माँ शब्द कलंकित : काश! नवजात मासूम अपनी माँ से पूछ पाती, माँ मुझे पत्थरों और झाड़ियों में क्यों फेंका

मूकनायक मीडिया ब्यूरो || 18 जुलाई 2021|| जयपुर- चित्तौड़गढ़ : चित्तौड़गढ़ के कनेरा थाना क्षेत्र में दो दिन की मासूम बच्ची पत्थरों और झाड़ियों के बीच मिली। वहाँ मौजूद कुछ बच्चों ने रोने की आवाज सुन ली। इसके बाद ववहाँ से गुजर रहे एक किसान ने कपड़ा हटाकर देखा तो मासूम बेसुध पड़ी थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और उसे अस्पताल पहुँचाया गया। चित्तैड़गढ़ के कनेरा क्षेत्र के सरकारी हॉस्पिटल से करीब 100 मीटर की दूरी पर भुवानिया खेड़ी रोड के किनारे झाड़ियों में एक नवजात को कोई फेंक गया। घटना शनिवार देर शाम की है। श्रीनिवास नाम के युवक को जब पता चला कि मासूम को ऐसी हालात में छोड़ कर चले गये तो उसने तुरंत अस्पताल के कर्मचारियों को सूचना दी और कर्मचारी मौके पर पहुँचे। वे बच्चे को उठाकर कनेरा अस्पताल ले गये, जवहाँ उसका प्रारंभिक उपचार कर पुलिस को सूचना दी। मौके पर कनेरा पुलिस पहुँची और बाल कल्याण समिति को सूचना दी। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश दशोरा ने तुरंत FIR दर्ज कर बच्ची को जिला अस्पताल भेजने का आर्डर दिया। कनेरा SHO रूपलाल मीणा ने सारी फॉर्मेलिटी पूरी कर उसे रात को 108 एम्बुलेंस की सहायता से जिला अस्पताल लेकर आये, जहाँ वहाँ बच्ची का उपचार किया गया। जब बच्ची मिली थी तो उसके हाथ पर हल्की सी खरोंच थी और खून के धब्बे थे। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश दशोरा ने बताया कि बच्ची लगभग 2 से 3 दिन की रही होगी। ग्रामीण श्रीनिवास धाकड़ ने मौके पर हॉस्पिटल के कर्मचारियों को बुलाया। हॉस्पिटल में पुलिस पहुँची और नवजात को जिला अस्पताल लेकर आये। नवजात का वजन लगभग दो किलो का है। अभी मासूम स्वस्थ है और उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टर ने बताया कि पत्थरों व झाड़ियों के बीच होने की वजह से उसके हाथ पर चोटें आयी है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश दशोरा ने बताया कि कनेरा पुलिस ने बच्ची का मेडिकल करवा कर उसकी रिपोर्ट तैयार की है। मासूम को एनआईसीयू में बच्चे को रखा गया है। अध्यक्ष दशोरा ने बताया कि बच्ची के शरीर में साधारण सी चोटें आयी हैं। इसलिए उसे कुछ दिनों तक NICU में ही रखा जायेगा ताकि डॉक्टर उसके पूर्ण उपचार कर सके। उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद ही उसे शिशु गृह में लिया जायेगा। अज्ञात माँ-बाप के खिलाफ कनेरा थाने में मामला दर्ज करवाया गया है। प्रत्यक्षदर्शी श्रीनिवास बोले: रोने की आवाज से बच्चे शामिल हो गये थे, मैंने देखा तो मासूम बेसुध थी कनेरा निवासी श्रीनिवास ने बताया कि रोज की तरह वे शाम को अपने खेत की ओर जा रहे थे। इससे पहले वहाँ खेल रहे बच्चों को झाड़ियों के बीच में से मासूम के रोने की आवाज सुनाई दी तो वे वहाँ जाकर देखने लगे। बच्चों को वहाँ देख, मैं भी पहुँचा तो उसमें से रोने की आवाज आने लगी। इस पर कपड़ा हटाया तो मैं खुद चौक गया। करीब दो से तीन दिन की मासूम थी और कपड़ों में लिपटी हुई थी। इसके बाद पुलिस और हॉस्पिटल के लोगों को सूचना दी और उसे अस्पताल पहुँचाया। डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। उम्मीद है आप बिरसा फुले अंबेडकर मिशन से अवश्य जुड़ेंगे, सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…

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