एलआईसी, रेलवे के बाद बैंकों का भी निजीकरण, आखिर ये देश जा कहाँ रहा हैं.? ‘बहुजन राममंदिर में व्यस्त’

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‘सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों और बैंकों के निजीकरण की मोदीसरकार की बड़ी तैयारी, छह बैंकों का निजीकरण होगा, केवल पाँच नेशनल बैंक बचेंगे, बाकी सब बिकेंगे’ मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 22 जुलाई 2020 | जयपुर-दिल्ली-मुंबई : बहुजन जितने निकम्मे है शायद ही दुनियाभर में कोई समुदाय उनके निकम्मेपन का सानी हो। विरासत में मिला दुनिया का सबसे बेहतरीन संविधान उनसे हौले-हौले छीना जा रहा है और वे तमाशबीन बनकर बेसब्री से 5अगस्त का इंतजार कर रहे हैं। जिस दिन पीएम मोदी राममंदिर की आधारशिला रखेंगे। जैसे-जैसे राम मंदिर बनेगा वैसे-वैसे पेशवाई और मनुस्मृति राज कायम होगा। फिर जीने का अधिकार छिनेगा, जो बोलेगा उसका येन-केन प्रकारेण मानमर्दन होगा बाकी लोग तमाशा देखेंगे। एक इंदिरा गाँधी थी जिन्होंने निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके आरक्षित-वर्गों के लिए रोजगार के लाखों अवसर मुहैया करवा दिये थे। दूसरे मोदी हैं जो उन्हीं राष्ट्रीय बैंकों का निजीकरण करके लाखों एससी, एसटी, ओबीसी के लोगों से रोजगार छीनने की जुगत में है। इन बहुजनों का रोजगार छिनने से उनके लाखों-करोड़ों परिजनों के मुँह का निवाला भी छिनेगा, इसमें तनिक भी शक-सूबा नहीं होना चाहिए। ध्यातव्य हो कि मोदी सरकार ने पहले इंश्योरेंस कंपनियों और अब बैंकों के निजीकरण की बड़ी तैयारी कर रही है। पीएम आरएसएस के साथ मिलकर एससी, एसटी और ओबीसी से सब कुछ छीन लेना चाहती है। वैसे भी, देश के बहुजनों को संविधान, आरक्षण, और नौकरियों का क्या करना है, उन्हें 5अगस्त को राममंदिर मिलने जा रहा है। आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने कुछ समय पूर्व कहा था कि आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए। सारे देश में भागवत के इस कथन पर कोई नहीं बोला, शिवाय लालूप्रसाद यादव के। उन्हें जेल में डाल दिया गया पर किसी के जूं तक नहीं रेंगी। फिर आरएसएस ने मोहन भागवत के कथन को पूरा करने में ऐढ़ी-चोटी का जोर लगा दिया। आरएसएस ने मोदी सरकार पर अपेक्षित दवाब बनाया और अब सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों और बैंकों के निजीकरण पर सरकार बड़ी तैयारी कर रही है। मोदी को क्या चाहिए ? ओबीसी का चौला ओढ़कर सत्तासुख चाहिए, वह उन्हें मिल रहा है। बैंकों का निजीकरण सूत्रों के हवाले से ये जानकारी भी मिली है कि 6 सरकारी बैंकों को छोड़ बाकी सभी बैंकों का निजीकरण किया जा सकता है। पहले चरण में बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक में सरकारी हिस्सेदारी बेची जा सकती है। 6 बैंकों को छोड़ बाकी सभी बैंकों निजीकरण की योजना को तहत बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी चरणों में बेचने का प्रस्ताव है। पहले चरण में 5 सरकारी बैंकों में हिस्सा बिक सकता है। सबसे पहले बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, इंडियन ओवेरसीज बैंक में सरकारी हिस्सा बिक सकता है। बैंक ऑफ़ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया का भी निजीकरण संभव है। यूको बैंक में भी सरकारी हिस्सेदारी बेची जा सकती है। सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों और बैंकों के निजीकरण की मोदीसरकार की बड़ी तैयारी सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों और बैंकों के निजीकरण पर सरकार बड़ी तैयारी कर रही है। मूकनायक मीडिया ब्यूरो को एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि एलआईसी और एक नॉन लाईफ इंश्योरेंस कंपनी को छोड़कर बाकी सभी इंश्योरेंस कंपनियों में सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी किस्तों में बेच सकती है। इधर बैंको के भी प्राइवटाइजेशन का भी बिग प्लान है। इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के बीच सहमति बनी है। कैबिनेट ड्रॉफ्ट नोट भी तैयार है। क्या है मोदी की योजना सीएनबीसी-आवाज़ को सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, नीति आयोग के बीच चर्चा हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। ये प्रस्ताव सरकारी कंपनियों के निजीकरण पर बन रही पॉलिसी का हिस्सा होगा। सूत्रों के मुताबिक सरकारी कंपनियों के निजीकरण की पॉलिसी का कैबिनेट ड्राफ्ट नोट तैयार है। इस प्रस्ताव के मुताबिक एलआईसी और एक नॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी सरकार अपने पास रखेगी। बता दें कि अभी कुल 8 सरकारी इंश्योरेंस कंपनियाँ हैं। एलआईसी के अलावा 6 जनरल इंश्योरेंस और एक राष्ट्रीय रिइंश्युरर कंपनी है।

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