‘एससी, एसटी, ओबीसी का आरक्षण तो झुनझुना है, और उसे भी छीन रहे हैं, असली आरक्षण सवर्णों का है’

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 26 जुलाई 2020 | जयपुर : एससी-एसटी, ओबीसी के आरक्षण को खत्म कर रही है मोदी सरकार। आरक्षण में आपको चावल, गेहूँ, नमक मिल गया और एक फीसदी से भी कम उच्च पदों तथा चपरासी, मास्टर, पटवारी, गैंगमैन आदि लग गये तो इसे आरक्षण न समझें। जिसको भारत में आरक्षण नजर आता है, वो सिर्फ प्रतिनिधित्व है और इसे सभी यूरोपीय, अमेरिकी, अफ्रीकी और जापान आदि देशों में भी अपनाया गया है। संविधान के मूल अधिकार में यह साफ प्रावधान है कि आरक्षण प्रतिनिधित्व का मामला है और यह सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को प्रतिनिधित्व देने के लिए लाया गया, यह कोई गरीबी उन्मूलन योजना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट अपने निर्णयों द्वारा एससी-एसटी/ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के आरक्षण को व पदोन्नति में आरक्षण को खत्म कर रही हैं। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय के माध्यम से कहा कि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार आरक्षित वर्ग में ही चयनित होगा, चाहे वह परीक्षा में टॉप ही क्यों न करे। उक्त 85 प्रतिशत के लोगों को आरक्षण का लाभ न मिले, इसके लिए उन्होंने क्रीमी लेयर लागू कर दिया व सरकारी संस्थानों का निजीकरण कर रहे हैं। केरल में हाईकोर्ट का एक जज ब्राह्मणों के सार्वजानिक कार्यक्रम में ब्राह्मणों के लिए आरक्षण की मांग करते हैं और कुछ ही दिनों में संसद सवर्ण आरक्षण का बिल लाकर पास कर देती है। और सुप्रीमकोर्ट के एकाध जज संवैधानिक आरक्षण को गैर-संवैधानिक घोषित कर देते हैं। सवर्ण आरक्षण संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। ब्राह्मणवादी व्यवस्था की सरकार व न्यायपालिका भेदभाव जाति के आधार पर करती है और अपने लोगों को आरक्षण गरीबी के आधार दे दिया है। आरक्षण गरीबी मिटाओ योजना नहीं संविधान के मूल अधिकार में यह साफ प्रावधान है कि आरक्षण प्रतिनिधित्व का मामला है और यह सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को प्रतिनिधित्व देने के लिए लाया गया, यह कोई गरीबी मिटाओ योजना नहीं है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स अपने निर्णयों द्वारा एससी-एसटी/ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के आरक्षण को व पदोन्नति में आरक्षण को खत्म कर रही हैं। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय के माध्यम से कहा कि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार आरक्षित वर्ग में ही चयनित होगा, चाहे वह परीक्षा में टॉप ही क्यों न करे। उक्त 85 प्रतिशत के लोगों को आरक्षण का लाभ न मिले इसके लिए उन्होंने क्रीमी लेयर लागू कर दिया व सरकारी संस्थानों का निजीकरण कर रहे हैं। वहीं सवर्ण आरक्षण उन्होंने संसद में चाय पार्टी पर पास कर दिया और उसका अनुपालन भी हो गया।’ आरक्षण किसे कहते हैं इसे कुछ उदाहरणों से समझते हैं: 1. जब अपने स्कूल की क्रिकेट टीम में भी चयनित न होने वाले जय साह को सीधे BCCI के अध्यक्ष बनाते हैं, -इसे कहते हैं आरक्षण। 2. जब बिना किसी परीक्षा और इंटरव्यू के सीधा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं रिस्तेदारी के कारण जज नियुक्त होते हैं, उसे कहते हैं आरक्षण। 3. जब तमाम स्कूल और कॉलेज खोलने वाले मैनेजर अपने रिस्तेदारों, बहू-बेटों को, बिना किसी योग्यता और पात्रता के आधार पर और सरकारी अनुदान पर नियुक्त करा लेते हैं, तो इसे कहते हैं आरक्षण। 4. जब तमाम अकेडमिक परिक्षाएं पास करने तथा पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी सिर्फ जाति के आधार पर घोषित कर दिया जाता है “नाट फाउंड सूटेबल”( कोई पद के योग्य नहीं मिला)। ताकि आगे उन पदों पर अपने वर्ग के हितों के अनरूप नियुक्ति की जा सके तो उसे कहते हैं आरक्षण। 5. जब केन्द्रीय मंत्री के पुत्र को बिना किसी प्रतियोगी परीक्षा के राज्य सरकार बड़े पद पर नियुक्त कर देती है तो इसे कहते हैं आरक्षण। 6. जब बिना चुनाव लडे़ मंत्री, मुख्यमंत्री/ उपमुख्यमंत्री, और अध्यक्ष बना दिया जाता है तथा जिसके नाम पर चुनाव लड़ा था, उन्हें धकिया दिया जाये तो इस सामंतवाद को कहते हैं आरक्षण। 7. जब बिना IAS की परीक्षा पास किए किसी वर्ग-विशेष के लोगों को सीधे सैंकड़ों संयुक्त-सचिव बना दिया जाता है तो इसे कहते हैं आरक्षण। 8. जब लोकडाउन में भी मुख्यमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री मंदिरों में जाते हैं या विवाह-पार्टी अटैंड करते हैं जबकि दूसरी तरफ मरीजों व मजदूरों को सड़क पर मुर्गा बनाकर पीटा जाता है तो इस विशेषाधिकार को कहते हैं आरक्षण। 9. आज तक तीर-कमान भी न बनाने का अनुभव रखने वाली कम्पनी को सीधे राफेल लड़ाकू विमान बनाने का ठेका दे दिया जाता है तो उसे कहते हैं आरक्षण। 10. जब एक ही तरह् के मुकदमे में बहुजनों को जेल और सवर्णों को बेल (रिहाई) मिल जाती है तो यहाँ दिखाई देता है वर्ग और जाति विशेष का आरक्षण। 11. जब हजारों-करोड़ों रूपयों का कर्जा माफ और दस-बीस हज़ार रूपये के लिये कुर्की की जाती है तो उसे कहते हैं आरक्षण। 12. प्राईमरी स्कूल खोलने लायक भी इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के बावज़ूद ” कागज़ी जियो यूनिवर्सिटी” को 10,000 करोड़ रूपये मिलते हैं वो भी “सेंटर आफ एक्सीलेंस” बनाने के लिये तो इसे कहते हैं आरक्षण। 13. जब राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की भर्ती चुनिन्दा जातियों से की जाती है तो उसे कहते हैं आरक्षण। प्रतिनिधित्व ” लोकतंत्र का प्राण होता है, जिसे “भारतीय संविधान” ने अपने प्रत्येक नागरिक को प्रदान किया है। हम लोग इसका पुरजोर विरोध करते हैं और इस कार्यक्रम के माध्यम से मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में भी परीक्षा और अनुभव के माध्यम से जजों की नियुक्ति हो और उसमें भी 85 प्रतिशत लोगों का प्रतिनिधित्व आरक्षण के माध्यम से सुनिश्चित किया जाये। सब जानते हैं हैं पर बोलते नहीं है कि उच्च पदों पर 90 प्रतिशत से ज्यादा उनका कब्जा है और जहाँ हमारे लोगों का थोड़ा-बहुत प्रतिनिधित्व होना शुरू हुआ, वहाँ पर उन्होंने निजीकरण कर दिया है या तो लगातार कर रहे हैं।’

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