3 बार आल इंडिया, 9 नेशनल और 24 बार स्टेट खेलने वाली दलित खिलाड़ी शिक्षा कर रही है मनरेगा में दिहाड़ी

2 min read

‘ सोचिए.! अंतरराष्ट्रीय स्तर की दलित खिलाड़ी शिक्षा दिहाड़ी पर रोज काम कर रही है, जो वुशु में हरियाणा में गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं ‘ मूकनायक मीडिया-भाषा | 13 जुलाई 2020 | जयपुर – रोहतक : बेहतरीन खेल नीति का दम भरने वाली हरियाणा सरकार में राष्ट्रीय खिलाड़ियों की ऐसे अनदेखी होगी किसी ने सोचा भी नहीं होगा। उससे भी बड़ी बात राष्ट्रीय गोदी मीडिया चुप है। यही खिलाड़ी यदि दलित ना होकर सवर्ण होती तो जातिवादी मीडिया सारे देश को सिर पर रख लेता। रोहतक जिले के इंदरगढ़ गाँव की रहने वाली राष्ट्रीय वुशु खिलाड़ी शिक्षा इन दिनों तंगी की हालत में मनरेगा में मजदूरी कर रहीं है। खुद की मनरेगा कॉपी न बनने के कारण ‘शिक्षा’ माता-पिता की सहायता करवाती है और 2 वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रही है। शिक्षा तीन बार ऑल इंडिया 9 बार राष्ट्रीय चौंपियन और 24 बार स्टेट में चैंपियन रह चुकी है। शिक्षा वुशु में हरियाणा में गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी है। ऐसे में सरकार द्वारा शिक्षा की कोई सहायता नहीं की गयी है जिसके कारण लॉकडाउन में शिक्षा मनरेगा में काम करने पर मजबूर है। ‘शिक्षा’ सुबह 6 बजे कंधों पर कस्सी लादकर माता-पिता के साथ मनरेगा में मजदूरी का काम करने जाती है और जी तोड़ मेहनत कर दो पैसों का इंतजाम करती है। लॉकडाउन के दौर में सब कुछ बंद है काम धंधे ठप है ऐसे में सरकार द्वारा शुरू की गयी मनरेगा स्कीम के तहत मजदूरों का गुजारा हो रहा है। गरीब भाईयों बहनों का कोई सहारा नहीं होता है सिर्फ पैसे वालों को ही दुनिया पहचानती है। इस देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है लोग धर्म के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें किया करते हैं लेकिन हमारे गाँव घर की जो प्रतिभाएं हैं उनको उचित सम्मान और उचित स्थान नहीं मिल पा रहा है । सोचिए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिहाड़ी पर रोज काम कर रही है। उससे भी बड़ी शर्म की बात यह है कि खट्टर सरकार का ध्यान नहीं है। ऐसे लोगों को उचित सम्मान उचित स्थान दिया जाना चाहिए। यही नहीं शिक्षा को जब मनरेगा में काम नही मिलता या मनरेगा का काम बंद हो जाता है तो खेत मे काम करती है। शिक्षा दूसरे मजदूरों की तरह ही खेत मे धान लगाने का काम करती है। इससे पहले भी माता-पिता ने दिहाड़ी मजदूरी कर बेटी को चैंपियन बनाया और इस मुकाम तक पहुँचाया है। दूसरी ओर राष्ट्रीय चैंपियन की हालत पर माता-पिता का कहना है कि बेटी को इस मुकाम तक पहुँचाने में बड़ी मेहनत लगी। उन्होंने कहा कि बेटी को दिहाड़ी मजदूरी करके ही पढ़ाया लिखाया और खिलाड़ी बनाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पेट भरने के लिए दिहाड़ी करनी पड़ती है जिसमें बेटी हाथ बटाती है। तो वहीं दूसरी ओर वुशु खिलाड़ी ‘शिक्षा’ का कहना है कि मजबूरी में मजदूरी करनी पड़ती है।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

डॉ अंबेडकर की बुलंद आवाज के दस्तावेज : मूकनायक मीडिया पर आपका स्वागत है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिला के हक़-हकुक तथा सामाजिक न्याय और बहुजन अधिकारों से जुड़ी हर ख़बर पाने के लिए मूकनायक मीडिया के इन सभी links फेसबुक/ Twitter / यूट्यूब चैनलको click करके सब्सक्राइब कीजिए… बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के “Payback to Society” के मंत्र के तहत मूकनायक मीडिया को साहसी पत्रकारिता जारी रखने के लिए PhonePay या Paytm 9999750166 पर यथाशक्ति आर्थिक सहयोग दीजिए…
उम्मीद है आप बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन से अवश्य जुड़ेंगे !

बिरसा अंबेडकर फुले फातिमा मिशन के लिए सहयोग के लिए धन्यवाद्

Recent Post

Live Cricket Update

Rashifal

You May Like This