इंदिरा गाँधी ने रोजगार देने केलिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया,मोदी उनको बेच बहुजनों से नौकरी छीनेंगे

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‘जानिए मोदीसरकार का बहुजन विरोधी प्लान – देश में सिर्फ 5 सरकारी बैंक रहेंगे, सूत्रों के अनुसार सरकार अपने आधे से ज्यादा सरकारी बैंकों की निजीकरण की तैयारी में है’ मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 22 जुलाई 2020 | जयपुर-दिल्ली-मुंबई : सरकारी और बैंकिंग सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मोदीसरकार अपने आधे से ज्यादा सरकारी बैंकों की निजीकरण की तैयारी में है। अब तक आपने पढ़ा-सुना होगा कि कोर्पोरेट्स घरानों को मोदीसरकार ने बैंकों की मिल्कियत लुटवायी थी, पर अब वह बैंकों को ही बेच रही है। यह इसलिए किया जा रहा है कि सरकारी नौकरियों को ख़त्म किया जा सके, और आरक्षण स्वत: ख़त्म हो जायेगा। न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी। सरकार की बैंकिंग इंडस्ट्री की दुरुस्तीकरण की इस योजना के तहत सरकारी बैंकों की संख्या घटा कर 5 की जायेगी। एक सरकारी अधिकारी नें बताया कि इस योजना के पहले चरण के तहत बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब और सिंध बैंक सरकार की मोजोरिटी हिस्सेदारी की बिक्री की जायेगी जिससे की इन पीएसयू बैंको के निजीकरण की योजना को अमली जामा पहनाया जा सके। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार की सिर्फ 4-5 सरकारी बैंक बनाये रखने की योजना है। वर्तमान में देश 12 सरकारी बैंक हैं। सरकारी सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि इस योजना को नए निजीकरण प्रस्ताव में शामिल किया जायेगा और इसको मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जायेगा। हालांकि भारतीय वित्तमंत्रालय ने इस खबर पर कोई टिप्पड़ी करने से इंकार कर दिया है। बता दें कि कोरोना संकट काल में उत्पन्न वित्तीय परेशानियों से निपटने के लिए सरकार नॉन-कोर सेक्टर और कंपनियों में हिस्सेदारी बेच कर पूंजी जुटानें के एक निजीकरण योजना पर काम कर रही है। तमाम सरकारी समितियों और आरबीआई ने भी इस बात की सिफारिश की है कि देश में 5 से ज्यादा सरकारी बैंक नहीं होने चाहिए। एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार पहले ही कह चुकी है कि अब सरकारी बैंकों के बीच और मर्जर नहीं होगी ऐसे में इस योजना को बढ़ाने को लिए सिर्फ सरकारी हिस्सेदारी बेचने का ही विकल्प बचता है। पिछले साल सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का मर्जर 4 बैंकों में किया था और कुछ बड़े बैंक बनाये थे। अब सरकार कुछ अनमर्ज्ड बैंकों को निजी हाथों में देने की तैयारी में है।

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