‘पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ को राष्ट्रीय घोषित करवाने हेतु गहलोत मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन

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‘ईआरसीपी’ प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना और इसकी जल्द क्रियान्विति सुनिश्चित करना आवश्यक, गहलोत सरकार का ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट का सपना धरातल पर उतरा तो जयपुर का रामगढ़ बांध फिर से जिंदा हो जायेगा मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 15 जुलाई 2020 | जयपुर : पूर्वी राजस्थान की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना ‘पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की माँग की है। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना, राजस्थान के पूर्वी भाग के किसानों के लिए अति महत्वपूर्ण जीवनदायनी परियोजना है। गहलोत मंत्रिपरिषद ने 14 जुलाई 2020 को लिये लोककल्याणकारी निर्णय लेते हुए पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को मंजूरी देदी और इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भिजवाने का निर्णय लिया जिसकी लागत करीब 40,000 करोड़ रुपए है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से राज्य की महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया है। प्रदेश के कई जिलों में पेयजल की गंभीर समस्या के चलते इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना और इसकी जल्द क्रियान्विति सुनिश्चित करना आवश्यक है। कालीसिंध, गंभीरी और पार्वती नदियों को जोड़ेगी तथा राजस्थान के 13 ज़िलों की पेयजल संबंधी समस्याओं का समाधान करेगी। इस परियोजना को राज्य में चल रहे जल स्वावलंबन अभियान (Jal Swavalamban Abhiyan-JSA) के सहयोग से चलाया जायेगा।

पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना राजस्थान में इंदिरा गाँधी नहर परियोजना के बाद दूसरी सबसे बड़ी नहर परियोजना है। इसकी लागत 37 हजार 247 करोड़ रूपए आँकी गयी है। इस परियोजना के तहत दक्षिण राजस्थान की नदियों पार्वती, कालीसिंध, मेज के सरप्लस पानी को दक्षिण पूर्वी राजस्थान बनास, मोरिल, बाणगंगा,गम्भीर आदि नदियों में पहुँचाया जाना है और एक नहर बनाई जानी है जो राजस्थान के 13 जिलों झालावाडा, कोटा, बारां, बूंदी, करौली, सवाईमाधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर व धौलपुर को पानी पहुँचाएगी। 40 हजार करोड रूपये की लागत वाली इस मेगा परियोजना का ध्येय चंबल नदी का पानी 13 जिलों में पीने का पानी और सिचांई के लिये उपलब्ध कराना है। परियोजना की उपयोगिता के लिये रडार सर्वे पूर्व में किया जा चुका है। अब तक की कार्य-प्रगति मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि है कि लगभग 37,247 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से राज्य के 13 जिलों में पेयजल तथा 2.8 लाख हेक्टयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। गहलोत ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि ईआरसीपी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) नवम्बर 2017 में आवश्यक अनुमोदन के लिए केन्द्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है। पृष्ठभूमि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि है कि लगभग 37,247 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से राज्य के 13 जिलों में पेयजल तथा 2.8 लाख हेक्टयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। गहलोत ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि ईआरसीपी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) नवम्बर 2017 में आवश्यक अनुमोदन के लिए केन्द्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है। उन्होंने आग्रह किया कि इस योजना को जल्द से जल्द राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि केन्द्र सरकार ने पूर्व में 16 विभिन्न बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है लेकिन राजस्थान की किसी भी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को यह दर्जा नहीं मिला है। राज्य के कई जिलों में पेयजल की गंभीर समस्या के चलते इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना और इसका जल्दी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि ईआरसीपी परियोजना से झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर व धौलपुर जिलों को वर्ष 2051 तक पीने तथा सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी। ईआरसीपी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार परियोजना से मानसून के दौरान कुन्नू, कुल, पार्वती, कालीसिंध एवं मेज नदियों के सब बेसिन के अधिशेष जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा, गंभीर व पार्बती नदियों के सब बेसिन में पहुँचाया जाना है।

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