नयी शिक्षा नीति-3 : शिक्षा बाजार के हवाले, शिक्षा में आरक्षण ख़त्म, आरक्षण का कहीं कोई जिक्र नहीं है

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मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 30 जुलाई 2020 | जयपुर : नई शिक्षा नीति को लेकर हुए व्यापक परामर्श में एक प्रमुख आवाज़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस की थी। उसी की मंशा के अनुरूप शिक्षण संस्थान घटेंगे, सरकारीकरण की जगह निजीकरण को प्राथमिकता होगी। ऑटोनॉमी से शिक्षा महंगी होगी, सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा, मर्जर, क्लोजर और टेक ओवर की नीति के जरिये आरक्षित वर्गों द्वारा चलाये जा रहे निजी संस्थानों को बंद करवाया जा सकता है, उन्हीं पर गज गिरेगी। भाषा और सामाजिक विज्ञान के विषयों की बाजार मे माँग न होने से इन पर संकट बढ़ेगा। प्रोफेसर्नल कोर्सेज के संस्थान बंद होंगे और खिचड़ी संस्थान बनेंगे। उनसे पढ़कर आप किसी के लायक नही रहोगे केवल डिग्री धारी मजदूर बनोगे। स्थायी नौकरी अब गुजरे वक्त की बात होगी, एक पद पर नियुक्ति में अलग अलग वेतन होगा, प्रमोशन बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स (BOG) देगा, और संस्थान के लिए उपयोगी न होने पर रिटायमेंट भी उसी की कृपा से कभी भी होगा। अभिव्यक्ति की आजादी ख़त्म होगी, सरकार के खिलाफ बोलना अब नौकरी से हाथ धोना होगा। महंगी शिक्षा के कारण बेदखली (ड्रॉपआउट) बढ़ेगी और आरक्षण का कहीं कोई जिक्र नहीं हैं तो आदिवासी, दलित और पिछड़ा तबका अब कभी किसी विश्वविधालय में ना पढ़ पायेगा और ना ही पढ़ा भी पायेगा। मनु स्मृति की लाज रह जायेगी। इसीलिए इस तबके को कावड यात्रा और किसी मंदिर के बनवाने के लिए आंदोलन में जुट जाना चाहिए। रहा अल्पसंख्यकों का मामला वो अपनी जान बचा ले वही बहुत है। उच्च शिक्षा के हवाले कुछ तथ्य :- उच्च शिक्षा को तीन स्तर – रिसर्च यूनिवर्सिटी, टीचिंग यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेज मे विभाजन अगले 15 साल मे (2035 तक) कॉलेजों का विश्वविधालयों से संवद्धता (अफिलियेशन) समाप्त उच्च शिक्षा के 50000 संस्थान – मर्जर, क्लोजर और टेक ओवर की नीति के जरिये 15000 मे सीमित किये जायेंगे, 3000 स्टूडेंट से कम नामांकन वाले संस्थान बंद होंगे। एक विषयक संस्थान जैसे आइआइएमसी / आइआइटी / आईआईएम इत्यादि बंद होंगे उनकी जगह केवल बहु विषयक संस्थान (खिचड़ी) ही बचे रहेंगे। प्रत्येक संस्थान ऑटोनोमस् (वित्तीय, अकादमिक, प्रसाशनिक) होगा। मतलब सरकार अपनी वित्तीय जिम्मेदारी से मुक्त। प्रत्येक संस्थान मे BOG (बोर्ड ऑफ गवर्नरस्) होगा जो सारे मामले देखेगा वित्त का जुगाड़ से लेकर, शिक्षको की तंख्वाह, प्रमोशन। नियुक्ति पुराने हिसाब से होती रहेगी पर BOG के हिसाब से। पब्लिक संस्थानो के लिए पब्लिक फंडिंग बढ़ाई जायेगी। स्नातक 3-4 साल की होगी और परास्नातक 1-2 साल की। अब M.Phil खत्म होगी । पीएच-डी के लिए 4 साल की BA काफी होगी या 3 साल BA और 2 साल MA। अमेरिका के Ivy League की तर्ज पर MERU (Multidisciplinary Education & Research University बनाई जायेगी 13 National Research Foundation बनाया जायेगा। UGC खत्म होगा, NHERA – Nationl Higher Education Research Authority बनाई जायेगी। RSA राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनेगा जिसका अध्यक्ष शिक्षा मंत्री, कैबिनेट के कुछ मंत्री, राज्य सरकार के मेबर, नीति आयोग, और कुछ व्यक्ति ( ?) कौन होंगे मर्जी पर निर्भर। राज्य शिक्षा आयोग बनेगा, शिक्षा पर GDP का 6% खर्च का गोल रखा है जबकि ये 1986 में 10% था।

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