आदिवासियों जागो.! जनगणना में आदिवासी धर्म कॉलम की मांग कोरोना के बाद फिर जोर पकड़ने लगी है, युवा आगे

3 min read

मूकनायक मीडिया | 26 मार्च 2022 | दिल्ली जयपुर : जनगणना 2021 में आदिवासी/ ट्राइबल कॉलम लागू करवाने की मांग पूरे देश में लगातार रफ्तार पकड़ रही है। 2021 की जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग ट्राइबल कॉलम देने की मांग को लेकर 15 मार्च को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर ”राष्ट्रीय आदिवासी इंडिजिनियस धर्म समन्वय समिति, भारत” के बैनर तले एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया था। जहां छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, असम, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित झारखंड के आदिवासी अगुआ शामिल हुए। कार्यक्रम में धर्म कोड की मांग को लेकर भारत के 21 राज्यों से आदिवासी साहित्यकार, इतिहासकार, समाजिक चिंतक, समाज सेवक, बुद्धिजीवी, लेखक आदि शामिल हुए और आदिवासी धर्म कोड की मांग को काफी मजबूती से रखा। इस अवसर पर आदिवासी बुद्धिजीवियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आदिवासी किसी भी परिस्थिति में हिंदू नहीं हैं। आदिवासी जनजातियों का रीति-रिवाज, पूजा-पद्धति, जन्म-विवाह-मरण संस्कार हिंदुओं से भिन्न हैं। इसलिए इसकी अस्मिता पहचान की रक्षा के लिए जनगणना 2021 के फॉर्म में आदिवासियों के लिए अलग कोड होना नितांत आवश्यक है। सुप्रसिद्ध आदिवासी चिंतक, सोशल एक्टिविस्ट और बुद्धिजीवी प्रोफेसर राम लखन मीना ने इस अवसर पर कहा कि ब्रिटिश शासन काल में 1871-1941 तक की हुई जनगणना प्रपत्र में देश के आदिवासियों के लिए अलग 7वां कॉलम अंकित किया गया था, जहां देश के आदिवासी, धर्म के स्थान पर खुद को अन्य धर्म जैसे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन से अलग मानकर 7वें कॉलम में अपना धर्म लिखते थे। परंतु देश की आजादी के बाद एक बड़ी और सोची समझी साजिश के तहत सुनियोजित तरीके से इस कॉलम को हटा दिया गया। प्रोफेसर मीना ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम सेक्शन-2 में स्पष्ट अंकित है कि हिंदू विवाह अधिनियम शेड्यूल्ड ट्राइब्स पर लागू नहीं होता है, क्योंकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स के पूजा व शादी विधान, हिंदू शादी विधान से अलग है। इस अवसर पर कहा गया कि देश के आदिवासी ना ही आस्तिक हैं, ना ही नास्तिक है, वे सभी वास्तविक हैं। प्रकृति की रक्षा और प्रकृति के साथ चलने वाले आदिवासी ही भारत के मूल निवासी हैं और इनका अस्तित्व और इनकी पहचान के लिए जनगणना प्रपत्र में कॉलम होना चाहिए। दिल्ली में जंतर मंतर पर अनेक आदिवासी अगुआओं ने आह्वान करते हुए कहा कि जब तक धर्म कोड की मांग पूरी नहीं होती है, तब तक उलगुलान जारी रहेगा। धरना-प्रदर्शन के पश्चात राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग, महा रजिस्ट्रार जनगणना आयोग को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन रिसीव करते हुए केंद्रीय ट्राइबल मंत्री अर्जुन मुंडा ने आश्वस्त किया कि वे जल्द ही अन्य सांसदों से इस मुद्दे पर विचार विमर्श करेंगे एवं उनका समर्थन लेकर संसद से आदिवासी / ट्राईबल धर्म कॉलम प्रस्ताव पारित कराकर सरकार को भेजेंगे, ताकि इस देश के आदिवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो सके तथा उनको स्वतंत्र धार्मिक पहचान मिल सके। देश के विभिन्न राज्यों के विभिन्न आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने पूरे देश के आदिवासियों से अपील किया कि वे 2021 के जनगणना प्रपत्र में अपना धर्म आदिवासी/ट्राइबल लिखें, ताकि पूरे देश के आदिवासियो को उनका धर्म कॉलम मिल सके। इस अवसर पर राष्ट्रीय आदिवासी-इंडीजीनस धर्म समन्वय समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

1 thought on “आदिवासियों जागो.! जनगणना में आदिवासी धर्म कॉलम की मांग कोरोना के बाद फिर जोर पकड़ने लगी है, युवा आगे”

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This