गुजरात के सिहोर (भावनगर) में बाबासाहब डॉ अंबेडकर की प्रतिमा के चारों ओर शराब की बोतल रखकर किया अपमान

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‘मुँह को बाल्टी से ढका, एक सप्ताह में दूसरी घटना, पाँच दिन पूर्व राजगृह, मुंबई में की थी तोड़-फोड़’ मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 14 जुलाई 2020 | जयपुर- भावनगर : असामाजिक तत्वों द्वारा बाबासाहेब के चेहरे को बाल्टी से कवर किया गया और चारों ओर शराब की बोतल रखी गयी। गुजरात सरकार सोयी हुई है और अब तक कोई कार्यवाही नहीं की। ये लोग बाबासाहेब के नाम पर समाज को तोड़ना चाहते है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 13 जुलाई 2020 को गुजरात के भावनगर जिले के सीहोर शहर में सोमवार को बाबासाहेब आंबेडकर की एक आवक्ष प्रतिमा को अपवित्र कर दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि किसी ने आवक्ष प्रतिमा को एक बाल्टी से ढक दिया और पास में एक शराब की खाली बोतल रख दी। यह हरकत मध्यरात्रि से सुबह आठ बजे के बीच की गयी। आसपास के लोगों ने सुबह सीहोर पुलिस थाने में संपर्क किया जिसके बाद भादसं की धारा 295 के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी। उन्होंने बताया कि लोगों ने बाद में आवक्ष प्रतिमा को साफ किया। यह भी पढ़ें : ‘अज्ञात लोगों ने भारतीय संविधान के निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के निवास ‘राजगृह’ में तोड़फोड़ की’ पाँच दिन पूर्व ‘राजगृह’ परिसर में घुसकर बरामदे और गार्डन में तोड़फोड़ की मंगलवार 7 जुलाई की देर शाम कुछ अज्ञात लोगों ने ‘राजगृह’ परिसर में घुसकर बरामदे और गार्डन में तोड़फोड़ की। यह ख़बर फैलते ही आंबेडकर के अनुयायियों में रोष फैल गया। महाराष्ट्र यूँ भी आंबेडकर का कार्यक्षेत्र रहा है और यहाँ दलित आंदोलन भी मजबूत रहा है। देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से इस बारे में सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। मुंबई के दादर इलाके में स्थित ‘राजगृह’ करीब दो दशकों तक डॉ. आंबेडकर का निवास रहा है। फ़िलहाल इस तीन मंजिला भवन के ऊपरी हिस्से में बाबा साहब के परिवार के सदस्य रहते हैं जबकि नीचे की दो मंज़िलों में बाबा साहब स्मारक है। 1931-33 में तैयार हुए इस भवन में आंबेडकर ने विशाल समृद्ध पुस्तकालय भी स्थापित किया था। उस समय ही करीब 50 हज़ार किताबों वाला यह निजी पुस्तकालय बेहद मशहूर था। विशाल पुस्तकालय और संग्रहालय से समृद्ध यह स्मारक आंबेडकर के अनुयायियों की आस्था के साथ आंबेडकर और बुद्धिज़्म के शोधार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। ‘राजगृह’ प्राचीन बुद्धिस्ट राज्य के नाम से ही लिया गया है। लॉकडाउन के बाद से यह आम लोगों के लिए बंद है।

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