गहलोत का दांव : पायलट और बीजेपी एक साथ हो सकते हैं चित, राज्यपाल के पास भी अब अधिक विकल्प नहीं

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 26 जुलाई 2020 | जयपुर : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार देर रात 31 जुलाई से विधानसभा सत्र बुलाने का नया प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें वे कोरोना पर विशेष चर्चा करना चाहते हैं और छह बिल पेश करना चाहते हैं। हालांकि इसमें बहुमत साबित करने का कोई जिक्र नहीं है।

राजस्थान में फिलहाल टकराव की जबरदस्त स्थिति है। इससे पहले शुक्रवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को लेकर गहलोत गुट के विधायकों ने राजभवन में धरना दिया था। इस दौरान राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधायकों से बात भी की। 6 बिल विधानसभा में पेश करेंगे गहलोत हालांकि, अशोक गहलोत का गुट अभी भी विधानसभा सत्र बुलाने के लिए अड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 31 जुलाई से विधानसभा का सत्र बुलाने की माँग की है। गहलोत के प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य में 6 बिलों को विधानसभा में पेश करना है। विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बिजनेस एडवाइजरी कमेटी तय करती है लेकिन फिलहाल हम 6 बिल विधानसभा में पेश करेंगे। सरकार के पास संवैधानिक अधिकार होता है कि वह सत्र बुलाए और अल्प अवधि में पहले भी आपके द्वारा दो बार सत्र आहूत की गयी है। इसमें सरकार ने कहीं भी नहीं लिखा है कि वह विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना चाहती है। दरअसल, इससे पहले राज्यपाल कलराज मिश्रा भी सरकार से ही पूछ रहे थे कि आखिर वह विधानसभा सत्र क्यों बुलाना चाहती है और उनका एजेंडा क्या है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से छह सवाल पूछे थे। अशोक गहलोत सत्र बुलाकर बिल के जरिए व्हिप जारी कर सचिन गुट के 19 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष से अयोग्य साबित करा देंगे और उसके बाद सदन में विधायकों की कुल संख्या कम हो जायेगी तो सरकार खुद ही बहुमत में आ जायेगी। इसके बाद ही गहलोत सरकार सदन में बहुमत साबित करेगी। कुल मिलाकर गहलोत सरकार और राज्यपाल के बीच लुका-छुपी का खेल अभी चल रहा है। कांग्रेस के दोनों ही धड़े अपने पत्ते खुलकर दिखाने के लिए तैयार नहीं है। मगर जिस तरह से अशोक गहलोत ने विधानसभा सत्र बुलाने का तरीका अपनाया है उस पर भी सवाल उठेंगे। बीजेपी कैसे कूदी मैदान में दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसी लिए बहुमत साबित करने की माँग नहीं कर रही क्योंकि इसके लिए सत्र बुलाना होगा और सत्र बुलाने पर कांग्रेस की माँग ऐसे ही पूरी हो जायेगी। वह व्हिप जारी कर अपनी सत्ता साबित कर देगी। दूसरी तरफ, राज्यपाल कलराज मिश्र कोरोना संकट और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए थोड़ा वक्त माँग रहे हैं। गहलोत ने शुक्रवार शाम को कहा कि राज्यपाल दबाव में आ गये हैं। जानिए क्या है आर्टिकल 174 राज्यपाल आर्टिकल 174 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, अशोक गहलोत सरकार की सलाह को टाल सकते हैं या फिर देरी कर सकते हैं। लेकिन ऐसा तभी किया जा सकता है जब सरकार को बहुमत पर संदेह हो। आर्टिकल 174 के मुताबिक, ‘राज्यपाल के पास ये शक्ति है कि समय-समय पर राज्य के विधानमंडल के प्रत्येक सदन को स्थिति के मद्देनजर बैठक के लिए बुला सकते हैं। लेकिन इसमें पिछले सत्र की अंतिम बैठक और आगामी सत्र की पहली बैठक के बीच 6 महीने का अंतर नहीं हो।’

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