये है कि क्या नये नियमों को मानने से व्हाट्सएप को नुकसान होगा? दरअसल, नये नियमों के तहत व्हाट्सएप को यूजर्स के सभी मैसेजेस को ट्रेस करना होगा और ऐसा करने से लोगों का व्हाट्सएप से भरोसा उठ जाएगा। व्हाट्सएप का कहना है कि चैट ट्रेस करना एक तरह से वैसे ही है जैसे हमारे यूजर्स के फिंगरप्रिंट की जानकारी माँगी जा रही हो। यूजर्स को क्या नुकसान? नये आईटी नियमों से आम लोगों को क्या नुकसान होगा? बता दें कि नये नियमों के अनुसार, व्हाट्सएप को सभी मैसेजेस को ट्रेस करना होगा और यूजर्स के सभी प्राइवेट मैसेजेस का हिसाब कंपनी के पास रहेगा। इसके साथ ही सोशल मीडिया कंपनियाँ यूजर्स का और भी ज्यादा डेटा कलेक्ट करेंगी। …तो मौजूदा आईडी एक्ट के तहत होगी कार्रवाई अगर कंपनियाँ नये नियमों को नहीं मानती हैं तो उन पर मौजूदा आईटी एक्ट के तहत ही कार्रवाई होगी। हाल ही में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि ये कोई कानून नहीं है और ये सिर्फ गाइडलाइन हैं। अगर सोशल मीडिया कंपनियाँ नयी गाइडलाइन को फॉलो नहीं करती हैं तो उन पर मौजूदा आईटी कानून के तहत ही कार्रवाई होगी। गूगल, फेसबुक ने दिलाया सरकार को भरोसा व्हॉट्सएप ने इन नियमों को अदालत में चुनौती दी है, जबकि फेसबुक-गूगल ने अमल करने का भरोसा तो दिलाया है, लेकिन इसकी समयसीमा नहीं घोषित की है। वहीं, ट्विटर ने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जानकारों का कहना है कि कंपनियाँ नये नियमों में कुछ बदलाव चाहती हैं। वे इनके क्रियान्वयन के लिए छह महीने की मोहलत देने की भी पक्षधर हैं। कू ने लागू किये नियम तो ट्विटर ने माँगा वक्त माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने केंद्र सरकार की तरफ से नयी गाइडलाइन को लागू करने के लिए छह महीने का समय माँगा है। वहीं भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग साइट कू एप ने सरकार की गाइडलाइन को लागू कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल निजता की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की एक बेंच सुनवाई कर रही है कि निजता के अधिकार को संविधान के तहत बुनियादी अधिकार क़रार दिया है। उच्चतम न्यायालय का कहना है कि प्रौद्योगिकी के इस दौर में निजता की अवधारणा की सुरक्षा हारी हुई बाज़ी है। हम निजता की हारी हुई बाज़ी की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम नहीं जानते कि किस मकसद से सूचना का इस्तेमाल किया जायेगा। यह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। मोदी सरकार आरएसएस के दबावों में काम कार रही है और आरएसएस कभी लोकतांत्रिक जीवन-मूल्यों का पक्षधर नहीं रहा तो देखना यह है कि पीएम मोदी लोकतांत्रिक जीवन-मूल्यों की तरफ बढ़ाते हैं या आरएसएस की अराजकता! मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए आर्थिक सहयोग दीजिए… उम्मीद है आप मिशन अंबेडकर से अवश्य जुड़ेंगे मूकनायक मीडिया बिरसा फुले अंबेडकार मिशन हम तभी जारी रख सकते हैं जब आप सभी बाबासाहब डॉ अंबेडकर के इस मिशन से आत्मीयता से जुड़ें ! मिशनरी कार्य आप तक पँहुचाने के लिए हमारा आर्थिक सहयोग करें। आप सब दानवीर हैं इसलिए आपसे मिशन अंबेडकर को आगे बढ़ाने हेतु आर्थिक मदद की जरुरत हैं। अत: अपनी इच्छानुसार PhonePay या Paytm 9999750166 पर 200, 600, 1200, 2400, 5100, 11000, 21000 या इससे भी इससे भी अधिक अपनी हेसियत के मुताबिक नीचे Donate link पर जाकर आर्थिक सहयोग दीजिए ताकि बिरसा फुले अंबेडकार मिशन का कारवाँ जारी रह सके। जैसे-जैसे संसाधन बढ़ेंगे.. आपका मूकनायक मीडिया आगे बढ़ेगा..

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